घर की पाबंदियों के बीच फोन देखकर सीखी डिजाइनिंग, रांची की जूही अब महीने में कमा रहीं लाख रुपये से ज्यादा कॉलेज जाने की बंदिशों के बावजूद रांची की जूही ने ऑनलाइन फैशन डिजाइनिंग सीखी और बुटीक शुरू करके हर महीने एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं. झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली जूही की उद्यमिता यात्रा पारिवारिक बंदिशों के साए में शुरू हुई थी. उन्होंने शहर के ही एक सामान्य कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की, लेकिन उन्हें नियमित रूप से कॉलेज जाने की अनुमति परिवार से नहीं मिली थी. वह केवल अपनी वार्षिक परीक्षाएं देने के लिए ही कॉलेज जाया करती थीं, क्योंकि उनके घर पर पढ़ाई जारी रखने को लेकर कड़ा विरोध था. इन तमाम रुकावटों के बीच जूही की गहरी रुचि फैशन डिजाइनिंग में थी. औपचारिक प्रशिक्षण का कोई रास्ता न देख उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया. इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो देखकर उन्होंने घर की चारदीवारी में ही सिलाई और कपड़ों के डिजाइन की लगातार प्रैक्टिस शुरू कर दी. विरोध के बावजूद बुटीक की शुरुआत और आत्मनिर्भरता की राह जब जूही ने अपने काम को एक व्यवस्थित रूप देने के लिए बुटीक खोलने का निर्णय लिया, तब उन्हें परिवार में फिर से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. इस बार जूही पीछे हटने के मूड में नहीं थीं. उन्होंने अपने करियर और सपनों के लिए स्पष्ट रुख अपनाया और यह तय कर लिया कि उन्हें अपनी बुटीक शुरू करनी ही है. शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी और सामाजिक बाधाओं के बीच उनका काफी लंबा संघर्ष रहा. हालांकि उनकी लगन का नतीजा यह निकला कि आज उनकी मासिक कमाई 1 लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है. वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ ही उन्होंने अपने संस्थान में 6 से 7 लोगों को रोजगार भी दिया हुआ है. ग्राहकों को जोड़ने के लिए खास डिस्काउंट और मार्केटिंग रणनीति जूही अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए एक बेहद सोची-समझी व्यावसायिक रणनीति अपनाती हैं. उनका मुख्य जोर शुरुआत में बड़ा मुनाफा कमाने के बजाय मजबूत ग्राहक आधार तैयार करने पर रहता है. उनका मानना है कि यदि कोई उद्यमी पहली ही डील में 5000 रुपये जैसे बड़े मुनाफे की जिद पकड़ ले, तो कारोबार लंबा नहीं चल सकता. इसलिए वह हर दो से तीन महीने के अंतराल पर ग्राहकों को 50 प्रतिशत तक के डिस्काउंट जैसे आकर्षक ऑफर्स देती हैं. इसके अलावा शहर में लगने वाली हर प्रदर्शनी में वह अपना स्टॉल लगाती हैं और वहां भी ग्राहकों को सीधे 50 प्रतिशत की छूट देती हैं. जूही के अनुसार जब खरीदारों को सही फिटिंग और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलते हैं, तो वे दोबारा खुद चलकर दुकान पर आते हैं. डिजिटल मौजूदगी और अलग डिजाइन तैयार करने की कला पारंपरिक बिक्री के अलावा जूही ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनी बिक्री का मुख्य जरिया बनाया हुआ है. वह अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज और व्हाट्सएप के माध्यम से प्रतिदिन नए-नए कपड़ों की शॉर्ट वीडियो साझा करती हैं. इन ऑनलाइन पोस्ट्स की बदौलत उन्हें इंस्टाग्राम से रोजाना नए ऑर्डर मिलते रहते हैं. अपने कलेक्शन को दूसरों से अलग रखने के लिए वह बाजार में महिलाओं के पहनावे और बदलती पसंद पर बारीक नजर रखती हैं. महिलाओं के रोजमर्रा के फैशन को गहराई से समझकर वह उसमें नयापन जोड़ती हैं. इसी अनूठे कलेक्शन और निरंतर प्रयास के दम पर वह आज पूरी तरह अपने पैरों पर खड़ी हैं और अपनी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करती हैं. इसका आप पर असर यह कहानी छोटे शहरों के युवाओं और महिलाओं को सीमित संसाधनों में डिजिटल माध्यमों के जरिए स्वरोजगार शुरू करने का व्यावहारिक रास्ता दिखाती है. • भारत में: इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल मनोरंजन के बजाय कौशल सीखने और सीधे उत्पाद बेचने का साधन बनाया जा सकता है. कम पूंजी में घर से काम शुरू करके खुद का ब्रांड स्थापित करना अब बिना महंगे कोर्स के भी मुमकिन है. • रांची में: स्थानीय कपड़ा और बुटीक बाजार में नए डिजाइनरों के लिए प्रदर्शनियों और ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए काम के नए मौके बन रहे हैं. स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार शुरू होने से आसपास के 6 से 7 कारीगरों और सहायकों को नियमित रोजगार मिल रहा है. • नए उद्यमियों के लिए: शुरुआती दौर में 50 प्रतिशत तक की छूट देकर ग्राहकों को जोड़ना लंबे समय में भरोसेमंद खरीदार तैयार करता है. भारी मुनाफे के बजाय उत्पाद की फिटिंग और गुणवत्ता पर ध्यान देकर बिना विज्ञापन खर्च के बार-बार आने वाले ग्राहक बनाए जा सकते हैं. • घरेलू महिलाओं के लिए: पारिवारिक पाबंदियों के बीच भी घर बैठे फोन से हुनर सीखकर अपनी वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है. दैनिक आधार पर शॉर्ट वीडियो बनाकर अपने हुनर का प्रदर्शन करने से सीधे खरीदार मिलना आसान हो जाता है. ऐसा क्यों हुआ जूही की व्यावसायिक सफलता व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प, मुफ्त डिजिटल सामग्री का सही उपयोग और ग्राहकों पर केंद्रित बिक्री मॉडल का नतीजा है. • पारिवारिक पाबंदियां और व्यक्तिगत रुचि: घर से नियमित कॉलेज जाने की अनुमति न होने के बावजूद जूही ने फैशन में अपनी गहरी रुचि को दबने नहीं दिया. औपचारिक प्रशिक्षण की कमी को उन्होंने सोशल मीडिया पर उपलब्ध ट्यूटोरियल्स और घर पर निरंतर अभ्यास के जरिए पूरा किया. • फैसले पर अडिग रहना: बुटीक खोलने के फैसले पर जब परिजनों की तरफ से भारी विरोध हुआ, तब उन्होंने अपने करियर के लिए कड़ा रुख अपनाया. इस स्पष्ट संकल्प और शुरुआती संघर्ष ने उन्हें अपने निर्णय को साबित करने की प्रेरणा दी. • ग्राहक-केंद्रित मार्केटिंग: तुरंत बड़ा मुनाफा कमाने के बजाय जूही ने हर दो-तीन महीने में 50 प्रतिशत छूट और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने का रास्ता चुना. इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और वे कपड़ों की फिटिंग पसंद आने पर स्थायी खरीदार बन गए. • दैनिक डिजिटल प्रचार: इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हर दिन कपड़ों की छोटी वीडियो साझा करने से उन्हें लगातार नए खरीदार मिलते रहे. महिलाओं की बदलती प्राथमिकताओं पर लगातार नजर रखने से उनके डिजाइन बाजार में हमेशा अलग और प्रासंगिक बने रहे. सवाल-जवाब 1. रांची की जूही ने फैशन डिजाइनिंग कहां से सीखी? घर से बाहर जाने की अनुमति न होने के कारण जूही ने सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर और घर पर ही अभ्यास करके फैशन डिजाइनिंग सीखी. 2. जूही की मौजूदा मासिक कमाई कितनी है? जूही अपने बुटीक और फैशन कारोबार से हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर रही हैं. 3. जूही की बुटीक में कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है? उनकी बुटीक में वर्तमान में 6 से 7 लोगों को काम मिला हुआ है. 4. जूही अपने बुटीक पर ग्राहकों को क्या खास ऑफर्स देती हैं? वह हर दो से तीन महीने में 50 प्रतिशत तक का डिस्काउंट देती हैं और स्थानीय प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर भी 50 प्रतिशत छूट पर कपड़े बेचती हैं. 5. जूही को ऑनलाइन ऑर्डर किस तरह मिलते हैं? वह अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज और व्हाट्सएप पर प्रतिदिन कपड़ों की शॉर्ट वीडियो साझा करती हैं, जिससे उन्हें नियमित रूप से नए ऑर्डर मिलते हैं. प्रेरणा और सबक सीमित अवसरों और पारिवारिक बंदिशों के बीच अपनी पहचान बनाने वाली जूही का सफर कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक सीख देता है. • संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं: यदि बड़े कॉलेज में जाने का अवसर न मिले, तो सोशल मीडिया और इंटरनेट को सीखने की मुफ़्त पाठशाला बनाया जा सकता है. अपनी लगन से घर की चारदीवारी में भी किसी भी हुनर में महारत हासिल की जा सकती है. • अपने सपनों के लिए स्टैंड लेना सीखें: जब सामाजिक या पारिवारिक विरोध सामने आए, तो अपने सही लक्ष्य के लिए खुलकर आगे आना जरूरी होता है. अपने निर्णय पर डटे रहने से ही भविष्य के रास्ते खुलते हैं. • शुरुआत में मुनाफे से पहले ग्राहक बनाएं: एक ही बार में बड़ा लाभ कमाने की जिद के बजाय ग्राहकों को लुभावने ऑफर्स देकर अपने साथ जोड़ें. जब आपकी गुणवत्ता और फिटिंग लोगों को पसंद आएगी, तो कारोबार अपने आप बड़ा रूप ले लेगा. • दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच रखें: खुद आत्मनिर्भर बनने के बाद अपने काम के जरिए अन्य 6 से 7 लोगों को रोजगार देकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है. https://trendkia.com/jharkhand/ghara-ki-pabndiyon-ke-bicha-phona-dekhakara-sikhi-dijaininga-ranchi-ki-juhi-aba-mahine-men-kama-rahin-lakha-rupaye-se-jyada-42575 TrendKia — Har trend, sabse pehle.