# जमशेदपुर के अटल बिहारी मोहंती ने घर की छत और आंगन को बनाया मिनी जंगल, 300 से ज्यादा पौधे रोपे

> जमशेदपुर के रहने वाले अटल बिहारी मोहंती ने अपने घर के आसपास 300 से अधिक पौधे और फलदार पेड़ लगाकर एक हरा-भरा मिनी जंगल तैयार किया है। वह खुद ही मिट्टी तैयार करने से लेकर पौधों की देखभाल तक का सारा काम करते हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jamashedapura-ke-atal-bihari-mohanty-ne-ghara-ki-chhata-aura-angana-ko-banaya-mini-jngala-300-se-jyada-paudhe-rope-51962 · **Language:** Hindi
**Tags:** अटल बिहारी मोहंती, जमशेदपुर गार्डन, मिनी जंगल, घर की बागवानी, पौधे और हरियाली

जमशेदपुर निवासी अटल बिहारी मोहंती ने अपने घर के आसपास के इलाके को एक जीवंत और खूबसूरत मिनी जंगल में तब्दील कर दिया है। उनके इस अनूठे बगीचे में तीन सौ से ज्यादा पौधे और गमले सजाए गए हैं। यहां आने वाले लोगों को रंग-बिरंगे फूलों के साथ-साथ कई तरह के आकर्षक शो प्लांट भी देखने को मिलते हैं। इस पूरे परिवेश को और अधिक मनमोहक बनाने के लिए उन्होंने पूरे घर में शानदार लाइटिंग की व्यवस्था की है, जो साल के बारह महीने इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती रहती है। जैसे ही शाम ढलती है, रोशनी और हरियाली का यह अनूठा संगम उनके आशियाने को एक जादुई और सम्मोहक रूप प्रदान कर देता है। उनकी इस कड़ी मेहनत और लगन का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि वह केवल पेड़-पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि उनके रख-रखाव से लेकर उनके लिए उपजाऊ मिट्टी तैयार करने और जैविक खाद बनाने तक के सारे जरूरी काम अपने हाथों से ही करते हैं।

 

## फलदार पेड़ों का संग्रह और यात्राओं की अनमोल यादें
 इस छोटे से मिनी गार्डन की खूबी केवल सजावटी पौधों और फूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां कई प्रकार के उपयोगी फलदार वृक्ष भी लहलहा रहे हैं। उनके इस बगीचे में सुपारी, आम, नारियल, बेल और अमरूद जैसे पेड़ भी शान से खड़े हैं। विभिन्न किस्मों और प्रजातियों के इन पौधों को इस गजब के तरीके से व्यवस्थित किया गया है कि सीमित और कम जगह होने के बावजूद आंखों को सुकून देने वाला हरियाली का एक भव्य नजारा दिखाई देता है। अटल बिहारी मोहंती जब भी कभी किसी नई जगह की यात्रा पर जाते हैं, तो वह वहां से खाली हाथ लौटने के बजाय कम से कम दो से तीन पौधे अपने साथ जरूर लेकर आते हैं। इस प्रकार उनके घर का यह हरा-भरा बगीचा केवल पौधों का संग्रह नहीं है, बल्कि उनकी तमाम यात्राओं और सुहाने सफरों की यादों का एक जीवंत दस्तावेज भी बन चुका है, जो उनके हर पौधे से जुड़ा हुआ है।

 

## सुकून भरा बैठने का स्थान और व्यस्त दिनचर्या
 इस अद्भुत हरियाली के बीच उन्होंने मेहमानों और अपनों के बैठने के लिए एक अत्यंत सुंदर सीटिंग एरिया भी बनवाया है। इस खास जगह पर शाम के वक्त पांच से सात लोग बेहद आराम से बैठकर सुकून के पल बिता सकते हैं। प्राकृतिक हरियाली के बीच बैठकर गर्म चाय या कॉफी की चुस्की लेना और अपने दोस्तों व करीबियों के साथ लंबी बातचीत करना इस जगह के आकर्षण को और अधिक बढ़ा देता है। घर के इस शांत कोने में बैठकर समय बिताना आगंतुकों को मानसिक शांति और आंतरिक सुकून का अहसास कराता है। अटल बिहारी मोहंती ने अपने इस अनूठे शौक को इतने बेहतरीन ढंग से पाला और विकसित किया है कि उनका यह घर अब महज रहने का साधारण ठिकाना नहीं रह गया है, बल्कि कुदरत और प्रकृति के बेहद करीब समय बिताने का एक अत्यंत रमणीय और शांत केंद्र बन चुका है।

 

## प्रकृति के प्रति प्रेम और सक्रिय जीवनशैली
 अटल बिहारी मोहंती का ऐसा मानना है कि वह अपने चौबीस घंटों के दौरान हमेशा सक्रिय और व्यस्त रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें एक जगह खाली बैठना बिल्कुल रास नहीं आता। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से इंसान का शरीर सुस्त और कमजोर पड़ने लगता है। शायद यही सबसे बड़ी वजह है कि वह अपने इस खूबसूरत गार्डन से बेहद गहरा लगाव रखते हैं और हर रोज इसकी देखभाल तथा संवारने के लिए पर्याप्त समय निकालते हैं। उनकी यह प्रेरणादायक जीवन यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि यदि कोई भी इंसान अपने कीमती समय का सदुपयोग करना सीख ले और अपने मनपसंद शौक के प्रति पूरी तरह समर्पित व मेहनती रहे, तो वह अपने घर के एक बहुत छोटे से हिस्से को भी एक बेहद खूबसूरत, जीवंत और सुकून भरी दुनिया में आसानी से बदल सकता है।

## इसका आप पर असर
यह प्रेरणादायक खबर उन सभी लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने घर में हरियाली और सुकून भरा माहौल चाहते हैं।

- **आम लोगों के लिए:** कम जगह और सीमित संसाधनों में भी अपने घर की छत या आसपास के खाली हिस्से को हरा-भरा मिनी गार्डन बनाया जा सकता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और घर का तापमान भी नियंत्रित रहता है।

- **जमशेदपुर में:** स्थानीय निवासी अटल बिहारी मोहंती के इस प्रयास से प्रेरणा लेकर अपने मोहल्लों और घरों में पेड़-पौधे लगाकर पर्यावरण को सुधारने में योगदान दे सकते हैं।

- **दैनिक जीवन पर:** खुद गार्डनिंग करने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से सुस्ती दूर होती है और स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

- **लागत और बचत:** जैविक खाद खुद तैयार करके और पौधे बाहर से खरीदने के बजाय यात्राओं से लाकर कम खर्च में खूबसूरत बगीचा तैयार किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अटल बिहारी मोहंती के इस अनूठे कदम के पीछे उनका बागवानी के प्रति गहरा प्रेम और खाली समय का सदुपयोग करने की सोच जुड़ी हुई है।

- **सक्रिय जीवनशैली की चाह:** उन्हें लंबे समय तक खाली बैठना पसंद नहीं था और उनका मानना था कि निष्क्रियता से शरीर में सुस्ती आती है।

- **यात्राओं का शौक:** अलग-अलग जगहों की यात्रा करने के दौरान पौधे एकत्र करने की उनकी आदत ने इस बगीचे को विस्तार दिया।

- **प्रकृति से जुड़ाव:** आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच मानसिक शांति पाने के लिए उन्होंने घर को प्राकृतिक रूप से सजाने का फैसला किया।

## सवाल-जवाब

### 1. अटल बिहारी मोहंती कहां के रहने वाले हैं?
अटल बिहारी मोहंती जमशेदपुर के रहने वाले हैं।

### 2. उनके बगीचे में कुल कितने पौधे लगे हैं?
उनके घर के आसपास 300 से अधिक पौधे और गमले लगे हुए हैं।

### 3. बगीचे में कौन-कौन से फलदार पेड़ मौजूद हैं?
उनके बगीचे में सुपारी, आम, नारियल, बेल और अमरूद जैसे फलदार पेड़ लगे हैं।

### 4. वे पौधों की देखभाल कैसे करते हैं?
वे पौधों की देखभाल से लेकर मिट्टी तैयार करने और खाद बनाने तक का सारा काम खुद करते हैं।

### 5. बगीचे में बैठने के लिए क्या व्यवस्था है?
उन्होंने बगीचे में एक खूबसूरत सीटिंग एरिया बनाया है जहां शाम के समय 5 से 7 लोग आराम से बैठ सकते हैं।

## प्रेरणा और सबक
अटल बिहारी मोहंती की यह सफलता की कहानी कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है जिन्हें कोई भी अपने जीवन में अपना सकता है।

- **शौक को बनाएं ताकत:** अपने पसंदीदा कार्यों में समय लगाने से न केवल मानसिक संतोष मिलता है, बल्कि एक बेहतरीन रचना भी तैयार होती है।

- **समय का सदुपयोग:** खाली बैठने के बजाय शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहने से जीवन में ऊर्जा बनी रहती है।

- **सीमित जगह का इस्तेमाल:** कम जगह होने के बावजूद सही योजना और मेहनत से शानदार परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

- **खुद मेहनत करना:** पौधों की देखभाल और खाद खुद तैयार करने का मतलब है कि अपने काम के प्रति सच्ची निष्ठा होना।

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