हरसिंगार के पौधे से भरा रहेगा गार्डन, अपनाएं बोकारो के एक्सपर्ट के ये आसान तरीके अक्टूबर के महीने में हरसिंगार यानी पारिजात के पौधे की सही देखभाल और खाद-पानी के जरिए ढेरों फूल पाए जा सकते हैं। बोकारो के नर्सरी विशेषज्ञ अभिषेक ने इसे गमले में उगाने और फूलों से लबालब रखने के खास तरीके बताए हैं। अक्टूबर के दिनों में त्योहारों के आगमन के साथ ही लोग अपने घर और आंगन को महकाने के लिए तरह-तरह के फूलों वाले पौधे लगाना पसंद करते हैं। इन पौधों में हरसिंगार का पौधा अपनी एक खास पहचान रखता है, जिसे पारिजात के नाम से भी पुकारा जाता है। रात के समय खिलने वाले इसके सफेद फूल और इसकी भीनी-भीनी महक पूरे परिवेश को बेहद खुशनुमा बना देती है। हालांकि, कई बार उचित देखरेख के अभाव में इस पौधे की ग्रोथ थम जाती है और इसमें फूल खिलना भी काफी कम हो जाते हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए बोकारो के एक नर्सरी एक्सपर्ट अभिषेक ने हरसिंगार के पौधे को स्वस्थ रखने और उस पर भरपूर फूल लाने के कुछ बेहद कारगर उपाय साझा किए हैं। छोटे गमले में भी आसानी से उगता है पौधा विशेषज्ञ अभिषेक के अनुसार, यह एक बेहद खास फूलों वाला पौधा है जो मुख्य रूप से रात्रि के समय खिलता है और अपनी बेहतरीन खुशबू के लिए जाना जाता है। इस पौधे के फूल आमतौर पर अक्टूबर से लेकर दिसंबर के महीने तक अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसे घर के आंगन के अलावा बालकनी या छत पर भी बेहद आसानी से लगाया जा सकता है। जिन लोगों के पास जगह की कमी है, वे इसकी ड्वार्फ वैरायटी यानी कम ऊंचाई वाली किस्म का चुनाव कर सकते हैं। इसे 10 से 12 इंच के गमले में आसानी से लगाया जा सकता है क्योंकि यह सीमित जगह में भी बेहतरीन तरीके से विकसित होता है और पूरा गमला फूलों से भर जाता है। गमले की मिट्टी कैसी होनी चाहिए किसी भी पौधे की अच्छी सेहत के लिए सही मिट्टी और गमले का चुनाव करना सबसे अहम कदम होता है। शुरुआती दौर में पौधे को टेराकोटा के गमले में रोपा जा सकता है और इसके लिए 10 से 12 इंच का मध्यम आकार का गमला एकदम उपयुक्त रहता है। इसके साथ ही, पौधे की जड़ों के बेहतर फैलाव के लिए मिट्टी हमेशा भुरभुरी तैयार करनी चाहिए। सामान्य मिट्टी के अंदर जैविक गोबर की खाद का उचित मिश्रण मिलाने से हरसिंगार का पौधा काफी तेज गति से विकास करता है। खाद और गुड़ाई का सही तरीका यदि हरसिंगार के पौधे में फूल नहीं खिल रहे हैं या उसकी बढ़ाई रुक गई है, तो उसकी मिट्टी की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। इसके लिए महीने में कम से कम एक बार गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह की हल्की गुड़ाई की जा सकती है। इसके बाद पौधे में कंपोस्ट खाद, अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद और निश्चित मात्रा में सरसों की खली का इस्तेमाल करना चाहिए। इन चीजों से पौधे को जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं और उसकी ग्रोथ में काफी मदद मिलती है। धूप की कितनी है आवश्यकता हर पौधे की तरह हरसिंगार को भी बेहतर तरीके से पनपने और अधिक से अधिक फूल देने के लिए पर्याप्त मात्रा में धूप की जरूरत होती है। इसलिए गमले को हमेशा ऐसी खुली जगह पर रखना चाहिए जहां पौधे को दिनभर में लगभग 6 से 7 घंटे की सीधी धूप मिल सके। पर्याप्त रोशनी मिलने से पौधे की शाखाएं और पत्तियां बेहतर ढंग से विकसित होती हैं। पौधे की प्रूनिंग कब करें हरसिंगार के पौधे को घना और सुंदर बनाए रखने के लिए समय-समय पर उसकी कटाई-छंटाई यानी प्रूनिंग करना बेहद आवश्यक होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, पौधे की जरूरत को देखते हुए इसकी हल्की कटिंग की जा सकती है, लेकिन इसका सही समय ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। जब पौधे पर फूल आ रहे हों, उस दौरान अनावश्यक कटिंग करने से बचना चाहिए और सर्दियों का मौसम बीतने के बाद फरवरी महीने के आसपास ही इसकी छंटाई करनी चाहिए। पत्तियों के पीले पड़ने पर क्या करें अक्सर हरसिंगार के पौधे में पत्तियां पीली पड़ने की शिकायत देखने को मिलती है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए पौधे में बार-बार पानी डालने से हमेशा परहेज करना चाहिए। गमले की मिट्टी की ऊपरी परत जब पूरी तरह सूख जाए, तभी उसमें दोबारा पानी देना चाहिए। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि गमले की तली में पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद बने हों, ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। मिट्टी के अंदर लगातार नमी बनी रहने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और उन्हें भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसका आप पर असर हरसिंगार के पौधे की सही देखभाल करने से घर का वातावरण महकता है और त्योहारी सीजन में गार्डन की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। • घर और बालकनी पर असर: सही खाद और सही आकार के गमले का चुनाव करने से सीमित जगह में भी पौधे हरे-भरे रहते हैं। इससे पौधों की ग्रोथ रुकने या पत्तियां पीली पड़ने जैसी आम समस्याओं से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। • रखरखाव का तरीका: सर्दियों के बाद फरवरी में छंटाई करने और केवल ऊपर की मिट्टी सूखने पर ही पानी देने से पौधे की जड़ें सुरक्षित रहती हैं। इन छोटे बदलावों को अपनाकर पौधों पर बिना किसी अतिरिक्त खर्च के भरपूर फूल पाए जा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ हरसिंगार के पौधे की वृद्धि रुकने या फूल न आने के पीछे मुख्य वजहें गलत मिट्टी का चयन, धूप की कमी और पोषक तत्वों की कमी होती हैं। • मिट्टी की स्थिति: गमले में सख्त मिट्टी होने या जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से जड़ों तक हवा नहीं पहुंच पाती, जिससे पौधे को नुकसान होता है। • पोषण और धूप का अभाव: पर्याप्त 6 से 7 घंटे की धूप न मिलने और समय पर गोबर की खाद या सरसों की खली न डालने से पौधे को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती है। सवाल-जवाब 1. हरसिंगार को और किस नाम से जाना जाता है? हरसिंगार के पौधे को पारिजात के नाम से भी जाना जाता है। 2. छोटे गमले के लिए हरसिंगार की कौन सी किस्म अच्छी है? कम जगह और छोटे गमले के लिए इसकी ड्वार्फ वैरायटी यानी कम ऊंचाई वाली किस्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. गमले का आकार कितना होना चाहिए? इस पौधे के लिए 10 से 12 इंच का मध्यम आकार का गमला बेहतर रहता है। 4. हरसिंगार के पौधे को प्रतिदिन कितनी धूप चाहिए? पौधे की बेहतर ग्रोथ के लिए रोजाना लगभग 6 से 7 घंटे की धूप जरूरी होती है। 5. पौधे की कटाई-छंटाई कब करनी चाहिए? फूल आने के दौरान कटिंग से बचना चाहिए और सर्दियों के बाद फरवरी महीने में इसकी छंटाई करनी चाहिए। https://trendkia.com/jharkhand/harsingar-gardening-tips-how-to-get-abundant-blooms-on-parijat-plant-49696 TrendKia — Har trend, sabse pehle.