जमशेदपुर में कांतारा थीम पर सजेगा काली पूजा का पंडाल, सोनारी में दिखेगी प्रकृति की अनूठी झलक जमशेदपुर के सोनारी स्थित सबुज संघ इस साल काली पूजा के अवसर पर दक्षिण भारतीय फिल्म कांतारा की थीम पर आधारित एक भव्य और प्राकृतिक पंडाल तैयार कर रहा है। जमशेदपुर में दुर्गा पूजा के तर्ज पर अब काली पूजा का आयोजन भी काफी भव्य और आकर्षक तरीके से किया जाने लगा है। शहर के सोनारी स्थित सबुज संघ की तरफ से इस बार काली पूजा को बेहद खास बनाने के लिए दक्षिण भारतीय फिल्म कांतारा की थीम पर एक भव्य पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। इस पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से पर्यावरण और प्रकृति के करीब रखा जा रहा है। यहां आधुनिक और कृत्रिम सजावट के बजाय बांस, लकड़ियों, पत्तों और विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों जैसी प्राकृतिक चीजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को पहली नजर में ही प्रकृति की गोद में होने का अहसास हो सके। कांतारा फिल्म की संस्कृति से प्रेरित है पंडाल सबुज संघ की ओर से तैयार किए जा रहे इस विशेष पंडाल की परिकल्पना पूरी तरह से कांतारा फिल्म की पारंपरिक एवं प्राकृतिक संस्कृति से प्रेरित होकर की गई है। जिस तरह से उस लोकप्रिय फिल्म में जंगल, प्राचीन परंपराओं, प्रकृति और स्थानीय संस्कृति का एक बेहद खूबसूरत संगम देखने को मिलता है, उसी प्रकार की जीवंत झलक इस पंडाल के अंदर भी प्रस्तुत करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इस पंडाल को सजाने के लिए पश्चिम बंगाल और अन्य स्थानों से लाई गई प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग हो रहा है, जिनमें मुख्य रूप से केले के पत्ते, सुपारी के पेड़, गन्ने के पौधे, बांस, साल के पत्ते और कई अन्य प्रकार के लाल पत्ते शामिल हैं। इन तमाम प्राकृतिक तत्वों को बेहद करीने से आपस में जोड़कर एक ऐसा अद्भुत और कलात्मक रूप दिया जा रहा है जो देखने में बेहद मनमोहक लग रहा है। मिदनापुर के कुशल कारीगर दे रहे हैं अंतिम रूप इस विशाल और कलात्मक पंडाल को जमीन पर उतारने के लिए पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से कारीगरों की एक विशेष टीम बुलाई गई है। मिदनापुर के करीब 20 कुशल कारीगर पिछले एक महीने से लगातार दिन-रात मेहनत कर इस पंडाल को उसका अंतिम और भव्य रूप देने में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। इन अनुभवी कारीगरों द्वारा पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल करके बारीक कलात्मक सजावट की जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप पंडाल की खूबसूरती में चार चांद लग रहे हैं और कांतारा फिल्म की मूल थीम भी पूरी तरह से जीवंत हो उठती है। आयोजकों का मुख्य जोर इसी बात पर है कि निर्माण कार्य में पर्यावरण के अनुकूल चीजों को ही प्राथमिकता दी जाए ताकि पंडाल को एक अनूठी और पारंपरिक पहचान मिल सके। श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र इस बार सबुज संघ के पंडाल में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मां काली के अलौकिक दर्शन के साथ-साथ एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव प्राप्त होगा। पंडाल की अनूठी बनावट और उसकी सजीव प्राकृतिक सजावट निश्चित रूप से हर उम्र के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करेगी। विशेष तौर पर शहर के बच्चों और युवाओं के लिए यह पंडाल सेल्फी लेने और बेहतरीन फोटोग्राफी करने का एक बहुत बड़ा केंद्र साबित हो सकता है। जिस प्रकार जमशेदपुर में दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर थीम आधारित पंडाल देखने को मिलते हैं, उसी तर्ज पर इस बार सोनारी का सबुज संघ भी काली पूजा को भव्यता देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। यहाँ धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ कला, संस्कृति और प्रकृति का एक बहुत ही सुंदर संगम देखने को मिलेगा, जो इस बार के उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बनने की उम्मीद है। इसका आप पर असर यहाँ जानिए इस भव्य आयोजन का स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ेगा। • जमशेदपुर में: सोनारी और आसपास के इलाकों के स्थानीय लोगों को इस बार एक बिल्कुल अलग और प्राकृतिक थीम देखने को मिलेगी। बच्चों और युवाओं के लिए यह पंडाल फोटोग्राफी और घूमने का मुख्य आकर्षण केंद्र रहेगा। • उत्सव प्रेमियों के लिए: शहर के अन्य हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल सजावट का अनूठा अनुभव मिलेगा। इससे शहर में सामुदायिक आयोजनों के दौरान प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ इस विशेष थीम और भव्य निर्माण के पीछे आयोजकों की अनूठी सोच और कारीगरों की लंबी मेहनत जुड़ी है। • फिल्म से प्रेरणा: आयोजकों ने कांतारा फिल्म की संस्कृति और प्रकृति के मेल से प्रेरित होकर इस साल एक अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया। • कलाकारों की मेहनत: पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से आए लगभग 20 कारीगरों की टीम पिछले एक महीने से लगातार प्राकृतिक सामग्रियों को संवारने में जुटी है। • पर्यावरण की प्राथमिकता: आधुनिक कृत्रिम सजावट से हटकर पूरी तरह प्राकृतिक चीजों जैसे बांस, पेड़-पौधों और पत्तों को प्राथमिकता दी गई है। सवाल-जवाब 1. जमशेदपुर में किस जगह कांतारा थीम पर काली पूजा पंडाल बन रहा है? यह पंडाल जमशेदपुर के सोनारी स्थित सबुज संघ द्वारा तैयार किया जा रहा है। 2. पंडाल को सजाने के लिए किन प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग हो रहा है? पंडाल की सजावट के लिए बांस, लकड़ियों, केले के पत्तों, सुपारी के पेड़ों, गन्ने और साल के पत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 3. इस भव्य पंडाल को तैयार करने वाले कारीगर कहाँ से आए हैं? इस पंडाल को तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से करीब 20 कारीगरों की टीम बुलाई गई है। 4. कारीगर कितने समय से इस पंडाल को बनाने में जुटे हैं? मिदनापुर के ये कारीगर पिछले एक महीने से लगातार पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। https://trendkia.com/jharkhand/jamshedpur-men-kantara-thima-para-sajega-kali-puja-ka-pndala-sonari-men-dikhegi-prakriti-ki-anuthi-jhalaka-57509 TrendKia — Har trend, sabse pehle.