झारखंड के 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने स्केट्स पर तय किया 21 हजार किमी का सफर, 20 राज्यों में फैलाया नशामुक्ति का संदेश कोडरमा के फुलवरिया गांव निवासी 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने 404 दिनों में स्केट्स पहनकर 21 हजार किलोमीटर की दूरी नापी और चार धाम, 12 ज्योतिर्लिंग व 16 शक्तिपीठों के दर्शन किए. झारखंड के कोडरमा जिले अंतर्गत डोमचांच प्रखंड के फुलवरिया गांव निवासी 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर एक असाधारण कीर्तिमान स्थापित किया है. उन्होंने अपने पैरों में स्केट्स बांधकर 404 दिनों के भीतर देश के 20 राज्यों का विस्तृत भ्रमण पूरा किया. इस लंबी और दुर्गम मुहिम के दौरान उन्होंने लगभग 21 हजार किलोमीटर की दूरी स्केटिंग करते हुए तय की. 13 महीने से भी अधिक समय तक लगातार सड़कों पर रहने के बाद वे सकुशल अपने गृह नगर कोडरमा लौट आए हैं, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ. अपनी इस व्यापक राष्ट्रीय यात्रा के दौरान अजय ने भारत के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों की परिक्रमा की. उन्होंने चार धाम, 12 ज्योतिर्लिंगों तथा 16 शक्तिपीठों में शीश नवाया. धार्मिक तीर्थों के अलावा उन्होंने लद्दाख के बेहद चुनौतीपूर्ण और विषम पहाड़ी मार्गों पर भी स्केटिंग करते हुए अपनी यात्रा को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अजय के पिता संजय विश्वकर्मा वेल्डिंग मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनकी माता उर्मिला देवी एक गृहिणी हैं. पारिवारिक स्तर पर आर्थिक सीमाओं और बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद अजय के मजबूत हौसले ने इस विशाल राष्ट्रीय अभियान को साकार कर दिखाया. नशामुक्ति की अलख जगाने का लिया था संकल्प अजय कुमार विश्वकर्मा के इस सफर की शुरुआत 23 अगस्त 2025 को कोडरमा से हुई थी. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे समाज को एक गंभीर बुराई से मुक्त कराने का ध्येय भी जुड़ा था. अजय ने पूरे देश में मद्यपान और नशे के दुष्प्रभावों के खिलाफ जनचेतना फैलाने का बीड़ा उठाया था. उनका मानना है कि शराब की आदत केवल सेवन करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही बर्बाद नहीं करती, बल्कि समूचे परिवार को असहनीय मानसिक तनाव और गंभीर आर्थिक तंगी में झोंक देती है. अपने गृह क्षेत्र और आसपास के परिवेश में शराब के कारण बिखरते परिवारों और लोगों की दुर्दशा को अजय ने बहुत करीब से महसूस किया था. इसी सामाजिक दर्द ने उन्हें अपनी यात्रा को नशामुक्ति अभियान में बदलने के लिए प्रेरित किया. अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों, शहरों और कस्बों में रुक-रुक कर वे आम नागरिकों से सीधे मुखातिब हुए और उन्हें मद्यपान से दूर रहने की पुरजोर अपील की. पूर्व की तीर्थयात्राओं से मिला था लंबा सफर तय करने का हौसला यह पहला अवसर नहीं था जब अजय ने स्केटिंग करते हुए लंबी दूरी की यात्रा की हो. इससे पहले भी वे कई महत्वपूर्ण धार्मिक मार्गों पर स्केट्स चलाकर अपनी क्षमता साबित कर चुके थे. अतीत में उन्होंने कोडरमा से अयोध्या, वैष्णो माता और राजस्थान स्थित खाटू श्याम जी तक की यात्रा स्केटिंग के जरिए पूरी की थी. इसके अतिरिक्त वे हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा भी स्केट्स पर सफलता से पूरी कर चुके थे. पूर्व की इन कठिन यात्राओं से हासिल आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता ने ही उन्हें समूचे भारत का भ्रमण करने की योजना बनाने की ताकत दी. भूख, मूसलाधार बारिश और भाषा की रुकावटों को पछाड़ा लगातार 404 दिनों तक चली इस मुहिम की राह में अनगिनत परेशानियां और प्राकृतिक अड़चनें आईं. यात्रा के दौरान कई बार ऐसे नाजुक मोड़ आए जब उन्हें लगातार एक से दो दिनों तक भोजन नसीब नहीं हुआ और उन्हें भूखे पेट ही सफर आगे बढ़ाना पड़ा. निर्धारित समय पर मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई रातें सड़कों पर स्केटिंग करते हुए गुजारीं. भारी बारिश के मौसम में भी उन्होंने अपने पहियों को रुकने नहीं दिया और भीगते हुए भी आगे बढ़ते रहे. भौगोलिक विषमताओं के साथ-साथ जब वे दक्षिण भारत के राज्यों से होकर गुजरे, तो स्थानीय भाषा न जानने के कारण संवाद स्थापित करने में खासी दिक्कतें पेश आईं. हालांकि इन तमाम विपरीत परिस्थितियों, शारीरिक थकान और अनिश्चितताओं के बावजूद अजय का मनोबल नहीं डगमगाया और वे अपने संकल्प पर अडिग रहते हुए मंजिल तक पहुंचे. इसका आप पर असर यह उपलब्धि साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और खेल कौशल के जरिए बड़े सामाजिक संदेशों को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है. • भारत में: यह अभियान देश भर के युवाओं को शारीरिक फिटनेस, साहसिक गतिविधियों और नशामुक्ति के प्रति प्रेरित करता है. युवा वर्ग खेल या अन्य विधाओं का उपयोग सामाजिक जागरूकता फैलाने के माध्यम के रूप में कर सकते हैं. • झारखंड में: कोडरमा जैसे छोटे जिले के युवा की यह सफलता राज्य की स्थानीय प्रतिभाओं और एथलीटों के मनोबल को मजबूत करती है. सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले युवाओं के लिए यह अपने दम पर पहचान बनाने का जीवंत उदाहरण है. • परिवारों के लिए: समाज में शराब के खिलाफ जागरूकता से घरेलू आर्थिक संकट और पारिवारिक कलह को कम करने में मदद मिलती है. नागरिक अपने स्तर पर नशामुक्ति की पहल से जुड़कर सामाजिक बदलाव में योगदान दे सकते हैं. • साहसिक खेलों के क्षेत्र में: यह सफर सड़क सुरक्षा और लंबी दूरी की स्केटिंग के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. इससे भारतीय युवाओं में रोलर स्केटिंग को एक गंभीर साहसिक विधा के रूप में अपनाने की रुचि बढ़ सकती है. ऐसा क्यों हुआ यह ऐतिहासिक अभियान आध्यात्मिक आस्था, पारिवारिक पृष्ठभूमि के दर्दनाक अनुभवों और पूर्व की सफल यात्राओं से उपजे आत्मविश्वास का सम्मिलित परिणाम था. • आध्यात्मिक और सामाजिक ध्येय: अजय का प्राथमिक उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के साथ-साथ समाज को शराब की लत से मुक्त कराने का संदेश देना था. उन्होंने अपने आसपास शराब के कारण उजड़ते परिवारों की पीड़ा को देखा था, जिसने उन्हें इस जन-जागरूकता अभियान के लिए प्रेरित किया. • पूर्व यात्राओं का आधार: इससे पहले भी वे कोडरमा से अयोध्या, वैष्णो माता, खाटू श्याम जी और हरिद्वार से बैद्यनाथ धाम तक की स्केटिंग यात्राएं पूरी कर चुके थे. इन पिछले सफल अनुभवों ने उन्हें 21 हजार किलोमीटर की विशाल दूरी तय करने की शारीरिक और मानसिक तैयारी दी. • दृढ़ संकल्प का निर्माण: एक वेल्डिंग मिस्त्री के बेटे होने के नाते उन्होंने बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों में बड़े लक्ष्य तय करने का साहस जुटाया. विपरीत परिस्थितियों, भुखमरी, भारी बारिश और भाषा संबंधी कठिनाइयों के बावजूद उनका लक्ष्य के प्रति समर्पण अभियान को पूरा करने का मुख्य कारक बना. सवाल-जवाब 1. अजय कुमार विश्वकर्मा कौन हैं और वे कहां के निवासी हैं? अजय कुमार विश्वकर्मा 22 वर्षीय युवा हैं, जो झारखंड के कोडरमा जिले अंतर्गत डोमचांच प्रखंड के फुलवरिया गांव के रहने वाले हैं. 2. अजय ने स्केटिंग के जरिए कितने राज्यों और कितनी दूरी की यात्रा पूरी की? उन्होंने 404 दिनों के भीतर स्केट्स पर लगभग 21 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देश के 20 राज्यों का भ्रमण किया. 3. इस यात्रा के दौरान उन्होंने किन प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन किए? उन्होंने भारत के चार धाम, 12 ज्योतिर्लिंगों और 16 शक्तिपीठों के दर्शन किए, साथ ही लद्दाख के कठिन मार्गों की यात्रा भी पूरी की. 4. इस राष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत कब और कहां से हुई थी? इस यात्रा की शुरुआत 23 अगस्त 2025 को झारखंड के कोडरमा से हुई थी. 5. यात्रा के दौरान अजय ने समाज को क्या संदेश दिया? उन्होंने शराब और नशे की लत से दूर रहने का संदेश दिया, ताकि परिवारों को आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा से बचाया जा सके. 6. अजय के परिवार की पृष्ठभूमि क्या है? अजय के पिता संजय विश्वकर्मा पेशे से वेल्डिंग मिस्त्री हैं और उनकी माता उर्मिला देवी एक गृहिणी हैं. 7. सफर के दौरान उन्हें किन प्रमुख कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? उन्हें कई बार एक-दो दिन बिना भोजन के रहना पड़ा, मूसलाधार बारिश और रात में स्केटिंग करनी पड़ी तथा दक्षिण भारत में भाषा संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ा. 8. क्या अजय ने इससे पहले भी लंबी दूरी की स्केटिंग यात्राएं की थीं? हां, वे पहले कोडरमा से अयोध्या, वैष्णो माता, खाटू श्याम जी और हरिद्वार से बैद्यनाथ धाम तक स्केटिंग कर चुके थे. प्रेरणा और सबक सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बीच एक युवक का यह सफर जीवन में बड़े लक्ष्य साधने की अनूठी सीख देता है. • संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं: एक साधारण वेल्डिंग मिस्त्री का परिवार होने के बावजूद अजय ने अपने जुनून को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया. सच्ची लगन हो तो सीमित आर्थिक स्थिति भी बड़े कीर्तिमान रचने में आड़े नहीं आती. • दृढ़ संकल्प से बाधाओं को पछाड़ें: यात्रा के दौरान दो-दो दिन भूखे रहने, रात में स्केटिंग करने और मूसलाधार बारिश के बावजूद वे नहीं रुके. लक्ष्य के प्रति अटूट निष्ठा कठिन से कठिन परिस्थितियों को मात दे सकती है. • अपनी प्रतिभा को सामाजिक हित से जोड़ें: अजय ने अपनी स्केटिंग कला को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित रखने के बजाय नशामुक्ति के संदेश से जोड़ा. अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज की भलाई के लिए करना सफलता को अधिक सार्थक बनाता है. • छोटे कदमों से बड़ा मुकाम हासिल करें: 21 हजार किलोमीटर का सफर तय करने से पहले उन्होंने छोटी धार्मिक यात्राओं से अनुभव हासिल किया. जीवन में बड़ी सफलता पाने के लिए निरंतर अभ्यास और क्रमिक प्रगति आवश्यक है. https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-22-varshiya-ajay-kumar-vishwakarma-ne-sketsa-para-taya-kiya-21-hajara-kimi-ka-saphara-20-rajyon-men-phailaya-nashamuk-40872 TrendKia — Har trend, sabse pehle.