घर के आंगन को शाम ढलते ही महका देंगे ये चार खुशबूदार पौधे, जानिए सही देखभाल के तरीके चमेली, बेला, जूही और गंधराज जैसे सुगंधित पौधे शाम होते ही खिल उठते हैं। उचित धूप, संतुलित पोषण और सही सिंचाई के जरिए आप अपने बगीचे को फूलों से भर सकते हैं। घर के आंगन या बालकनी में हरियाली के साथ मनमोहक खुशबू जोड़ना हर बागवानी प्रेमी की ख्वाहिश होती है। सामान्य रंग-बिरंगे फूलों के अलावा ऐसे सुगंधित पौधे चुनना एक बेहतरीन फैसला साबित होता है, जो शाम ढलने पर अपनी महक से पूरे परिसर को सराबोर कर दें। चमेली, बेला, जूही और गंधराज ऐसे ही पौधे हैं, जिनकी सफेद पंखुड़ियां और भीनी खुशबू शाम के समय वातावरण को बिल्कुल तरोताजा बना देती हैं। प्रकृति में इन पौधों की कई किस्मों की विशेषता यही है कि उनकी गंध रात के समय अधिक तीव्र हो जाती है, ताकि रात में विचरण करने वाले परागण कीट इनकी ओर आकर्षित हो सकें। हालांकि दिन के समय भी इनकी धीमी गंध महसूस की जा सकती है, लेकिन सूरज ढलते ही इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। शाम के समय महकने वाली प्रमुख किस्में और उनकी खासियतें पलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ. डीएस श्रीवास्तव के अनुसार, यदि कोई अपने बगीचे या घर के खुले हिस्से में खुशबूदार हरियाली जोड़ना चाहता है, तो चमेली और बेला बेहद असरदार विकल्प हैं। इन दोनों ही पौधों पर खिलने वाले सफेद फूल न केवल दिखने में बेहद आकर्षक होते हैं, बल्कि कई किस्मों में शाम से लेकर रात करीब नौ बजे तक इनकी तीव्र और मनभावन खुशबू का आनंद लिया जा सकता है। इन पौधों को सुविधा अनुसार बड़े गमलों में अथवा सीधे जमीन की क्यारियों में लगाया जा सकता है। हालांकि इनमें फूल खिलने का चक्र मौसम और चुनी गई किस्म पर पूरी तरह निर्भर करता है। मिसाल के तौर पर, दिसंबर और जनवरी के भीषण ठंड वाले महीनों में कुछ विशेष किस्मों पर फूलों की संख्या अपेक्षाकृत कम हो सकती है। जूही और गंधराज से सजाएं बैठने की जगहें अन्य दो प्रमुख पौधों की बात करें तो गंधराज अपने अपेक्षाकृत बड़े, दूधिया सफेद और भारी सुगंध वाले फूलों के लिए विख्यात है। वहीं जूही के छोटे आकार के नाजुक फूल भी वातावरण को अपनी तेज खुशबू से भर देने की पूरी क्षमता रखते हैं। डॉ. डीएस श्रीवास्तव के अनुसार, इन पौधों को घर के मुख्य प्रवेश द्वार, बालकनी की रेलिंग के करीब या फिर परिवार के बैठने की जगह के पास रोपना सबसे उत्तम निर्णय होता है। शाम को जब लोग दिनभर की भागदौड़ के बाद बालकनी या आंगन में फुर्सत के पल बिताते हैं, तब इन फूलों की प्राकृतिक महक मन को शांति प्रदान करती है। उचित रख-रखाव और देखभाल मिलने पर ये पौधे घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पूरे परिवेश को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। पत्तियां हरी होने के बावजूद फूल न आने की वजहें अक्सर देखा जाता है कि चमेली या बेला के पौधे बेहद हरे-भरे रहते हैं, उन पर नई पत्तियों का विकास भी तेजी से होता है, लेकिन कलियां और फूल नदारद रहते हैं। इस समस्या पर ध्यान दिलाते हुए विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ऐसा केवल पोषक तत्वों या खाद की कमी से नहीं होता। इसके पीछे धूप और उर्वरक के संतुलन की कमी मुख्य कारण हो सकती है। चमेली और बेला की ज्यादातर किस्मों में भरपूर कलियां बनने के लिए रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलना अनिवार्य है। इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन युक्त खाद डालने से भी बचना चाहिए, क्योंकि नाइट्रोजन पौधे में केवल हरी पत्तियां बढ़ाता है और फूलों के विकास को रोक देता है। उचित सिंचाई, छंटाई और पोषण के जरूरी नियम पौधों में पानी देने की प्रक्रिया को बेहद संतुलित रखना चाहिए। मिट्टी में नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए, लेकिन गमले या क्यारी में जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली हल्की मिट्टी का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही, समय-समय पर सूखी टहनियों, पीली पत्तियों और मुरझा चुके हिस्सों की छंटाई करते रहना आवश्यक है। छंटाई का काम पौधे की किस्म और उसके फूल आने के मौसम को ध्यान में रखकर ही करें, जिससे नई शाखाओं और कलियों के निकलने में कोई बाधा न पहुंचे। अत्यधिक खाद के बजाय जरूरत के मुताबिक संतुलित खाद दें। नियमित देखरेख, पर्याप्त धूप और सही सिंचाई मिलने पर पौधों में फूल खिलने की संभावना तेजी से बढ़ जाती है और आपका परिसर रात तक महकता रहता है। इसका आप पर असर घर में सुगंधित पौधे लगाने से न केवल बगीचे की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि शाम के समय मानसिक तनाव दूर करने वाला प्राकृतिक माहौल भी तैयार होता है। • पौधों का चयन: चमेली, बेला, गंधराज और जूही के पौधे घर की बालकनी या आंगन में लगाएं। शाम के समय इनकी प्राकृतिक सुगंध बिना किसी रूम फ्रेशनर के पूरे घर को तरोताजा कर देती है। • धूप की व्यवस्था: इन पौधों के गमलों को ऐसी खुली जगह पर रखें जहां प्रतिदिन कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप आती हो। पर्याप्त धूप मिलने पर ही पौधों में कलियां और फूल सही मात्रा में विकसित होते हैं। • खाद का सही संतुलन: पौधों में ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद डालने से बचें ताकि केवल पत्तियां न बढ़ें। संतुलित खाद का सीमित मात्रा में उपयोग करने से कलियां तेजी से निकलती हैं। • सिंचाई और जल निकासी: गमले में पानी जमा न होने दें और मिट्टी में केवल जरूरी नमी बनाए रखें। जलभराव रोकने के लिए जल निकासी छिद्रों वाले गमलों का उपयोग करें। ऐसा क्यों हुआ रात और शाम के समय इन फूलों से अधिक महक आने और पौधों में फूल न खिलने के पीछे प्राकृतिक जैविक कारण और बागवानी से जुड़ी स्थितियां जिम्मेदार होती हैं। • परागण कीटों का आकर्षण: चमेली, बेला और जूही की कई प्रजातियां शाम होते ही अपनी खुशबू बढ़ा देती हैं। इसका सीधा जैविक उद्देश्य रात के समय सक्रिय रहने वाले पतंगों और अन्य परागण कीटों को आकर्षित करना होता है। • अत्यधिक नाइट्रोजन का असर: मिट्टी में अत्यधिक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक देने से पौधे का ध्यान केवल पत्तियों के विकास पर चला जाता है। नतीजतन पौधा हरा-भरा तो दिखता है, लेकिन कलियां बनना बंद हो जाती हैं। • धूप और मौसम का प्रभाव: दैनिक 4 से 5 घंटे की धूप न मिलने पर पौधे ऊर्जा संचय नहीं कर पाते। इसके अलावा दिसंबर और जनवरी की अत्यधिक ठंड भी कुछ किस्मों में फूलों की संख्या घटा देती है। सवाल-जवाब 1. शाम के समय आंगन को महकाने के लिए कौन से पौधे सबसे अच्छे हैं? चमेली, बेला, जूही और गंधराज शाम और रात के समय वातावरण को सुगंधित बनाने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। 2. चमेली और बेला की खुशबू शाम को किस समय तक सबसे ज्यादा महसूस होती है? इन पौधों की कई किस्मों में शाम से लेकर रात करीब नौ बजे तक तीव्र और मनमोहक खुशबू का आनंद लिया जा सकता है। 3. पौधे हरे-भरे रहने के बावजूद उन पर फूल क्यों नहीं आते? धूप की कमी और जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद का प्रयोग पत्तियों को बढ़ा देता है और कलियां नहीं बनने देता। 4. अच्छी फूल पैदावार के लिए पौधों को रोजाना कितनी धूप चाहिए? चमेली और बेला की अधिकांश किस्मों को अच्छी तरह फूलने के लिए रोजाना लगभग 4 से 5 घंटे की सीधी धूप चाहिए होती है। 5. किन महीनों में ठंड के कारण इन पौधों में फूल कम आ सकते हैं? दिसंबर और जनवरी के महीनों में अत्यधिक ठंड के कारण इन पौधों की कुछ किस्मों में फूल अपेक्षाकृत कम आ सकते हैं। 6. घर में इन सुगंधित पौधों को किस स्थान पर लगाना सबसे उपयुक्त रहता है? इन्हें घर के मुख्य प्रवेश द्वार, बालकनी या परिवार के बैठने की जगह के आसपास लगाना सबसे अच्छा माना जाता है। https://trendkia.com/jharkhand/ghara-ke-angana-ko-shama-dhalate-hi-mahaka-denge-ye-chara-khushabudara-paudhe-janie-sahi-dekhabhala-ke-tarike-46226 TrendKia — Har trend, sabse pehle.