घर पर ऐसे तैयार करें पंचफोरन, साधारण सब्जी का स्वाद भी बन जाएगा खास कोडरमा की गृहणी राधिका प्रजापति के अनुसार जीरा, राई, सौंफ, मेथी और मंगरेला को मिलाकर बनने वाला पंचफोरन सब्जियों के स्वाद को पारंपरिक और लाजवाब बना देता है. भारतीय खानपान की परंपरा में मसालों की भूमिका केवल भोजन में रंग और महक जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों से इनका उपयोग पकवानों को अनोखा जायका देने के लिए किया जाता रहा है. रसोई में मौजूद इन्हीं पारंपरिक स्वादों में से एक लोकप्रिय नाम पंचफोरन का है. यह खास मसाला पांच अलग-अलग साबुत मसालों के सटीक मेल से तैयार किया जाता है. इस मिश्रण की सबसे बड़ी खूबी यह मानी जाती है कि इसे बनाने के लिए न तो मसालों को पीसने की मशक्कत करनी पड़ती है और न ही इन्हें पहले से तवे पर भूनने का झंझट होता है. बस पांचों सामग्रियों को एक साथ मिला देने से यह मसाला उपयोग के लिए तुरंत तैयार हो जाता है. पंचफोरन बनाने के लिए जरूरी पांच मसाले कोडरमा की गृहणी राधिका प्रजापति ने बताया कि पंचफोरन का मिश्रण तैयार करने के लिए जीरा, सरसों अथवा राई, सौंफ, मेथी दाना और मंगरेला की आवश्यकता होती है. ये सभी सामग्रियां भारतीय घरों की रसोई में आमतौर पर बेहद आसानी से मिल जाती हैं. इन पांचों खड़े मसालों को उचित अनुपात में एक साथ मिलाकर रख लिया जाता है. राधिका प्रजापति के अनुसार, इस मसाले का उपयोग पाउडर बनाकर नहीं किया जाता, बल्कि इसे खड़े दानों के रूप में ही इस्तेमाल में लाया जाता है. जब गर्म तेल में पंचफोरन डाला जाता है, तब इसके साबुत दानों से निकलने वाला एरोमा और स्वाद तेल के भीतर अच्छी तरह समा जाता है. इसके बाद जब सब्जी तैयार की जाती है, तो उसका स्वाद रोजमर्रा की सामान्य सब्जी के मुकाबले कहीं अधिक खास और अलग महसूस होता है. साधारण सब्जियों में कैसे बढ़ता है जायका सब्जियों में तड़के के इस्तेमाल पर बात करते हुए राधिका प्रजापति ने बताया कि कद्दू, बैंगन और आलू-फूलगोभी की सूखी या रसेदार तैयारी में पंचफोरन का तड़का बेहद खास परिणाम देता है. इसके अतिरिक्त कई अन्य पारंपरिक व्यंजनों में भी इसका प्रयोग मुख्य स्वाद बढ़ाने वाले घटक के रूप में किया जाता है. यदि किसी सब्जी में बहुत कम पिसे मसालों का प्रयोग किया गया हो, तब भी पंचफोरन का सही तड़का उसके साधारण स्वाद को लाजवाब बना देता है. इसमें मौजूद हर एक घटक का अपना पारंपरिक महत्व भी माना गया है. उदाहरण के लिए, जीरा और सौंफ का उपयोग पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और खाने के बाद महसूस होने वाली बेचैनी को कम करने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है. मेथी दाना भी भारतीय पाक शैली का एक प्रमुख अंग रहा है, जबकि सरसों और मंगरेला अपनी तीखी महक और विशिष्ट स्वाद के लिए पहचाने जाते हैं. तैयारी में बेहद आसान और लंबे समय तक सुरक्षित पंचफोरन की लोकप्रियता की एक मुख्य वजह इसकी बेहद सरल तैयारी और हर तरह के व्यंजन में ढल जाने की क्षमता है. बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के इन पांच सामान्य बीजों को मिलाकर डिब्बे में भरकर रख दिया जाए, तो यह मिश्रण लंबे समय तक खराब नहीं होता. जब कभी रोज की सब्जी का स्वाद नीरस लगे या घर में बिल्कुल पारंपरिक देसी छौंक की महक चाहिए हो, तब इस पंचफोरन का प्रयोग कर भोजन को झटपट लजीज बनाया जा सकता है. इसका आप पर असर घर की रसोई में मौजूद साधारण मसालों से बिना किसी खर्च के स्वादिष्ट और पाचक तड़का तैयार किया जा सकता है. • दैनिक खानपान में सुधार: कम तेल-मसाले वाली साधारण सब्जियों में भी इस पारंपरिक छौंक से होटल जैसा अनोखा स्वाद लाया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम मसालों में स्वादिष्ट खाना चाहते हैं. • समय और मेहनत की बचत: इस मसाले को पीसने या भूनने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. इसे एक बार बनाकर महीनों तक बिना खराब हुए सुरक्षित रखा जा सकता है. • पाचन में मदद: इसमें शामिल जीरा, सौंफ और मेथी पारंपरिक रूप से पेट की भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं. भोजन के बाद होने वाली असहजता से राहत पाने के लिए यह तड़का उपयोगी है. • किफायती उपाय: इसके सभी पांच घटक पहले से ही हर भारतीय रसोई के डिब्बों में मौजूद रहते हैं. इसलिए अलग से कोई महंगा रेडीमेड मसाला खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. ऐसा क्यों हुआ भारतीय रसोई में विभिन्न खड़े मसालों को मिलाकर पंचफोरन तैयार करने और उपयोग करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. • स्वाद और महक का मेल: पांच अलग-अलग प्रकृति वाले मसालों को एक साथ गर्म तेल में डालने पर उनके एरोमैटिक तेल आपस में घुलकर एक अनूठी खुशबू पैदा करते हैं. यही कारण है कि इसे अलग-अलग इस्तेमाल करने के बजाय मिलाकर तड़का लगाया जाता है. • पाउडर न बनाने की वजह: खड़े मसाले गर्म तेल में धीरे-धीरे अपना स्वाद छोड़ते हैं और जलते नहीं हैं. पाउडर मसाले बहुत जल्दी जल जाते हैं, इसलिए पंचफोरन को हमेशा साबुत ही रखा जाता है. • परंपरा और स्वास्थ्य: भारतीय खानपान में मसालों का चयन केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि मौसमी पाचन संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया था. इसी विचार के तहत पाचन में मददगार जीरा, सौंफ और मेथी को स्वाद देने वाले राई और मंगरेला के साथ जोड़ा गया. सवाल-जवाब 1. पंचफोरन किन पांच मसालों से मिलकर बनता है? पंचफोरन जीरा, सरसों अथवा राई, सौंफ, मेथी दाना और मंगरेला को मिलाकर तैयार किया जाता है. 2. क्या पंचफोरन बनाने के लिए मसालों को भूनना या पीसना पड़ता है? नहीं, पंचफोरन के लिए मसालों को न तो भूनना पड़ता है और न ही पीसना पड़ता है, इसे खड़े रूप में ही मिलाया जाता है. 3. पंचफोरन का तड़का किन सब्जियों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है? आलू-फूलगोभी, कद्दू और बैंगन जैसी सब्जियों के अलावा कई पारंपरिक व्यंजनों में इसका तड़का लगाया जाता है. 4. पंचफोरन में जीरा और सौंफ का क्या महत्व है? पारंपरिक रूप से जीरा और सौंफ का उपयोग पाचन क्रिया को बेहतर रखने और भोजन के बाद होने वाली असहजता को कम करने के लिए किया जाता है. 5. क्या पंचफोरन को लंबे समय तक रसोई में स्टोर किया जा सकता है? हां, पांचों सूखे खड़े मसालों को मिलाकर एक साफ डिब्बे में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. https://trendkia.com/jharkhand/ghara-para-aise-taiyara-karen-pnchaphorana-sadharana-sabji-ka-svada-bhi-bana-jaega-khasa-33478 TrendKia — Har trend, sabse pehle.