# झारखंड के दुमका में बंद कमरे में अंगीठी का धुआं भरने से 11 वर्षीय बच्ची ने तोड़ा दम, मां और दो बच्चियां भर्ती

> दुमका के बेहराबांक गांव में ठंड से बचाव के लिए जलाई गई अंगीठी से दम घुटने के कारण 11 साल की बच्ची की जान चली गई, जबकि मां समेत दो बच्चियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है.

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-dumka-men-bnda-kamare-men-angithi-ka-dhuan-bharane-se-11-varshiya-bachchi-ne-tora-dama-man-aura-do-bachchiyan-bharti-55534 · **Language:** Hindi
**Tags:** दुमका समाचार, झारखंड दुर्घटना, अंगीठी से दम घुटा, बेहराबांक गांव, मुफस्सिल थाना, निक्कू कुमारी, सर्दियों में सुरक्षा

झारखंड के दुमका जिले से ठंड के मौसम में लापरवाही और दर्दनाक हादसे का एक गंभीर मामला सामने आया है. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेहराबांक गांव में रात के वक्त ठंड से राहत पाने के लिए कमरे में जलाई गई अंगीठी एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई. बंद कमरे में अंगीठी का जहरीला धुआं लगातार भरता रहा, जिससे सोते समय ही परिवार के सदस्यों का दम घुटने लगा. इस दुखद घटना में 11 साल की एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से अचेत मां और दो अन्य बच्चियों को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

## नवजात को सर्दी से बचाने के लिए कमरे में जलाई थी अंगीठी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस परिवार में महज 11 दिन पहले एक नवजात बच्ची का जन्म हुआ था. बदलते मौसम और कड़ाके की ठंड से नवजात बच्ची को सुरक्षित रखने और कमरे में गर्माहट बनाए रखने के उद्देश्य से परिजनों ने रात में अंगीठी सुलगाई थी. अंगीठी जलाने के बाद परिवार के सभी लोग कमरे की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह बंद करके सो गए. रातभर वेंटिलेशन न होने की वजह से कमरे के भीतर धुआं और हानिकारक गैसें जमा होती रहीं, जिसका अहसास गहरी नींद में सो रहे लोगों को बिल्कुल नहीं हो सका.

## खिड़की तोड़कर अंदर पहुंचे पड़ोसी, कमरे में अचेत मिले लोग
सुबह जब काफी देर बीत जाने के बाद भी उस घर से कोई हलचल नहीं हुई और परिवार का कोई भी सदस्य बाहर नहीं निकला, तो पास-पड़ोस के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई. स्थानीय लोगों ने बाहर से कई बार आवाजें लगाईं, मगर कमरे के अंदर से कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं आया. इसके बाद ग्रामीणों ने खिड़की से अंदर झांक कर देखा, तो वहां सभी लोग बेसुध पड़े हुए थे. स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए ग्रामीणों ने तुरंत खिड़की तोड़ी और घर के भीतर प्रवेश किया. अंदर मां और तीनों बच्चियां अचेत अवस्था में पड़ी हुई थीं. ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए सभी को एक-एक कर बाहर निकाला.

## अस्पताल पहुंचते ही बच्ची को घोषित किया मृत, तीन का उपचार जारी
स्थानीय निवासियों की सक्रिय सहायता से तुरंत सभी प्रभावितों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने जांच के उपरांत 11 वर्षीय निक्कू कुमारी को मृत घोषित कर दिया. वहीं अचेत मिली मां और दो अन्य बच्चियों को फौरन आपातकालीन वार्ड में भर्ती कर उनका उपचार प्रारंभ किया गया. तीनों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है.

## दम घुटने से अनहोनी की आशंका, जांच के बाद साफ होगी स्थिति
घटना की प्रारंभिक परिस्थितियों को देखते हुए यही आशंका जताई जा रही है कि कमरे के सभी खिड़की-दरवाजे बंद रहने और अंगीठी का धुआं भर जाने के कारण ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई, जिससे परिवार का दम घुट गया. हालांकि मौत के सटीक कारणों और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि चिकित्सीय रिपोर्ट और संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से पूरे गांव और पीड़ित परिवार में गहरा शोक व्याप्त है, जहां परिजन एक बेटी को खोने के सदमे में हैं और अस्पताल में भर्ती सदस्यों के स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

## इसका आप पर असर
सर्दियों के दिनों में बंद कमरों के भीतर अंगीठी या कोयला जलाकर सोना अत्यंत घातक हो सकता है, जिससे ऑक्सीजन खत्म होने पर व्यक्ति नींद में ही बेसुध हो जाता है.

- **भारत में:** ठंड के मौसम में किसी भी कमरे में अंगीठी, अलाव या हीटर जलाते समय ताजी हवा की आवाजाही के लिए कम से कम एक खिड़की या रोशनदान अवश्य खुला रखें. सोने से पहले आग या अंगीठी को पूरी तरह बुझा देना चाहिए ताकि बंद कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड या धुएं का स्तर न बढ़ सके.
- **दुमका में:** बेहराबांक गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को नवजात बच्चों को गर्म रखने के लिए पारंपरिक अंगीठी के सुरक्षित उपयोग के प्रति सतर्क रहना होगा. कमरे को गर्म करते समय बंद खिड़की-दरवाजों में वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखें ताकि ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके.
- **स्वास्थ्य संबंधी सावधानी:** यदि घर के किसी सदस्य को बंद कमरे में हल्का सिरदर्द, चक्कर या भारीपन महसूस हो, तो तुरंत बाहर खुली हवा में आएं. समय रहते बाहर निकलने और ताजी हवा मिलने से सांस की गंभीर समस्याओं और दम घुटने से बचा जा सकता है.
- **आपातकालीन कदम:** अचेत व्यक्ति को तुरंत खुले हवादार स्थान पर लाएं और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. स्थानीय स्तर पर त्वरित मदद मिलने से पीड़ित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह हादसा अत्यधिक ठंड के दौरान बंद कमरे में वेंटिलेशन न होने और अंगीठी का धुआं लगातार कमरे में भरते रहने की वजह से घटित हुआ.

- **सीधा कारण:** कमरे के सारे खिड़की और दरवाजे रातभर पूरी तरह बंद रखे गए थे, जिसके कारण अंगीठी से निकलने वाले धुएं को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला.
- **अनुकूल परिस्थितियां:** घर में जन्मी महज 11 दिन की नवजात बच्ची को ठंड से बचाने के लिए कमरे को गर्म रखने का प्रयास किया जा रहा था, जिसके चलते परिजनों ने अंगीठी जलाई थी.
- **जांच की स्थिति:** हालांकि दम घुटने को ही प्राथमिक तौर पर मौत का कारण माना जा रहा है, परंतु पुलिस जांच और अस्पताल की अंतिम मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही कारणों की आधिकारिक पुष्टि होगी.

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना झारखंड के किस क्षेत्र में हुई?
यह घटना दुमका जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित बेहराबांक गांव में घटी.

### 2. परिवार ने रात में कमरे में अंगीठी क्यों जलाई थी?
घर में मौजूद 11 दिन की नवजात बच्ची को ठंड से बचाने और कमरे में गर्माहट बनाए रखने के लिए अंगीठी जलाई गई थी.

### 3. इस दुखद हादसे में किसकी मौत हुई है?
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने 11 साल की बच्ची निक्कू कुमारी को मृत घोषित कर दिया.

### 4. ग्रामीणों को घटना के बारे में कैसे पता चला?
सुबह काफी देर तक परिवार के किसी सदस्य के बाहर न आने पर पड़ोसियों ने आवाज लगाई और फिर खिड़की से झांककर देखा, जहां सभी अचेत मिले.

### 5. अस्पताल में वर्तमान में किन लोगों का उपचार चल रहा है?
अस्पताल में बच्ची की मां और दो अन्य बच्चियों का इलाज जारी है.

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