देवघर में कुमड़ाबाद रोहिणी बाईपास लाइन का काम पूरा, जसीडीह जाए बिना बचेंगे 45 मिनट कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन बनकर तैयार हो गई है, जिससे ट्रेनों को जसीडीह में इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यात्रा समय घटेगा। झारखंड के देवघर जिले में रेल नेटवर्क को रफ्तार देने और मुसाफिरों की राह आसान बनाने के लिए भारतीय रेल ने एक बड़ा बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया है। कुमड़ाबाद रोहिणी से लेकर देवघर लिंक केबिन के बीच लगभग 5 किलोमीटर लंबी नई रेल बाईपास लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पूरे रेल बाईपास प्रोजेक्ट को करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसके औपचारिक परिचालन में आने के बाद देवघर, रोहिणी और आसपास के पूरे इलाके के रेल नेटवर्क में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के संभावित ठहराव से बढ़ी उम्मीदें इस नई बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे महत्वपूर्ण असर रोहिणी रेलवे स्टेशन पर पड़ने वाला है। अब तक रोहिणी स्टेशन की पहचान केवल मेमू और साधारण लोकल ट्रेनों के ठहराव तक ही सीमित रही थी। बाईपास लाइन के सक्रिय होते ही इस बात की प्रबल संभावना बन रही है कि कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों को भी रोहिणी स्टेशन पर व्यावसायिक ठहराव दिया जाएगा। यदि एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव यहां सुनिश्चित होता है, तो स्थानीय नागरिकों और आसपास के ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को लंबी दूरी की गाड़ियां पकड़ने के लिए बार-बार जसीडीह जंक्शन जाने की जद्दोजहद से मुक्ति मिल जाएगी। स्थानीय दैनिक यात्रियों में इस नए रेल मार्ग को लेकर काफी उत्साह नजर आ रहा है। नियमित रेल यात्री श्यान गुप्ता ने बताया कि जिस छोटे स्टेशन पर अब तक केवल सवारी गाड़ियां रुका करती थीं, वहां अगर लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियों का स्टॉपेज शुरू हो जाए तो यह पूरे इलाके के लिए एक अभूतपूर्व सुविधा साबित होगी। उनका मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों को जसीडीह जाने के झंझट और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलेगी, जिससे यात्रा के कुल समय में खासी बचत संभव होगी। एम्स देवघर आने वाले मरीजों और परिजनों को बड़ी राहत रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के प्रस्तावित ठहराव का एक सामाजिक और चिकित्सकीय पहलू भी सामने आ रहा है। एक अन्य स्थानीय यात्री राकेश कुमार ने साझा किया कि रोहिणी में एक्सप्रेस गाड़ियों का रुकना विशेष तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित हो सकता है। वर्तमान समय में जब मरीज जसीडीह रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं, तो उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) देवघर तक पहुंचने के लिए लगभग 7 से 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके विपरीत रोहिणी स्टेशन से देवघर स्थित एम्स अस्पताल की दूरी जसीडीह की तुलना में काफी कम है। ऐसे में यदि एक्सप्रेस ट्रेनों को रोहिणी पर हॉल्ट मिलता है, तो गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और उनके तीमारदारों को अस्पताल परिसर तक पहुंचने में बेहद आसानी होगी। यह सुविधा न केवल उनके समय की बचत करेगी, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में आने वाले लोगों को भी ट्रैफिक और लंबी दूरी की परेशानी से बचाएगी। जसीडीह में इंजन रिवर्सल से छुटकारा, 45 मिनट तक समय की बचत इस रेल बाईपास के अस्तित्व में आने का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव रेल गाड़ियों के परिचालन समय और तकनीकी संचालन पर पड़ने वाला है। अब तक देवघर मार्ग से आगे जाने वाली कई महत्वपूर्ण गाड़ियों को जसीडीह जंक्शन ले जाना पड़ता था, जहां आगे का सफर तय करने के लिए ट्रेन के इंजन की दिशा बदलने यानी इंजन रिवर्सल की जटिल प्रक्रिया पूरी की जाती थी। इस इंजन रिवर्सल की प्रक्रिया में सामान्य तौर पर 40 से 45 मिनट तक का अतिरिक्त समय व्यर्थ चला जाता था। इन प्रभावित गाड़ियों में रांची-दुमका इंटरसिटी एक्सप्रेस और मयूराक्षी एक्सप्रेस जैसी व्यस्त ट्रेनें शामिल रही हैं। अब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बाईपास लाइन के चालू होने के बाद ट्रेनों को जसीडीह स्टेशन ले जाकर इंजन की दिशा बदलने की कतई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ट्रेनें कुमड़ाबाद रोहिणी होते हुए सीधे अपने तय गंतव्य मार्ग पर निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकेंगी। इस सीधी कनेक्टिविटी की वजह से झाझा, जमुई और सिमुलतला समेत समूचे रेल खंड के यात्रियों के सफर में कम से कम 45 मिनट से लेकर पूरे एक घंटे तक के कीमती समय की बचत दर्ज होगी। 293 करोड़ रुपये की लागत से बदलेगी पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी करीब 293 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार यह 5 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन केवल ट्रेनों के आवागमन को रफ्तार देने तक ही सीमित नहीं है। यह ढांचा रोहिणी रेलवे स्टेशन के पूरे परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। यदि रेलवे बोर्ड द्वारा इस नए मार्ग से गुजरने वाली महत्वपूर्ण गाड़ियों को रोहिणी पर ठहराव दिया जाता है, तो रोहिणी स्टेशन देवघर अनुमंडल के एक अत्यंत अहम रेलवे केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। देवघर, रोहिणी और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना रोजगार, व्यापार, अध्ययन या उपचार के सिलसिले में यात्रा करने वाले लाखों नागरिकों के लिए यह बाईपास जीवन रेखा साबित होने जा रहा है। इसका आप पर असर इस बाईपास लाइन के शुरू होने से देवघर और आसपास के यात्रियों की रेल यात्रा में कई बड़े और प्रत्यक्ष बदलाव आएंगे। • भारत में: इस मार्ग से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन में इंजन रिवर्सल न होने से यात्रा का समय 45 मिनट से एक घंटे तक कम हो जाएगा। इससे लंबी दूरी का सफर तय करने वाले सभी यात्रियों को तेज और समयबद्ध आवागमन का सीधा लाभ मिलेगा। • देवघर और रोहिणी में: रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के संभावित ठहराव से स्थानीय यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए जसीडीह जाने की बाध्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही एम्स देवघर आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को जसीडीह की तुलना में रोहिणी से अस्पताल पहुंचने में काफी कम दूरी तय करनी होगी। • झाझा, जमुई और सिमुलतला के लिए: इस पूरे रेल खंड के यात्रियों को जसीडीह में लगने वाले अनावश्यक 40 से 45 मिनट के ठहराव से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। समय की यह बचत दैनिक यात्रियों और व्यापारिक सफर करने वालों के लिए बेहद मददगार साबित होगी। • ट्रेन संचालन में: रांची-दुमका इंटरसिटी और मयूराक्षी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का रूट सरल होने से जसीडीह जंक्शन पर दबाव काफी घट जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र के रेल ट्रैफिक प्रबंधन में आसानी होगी और अन्य ट्रेनों की लेटलतीफी में भी कमी आएगी। ऐसा क्यों हुआ यह बाईपास परियोजना जसीडीह स्टेशन पर होने वाली तकनीकी अड़चनों को दूर करने और ट्रेनों के बेवजह समय नुकसान को समाप्त करने के लिए तैयार की गई है। • इंजन रिवर्सल की मजबूरी: देवघर के रास्ते आगे बढ़ने वाली ट्रेनों को जसीडीह जंक्शन पर इंजन की दिशा बदलने की अनिवार्य प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस तकनीकी फेरबदल में प्रत्येक ट्रेन के 40 से 45 मिनट का बहुमूल्य समय व्यर्थ हो जाता था। • जसीडीह जंक्शन पर अत्यधिक दबाव: सभी प्रमुख और इंटरसिटी गाड़ियों के एक ही जंक्शन पर आने और इंजन बदलने से स्टेशन पर भारी रेल ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। ट्रेनों के सुगम आवागमन के लिए एक वैकल्पिक बाईपास की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। • सीधे रेल संपर्क का अभाव: कुमड़ाबाद रोहिणी और देवघर लिंक केबिन के बीच सीधा रेल संपर्क न होने से गाड़ियों को अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता था। 293 करोड़ रुपये की लागत से 5 किलोमीटर का बाईपास बनाकर इस परिचालन बाधा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। सवाल-जवाब 1. देवघर रेल बाईपास लाइन की कुल लंबाई और निर्माण लागत कितनी है? इस रेल बाईपास लाइन की लंबाई लगभग 5 किलोमीटर है और इसे करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। 2. यह बाईपास किन दो रेल बिंदुओं को आपस में जोड़ता है? यह नई रेल बाईपास लाइन कुमड़ाबाद रोहिणी से लेकर देवघर लिंक केबिन के बीच बनाई गई है। 3. इस बाईपास से यात्रियों के यात्रा समय में कितनी बचत होगी? ट्रेनों को जसीडीह में इंजन बदलने की जरूरत न होने के कारण यात्रियों के सफर में करीब 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का समय बचेगा। 4. इस बाईपास से किन प्रमुख ट्रेनों के संचालन को गति मिलेगी? इस रूट से रांची-दुमका इंटरसिटी एक्सप्रेस और मयूराक्षी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का संचालन सुगम और तेज हो जाएगा। 5. एम्स देवघर जाने वाले मरीजों को रोहिणी स्टेशन से क्या लाभ मिल सकता है? जसीडीह से एम्स की दूरी 7 से 8 किलोमीटर है, जबकि रोहिणी स्टेशन से एम्स की दूरी काफी कम है, जिससे अस्पताल पहुंचना आसान होगा। https://trendkia.com/jharkhand/deoghar-men-kumrabad-rohini-baipasa-laina-ka-kama-pura-jasidih-jae-bina-bachenge-45-minata-36975 TrendKia — Har trend, sabse pehle.