# झारखंड के देवघर में बहुफसली सब्जी मॉडल से किसान ने बदली अपनी किस्मत, सीमित लागत में हासिल किया शानदार मुनाफा

> देवघर के गोपीडीह गांव के किसान अंबिका कुशवाहा ने 6 एकड़ में छह तरह की सब्जियों की खेती कर 2 लाख रुपये की लागत से 4 लाख रुपये की कमाई का मॉडल तैयार किया है.

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-deoghar-men-bahuphasali-sabji-modala-se-kisana-ne-badali-apani-kismata-simita-lagata-men-hasila-kiya-shanadara-munaph-54234 · **Language:** Hindi
**Tags:** सब्जी की खेती, देवघर, अंबिका कुशवाहा, किसान की कमाई, झारखंड कृषि, बहुफसली खेती, गोपीडीह

खेती-किसानी को लेकर आम तौर पर यही धारणा रहती है कि यह केवल घाटे और अनिश्चितताओं का जरिया है, लेकिन झारखंड के देवघर जिले के एक किसान ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. बिना किसी भारी पूंजी निवेश या बड़े व्यावसायिक सेटअप के, इस किसान ने अपनी पारंपरिक जमीन पर आधुनिक बाजार समझ का इस्तेमाल करते हुए परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया है. छह एकड़ जमीन पर तरह-तरह की नकदी सब्जियों की पैदावार कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो किसानी से भी सम्मानजनक मुनाफा कमाया जा सकता है.

## बाजार की मांग और बहुफसली मॉडल की रणनीति
यह सफल कहानी देवघर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गोपीडीह गांव के निवासी किसान अंबिका कुशवाहा की है. अंबिका कुशवाहा के पास लगभग 6 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध है. उन्होंने पारंपरिक एकल फसल प्रणाली में फंसने के बजाय अपने खेतों को बहुफसली व्यवस्था में बदल दिया. वर्तमान में उनके खेतों में एक साथ छह अलग-अलग प्रकार की सब्जियां तैयार हो रही हैं, जिनमें फूलगोभी, गाजर, हरी धनिया और मिर्च जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं. मौसमी बदलावों और स्थानीय मंडियों में मांग के चक्र को ध्यान में रखकर उन्होंने फसलों का चुनाव किया है.

एक ही तरह की उपज पर आश्रित न रहने की इस रणनीति से किसान को कई व्यावहारिक फायदे मिलते हैं. जब खेत में कई तरह की फसलें एक साथ तैयार होती हैं, तो किसान के पास अलग-अलग समय पर मंडियों में माल पहुंचाने का अवसर रहता है. इसके अलावा अगर कभी किसी एक सब्जी के दाम बाजार में अचानक गिर भी जाएं, तो दूसरी फसल से होने वाला मुनाफा नुकसान की भरपाई कर देता है. इस तरह उनका जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है और नियमित नकद प्रवाह बना रहता है.

## लागत और मुनाफे का वित्तीय संतुलन
अंबिका कुशवाहा की इस खेती का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका वित्तीय प्रबंधन है. अपनी 6 एकड़ जमीन पर छह प्रकार की सब्जियों की पूरी खेती तैयार करने में उनका कुल खर्च लगभग 2 लाख रुपये के आसपास आता है. इस निवेश के जरिए वे संबंधित सीजन में लगभग 04 लाख रुपये तक की सकल कमाई हासिल करने में सफल रहते हैं. लागत निकालने के बाद भी किसान के पास अपनी मेहनत का संतोषजनक लाभ बच जाता है.

सब्जी उत्पादन में मौसम के मिजाज, सिंचाई की व्यवस्था, उत्तम किस्म के बीज, खाद और कीटनाशकों के समय पर प्रयोग की बड़ी भूमिका होती है. साथ ही स्थानीय थोक मंडी में मिलने वाले दैनिक भाव भी आय को तय करते हैं. इन तमाम प्राकृतिक और बाजार संबंधी चुनौतियों के बावजूद संतुलित योजना के दम पर उन्होंने अपनी कृषि आय को सुरक्षित किया है, जो इलाके के अन्य काश्तकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है.

## पारिवारिक श्रम और सामूहिक भागीदारी की मिसाल
इस पूरे कृषि कार्य की सफलता के पीछे किसान के पूरे परिवार का संगठित श्रम जुड़ा हुआ है. पूरा परिवार अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह खेती पर ही निर्भर है, इसलिए सभी सदस्य सक्रिय रूप से जिम्मेदारियां निभाते हैं. खेतों की जुताई और क्यारियां तैयार करने से लेकर पौधों की दैनिक देखभाल, नियमित सिंचाई और परिपक्व सब्जियों की तुड़ाई तक के सारे काम परिवार के लोग मिलकर पूरा करते हैं.

पारिवारिक भागीदारी के चलते बाहरी मजदूरों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में बचत होती है और फसलों की गुणवत्ता पर व्यक्तिगत नजर बनी रहती है. अंबिका कुशवाहा का साफ मानना है कि यदि कोई भी किसान बाजार की नब्ज और मांग को बारीकी से परखे और केवल एक ही फसल पर जुआ खेलने से बचे, तो सीमित पूंजी के बावजूद किसानी से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है.

## इसका आप पर असर
इस सफल कृषि मॉडल से छोटे और मध्यम जोत वाले किसानों के लिए अपनी आमदनी सुरक्षित करने का व्यावहारिक रास्ता सामने आता है.

- **भारत में:** देश भर के किसान एकल फसल प्रणाली के जोखिम को कम करने के लिए बहुफसली सब्जी मॉडल अपना सकते हैं. इससे किसी एक फसल का दाम गिरने पर भी किसान को आर्थिक दिवालिएपन से बचाया जा सकता है.
- **देवघर और झारखंड में:** स्थानीय सब्जी उत्पादक बाजार की मांग के अनुसार गोभी, गाजर और धनिया जैसी नकदी फसलों का चक्र अपना सकते हैं. इससे स्थानीय मंडियों में सीधी आपूर्ति कर बिचौलियों पर निर्भरता घटाई जा सकती है.
- **सीमित पूंजी वाले किसानों के लिए:** 2 लाख रुपये के चरणबद्ध निवेश से 4 लाख रुपये तक का सकल कारोबार तैयार किया जा सकता है. पारिवारिक श्रम का सही उपयोग कर मजदूरी का खर्च काफी हद तक घटाया जा सकता है.
- **उपभोक्ताओं के लिए:** स्थानीय स्तर पर कई तरह की ताजी सब्जियों की नियमित आपूर्ति बनी रहती है. इससे मौसमी सब्जियों के दामों में अचानक होने वाले उछाल पर अंकुश लगता है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह कृषि सफलता आधुनिक बाजार सूझबूझ, फसल विविधीकरण और परिवार के संयुक्त श्रम प्रबंधन के सही तालमेल के चलते संभव हुई है.

- **बहुफसली रणनीति:** किसान ने 6 एकड़ भूमि में केवल एक फसल लगाने के बजाय फूलगोभी, गाजर, धनिया और मिर्च समेत छह अलग-अलग सब्जियां उगाने का निर्णय लिया. इससे एक सब्जी की कीमत गिरने पर दूसरी फसल से वित्तीय संतुलन बना रहा.
- **मांग आधारित चयन:** फसलों का चुनाव मौसम की परिस्थितियों और स्थानीय बाजार में नियमित खपत को देखकर किया गया. सही समय पर तैयार होने वाली सब्जियों को मंडियों में बेहतर और स्थिर दाम प्राप्त हुए.
- **पारिवारिक श्रम का योगदान:** खेत की तैयारी से लेकर सिंचाई और तुड़ाई तक परिवार के सदस्यों ने खुद सारा कार्य संभाला. इससे उत्पादन लागत नियंत्रित रही और 2 लाख रुपये के खर्च में फसलें तैयार हो सकीं.

## सवाल-जवाब

### 1. अंबिका कुशवाहा किस गांव और जिले के रहने वाले हैं?
वे झारखंड के देवघर जिले के देवघर प्रखंड स्थित गोपीडीह गांव के निवासी हैं.

### 2. वे कितने रकबे पर सब्जियों की खेती कर रहे हैं?
अंबिका कुशवाहा लगभग 6 एकड़ जमीन पर विभिन्न सब्जियों की खेती कर रहे हैं.

### 3. उनके खेतों में कौन-कौन सी मुख्य सब्जियां उगाई जा रही हैं?
उनके खेतों में फूलगोभी, गाजर, हरी धनिया और मिर्च समेत कुल छह तरह की सब्जियां उगाई जा रही हैं.

### 4. 6 एकड़ में खेती करने में कुल कितनी लागत आती है?
सब्जियों के इस उत्पादन में लगभग 2 लाख रुपये की कुल लागत आती है.

### 5. सीजन में सब्जियों की बिक्री से कुल कितनी कमाई होती है?
सब्जियों की पैदावार से सीजन में लगभग 04 लाख रुपये की सकल कमाई प्राप्त होती है.

### 6. बहुफसली खेती अपनाने का मुख्य लाभ क्या है?
एक फसल का बाजार भाव गिरने पर दूसरी फसल से आय का संतुलन बना रहता है और नियमित बिक्री का अवसर मिलता है.

### 7. खेती के दैनिक कार्यों में किसान की मदद कौन करता है?
खेत की तैयारी, सिंचाई और तुड़ाई जैसे सभी कार्यों में किसान का पूरा परिवार मिलकर हाथ बंटाता है.

## प्रेरणा और सबक
देवघर के किसान अंबिका कुशवाहा की मेहनत और सूझबूझ दिखाती है कि खेती में बिना भारी कर्ज लिए भी योजनाबद्ध तरीके से प्रगति की जा सकती है.

- **विविधीकरण से जोखिम घटाएं:** कभी भी अपनी पूरी पूंजी या जमीन किसी एक ही फसल के भरोसे न छोड़ें. अलग-अलग फसलों का चुनाव अनपेक्षित नुकसान से सुरक्षा कवच प्रदान करता है.
- **बाजार की मांग को पहचानें:** वही फसल उगाएं जिसकी स्थानीय मंडी में नियमित मांग और वाजिब कीमत उपलब्ध हो. बाजार को समझे बिना की गई खेती अक्सर नुकसान का कारण बनती है.
- **पारिवारिक सामंजस्य और अनुशासन:** परिवार के सदस्यों का आपसी सहयोग न केवल कार्यकुशलता बढ़ाता है बल्कि बाहरी खर्चों को भी न्यूनतम रखता है. संयुक्त प्रयास से छोटे साधन भी बड़ा परिणाम दे सकते हैं.
- **सीमित पूंजी में स्पष्ट योजना:** सफलता के लिए लाखों का दिखावा जरूरी नहीं है, बल्कि 2 लाख की पूंजी का भी सही प्रबंधन 4 लाख की आमदनी दिला सकता है. अनुशासन और निरंतर देखभाल ही वास्तविक पूंजी है.

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