# झारखंड के बूढ़ई बाजार में 20 से 50 रुपये में मिलता है खास देसी नाश्ता, मुड़ी-घुघनी और समोसे का अनोखा मेल

> देवघर-गिरिडीह मार्ग पर स्थित बूढ़ई बाजार का पारंपरिक नाश्ता राहगीरों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है, जहां 20 से 50 रुपये में भरपेट थाली परोसी जाती है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-budhai-bazar-men-20-se-50-rupaye-men-milata-hai-khasa-desi-nashta-mudi-ghughni-aura-samosa-ka-anokha-mela-53525 · **Language:** Hindi
**Tags:** बूढ़ई बाजार, देवघर, देसी नाश्ता, झारखंड खानपान, मुड़ी घुघनी, सड़क किनारे का खाना, किफायती भोजन

झारखंड के व्यस्त सड़क मार्गों पर सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए बूढ़ई बाजार का पारंपरिक नाश्ता एक प्रमुख पड़ाव बन चुका है। यहां के बाजार में मिलने वाला देसी खानपान अपने अनोखे स्वाद और किफायती दाम के कारण दूर-दराज के यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। रास्ते से होकर निकलने वाले अधिकांश लोग बिना इस खास नाश्ते का स्वाद चखे आगे नहीं बढ़ते, जिससे यह इस पूरे इलाके की खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया है।

## स्वाद का अनोखा मेल और थाली की तैयारी
इस नाश्ते को तैयार करने का तरीका बेहद दिलचस्प और पारंपरिक है। दुकानदार एक चौड़ी प्लेट में सबसे पहले हल्की और कुरकुरी मुड़ी डालते हैं, जिसके ऊपर गर्मागर्म घुघनी की रसदार सब्जी परोसी जाती है। इसके बाद स्वाद को कई गुना बढ़ाने के लिए इसमें सूखा चूड़ा, क्रिस्पी चॉप, तली हुई पकौड़ी और एक समोसा मिलाया जाता है। इन सभी नमकीन और कुरकुरी चीजों का मिश्रण हर निवाले में अलग-अलग बनावट और स्वाद का अनुभव कराता है। इस तरह एक ही थाली में मीठे-तीखे और चटपटे मसालों का संतुलित मेल ग्राहकों को भरपूर तृप्ति देता है।

## महंगाई में भी 20 से 50 रुपये में पेट भरने का विकल्प
वर्तमान समय में जब बाहर का खानपान लगातार महंगा होता जा रहा है, तब भी यह देसी नाश्ता बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध है। ग्राहक अपनी भूख और जरूरत के अनुसार 20 से 50 रुपये के बीच भरपेट नाश्ता ले सकते हैं। कम कीमत में भरपूर मात्रा मिलने के कारण न सिर्फ आसपास के निवासी, बल्कि लंबी दूरी का सफर तय करने वाले मुसाफिर भी यहां नियमित रूप से रुकते हैं। बूढ़ई के स्थानीय निवासी संतोष दास का कहना है कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार इस नाश्ते का स्वाद ले रहे हैं। उनका मानना है कि मुड़ी, घुघनी, चूड़ा, चॉप, पकौड़ी और समोसे का यह संयोजन ऐसा लाजवाब स्वाद पैदा करता है कि जो व्यक्ति एक बार इसे चख लेता है, वह बार-बार यहां खिंचा चला आता है। इसी वजह से इन दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक ग्राहकों की कतारें देखने को मिलती हैं।

## देवघर, गिरिडीह और रांची मार्ग पर मुसाफिरों का ठिकाना
यह बाजार भौगोलिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। देवघर, गिरिडीह और रांची को आपस में जोड़ने वाली इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लंबी यात्रा पर निकले चालक और यात्री बूढ़ई बाजार में अपनी गाड़ी रोकते हैं और गरम चाय के साथ इस खास नाश्ते का लुत्फ उठाते हैं। इसके अतिरिक्त, देवघर में मंदिर दर्शन के लिए विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी अपनी यात्रा के दौरान यहां अल्पाहार के लिए ठहरते हैं। किफायती दाम, शुद्ध देसी जायके और पेट भरने वाली मात्रा ने इस साधारण सी दिखने वाली नाश्ते की प्लेट को बूढ़ई कस्बे की सबसे बड़ी पहचान बना दिया है।

## इसका आप पर असर
यह नाश्ता देवघर-रांची मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों और तीर्थयात्रियों को महंगाई के दौर में बेहद सस्ता और पौष्टिक पेट भरने का विकल्प देता है।

- **झारखंड में:** देवघर, गिरिडीह और रांची के बीच यात्रा करने वाले मुसाफिरों को रास्ते में सिर्फ 20 से 50 रुपये में भरपेट अल्पाहार मिल जाता है। यात्रियों को महंगे होटलों या ढाबों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है।
- **देवघर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए:** बाबा मंदिर के दर्शन के लिए जाने वाले भक्त बिना अधिक पैसे खर्च किए पारंपरिक स्थानीय भोजन का स्वाद ले सकते हैं। इससे तीर्थयात्रा का बजट सीमित रखने में मदद मिलती है।
- **स्थानीय छोटे व्यापारियों के लिए:** सड़क किनारे लगने वाली इन दुकानों से ग्रामीण बाजार की अर्थव्यवस्था को निरंतर गति मिलती है। दैनिक मजदूरी और छोटे कारोबारियों को अपनी आजीविका चलाने का स्थायी आधार मिलता है।
- **सड़क यात्रियों के लिए:** लंबी दूरी की बसों और निजी गाड़ियों के चालकों के लिए यह बाजार चाय और नाश्ते का एक सुविधाजनक विश्राम स्थल साबित होता है। इससे थका देने वाले लंबे सफर में ताजगी और सस्ता भोजन दोनों मिल जाते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
बूढ़ई बाजार में इस खास नाश्ते के प्रसिद्ध होने के पीछे तीन प्रमुख शहरों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय सड़क संपर्क, इसका अनोखा संयोजन और बेहद किफायती दाम मुख्य कारण हैं।

- **भौगोलिक संपर्क:** यह बाजार देवघर, गिरिडीह और रांची को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्ग पर स्थित है। प्रतिदिन इस रास्ते से सैकड़ों गाड़ियां और यात्री गुजरते हैं, जिससे दुकानों को निरंतर ग्राहक मिलते रहते हैं।
- **अनोखा स्वाद और संयोजन:** एक ही प्लेट में मुड़ी, रसदार घुघनी, सूखा चूड़ा, समोसा, चॉप और पकौड़ी को मिलाकर परोसने की परंपरा अन्य स्थानों पर कम दिखती है। यह अनूठा मिश्रण हर वर्ग के लोगों के स्वाद को भाता है।
- **किफायती मूल्य:** 20 से 50 रुपये की न्यूनतम कीमत में भरपेट भोजन उपलब्ध कराना आम कामकाजी लोगों और मुसाफिरों के लिए इसे पहली पसंद बना देता है। महंगाई के दौर में यह दर ग्राहकों को बार-बार आने के लिए आकर्षित करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. बूढ़ई बाजार का यह देसी नाश्ता कहां मिलता है?
यह नाश्ता झारखंड के बूढ़ई बाजार में मिलता है, जो देवघर, गिरिडीह और रांची को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है।

### 2. इस नाश्ते की एक प्लेट में कौन-कौन सी चीजें मिलाई जाती हैं?
इस प्लेट में मुड़ी, गर्मागर्म घुघनी की सब्जी, चूड़ा, कुरकुरा चॉप, पकौड़ी और एक समोसा मिलाकर परोसा जाता है।

### 3. बूढ़ई बाजार में इस नाश्ते की कीमत कितनी है?
यह भरपेट नाश्ता दुकानों पर 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध है।

### 4. स्थानीय ग्राहक इस नाश्ते को कितने समय से पसंद कर रहे हैं?
स्थानीय निवासी संतोष दास के अनुसार, वह पिछले करीब 15 वर्षों से नियमित रूप से इस खास नाश्ते का स्वाद ले रहे हैं।

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