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  "type": "article",
  "title": "जमशेदपुर में लावारिस और बेसहारा दिवंगत आत्माओं के लिए सामूहिक पिंडदान, 599 लोगों का कराया गया श्राद्ध भोज",
  "summary": "जमशेदपुर के जुगसलाई स्थित पार्वती घाट पर पितृ पक्ष की अमावस्या के अवसर पर 599 अज्ञात और जरूरतमंद दिवंगतों के लिए सामूहिक श्राद्ध कर्म, पिंडदान और हवन आयोजित हुआ। इस दौरान करीब 1000 लोगों को श्राद्ध भोज कराया गया और श्मशान घाट के कर्मियों को सम्मानित किया गया।",
  "content": "मृत्यु के उपरांत सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म मिलना हर व्यक्ति का एक बुनियादी मानवीय हक माना जाता है। हालांकि कई बार आर्थिक लाचारी अथवा परिजनों की गैरमौजूदगी के कारण लावारिस शवों को अपना कहने वाला कोई नहीं मिलता। झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में ऐसे ही उपेक्षित और बेसहारा दिवंगतों को पूरे विधि-विधान के साथ सम्मानजनक विदाई देने की एक अनूठी सामाजिक परंपरा निभाई जा रही है। पितृ पक्ष की अमावस्या के पावन अवसर पर जुगसलाई इलाके में स्थित पार्वती घाट पर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 599 अज्ञात और निर्धन व्यक्तियों की आत्मा की शांति के उद्देश्य से सामूहिक तर्पण, पिंडदान, हवन और वैदिक रीति से श्राद्ध कर्म कराया गया। इस पूरे आयोजन के साथ करीब 1000 जरूरतमंद लोगों को आदरपूर्वक श्राद्ध भोज भी कराया गया।\n\nएक व्यक्तिगत संकल्प से शुरू हुई मानवीय सेवा\n\nइस पूरे सेवा कार्य का नेतृत्व जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद और पेशे से पत्रकार प्रवीण सेठी कर रहे हैं। उनके अनुसार यह कोई औपचारिक रस्म भर नहीं है, बल्कि एक गहरी मानवीय संवेदना से उपजा जीवन का संकल्प है। कुछ वर्ष पहले एक दिव्यांग पति-पत्नी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के समय उपजी परिस्थितियों ने सेठी के मन पर गहरा प्रभाव डाला था। उसी क्षण उन्होंने यह प्रण किया था कि शहर में जब भी किसी लावारिस शव के मिलने या किसी निर्धन परिवार के दाह-संस्कार में असमर्थ होने की जानकारी मिलेगी, तो किसी भी मृतक को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा। हर शव को गरिमा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार दिया जाएगा। इसी सोच को ज़मीनी स्तर पर साकार करने के लिए वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी के पावन दिन 'अंत्योदय एक अभियान' की विधिवत शुरुआत की गई थी।\n\n599 पार्थिव शरीरों को मिला गरिमापूर्ण विदाई का अधिकार\n\nवर्ष 2022 में अभियान के प्रारंभ से लेकर अब तक कुल 599 शवों का विधिवत अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। इस संख्या का ब्योरा साझा करते हुए प्रवीण सेठी ने स्पष्ट किया कि इनमें 466 लावारिस अथवा अज्ञात शव शामिल थे, जिनकी पहचान नहीं हो सकी थी। इसके अलावा 133 ऐसे शवों का दाह-संस्कार कराया गया, जिनके परिवार इतने विपन्न थे कि वे अंतिम संस्कार का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं थे। जब किसी भी दिवंगत व्यक्ति के लिए आगे आने वाला कोई सगा-संबंधी नहीं होता, तब इस अभियान के सदस्य परिजनों की भांति आगे बढ़कर पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं। पितृ पक्ष की अमावस्या का अवसर ऐसे सभी अज्ञात मृतकों को सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि देने के लिए चुना गया, ताकि धार्मिक परंपराओं के मुताबिक उनकी आत्माओं को तृप्ति प्राप्त हो सके।\n\nसमाज के हर वर्ग की एकजुट भागीदारी\n\nइस मुहिम की सबसे सशक्त विशेषता यह है कि यह किसी एक व्यक्ति या संस्था के दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संपूर्ण समाज साझेदार बना हुआ है। अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 'अंत्योदय एक अभियान' नाम से एक डिजिटल संवाद समूह यानी व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस समूह में शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, शिक्षाविद, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक और दिहाड़ी मजदूर वर्ग के नागरिक एक साथ जुड़े हुए हैं। सभी सदस्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार आवश्यक धनराशि अथवा संसाधन उपलब्ध कराते हैं, ताकि पैसे की तंगी किसी भी अंतिम संस्कार के मार्ग में बाधा न बन सके। प्रवीण सेठी का मानना है कि सामाजिक समरसता और नागरिकों का यह निरंतर सहयोग ही इस प्रयास का वास्तविक आधार है। इसके साथ ही पार्वती घाट के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की निष्ठावान भूमिका को सराहते हुए उन्हें समारोह में विशेष रूप से सम्मानित किया गया।\n\nनिशुल्क सेवा के लिए एक फोन कॉल पर सहायता उपलब्ध\n\nपार्वती घाट पर हुए इस आयोजन के दौरान प्रवीण सेठी ने जमशेदपुर और आस-पास के सभी नागरिकों से एक भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी नागरिक को किसी लावारिस शव की सूचना मिले, या फिर कोई परिवार आर्थिक विपन्नता के कारण अपने परिजन का दाह-संस्कार करने में लाचार हो, तो वे निसंकोच अभियान से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर 9204886232 सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। अभियान की ओर से दाह-संस्कार और उससे जुड़ी समस्त व्यवस्थाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। यह मानवीय पहल इस बात को रेखांकित करती है कि इंसान की प्रतिष्ठा केवल उसके जीवनकाल तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के पश्चात दी जाने वाली गरिमामयी अंतिम विदाई भी समाज की संवेदनशीलता का पैमाना तय करती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिवार की आर्थिक विपन्नता अथवा लाचारी किसी मृत व्यक्ति के गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार के आड़े न आए।\n\n• भारत में: देश भर के नागरिकों के लिए यह एक अनुकरणीय सामाजिक मॉडल है जो दिखाता है कि कैसे जनसहयोग से लावारिस और निर्धन शवों के अंतिम संस्कार की सम्मानजनक व्यवस्था की जा सकती है। यह पहल अन्य शहरों के समाजसेवियों को भी अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के सामूहिक सेवा अभियान शुरू करने की प्रेरणा देती है।\n• जमशेदपुर में: जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को अब आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार के खर्च की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। नागरिक लावारिस शव दिखने या आर्थिक तंगी होने पर सीधे मोबाइल नंबर 9204886232 पर संपर्क कर निशुल्क अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्राप्त कर सकते हैं।\n• श्मशान कर्मियों का सम्मान: समाज में अक्सर उपेक्षित रहने वाले श्मशान घाट कर्मियों के सेवाभाव को पहचान और सामाजिक सम्मान प्राप्त हुआ है। इससे जमीनी स्तर पर सेवा दे रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और कार्य संस्कृति में संवेदनशीलता आती है।\n• धार्मिक परंपरा की पूर्ति: उन 599 दिवंगतों के लिए विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध संपन्न कराया गया जिनका श्राद्ध करने वाला कोई परिजन नहीं था। इससे स्थानीय समाज में लावारिस आत्माओं के प्रति नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह आयोजन उन 599 लावारिस और निर्धन मृतकों को मरणोपरांत धार्मिक सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया जिनके लिए श्राद्ध करने वाला कोई सगा-संबंधी मौजूद नहीं था। इसके पीछे व्यक्तिगत संवेदनशीलता और समाज के सामूहिक सहयोग का एक सुविचारित तंत्र सक्रिय रहा है।\n\n• प्रेरक घटना: जुगसलाई के पार्षद प्रवीण सेठी ने एक दिव्यांग दंपत्ति के निधन के बाद उपजी हृदयविदारक परिस्थितियों को देखकर यह प्रण लिया था। उसी क्षण उन्होंने तय किया कि शहर में किसी भी लावारिस या गरीब शव को उपेक्षित नहीं रहने दिया जाएगा।\n• संस्थागत प्रयास: इस संकल्प को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी के दिन 'अंत्योदय एक अभियान' की स्थापना की गई। इसके माध्यम से शहर में लावारिस और विपन्न मृतकों के अंतिम संस्कार का एक संगठित ढांचा तैयार हुआ।\n• सामूहिक जनसहयोग: अभियान को गति देने के लिए एक संवाद समूह बनाया गया जिसमें व्यापारी, पुलिसकर्मी, शिक्षक, चिकित्सक और श्रमिक शामिल हुए। इस जनसहभागिता ने यह सुनिश्चित किया कि संसाधनों की कमी कभी सेवा कार्य में बाधा न बने।\n• पितृ पक्ष का धार्मिक अवसर: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष की अमावस्या पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं के तर्पण का अत्यंत पावन दिन माना जाता है। इसी अवसर पर अभियान के तहत अब तक संस्कारित सभी 599 दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक पिंडदान और हवन संपन्न कराया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पार्वती घाट पर किन लोगों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराया गया?\nजुगसलाई स्थित पार्वती घाट पर 599 अज्ञात और आर्थिक रूप से कमजोर दिवंगत व्यक्तियों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कराया गया।\n\n2. इस सामूहिक श्राद्ध के दौरान कितने लोगों को भोजन कराया गया?\nइस अवसर पर लगभग 1000 जरूरतमंद लोगों के बीच सामूहिक श्राद्ध भोज का आयोजन किया गया।\n\n3. इस सेवा कार्य का संचालन करने वाले अभियान का नाम क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?\nइस अभियान का नाम 'अंत्योदय एक अभियान' है और इसकी स्थापना वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी के दिन की गई थी।\n\n4. यह अभियान किसके नेतृत्व में चलाया जा रहा है?\nयह अभियान जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद और पत्रकार प्रवीण सेठी के नेतृत्व में समाज के सहयोग से चलाया जा रहा है।\n\n5. अब तक कुल कितने शवों का अंतिम संस्कार इस अभियान द्वारा कराया गया है?\nअभियान के तहत अब तक कुल 599 शवों का अंतिम संस्कार कराया गया है, जिनमें 466 अज्ञात और 133 निर्धन परिवारों के शव शामिल हैं।\n\n6. यदि किसी को लावारिस शव की जानकारी मिले या अंतिम संस्कार के लिए मदद चाहिए हो, तो किस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है?\nनिशुल्क अंतिम संस्कार सहायता के लिए मोबाइल नंबर 9204886232 पर संपर्क किया जा सकता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रवीण सेठी और जमशेदपुर के नागरिकों का यह प्रयास साबित करता है कि सच्ची सेवा जाति, वर्ग और व्यक्तिगत सीमाओं से परे जाकर संपूर्ण समाज को एक सूत्र में जोड़ सकती है।\n\n• संवेदना को संकल्प में बदलना: दूसरों की लाचारी देखकर केवल सहानुभूति प्रकट करने के बजाय प्रवीण सेठी ने उसे एक ठोस संकल्प में ढाला और जमीनी बदलाव की नींव रखी।\n• सामूहिकता की शक्ति: अकेले प्रयास करने के बजाय समाज के हर तबके—व्यापारी से लेकर मजदूर तक—को जोड़कर एक स्थायी और पारदर्शी सेवा तंत्र विकसित किया गया।\n• मरणोपरांत सम्मान का मूल्य: यह पहल सिखाती है कि मानवीय गरिमा व्यक्ति के जीवित रहने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसके जाने के बाद भी उसका सम्मान करना समाज का परम कर्तव्य है।\n• पारदर्शिता और समर्पण: बिना किसी स्वार्थ के श्मशान कर्मियों को सम्मान देना और आम जनता के लिए निशुल्क हेल्पलाइन चलाना निःस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश करता है।",
  "url": "https://trendkia.com/jharkhand/jamshedpur-men-lavarisa-aura-besahara-divngata-atmaon-ke-lie-samuhika-pindadana-599-logon-ka-karaya-gaya-shraddha-bhoja-46145",
  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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