# झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL के दो हजार सफल अभ्यर्थियों को राहत और परीक्षा रद्द करने का आदेश खारिज

> झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है। अदालत के इस आदेश से करीब दो हजार सफल अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-high-court-ka-bada-faisla-jssc-cgl-ke-do-hazaar-saphil-abhyarthiyon-ko-raahat-57106 · **Language:** Hindi
**Tags:** झारखंड हाईकोर्ट, JSSC CGL, झारखंड समाचार, सरकारी नौकरी, जेएसएससी परीक्षा

रांची के न्यायिक दायरे में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस कदम को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें JSSC CGL नियुक्ति परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। अदालत के इस फैसले से करीब दो हजार उन सफल अभ्यर्थियों को बहुत बड़ी राहत मिली है जो लंबे वक्त से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से यह बात कही कि इस पूरी परीक्षा को रद्द करने के पीछे कोई भी स्पष्ट और ठोस आधार नजर नहीं आता है। अदालत ने सरकार के इस फैसले को जल्दबाजी में उठाया गया एक ऐसा कदम बताया जिसका कोई पर्याप्त औचित्य नहीं था।

## सरकार के फैसले को अदालत में दी गई थी चुनौती
झारखंड में JSSC CGL परीक्षा को लेकर पिछले काफी समय से विवाद और राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई थी। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के माहौल के बीच राज्य सरकार ने इस नियुक्ति परीक्षा से जुड़े विज्ञापन को ही पूरी तरह से रद्द करने का निर्णय ले लिया था। सरकार के इसी मनमाने और एकतरफा कदम के खिलाफ अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में रमेश उरांव और नीरज खेस समेत कुल आठ अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ संयुक्त रूप से सुनवाई की गई थी। सभी पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आठ अक्टूबर को अपना फैसला पूरी तरह से सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए सरकार के फैसले को अवैध करार दिया गया है।

## परीक्षा रद्द करने के लिए नहीं मिला कोई ठोस आधार
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने का सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से प्रीमेच्योर यानी जल्दबाजी में उठाया गया कदम था। इसके साथ ही बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार की तरफ से जो काउंटर एफिडेविट अदालत में दाखिल किया गया था, वह उठाए गए कदमों के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं था। अदालत के कड़े रुख के मुताबिक परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी के महज कुछ आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा को ही सिरे से खारिज कर देना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब सरकार की तरफ से कोई भी ठोस और पुख्ता सबूत सामने नहीं लाया गया हो।

## दागी अभ्यर्थियों की पहचान करना मुमकिन है
हाईकोर्ट ने इस मामले में एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल दागी और संदेहास्पद अभ्यर्थियों की पहचान करना किसी भी स्थिति में असंभव नहीं है। यदि कुछ खास अभ्यर्थियों पर परीक्षा में गड़बड़ी करने या शामिल होने के आरोप हैं तो केवल उनकी अलग से पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए सभी योग्य और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को बीच में रोकना या फिर पूरी परीक्षा को ही रद्द कर देना बिल्कुल भी जरूरी नहीं था। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि राज्य सरकार इस न्यायिक फैसले से इतर या इसके खिलाफ जाकर कोई भी दूसरा निर्णय नहीं ले सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तीखे सवाल को भी उठाया कि क्या सरकार ने यह फैसला केवल सड़कों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दबाव में आकर तो नहीं लिया था।

## इसका आप पर असर
झारखंड में JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले करीब दो हजार सफल अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद नौकरी मिलने का मार्ग प्रशस्त करता है।

- **भारत में:** यह फैसला देश भर के उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बनता है जो प्रशासनिक परीक्षाओं में अचानक लिए जाने वाले रद्दीकरण के फैसलों से प्रभावित होते हैं।
- **रांची में:** झारखंड के स्थानीय युवाओं और परीक्षाार्थियों के बीच लंबे समय से चल रही अनिश्चितता समाप्त हुई है और प्रशासनिक नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा कानूनी विवाद JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और उसके बाद राज्यभर में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पैदा हुआ था।

- **विरोध का दबाव:** राज्य सरकार ने बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच विज्ञापन रद्द करने का निर्णय लिया था जिसे अदालत ने बिना किसी पुष्ट आधार के उठाया गया जल्दबाजी का कदम माना।
- **कानूनी चुनौती:** रमेश उरांव और नीरज खेस सहित आठ अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने सरकार के इस एकतरफा फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- **न्यायिक समीक्षा:** अदालत ने पाया कि कुछ संदिग्ध लोगों की वजह से पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना और दो हजार योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य को खतरे में डालना अनुचित था।

## सवाल-जवाब

### 1. झारखंड हाईकोर्ट ने किस परीक्षा से जुड़ा फैसला सुनाया है?
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL नियुक्ति परीक्षा से जुड़ा फैसला सुनाया है।

### 2. हाईकोर्ट ने सरकार के किस फैसले को रद्द किया है?
अदालत ने राज्य सरकार द्वारा JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने के निर्णय को खारिज कर दिया है।

### 3. इस फैसले से कितने सफल अभ्यर्थियों को राहत मिली है?
इस फैसले से करीब दो हजार सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

### 4. इस मामले की सुनवाई किस न्यायाधीश की अदालत में हुई?
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई।

### 5. किन लोगों ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी?
रमेश उरांव, नीरज खेस समेत कुल आठ याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

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