दोस्त को नहीं मिल पाया था खून, तो बोकारो के शशिकांत विश्वकर्मा ने लिया संकल्प, 15 सालों में 50 से अधिक बार किया रक्तदान वर्ष 2010 में दोस्त को गोली लगने पर खून की किल्लत झेलते देख बोकारो के 59 वर्षीय शशिकांत विश्वकर्मा ने नियमित रक्तदान की शुरुआत की थी। पिछले 15 वर्षों में 50 से अधिक बार रक्तदान कर वे कई जानें बचा चुके हैं। झारखंड के बोकारो जिले में स्थित बालीडीह के रहने वाले 59 वर्षीय शशिकांत विश्वकर्मा समाज के लिए एक अनूठी मिसाल कायम कर चुके हैं। पिछले 15 वर्षों के लंबे सफर में वे 50 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। एक व्यवसायी के रूप में व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, उन्होंने निस्वार्थ भाव से दूसरों का जीवन बचाने के इस कार्य को अपनी जीवन शैली का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है। क्षेत्र के लोग उन्हें आदरपूर्वक 'रक्तवीर' के नाम से पुकारते हैं। एक हादसे ने बदल दी जीवन की दिशा शशिकांत विश्वकर्मा के रक्तदान की इस प्रेरणादायक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2010 में घटी एक दुखद घटना से हुई थी। उस समय उनके करीबी मित्र मुरारी सिंह को अचानक गोली लग गई थी। गंभीर अवस्था में उन्हें तत्काल रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत खून चढ़ाने की सलाह दी। हालांकि, मुरारी सिंह का ब्लड ग्रुप O नेगेटिव था, जो आसानी से उपलब्ध नहीं होता है। खून की कमी और समय पर डोनर न मिलने के कारण उनका परिवार बेहद चिंतित और असहाय स्थिति में था। दुर्लभ ब्लड ग्रुप और सेवा का संकल्प अपने दोस्त के परिवार को निराशा और लाचारी में घिरा देखकर शशिकांत का मन अंदर तक व्यथित हो उठा। उसी समय उन्हें यह भी अहसास हुआ कि उनका अपना ब्लड ग्रुप भी दुर्लभ O नेगेटिव ही है। दोस्त की उस बेबसी ने शशिकांत के जीवन को एक नया मोड़ दिया। उन्होंने उसी पल यह दृढ़ संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से रक्तदान करेंगे ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को अपने किसी प्रियजन की जान बचाने के लिए दर-दर न भटकना पड़े। मासूम बच्चे की बची जान, पिता ने भी ली प्रेरणा पिछले 15 सालों के इस सेवा यात्रा में शशिकांत के जीवन में कई ऐसे पल आए, जिन्होंने उनके संकल्प को और मजबूत बनाया। एक बार एक छोटे बच्चे को आपातकालीन स्थिति में तुरंत खून की आवश्यकता थी। बच्चे के परिजन काफी परेशान थे और लगातार मदद की गुहार लगा रहे थे। जैसे ही शशिकांत को इस बात की सूचना मिली, वे बिना कोई समय गंवाए अस्पताल पहुंचे और रक्तदान किया। सफल ट्रांसफ्यूजन के बाद बच्चे की जान बच गई। इस पर बच्चे के पिता ने शशिकांत का आभार जताया और स्वयं भी भविष्य में नियमित रूप से रक्तदान करने की शपथ ली। परिवार का सहयोग और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव शशिकांत बताते हैं कि अपने व्यवसाय और दैनिक व्यस्तताओं के बीच लगातार 15 वर्षों तक इस मिशन को जारी रखने में उनके परिवार ने हमेशा पूरा समर्थन दिया है। उनका मानना है कि नियमित रक्तदान से केवल जरूरतमंद मरीजों को ही जीवनदान नहीं मिलता, बल्कि रक्तदान से पहले होने वाली मुफ्त स्वास्थ्य जांच के जरिए डोनर को अपनी सेहत की सटीक जानकारी भी मिलती रहती है। हालांकि, वे यह सलाह भी देते हैं कि रक्तदान करने से पहले डॉक्टरों अथवा स्वास्थ्यकर्मियों की उचित सलाह और प्राथमिक जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। इसका आप पर असर यह खबर समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को दर्शाती है और आपातकालीन स्थितियों में दुर्लभ ब्लड ग्रुप की उपलब्धता बढ़ाने का रास्ता दिखाती है। • भारत में: देश भर के नागरिकों के लिए नियमित स्वैच्छिक रक्तदान आपातकालीन ब्लड बैंकों में दुर्लभ ब्लड ग्रुप की कमी को दूर करने में मददगार साबित होता है। 18 से 65 वर्ष के स्वस्थ व्यक्ति डॉक्टर की सलाह लेकर नियमित रक्तदान कर किसी की जान बचा सकते हैं। • बोकारो एवं झारखंड में: बोकारो जिले और झारखंड के स्थानीय निवासियों को शशिकांत विश्वकर्मा की इस मुहिम से प्रेरणा लेकर स्थानीय ब्लड बैंकों से जुड़ना चाहिए। इससे स्थानीय अस्पतालों में दुर्घटना या गंभीर बीमारियों के दौरान ओ नेगेटिव जैसे दुर्लभ खून के लिए मरीजों के परिजनों को दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. शशिकांत विश्वकर्मा कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं? शशिकांत विश्वकर्मा बोकारो के बालीडीह निवासी 59 वर्षीय व्यवसायी हैं, जो पिछले 15 वर्षों में 50 से अधिक बार रक्तदान कर समाज में 'रक्तवीर' के रूप में जाने जाते हैं। 2. शशिकांत विश्वकर्मा को नियमित रक्तदान करने की प्रेरणा कहां से मिली? वर्ष 2010 में उनके मित्र मुरारी सिंह को गोली लगने के बाद रांची में ओ नेगेटिव खून की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा था। दोस्त की बेबसी देखकर शशिकांत ने नियमित रक्तदान का संकल्प लिया। 3. शशिकांत का ब्लड ग्रुप क्या है? शशिकांत विश्वकर्मा का ब्लड ग्रुप O नेगेटिव है, जो एक दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण ब्लड ग्रुप माना जाता है। 4. रक्तदान के दौरान बच्चे की जान बचाने वाली घटना क्या थी? एक बार आपातकालीन स्थिति में एक छोटे बच्चे को खून की जरूरत थी। शशिकांत ने तुरंत पहुंचकर रक्तदान किया जिससे बच्चे की जान बच गई और उसके पिता ने भी नियमित रक्तदान करने की शपथ ली। 5. शशिकांत रक्तदान को लेकर क्या स्वास्थ्य सलाह देते हैं? वे सलाह देते हैं कि रक्तदान से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से जांच और परामर्श लेना जरूरी है। साथ ही रक्तदान से पूर्व होने वाली जांच से डोनर को अपनी सेहत की जानकारी भी मिलती है। प्रेरणा और सबक शशिकांत विश्वकर्मा का जीवन दर्शाता है कि एक व्यक्तिगत संकट किस तरह सामाजिक बदलाव और जनसेवा का स्थायी माध्यम बन सकता है। • संकट को संकल्प में बदलना: दोस्त के जीवन पर आए संकट से निराश होने के बजाय उन्होंने उसे समाज सेवा के एक स्थायी उद्देश्य में बदल दिया। • अपनी क्षमता का सही उपयोग: अपने दुर्लभ ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप की उपयोगिता को समझते हुए उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान करने का नियम बनाया। • निरंतरता और अनुशासन: एक व्यवसायी की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने 15 वर्षों तक बिना रुके 50 से अधिक बार रक्तदान कर सेवा की मिसाल पेश की। • दूसरों के लिए प्रेरणा बनना: उनके निस्वार्थ कार्य ने लाभान्वित परिवारों और समाज के अन्य लोगों को भी स्वैच्छिक रक्तदान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। https://trendkia.com/jharkhand/dosta-ko-nahin-mila-paya-tha-khuna-to-bokaro-ke-sashikant-vishwakarma-ne-liya-snkalpa-15-salon-men-50-se-adhika-bara-kiya-raktadan-26257 TrendKia — Har trend, sabse pehle.