# धनबाद में फहीम खान के ठिकाने पर 2004 के खूनी हमले में तीन आरोपी दोषी साबित, अदालत जल्द तय करेगी सजा

> धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान के आवास पर वर्ष 2004 में हुई एके-47 गोलीबारी और सुरक्षाकर्मी की हत्या के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया है.

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/dhanbad-men-faheem-khan-ke-thikane-para-2004-ke-khuni-hamale-men-tina-aropi-doshi-sabita-adalata-jalda-taya-karegi-saja-40074 · **Language:** Hindi
**Tags:** धनबाद, फहीम खान, अदालत का फैसला, एके 47 फायरिंग, वासेपुर, झारखंड अपराध

झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में दो दशक से अधिक पुराने चर्चित गोलीबारी कांड में न्यायपालिका ने अहम फैसला सुना दिया है। गैंगस्टर फहीम खान के घर को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमले के लगभग 22 साल बाद अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ दोष साबित पाया है। अदालत ने इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही दोषियों की सजा की अवधि तय करने के लिए 3 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।

## साल 2004 में एके-47 से दहला था वासेपुर का इलाका
यह खूनी वारदात 29 जनवरी 2004 की तारीख को अंजाम दी गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। उस दिन हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियार एके-47 से फहीम खान के आवास पर अचानक अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। चारों तरफ से हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से इलाका थर्रा उठा था। हमला इतना सुनियोजित और घातक था कि अंदर मौजूद लोगों को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला। इस अचानक हुए जानलेवा हमले से अपनी जान बचाने के लिए फहीम खान को पास की एक पड़ोसी की छत पर छलांग लगानी पड़ी थी, जिससे वह बाल-बाल बच सके।

## गोली लगने से सुरक्षाकर्मी विनोद शर्मा की हुई थी मौत
हमलावरों की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी के बीच फहीम खान के सुरक्षाकर्मी विनोद शर्मा गोलियों का शिकार बन गए। गंभीर रूप से घायल होने के कारण विनोद शर्मा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। विनोद शर्मा मूल रूप से बिहार के अरवल जिले के निवासी थे और उस वक्त सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस भीषण गोलीकांड के दौरान एक आरोपी शाहिद आलम के पैर में भी गोली लगी थी। स्वचालित हथियारों के इस खुलेआम इस्तेमाल ने उस दौर में धनबाद के अपराध जगत और प्रशासनिक हलकों में भारी सनसनी फैला दी थी।

## लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद तीन अभियुक्त दोषी करार
हमले के बाद पुलिस ने इस मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर के स्थानीय निवासी शहादत हुसैन और बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। वर्षों तक चली गवाही, साक्ष्यों की जांच और लंबी न्यायिक बहस के बाद पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने तीनों नामजद आरोपियों को दोषी करार दिया। लगभग 22 वर्षों तक चले इस लंबे ट्रायल के बाद आए इस न्यायिक फैसले ने यह साफ कर दिया है कि संगीन वारदातों में कानूनी जवाबदेही से बचना संभव नहीं है।

## सजा के बिंदुओं पर 3 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत की ओर से दोषसिद्धि का निर्णय आने के बाद अब सभी की निगाहें सजा के निर्धारण पर टिकी हुई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 3 अक्टूबर को सजा के बिंदुओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उसी दिन सजा का ऐलान किया जाएगा। हत्या और जानलेवा हमले के इस पुराने मामले में दोषियों को क्या सजा दी जाती है, इसका अंतिम फैसला इसी आगामी तारीख को सार्वजनिक होगा।

## इसका आप पर असर
यह फैसला दिखाता है कि वर्षों पुरानी आपराधिक वारदातों में भी न्यायिक जवाबदेही तय होती है और दोषियों को कानून की गिरफ्त में लाया जा सकता है।

- **झारखंड में:** कोयलांचल क्षेत्र में लंबे समय से लंबित गंभीर अपराधों के मुकदमों में सजा की प्रक्रिया तेज होने से आम नागरिकों और कानून व्यवस्था का मनोबल बढ़ता है। स्थानीय स्तर पर 3 अक्टूबर को आने वाले सजा के फैसले पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जनता की नजरें रहेंगी।
- **भारत में:** दो दशक पुराने गंभीर अपराधों में अंतिम दोषसिद्धि न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को रेखांकित करती है। हालांकि मुकदमों के निपटारे में लगने वाला 22 साल का लंबा समय न्यायिक सुधारों और त्वरित न्याय की आवश्यकता को भी सामने लाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला 2004 में धनबाद के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान को निशाना बनाकर किए गए जानलेवा हमले से जुड़ा है। दो दशक तक चले लंबे न्यायिक ट्रायल के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला दिया है।

- **हमले का कारण:** 29 जनवरी 2004 को हमलावरों ने फहीम खान के आवास पर एके-47 जैसे स्वचालित हथियार से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। इस हमले के दौरान फहीम खान के सुरक्षाकर्मी विनोद शर्मा को गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
- **आरोपियों की संलिप्तता:** मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम पर मुकदमा चलाया गया था। जांच और गवाही के आधार पर अदालत ने इन तीनों व्यक्तियों की आपराधिक भूमिका को सिद्ध पाया।
- **न्यायिक निष्कर्ष:** लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया। अब मामले में सजा की अवधि तय करने के लिए 3 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. फहीम खान के घर पर गोलीबारी की घटना कब हुई थी?
यह घटना 29 जनवरी 2004 को हुई थी, जब हमलावरों ने एके-47 से उनके आवास पर अंधाधुंध फायरिंग की थी।

### 2. इस हमले में किसकी जान गई थी?
गोलीबारी में फहीम खान के बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की गोली लगने से मौत हो गई थी, जो बिहार के अरवल जिले के रहने वाले थे।

### 3. अदालत ने किन-किन आरोपियों को दोषी ठहराया है?
अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम को दोषी करार दिया है।

### 4. दोषियों की सजा पर फैसला कब सुनाया जाएगा?
अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई और फैसला सुनाने के लिए 3 अक्टूबर की तारीख तय की है।

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