# गुड़हल पर नहीं आ रहे फूल तो अपनाएं ये तरीके, नवरात्रि से पहले लद जाएगा पौधा

> पलामू में गुड़हल के पौधे में फूल नहीं आने की समस्या से परेशान लोगों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कुछ आसान उपाय बताए हैं। सही धूप, संतुलित खाद और छंटाई करने से पौधे पर बंपर फूल आ सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/gurahala-para-nahin-a-rahe-phula-to-apanaen-ye-tarike-navaratri-se-pahale-lada-jaega-paudha-39857 · **Language:** Hindi
**Tags:** गुड़हल के फूल, बागवानी टिप्स, पलामू समाचार, नवरात्रि पूजा, पौधों की देखभाल, एनपीके खाद

पलामू में इन दिनों कई घरों के गार्डनों में लगे गुड़हल के पौधों को लेकर एक आम शिकायत देखने को मिलती है कि पौधे हरे-भरे तो हैं लेकिन उनमें फूल नहीं खिल रहे हैं। नवरात्रि का पावन त्योहार नजदीक आते ही मां भगवती को अर्पित किए जाने वाले लाल गुड़हल के फूलों की मांग बाजार में काफी बढ़ जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक पूजा-पाठ में इस फूल का विशेष महत्व होने के कारण हर कोई चाहता है कि उसका पौधा फूलों से लदा रहे। हालांकि, उचित देखभाल के अभाव में कई बार पौधे केवल पत्तियां ही विकसित करते रह जाते हैं और उन पर कलियां नहीं बनती हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए कुछ कृषि विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों ने खास गार्डनिंग टिप्स साझा किए हैं जिन पर अमल करके पौधे की सेहत सुधारी जा सकती है।

## पर्याप्त धूप और सही स्थान का चुनाव
पलामू जिले के किसान तारकेश्वर सिंह चेरो के अनुसार गुड़हल के पौधे को बेहतरीन विकास और बंपर फूलों के लिए प्रचुर मात्रा में सीधी धूप की आवश्यकता होती है। पौधे को रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे की धूप मिलना अनिवार्य माना जाता है जिससे उसमें कलियों का निर्माण तेजी से होता है। यदि पौधे को घर के ऐसे कोने में रखा गया है जहाँ पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी या धूप नहीं पहुँच पाती है, तो उसकी ग्रोथ पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि गमले या पौधे को ऐसी खुली जगह पर स्थानांतरित किया जाए जहाँ उसे ताजी हवा के साथ-साथ भरपूर धूप भी मिल सके।

## संतुलित खाद और नाइट्रोजन का प्रबंधन
पौधे में फूल नहीं आने का एक अन्य मुख्य कारण मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन होना है, विशेष तौर पर जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजनयुक्त खादों का प्रयोग। अत्यधिक नाइट्रोजन मिलने से पौधे में केवल हरी पत्तियां और लंबी शाखाएं ही बढ़ती चली जाती हैं, जबकि फूल आने की प्रक्रिया रुक जाती है। गुड़हल के स्वस्थ विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का एक संतुलित अनुपात होना आवश्यक होता है, जिसके लिए सात अनुपात छह अनुपात पांच के अनुपात वाले एनपीके उर्वरक का उपयोग फायदेमंद साबित हो सकता है। खाद डालने के तुरंत बाद पौधे में हल्का पानी देना चाहिए और उसे दोबारा तेज धूप में रख देना चाहिए ताकि पोषक तत्व जड़ों तक आसानी से पहुँच सकें।

## नमी नियंत्रण और नियमित प्रूनिंग
गुड़हल के गमले की मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जड़ों के पास लगातार पानी जमा न हो। जलभराव होने से पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं और फूल आने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है, इसलिए गमले में जल निकासी यानी ड्रेनेज सिस्टम हमेशा दुरुस्त रहना चाहिए। जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी हुई महसूस हो, तभी आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके अलावा समय-समय पर पौधे की हल्की छंटाई यानी प्रूनिंग करने से नई शाखाएं फूटने में मदद मिलती है, क्योंकि इन्हीं नई शाखाओं पर सबसे ज्यादा संख्या में फूल खिलते हैं। पौधे की सूखी, कमजोर और रोगग्रस्त टहनियों को समय पर काट कर अलग कर देना चाहिए।

## जैविक पोषण और कीट नियंत्रण के उपाय
पौधे की संपूर्ण ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए हर दस से पंद्रह दिन के अंतराल पर जैविक खाद या अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कई बार पौधों पर एफिड्स जैसे छोटे कीट हमला बोल देते हैं जो पत्तियों और कलियों का रस चूस लेते हैं, जिससे फूल खिलने से पहले ही झड़ जाते हैं। इस तरह के कीटों की समस्या से निपटने के लिए नीम के तेल का सही मात्रा में घोल बनाकर पूरे पौधे पर नियमित रूप से स्प्रे करना चाहिए। कुल मिलाकर यदि धूप, संतुलित पोषण, नियंत्रित सिंचाई, बेहतर जल निकासी और उचित कटाई-छंटाई का सही तालमेल बिठाया जाए, तो गुड़हल का पौधा बहुत कम समय में अनगिनत फूलों से भर सकता है।

## इसका आप पर असर
घरेलू बागवानी करने वाले लोगों और पूजा-पाठ के लिए ताजे फूल चाहने वालों के लिए इन कृषि उपायों का सीधा असर पड़ेगा।

- **आम लोगों के लिए:** पौधे की सही देखभाल करने से बिना बाजार से महंगे फूल खरीदे घर पर ही पर्याप्त मात्रा में गुड़हल मिल सकेगा। सही समय पर खाद और पानी देने से पौधों की उम्र बढ़ती है और मेहनत का पूरा फल मिलता है।
- **पलामू में:** स्थानीय निवासियों और किसानों को अपने घर के गमलों में फूल उत्पादन बढ़ाने के लिए मौसम के अनुकूल खाद और धूप के प्रबंधन की सटीक जानकारी मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर घरेलू गार्डनिंग करने वालों को बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
पौधों में फूल नहीं आने की मुख्य वजह पोषक तत्वों का असंतुलन, अपर्याप्त धूप और गलत तरीके से पानी देना है।

- **पोषण का असंतुलन:** जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद देने से पौधे की सिर्फ पत्तियां बढ़ती हैं और कलियों का विकास रुक जाता है।
- **पर्याप्त रोशनी की कमी:** छायादार जगहों पर रखे जाने वाले पौधों को जरूरी सौर ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे उनका वानस्पतिक विकास बाधित होता है।
- **जलभराव की समस्या:** गमले में लगातार पानी रुके रहने से जड़ें सड़ जाती हैं और पौधा पोषण नहीं सोख पाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. गुड़हल के पौधे में फूल क्यों नहीं आते हैं?
पौधे को पर्याप्त धूप न मिलना, अत्यधिक नाइट्रोजन वाली खाद का प्रयोग होना और जड़ों में लगातार पानी जमा रहना इसके मुख्य कारण हैं।

### 2. गुड़हल के पौधे को रोजाना कितने घंटे धूप चाहिए?
स्वस्थ विकास और फूलों के लिए गुड़हल के पौधे को रोजाना करीब पांच से छह घंटे की सीधी धूप की आवश्यकता होती है।

### 3. कौन सी खाद गुड़हल के लिए सबसे अच्छी होती है?
सात अनुपात छह अनुपात पांच के अनुपात वाला एनपीके उर्वरक और जैविक गोबर की खाद गुड़हल के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।

### 4. कीट लगने पर पौधे पर क्या छिड़काव करना चाहिए?
एफिड्स और अन्य कीट दिखाई देने पर नीम के तेल के उचित घोल का स्प्रे करना चाहिए।

### 5. तारकेश्वर सिंह चेरो कौन हैं?
वह पलामू जिले के एक किसान हैं जिन्होंने गुड़हल के पौधे की देखभाल और फूल बढ़ाने के उपाय बताए हैं।

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