# घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए पलामू में शक्ति सदन की तैयारी, तीन वर्ष तक मिल सकेगा सुरक्षित ठिकाना

> पलामू में प्रताड़ना और पारिवारिक हिंसा से जूझ रही महिलाओं को दीर्घकालिक पुनर्वास देने के लिए शक्ति सदन की स्थापना की जा रही है, जहां उन्हें रहने के साथ कानूनी व चिकित्सीय मदद मिलेगी।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/gharelu-hinsa-ki-shikara-mahilaon-ke-lie-palamu-men-shakti-sadan-ki-taiyari-tina-varsha-taka-mila-sakega-surakshita-thikana-47743 · **Language:** Hindi
**Tags:** पलामू, शक्ति सदन, घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा, सखी वन स्टॉप सेंटर, झारखंड

झारखंड के पलामू जिले में विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों, मारपीट और गंभीर घरेलू प्रताड़ना का सामना कर रही महिलाओं की सहायता के लिए एक विस्तृत सुरक्षा योजना पर काम शुरू किया गया है। संकटग्रस्त महिलाओं को आपातकालीन राहत से आगे ले जाकर दीर्घकालिक सुरक्षा चक्र देने के मकसद से जिले में विशेष शक्ति सदन स्थापित किया जा रहा है। इस आश्रय गृह की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि पीड़ित महिलाएं यहां तीन साल की लंबी अवधि तक सुरक्षित रहकर अपना पुनर्वास कर सकेंगी। इस दौरान उनके रहने और भोजन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श और भविष्य की तैयारी के लिए आवश्यक सभी सहयोग उपलब्ध कराए जाएंगे। इस परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर विभागीय मंजूरी भी हासिल हो चुकी है।

## विभागीय मंजूरी के बाद भवन आवंटन की कवायद तेज
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान के अनुसार शक्ति सदन योजना का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण माहौल देना इस केंद्र की पहली प्राथमिकता है। संबंधित सरकारी विभाग से इस आश्रय गृह के संचालन की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद अब इसके लिए उपयुक्त भवन चिन्हित करने और उसे अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही भवन की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी, केंद्र के बुनियादी ढांचे को सक्रिय करने और संचालन से जुड़े अन्य तकनीकी कदमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस पूरी पहल का बुनियादी लक्ष्य संकट में फंसी महिलाओं को न केवल तात्कालिक संकट से निकालना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला देना भी है।

## सखी वन स्टॉप सेंटर से आगे का मजबूत सुरक्षा घेरा
जिले में वर्तमान में चल रही सहायता व्यवस्था की तुलना में शक्ति सदन एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। नीता चौहान ने जानकारी दी कि मौजूदा समय में पलामू में सखी वन स्टॉप सेंटर काम कर रहा है, जहां किसी भी प्रकार के अत्याचार या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को फौरी और आपातकालीन मदद दी जाती है। हालांकि, सखी वन स्टॉप सेंटर की अपनी सीमाएं हैं और वहां पीड़ित महिलाओं के लिए अधिकतम 10 दिनों तक ही ठहरने का प्रबंध रहता है। अल्पकालिक अवधि बीतने के बाद उन महिलाओं के सामने गंभीर आवास संकट खड़ा हो जाता है, जिनका पारिवारिक बिखराव हो चुका है या जिनके पास लौटने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होती। शक्ति सदन के धरातल पर उतरने के बाद ऐसी असहाय महिलाएं पूरे तीन वर्ष तक बिना किसी डर के रह सकेंगी, जिससे उन्हें अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का पर्याप्त समय मिलेगा।

## इलाज, परामर्श और कानूनी लड़ाई में कदम-कदम पर सहयोग
शक्ति सदन केवल एक चारदीवारी या ठहरने का स्थान भर नहीं होगा, बल्कि यह पीड़ित महिलाओं के संपूर्ण उपचार और न्याय की धुरी बनेगा। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि यहां आने वाली महिलाओं की जरूरतों का आकलन करके हर स्तर पर सहायता दी जाएगी। यदि कोई महिला शारीरिक हिंसा या गंभीर मारपीट का शिकार होकर पहुंचती है, तो सबसे पहले उसे समुचित चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराई जाएगी। शारीरिक उपचार के साथ ही हिंसा के कारण उपजे गहरे मानसिक आघात और सामाजिक तनाव से उबारने के लिए पेशेवर विशेषज्ञों द्वारा नियमित काउंसिलिंग और परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, जो महिलाएं अपने उत्पीड़कों के खिलाफ पुलिस थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराना चाहती हैं या अदालत में वैधानिक संघर्ष लड़ना चाहती हैं, उन्हें कानूनी सलाहकारों के जरिए कानूनी सहायता और पूरी न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

## सामाजिक दबाव और लाचारी से जूझती महिलाओं को नई राह
पारिवारिक कलह और गंभीर हिंसा के बावजूद ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बहुत सी महिलाएं सामाजिक लोकलाज, बच्चों के भविष्य और आर्थिक लाचारी के दबाव में चुप्पी साधने को मजबूर हो जाती हैं। रहने की कोई सुरक्षित जगह न होना उन्हें बार-बार उसी हिंसक माहौल में लौटने के लिए विवश कर देता है। पलामू में शक्ति सदन की शुरुआत ऐसे बंधनों को तोड़ने में बेहद मददगार साबित होगी। तीन साल के सुरक्षित आश्रय के दौरान महिलाओं को नए सिरे से अपनी जिंदगी की रूपरेखा तय करने, अपनी परिस्थितियों को संभालने और आत्मनिर्भरता के रास्ते तलाशने का वास्तविक अवसर मिल सकेगा।

## इसका आप पर असर
पलामू में शक्ति सदन की स्थापना से गंभीर पारिवारिक प्रताड़ना झेल रही महिलाओं को आपातकालीन राहत के बाद दीर्घकालिक पुनर्वास और आवास की स्थायी सुरक्षा मिलेगी।

- **भारत में:** केंद्र प्रायोजित महिला कल्याण नीतियों के तहत संकटग्रस्त महिलाओं के लिए दीर्घकालिक आश्रय की व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। इससे देश भर में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को त्वरित कानूनी और चिकित्सीय सहायता हासिल करने का विश्वास बढ़ता है।
- **पलामू में:** जिले में पीड़ित महिलाओं के लिए 10 दिनों की अल्पकालिक सीमा समाप्त होकर तीन वर्ष तक रहने का विकल्प मिलेगा। इससे बिना किसी सहारे वाली स्थानीय महिलाओं को मारपीट के डर से मुक्त होकर नया जीवन शुरू करने का समय मिलेगा।
- **सुरक्षा और संरक्षण:** प्रताड़ना के शिकार लोगों को रहने के साथ मुफ्त भोजन और सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा। इससे उन्हें दोबारा उसी प्रताड़ना वाले घर में लौटने की मजबूरी से बचाया जा सकेगा।
- **कानूनी और चिकित्सीय अधिकार:** थाने में शिकायत और अदालती प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक सहयोग सीधे उपलब्ध कराया जाएगा। घायल होने की स्थिति में तत्काल मेडिकल जांच और मानसिक तनाव से उबरने के लिए काउंसिलिंग भी सुनिश्चित होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
पलामू जिले में हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए दीर्घकालिक आश्रय और व्यापक पुनर्वास की अनुपस्थिति इस पहल का मुख्य कारण बनी। वर्तमान व्यवस्था केवल आपातकालीन सुरक्षा दे पा रही थी, जिससे महिलाएं फिर से असुरक्षित हो जाती थीं।

- **अल्पकालिक व्यवस्था की सीमा:** जिले में पहले से संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर में केवल 10 दिनों तक ठहरने का नियम है। इतने कम समय में किसी महिला का पारिवारिक विवाद सुलझना या आर्थिक रूप से सक्षम होना संभव नहीं हो पाता।
- **दीर्घकालिक आवास संकट:** गंभीर घरेलू हिंसा और मारपीट के बाद बेसहारा महिलाओं के पास जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होती थी। मजबूरी में उन्हें दोबारा उसी हिंसक माहौल में लौटना पड़ता था जहां उनका उत्पीड़न हुआ था।
- **विभागीय स्वीकृति और पहल:** समाज कल्याण विभाग ने महिलाओं की इस बुनियादी लाचारी को पहचानते हुए लंबे समय के आश्रय की जरूरत महसूस की। इसी के तहत शक्ति सदन के संचालन को प्रशासनिक स्वीकृति देकर भवन की तलाश शुरू की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. पलामू में शक्ति सदन किस उद्देश्य से खोला जा रहा है?
यह सदन घरेलू हिंसा, मारपीट और प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और लंबे समय तक आश्रय देने के लिए खोला जा रहा है।

### 2. पीड़ित महिलाएं शक्ति सदन में अधिकतम कितने समय तक रह सकेंगी?
इस आश्रय गृह में पात्र और जरूरतमंद महिलाएं अधिकतम तीन साल तक रह सकती हैं।

### 3. शक्ति सदन में महिलाओं को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
यहां रहने की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सीय उपचार, मानसिक परामर्श और पुलिस या अदालत से जुड़ी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

### 4. सखी वन स्टॉप सेंटर और शक्ति सदन में क्या अंतर है?
सखी वन स्टॉप सेंटर केवल 10 दिनों की फौरी आपातकालीन सहायता देता है, जबकि शक्ति सदन में तीन साल तक दीर्घकालिक पुनर्वास की सुविधा होगी।

### 5. शक्ति सदन के संचालन की वर्तमान स्थिति क्या है?
योजना को विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और वर्तमान में केंद्र के संचालन के लिए भवन की व्यवस्था की प्रक्रिया चल रही है।

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