झारखंड के बोकारो अस्पताल में प्रसव के नाम पर वसूली और नवजात बच्ची को बेचने की पेशकश पर प्रशासनिक जांच शुरू बोकारो जनरल अस्पताल में प्रसव के बाद कर्मचारियों पर अवैध उगाही और नवजात बच्ची को दो लाख रुपये में बेचने का दबाव बनाने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। झारखंड के बोकारो जनरल अस्पताल परिसर से अवैध वसूली और नवजात शिशु की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के कर्मचारियों पर सामान्य प्रसव के एवज में रुपयों की मांग करने और पैसे न दे पाने की स्थिति में नवजात बच्ची को दो लाख रुपये में किसी अन्य को सौंपने का प्रस्ताव रखने के आरोप लगे हैं। घटना से संबंधित एक वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस महकमा और बोकारो स्टील प्रबंधन तुरंत सक्रिय हो गए हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पीड़ित मां और नवजात बच्ची को सदर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और रकम घटाने का दबाव पीड़ित परिवार के अनुसार, सर्कस मैदान निवासी मनोज कुमार बाउरी की पत्नी सोनी कुमारी को प्रसव पीड़ा के चलते 29 अक्टूबर को बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 30 अक्टूबर की शाम सोनी कुमारी ने सामान्य प्रसव के जरिए एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के तुरंत बाद अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने प्रसव प्रक्रिया के नाम पर परिजनों से 40 हजार रुपये की मांग शुरू कर दी। परिजनों द्वारा इस अवैध मांग का कड़ा विरोध करने पर कर्मचारियों ने सौदेबाजी शुरू कर दी। पहले इस मांग को घटाकर 21 हजार रुपये किया गया और बाद में इसे 15 हजार रुपये पर तय करने का प्रयास किया गया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजनों ने दबाव में आकर 10 हजार रुपये का भुगतान कर भी दिया था। इसके बावजूद कर्मचारियों का लालच शांत नहीं हुआ और उन्होंने परिजनों पर फोन करके बाकी बचे 10 हजार रुपये तुरंत जमा कराने का लगातार दबाव बनाया। दो लाख रुपये में बच्ची बेचने का प्रस्ताव और वीडियो में गंभीर खुलासे बच्ची के पिता मनोज कुमार बाउरी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के एक सफाईकर्मी और तीन नर्सों ने मिलकर बच्ची को दो लाख रुपये में बेचने की साजिश रची। उन्होंने पीड़ित परिवार को यह दलील दी कि उनके पास पहले से ही दो बेटियां हैं और तीसरी बच्ची का लालन-पालन करना उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद कठिन होगा, इसलिए बच्ची को दो लाख रुपये में बेच देना ही उनके हित में होगा। इस पूरे प्रकरण से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पीड़ित प्रसूता सोनी कुमारी अस्पताल के भीतर चल रहे कथित गिरोह की गतिविधियों का उल्लेख करती दिख रही हैं। वीडियो में सोनी कुमारी यह कहती नजर आ रही हैं कि नवजात बच्चों को बेचने के लिए अस्पताल में औपचारिक कागजात तक तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि इस चिकित्सा संस्थान से पहले भी नवजात बच्चों को बेचे जाने के मामले सामने आ चुके हैं। चास एसडीएम के निर्देश पर पुलिस जांच और प्रबंधन का रुख मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए चास के एसडीएम प्रांजल ढांडा ने तुरंत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में सेक्टर-4 थाना पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर रही है। सेक्टर-4 थाना प्रभारी नीतीश कुमार ने कहा, "मामले की जांच की जा रही है।" थाना प्रभारी के अनुसार शुरुआती जांच में अभी तक इस तरह के किसी संगठित लेन-देन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। उधर बोकारो स्टील प्रबंधन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक स्तर पर पड़ताल शुरू कर दी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पीड़ित मां और बच्ची को बेहतर देखभाल के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल कर्मियों पर लगे इन आरोपों की असली सच्चाई विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। इसका आप पर असर यह घटना सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों के अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों और वहां सक्रिय अनैतिक गतिविधियों पर कड़े प्रशासनिक नियंत्रण की आवश्यकता को दर्शाती है। • झारखंड में: स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर सभी उपक्रम एवं ट्रस्ट अस्पतालों में प्रसव सेवाओं की सख्त निगरानी का दबाव बढ़ेगा। इससे सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और प्रसव कक्षों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण तेज हो सकते हैं। • बोकारो में: बोकारो जनरल अस्पताल में इलाज कराने वाले आम नागरिकों और बीएसपी कर्मचारियों के परिवारों में सतर्कता बढ़ेगी। अस्पताल प्रबंधन पर तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने और हेल्पडेस्क को मजबूत करने का सीधा असर पड़ेगा। • मरीजों के परिजनों के लिए: प्रसव या आपातकालीन सेवाओं के दौरान किसी भी अनधिकृत नकदी मांग का तुरंत विरोध करने और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने की जागरूकता बढ़ेगी। परिजन अब अस्पताल परिसर में बिना रसीद के किसी भी तरह का नकद भुगतान करने से बचेंगे। • सुरक्षा एवं शिकायत निवारण: जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में सीसीटीवी निगरानी और गोपनीय शिकायत पेटियों की व्यवस्था की जा सकती है। इससे पीड़ित परिवार बिना किसी डर के अवैध वसूली की सूचना सीधे पुलिस या मजिस्ट्रेट को दे सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह घटना अस्पताल कर्मियों द्वारा एक गरीब परिवार की आर्थिक विवशता का अनुचित लाभ उठाने और संस्थागत निगरानी की कमी के कारण सामने आई। • तात्कालिक कारण: प्रसव के बाद कर्मचारियों ने अवैध रूप से 40 हजार रुपये की मांग की, और भुगतान में असमर्थता जताने पर नवजात को बेचने की सलाह दे डाली। परिवार के पास पहले से दो बेटियां होने का हवाला देकर कर्मियों ने अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया। • निगरानी में चूक: अस्पताल के प्रसव वार्ड में कार्यरत निचले स्तर के कर्मचारियों पर नियमित पर्यवेक्षण का अभाव रहा, जिससे सौदेबाजी की गुंजाइश बनी। आंतरिक नियंत्रण कमजोर होने के चलते कर्मचारियों ने फोन पर भी अतिरिक्त रकम की मांग जारी रखी। • जांच की वर्तमान स्थिति: एसडीएम के निर्देश पर पुलिस और अस्पताल प्रबंधन आरोपों की पड़ताल कर रहे हैं, हालांकि प्रारंभिक तौर पर ठोस सुबूत की पुष्टि होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। सवाल-जवाब 1. बोकारो जनरल अस्पताल में क्या आरोप लगे हैं? अस्पताल कर्मियों पर सामान्य प्रसव के नाम पर अवैध वसूली करने और नवजात बच्ची को दो लाख रुपये में बेचने का प्रस्ताव देने के आरोप लगे हैं। 2. कर्मचारियों ने पीड़ित परिवार से शुरुआत में कितने रुपयों की मांग की थी? कर्मचारियों ने पहले 40 हजार रुपये मांगे थे, जिसे बाद में घटाकर 21 हजार और फिर 15 हजार रुपये कर दिया गया था। 3. पीड़ित परिवार ने अस्पताल कर्मियों को कितनी रकम दी थी? दबाव में आकर पीड़ित परिवार ने कर्मचारियों को 10 हजार रुपये जमा कर दिए थे। 4. इस मामले में किन कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं? बच्ची के पिता ने अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी और तीन नर्सों पर ये गंभीर आरोप लगाए हैं। 5. प्रशासन ने इस मामले में क्या कदम उठाया है? चास एसडीएम प्रांजल ढांडा के निर्देश पर सेक्टर-4 थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और प्रबंधन भी पड़ताल में जुटा है। 6. पीड़ित मां और नवजात बच्ची को वर्तमान में कहां रखा गया है? सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल को देखते हुए पीड़ित मां और बच्ची को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-bokaro-aspatala-men-prasava-ke-nama-para-vasuli-aura-navajata-bachchi-ko-bechane-ki-peshakasha-para-prashasanika-janc-54755 TrendKia — Har trend, sabse pehle.