# गेंदे में ढेरों कलियां पाने का आसान फॉर्मूला, ऊपरी सिरे की कटाई से घना बनेगा पौधा

> गेंदे के पौधों में ज्यादा शाखाएं और भरपूर फूल लेने के लिए बागवानी विशेषज्ञ शीर्ष कटाई यानी पिचिंग की सलाह देते हैं। सही समय पर मुख्य तने का ऊपरी भाग हटाने से पौधा सीधा भागने के बजाय चारों तरफ फैलकर विकसित होता है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/gende-men-dheron-kaliyan-pane-ka-asana-phormula-upari-sire-ki-katai-se-ghana-banega-paudha-52687 · **Language:** Hindi
**Tags:** गेंदा की खेती, पिचिंग तकनीक, बागवानी टिप्स, कृषि विज्ञान केंद्र, डॉ अजय कुमार राय, फूलों की पैदावार

घरों के बगीचों अथवा खेतों में गेंदे की बागवानी करने वाले लोग अक्सर पौधों में कम फूल आने की समस्या से परेशान रहते हैं। पौधे जब सीधे ऊपर की तरफ बढ़ते हैं, तो उनमें सीमित टहनियां ही निकल पाती हैं। इसका सीधा नुकसान फूलों की संख्या पर पड़ता है। ऐसे में वानस्पतिक विकास की दिशा बदलकर हर पौधे को फूलों से भरपूर बनाने के लिए एक खास बागवानी तरीका बेहद कारगर माना जाता है, जिसे कृषि शब्दावली में पिचिंग के नाम से जाना जाता है। कोडरमा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय के अनुसार, यह साधारण सी दिखने वाली प्रक्रिया गेंदे की उपज को कई गुना तक बढ़ाने की क्षमता रखती है।

## सीधी बढ़वार रोकने से क्या होता है बदलाव
सामान्य परिस्थितियों में गेंदा एकल दिशा में तेजी से ऊपर की ओर बढ़ता है। जब पूरा पोषण केवल मुख्य तने की लंबाई बढ़ाने में खर्च होता है, तो किनारे की टहनियों को पनपने का अवसर नहीं मिल पाता। इसका परिणाम यह होता है कि पौधे का ढांचा कमजोर रह जाता है और कलियों की संख्या घट जाती है। इसी प्राकृतिक बढ़वार को मोड़ने के लिए मुख्य डाली के सबसे ऊपरी शीर्ष को काट दिया जाता है। इस हिस्से के हटते ही तने का विकास रुक जाता है और जड़ से मिलने वाला पोषण पार्श्व कलियों की ओर बहने लगता है। नतीजतन, मुख्य तने के दोनों ओर से कई नई और मजबूत उप-शाखाएं तेजी से फूटने लगती हैं।

## झाड़ीदार बनावट से तय होती है फूलों की संख्या
डॉ. अजय कुमार राय ने स्पष्ट किया कि जितनी ज्यादा स्वस्थ शाखाएं विकसित होंगी, कलियां लगने की गुंजाइश भी उतनी ही अधिक तैयार होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि बागवानों को पौधे की सिर्फ ऊंचाई देखकर संतुष्ट होने के बजाय उसके फैलाव और मजबूती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि पौधा केवल सीधा ऊपर भागता रहा और झाड़ीदार न बन पाया, तो उस पर लगने वाले फूलों की कुल गिनती बहुत सीमित रह जाएगी। इसके उलट, जब शीर्ष भाग को सही वक्त पर छांट दिया जाता है, तो पौधा चारों तरफ से फैलकर घना रूप ले लेता है। यह संतुलित ढांचा आगे चलकर पौधे को भारी मात्रा में फूलों का भार संभालने लायक बना देता है।

## सुरक्षित छंटाई के लिए अपनाएं यह तरीका
गेंदे के पौधे की पिचिंग करते समय उसकी उम्र और पत्तियों की स्थिति को परखना सबसे पहला काम है। इस काम में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। जब पौधा गमले या खेत की मिट्टी में भलीभांति जड़ें जमा ले और उस पर पर्याप्त संख्या में हरी पत्तियां निकल आएं, तभी छंटाई की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके लिए किसी साफ और बेहद धारदार कैंची का इस्तेमाल करना आवश्यक है, जिससे तने पर चिकना कट लगे और ऊतकों को किसी तरह का अनावश्यक खिंचाव या आघात न पहुंचे। ध्यान रखें कि पौधे की हर शाखा को नहीं काटना है, बल्कि सिर्फ बीच वाले मुख्य तने के अग्र भाग को ही अलग किया जाता है। शीर्ष हटाने के उपरांत पौधे को नियमित नमी और संतुलित पोषण देना जारी रखें, ताकि नवजात शाखाएं तेजी से वृद्धि कर सकें।

## इसका आप पर असर
बागवानी के शौकीनों और व्यावसायिक फूल उत्पादकों के लिए यह तरीका बेहद कम मेहनत में गेंदे की पैदावार बढ़ाने का व्यावहारिक उपाय देता है।

- **लागत और बचत:** किसी महंगे रसायन या खाद के बिना केवल साधारण छंटाई से फूलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इससे छोटे किसानों और घरेलू बागवानों का अतिरिक्त खर्च बचता है।
- **फसल की उपज:** मुख्य तने की ऊपरी कटाई से पौधे में शाखाओं का जाल तैयार होता है। इससे हर पौधे से मिलने वाले फूलों का वजन और गिनती दोनों में सीधा इजाफा होता है।
- **गमलों का रखरखाव:** बालकनी या छत पर बागवानी करने वाले लोगों के पौधे लंबे होकर गिरते नहीं हैं। झाड़ीदार संरचना बनने से पौधे सीमित जगह में भी मजबूत और सुंदर बने रहते हैं।
- **पौधों की सेहत:** सही औजार से की गई कटाई तने को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना नई वृद्धि को तेज करती है। नियमित सिंचाई और खाद के साथ पौधे पूरे मौसम ताजगी से भरे रहते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गेंदे के पौधों में प्राकृतिक रूप से शीर्ष भाग की ओर तेज बढ़वार होती है, जिससे किनारे की टहनियां दब जाती हैं और फूल कम आते हैं।

- **प्राकृतिक बढ़वार का असर:** पौधा शुरुआत में सारा पोषण सीधे ऊपर बढ़ने में लगा देता है। इसके चलते निचली और पार्श्व कलियां विकसित नहीं हो पातीं और पौधा छरहरा रह जाता है।
- **ऊपरी सिरे को हटाने का विज्ञान:** मुख्य तने की ऊपरी नोक काटते ही अग्र वृद्धि रुक जाती है। इससे पौधे का आंतरिक पोषण किनारे की सुप्त कलियों में बंटने लगता है और नई टहनियां फूटती हैं।
- **उपज की कमी से बचाव:** यदि समय रहते यह कटाई न की जाए, तो पूरे पौधे पर केवल गिनी-चुनी कलियां ही खिल पाती हैं। शीर्ष हटाने से टहनियों की तादाद बढ़कर पौधे को फूलों से भर देती है।

## सवाल-जवाब

### 1. गेंदे के पौधे में पिचिंग किसे कहते हैं?
गेंदे के पौधे की मुख्य बढ़ती हुई डाली के सबसे ऊपरी सिरे को काटने की तकनीक को पिचिंग कहा जाता है।

### 2. पिचिंग तकनीक अपनाने से पौधे को क्या फायदा होता है?
इससे पौधे की बेवजह ऊंचाई रुकती है और उसमें चारों तरफ नई शाखाएं फूटती हैं, जिससे फूलों की संख्या बढ़ जाती है।

### 3. गेंदे के पौधे की छंटाई किस समय करनी चाहिए?
जब पौधा मिट्टी में अच्छी तरह अपनी जड़ें जमा ले और उस पर पर्याप्त हरी पत्तियां विकसित हो जाएं, तब छंटाई करनी चाहिए।

### 4. पिचिंग करते समय किन औजारों का इस्तेमाल करना चाहिए?
इस कार्य के लिए साफ और धारदार कैंची का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पौधे के तने को कोई अनावश्यक क्षति न पहुंचे।

### 5. क्या पौधे की सभी शाखाओं के सिरे काटने पड़ते हैं?
नहीं, सभी टहनियों को नहीं काटा जाता बल्कि केवल मुख्य बढ़ती हुई डाली के शीर्ष हिस्से को ही हटाया जाता है।

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