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  "title": "झारखंड का यासीन नौ साल बाद केरल से लौटा, इंस्टाग्राम रील ने दिखाया रास्ता",
  "summary": "साहिबगंज के यासीन शेख साल 2017 में लापता हुए थे, केरल में बनी एक 10 सेकंड की इंस्टाग्राम रील से परिवार ने नौ साल बाद उन्हें पहचान लिया और वे 2,500 किलोमीटर का सफर तय कर घर लौटे।",
  "content": "झारखंड के साहिबगंज जिले में रहने वाले एक परिवार के लिए इंस्टाग्राम पर दिखी सिर्फ 10 सेकंड की एक रील नौ साल के इंतजार का अंत लेकर आई। साल 2017 में लापता हुए यासीन शेख को उनके परिजनों ने इसी छोटी सी वीडियो क्लिप में पहचान लिया, जिसके बाद शुरू हुई तलाश आखिरकार उसे वापस घर तक ले आई।\n\n2017 में दोस्तों से मिलने गया, फिर लौटा ही नहीं\nयासीन शेख साल 2017 में नारायणपुर में रहने वाले अपने दोस्तों से मिलने गया था, लेकिन वहां से वापस घर नहीं आया। बेटे के अचानक गायब होने पर परिवार ने तुरंत पुलिस में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई और अपने स्तर पर भी लगातार तलाश जारी रखी। सालों तक कोई सुराग नहीं मिला और हर गुजरते साल के साथ परिवार की उम्मीदें धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगीं। करीब नौ साल बीत जाने के बाद अचानक केरल के एक गांव में बनी एक रील में यासीन जैसा दिखने वाला मुस्कुराता हुआ युवक नजर आया, जिसे देखते ही परिवार को अपने बेटे की शक्ल याद आ गई।\n\nकेरल में यासीन बन गया था 'रशीद'\nकेरल पहुंचने के बाद यासीन की पहचान पूरी तरह बदल चुकी थी और वह वहां 'रशीद' नाम से जाना जाने लगा। वह कोझिकोड जिले के कोट्टापारा इलाके में एक एनजीओ से जुड़े देखभाल केंद्र में रह रहा था। बताया गया है कि साल 2017 में ही चेरुवाडी गांव के स्थानीय लोगों ने एक अनजान युवक को वहां भटकते हुए देखा था। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी, जिसके बाद युवक को जिला बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। उस वक्त उसकी उम्र देखने में काफी कम लग रही थी, इसलिए समिति ने उसे सामाजिक न्याय विभाग की मदद से चलने वाले एक देखभाल केंद्र में रखवा दिया। उस समय न तो उसकी असली पहचान हो पाई और न ही उसके परिवार का कोई सुराग मिल सका, इसलिए वह वहीं रहने लगा।\n\nरील ने बनाया परिवार तक पहुंचने का रास्ता\nदेखभाल केंद्र में रहते-रहते यासीन की उम्र बढ़ती गई और वह केरल में आयोजित होने वाले सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेने लगा। इसी दौरान उसका एक वीडियो इंस्टाग्राम रील के तौर पर बना, जो देखते ही देखते वायरल हो गया और इसे 10 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। यह रील किसी तरह यासीन के रिश्तेदारों तक भी पहुंच गई। वीडियो में दिख रहे युवक का चेहरा देखकर उन्हें शक हुआ कि यह उनका लापता भाई हो सकता है। इसके बाद परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए ही जानकारी जुटानी शुरू कर दी और वीडियो में दिख रहे युवक के बारे में पता लगाने में जुट गए। संपर्क नंबर और पहचान से जुड़ी जानकारियों के आधार पर परिवार की केरल में मौजूद जान-पहचान के लोगों से बातचीत हुई। जब पहचान पूरी तरह से पुष्टि हो गई, तब जाकर यासीन को उसके परिवार के बारे में बताया गया।\n\nनौ साल बाद शुरू हुआ 2,500 किलोमीटर का सफर\nपहचान की पुष्टि होते ही यासीन के लिए झारखंड जाकर परिवार से मिलने का रास्ता खुल गया। अब करीब 35 साल के हो चुके यासीन ने अपने परिवार से मिलने के लिए केरल से झारखंड तक का करीब 2,500 किलोमीटर लंबा सफर तय किया। नौ साल के लंबे इंतजार के बाद जब वह आखिरकार अपने परिवार के सामने पहुंचा, तो यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था और घर में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि इस खुशी के मौके पर एक कमी भी खली, क्योंकि यासीन की मां का साल 2023 में ही निधन हो चुका है और वह अपने बेटे की घर वापसी को अपनी आंखों से देख नहीं सकीं।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना दिखाती है कि गुमशुदा लोगों को खोजने में अब सोशल मीडिया कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है, और परिवारों के पास उम्मीद बनाए रखने की एक नई वजह है।\n\n• भारत में: अगर परिवार का कोई सदस्य लापता है, तो पुलिस शिकायत के साथ-साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें और जानकारी साझा करना खोज को तेज कर सकता है। वायरल वीडियो और रील अब पहचान की पुष्टि का एक भरोसेमंद जरिया बनते जा रहे हैं।\n• साहिबगंज व झारखंड में: इस मामले ने साहिबगंज के लोगों को यह भरोसा दिया है कि सालों पुराने गुमशुदगी के मामलों में भी उम्मीद खत्म नहीं होती। स्थानीय प्रशासन और परिवारों को ऐसे मामलों में लगातार जागरूक और सक्रिय रहने की जरूरत है।\n• बाल कल्याण तंत्र: अनजान या भटकते मिले नाबालिगों को जिला बाल कल्याण समिति और सामाजिक न्याय विभाग के देखभाल केंद्रों में रखा जाता है। यदि कोई ऐसा बच्चा या युवक भटकता मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचना देना उसकी पहचान और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यासीन शेख कब लापता हुए थे?\nवह साल 2017 में नारायणपुर में दोस्तों से मिलने गए थे और वहां से वापस नहीं लौटे।\n\n2. परिवार को यासीन के बारे में कैसे पता चला?\nकेरल में बनी 10 सेकंड की एक इंस्टाग्राम रील में परिवार ने यासीन को पहचान लिया, इस रील को 10 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा था।\n\n3. केरल में यासीन किस नाम से रह रहे थे?\nवह 'रशीद' नाम से कोझिकोड के कोट्टापारा इलाके में एक देखभाल केंद्र में रह रहे थे।\n\n4. उन्हें केरल में देखभाल केंद्र में क्यों रखा गया था?\n2017 में चेरुवाडी गांव में भटकते मिलने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद जिला बाल कल्याण समिति ने उन्हें एक देखभाल केंद्र भेज दिया था।\n\n5. परिवार से मिलने के लिए यासीन ने कितनी दूरी तय की?\nउन्होंने केरल से झारखंड तक करीब 2,500 किलोमीटर का सफर तय किया।\n\n6. क्या यासीन की मां इस पुनर्मिलन को देख पाईं?\nनहीं, यासीन की मां का साल 2023 में ही निधन हो चुका था।\n\n7. यासीन अभी कितने साल के हैं?\nवह अब करीब 35 साल के हो चुके हैं।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-09-06",
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