# झारखंड के आठ कराटे खिलाड़ी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दिखाएंगे प्रतिभा, पलामू से कश्मीर तक का सफर

> राज्य स्तरीय स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पलामू के आठ कराटे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी जगह पक्की की है। यह टूर्नामेंट कश्मीर के शेरे कश्मीर इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-atha-karate-khilari-national-championship-men-dikhaenge-pratibha-palamau-se-kashmir-taka-ka-saphara-38206 · **Language:** Hindi
**Tags:** पलामू, झारखंड, कराटे, राष्ट्रीय प्रतियोगिता, कश्मीर, खेल समाचार, सुमित वर्मन

झारखंड के पलामू जिले के खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। आम तौर पर विकास की दौड़ में पिछड़े माने जाने वाले इस इलाके के आठ कराटे प्रतिभागी अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे हैं। जिला मुख्यालय के पांकी रोड स्थित द कराटे एकेडमी के इन आठ खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उनका चयन आगामी राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए हुआ है, जहां वे अपने खेल का लोहा मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

## राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक के दम पर राष्ट्रीय टीम में चयन
अकादमी से जुड़े इन चयनित प्रतिभागियों ने लगभग एक महीने पहले आयोजित हुई राज्य स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में अपनी चुनौती पेश की थी। वहां अपने दमदार दांव-पेंच के बल पर इन खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक हासिल किए। राज्य स्तर पर मिली इस स्वर्णिम सफलता के आधार पर ही इन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता का टिकट हासिल हुआ है। इस राष्ट्रीय आयोजन में अंडर-19, अंडर-25 और अंडर-30 आयु वर्ग के मुकाबले खेले जाएंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र पूरे कर लिए हैं और उनका स्पष्ट लक्ष्य राष्ट्रीय पटल पर भी गोल्ड मेडल जीतकर अपने गृह जिले का परचम लहराना है। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता कश्मीर स्थित शेरे कश्मीर इंडोर स्टेडियम में 29 सितंबर, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित होने वाली है।

## शिक्षा के साथ खेल के मैदान में साध रहे संतुलन
चयनित खिलाड़ियों में शामिल आकर्ष प्रताप ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कराटे के प्रति उनका रुझान शुरुआती दिनों में बना, जिसके बाद उन्होंने नियमित अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। उनके पिता एक पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और वे लगातार उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी सक्रिय रहने की प्रेरणा देते हैं। आकर्ष का कहना है कि कश्मीर में होने वाली इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में वे अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने के लिए कमर कस चुके हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।

इसी क्रम में एक अन्य कराटे खिलाड़ी सत्यम कुमार ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपने कराटे प्रशिक्षण की शुरुआत ओरिएंट पब्लिक स्कूल से की थी। आगे चलकर उन्होंने कोच सुमित वर्मन से नियमित मार्गदर्शन लेना शुरू किया और विभिन्न स्पर्धाओं में उतरने लगे। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता गया, खेल के प्रति उनका समर्पण और गहरा होता चला गया। सत्यम अब तक चार पदक अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य भविष्य में एक शीर्ष कराटे खिलाड़ी बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश को गौरवान्वित करना है।

## जमीनी प्रतिभा को ओलंपिक मंच तक ले जाने का संकल्प
द कराटे एकेडमी के कोच सुमित वर्मन का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचलों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। पलामू जैसे सुदूर जिले से भी युवा खिलाड़ी अपनी लगन के बूते लगातार आगे निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर अभिभावक केवल अकादमिक पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, जो निश्चित रूप से जरूरी है, मगर साथ ही बच्चों को खेलों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उनका सबसे बड़ा सपना यह है कि पलामू का कोई खिलाड़ी आने वाले समय में ओलंपिक खेलों के मंच तक पहुंचे। इसके अलावा सरकारी स्तर पर भी खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कई सुविधाएं और नए मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

## खेल कोटे से सरकारी नौकरियों और करियर के नए रास्ते
सुमित वर्मन ने करियर के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि खेल का दायरा केवल पदक बटोरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार का एक मजबूत जरिया भी बन चुका है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में खेल कोटे के तहत नौकरी के अवसर प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने रेलवे और बैंकिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इन संस्थानों में प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए विशेष भर्तियां निकाली जाती हैं। ऐसे में युवा अपनी औपचारिक पढ़ाई जारी रखते हुए खेल को एक सशक्त आजीविका बना सकते हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शिरकत करने जा रहे पलामू के आठों खिलाड़ियों से इस बार भी पदक तालिका में शीर्ष पर रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

## इसका आप पर असर
पलामू के आठ कराटे खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन यह दर्शाता है कि छोटे शहरों के युवा भी खेल को एक सफल करियर विकल्प के रूप में चुन सकते हैं।

- **झारखंड के युवाओं के लिए:** यह उपलब्धि साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगन और सही प्रशिक्षण से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। राज्य के अन्य युवा भी पढ़ाई के साथ खेलों में पेशेवर प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
- **पलामू जिले में:** पांकी रोड स्थित अकादमी की यह सफलता स्थानीय खेल संस्कृति को नई मजबूती देगी। अभिभावकों का नजरिया बदलेगा और वे बच्चों को मार्शल आर्ट्स और खेलों में भेजने के लिए आगे आएंगे।
- **सरकारी नौकरियों के अवसर:** राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने से खिलाड़ियों के लिए रेलवे और बैंकिंग जैसे विभागों में खेल कोटे के तहत सीधी भर्ती के दरवाजे खुलते हैं। इससे युवाओं को आर्थिक सुरक्षा और स्थायी आजीविका का ठोस विकल्प मिलता है।
- **आगामी प्रतियोगिता:** चयनित खिलाड़ी 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच कश्मीर में राष्ट्रीय मुकाबले खेलेंगे। इस प्रदर्शन के आधार पर उनके लिए भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने के रास्ते खुलेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
पलामू के आठ कराटे खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चयन उनकी हालिया राज्य स्तरीय जीत और लगातार प्रशिक्षण का सीधा परिणाम है।

- **राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक:** लगभग एक महीने पहले आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में इन आठों खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीते थे। यही स्वर्ण पदक राष्ट्रीय स्तर पर सीधे चयन का अनिवार्य आधार बना।
- **अनुशासित कोचिंग और अभ्यास:** पांकी रोड स्थित द कराटे एकेडमी में कोच सुमित वर्मन के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने तकनीक और फिटनेस पर निरंतर काम किया। स्कूल स्तर से शुरू हुई ट्रेनिंग को नियमित अभ्यास के जरिए प्रतिस्पर्धी स्तर तक पहुंचाया गया।
- **पारिवारिक और संस्थागत सहयोग:** खिलाड़ियों के परिवारों, जैसे आकर्ष प्रताप के पारा शिक्षक पिता, ने पढ़ाई के साथ खेल जारी रखने में निरंतर प्रोत्साहन दिया। ओरिएंट पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों से मिली शुरुआती बुनियादी ट्रेनिंग ने इस खेल यात्रा की नींव तैयार की।

## सवाल-जवाब

### 1. पलामू के कितने कराटे खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है?
पलामू स्थित द कराटे एकेडमी के कुल आठ खिलाड़ियों का चयन आगामी राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता के लिए हुआ है।

### 2. इन खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए किस आधार पर हुआ?
इन सभी खिलाड़ियों ने करीब एक महीने पहले आयोजित राज्य स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था, जिसके आधार पर उन्हें चुना गया।

### 3. राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता का आयोजन कहां और कब होने जा रहा है?
यह प्रतियोगिता कश्मीर के शेरे कश्मीर इंडोर स्टेडियम में 29 सितंबर, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

### 4. इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कौन-कौन से आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल होंगे?
इस चैंपियनशिप में अंडर-19, अंडर-25 और अंडर-30 आयु वर्ग के खिलाड़ी भाग लेंगे।

### 5. खिलाड़ी आकर्ष प्रताप के पिता क्या काम करते हैं?
आकर्ष प्रताप के पिता एक पारा शिक्षक हैं और वे आकर्ष को पढ़ाई के साथ-साथ खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

### 6. सत्यम कुमार ठाकुर ने कराटे का शुरुआती प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया था?
सत्यम कुमार ठाकुर ने कराटे की शुरुआती ट्रेनिंग ओरिएंट पब्लिक स्कूल से ली थी और वे अब तक चार पदक जीत चुके हैं।

### 7. द कराटे एकेडमी के कोच कौन हैं?
द कराटे एकेडमी के कोच सुमित वर्मन हैं, जो पांकी रोड पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं।

### 8. कोच सुमित वर्मन के अनुसार कराटे में उत्कृष्ट प्रदर्शन से करियर को क्या लाभ मिलता है?
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को रेलवे और बैंकिंग जैसे सरकारी विभागों में खेल कोटे के तहत नौकरी के अवसर मिलते हैं।

## प्रेरणा और सबक
पलामू जैसे पिछड़े माने जाने वाले जिले से निकलकर राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप तक पहुंचने की यह यात्रा साबित करती है कि दृढ़ संकल्प से हर बाधा पार की जा सकती है।

- **संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं:** सीमित सुविधाओं वाले क्षेत्र में रहते हुए भी इन खिलाड़ियों ने लगन से अभ्यास किया और राज्य स्तर पर स्वर्ण जीतकर राष्ट्रीय मंच पर जगह बनाई।
- **पढ़ाई और खेल में संतुलन साधना संभव है:** आकर्ष प्रताप की तरह विद्यार्थी अपनी अकादमिक शिक्षा जारी रखते हुए भी खेलों में उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं।
- **छोटी शुरुआत से बड़े लक्ष्य तय करें:** सत्यम कुमार ठाकुर ने स्कूल से सामान्य कराटे सीखकर शुरुआत की और कोच के मार्गदर्शन में चार पदक जीतकर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना बुना।
- **खेल को सम्मानजनक आजीविका बनाएं:** खेल अब केवल शौक नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर रेलवे और बैंकिंग जैसी सरकारी सेवाओं में सुरक्षित करियर पाया जा सकता है।

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