# झारखंड के कोडरमा में 7 वर्ष के अंतराल के बाद लौटेगा भव्य गोपाष्टमी मेला, 17 नवंबर से शुरू होंगे सांस्कृतिक उत्सव

> कोडरमा में कोरोना महामारी के समय से स्थगित ऐतिहासिक गोपाष्टमी मेले का आयोजन 7 वर्ष बाद पुनः होने जा रहा है, जिसमें 17 से 21 नवंबर तक विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और झांकियां सजेंगी।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-koderma-men-7-varsha-ke-antarala-ke-bada-lautega-bhavya-gopashtami-mela-17-navnbara-se-shuru-honge-sanskritika-utsava-56634 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोडरमा, गोपाष्टमी मेला, झारखंड, श्री कोडरमा गौशाला समिति, कृष्ण लीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम

झारखंड के कोडरमा जिले में सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को संजोने वाला ऐतिहासिक गोपाष्टमी मेला सात वर्ष के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ लौटने जा रहा है। कोरोना काल की परिस्थितियों के चलते इस पारंपरिक आयोजन को रोक दिया गया था, जिसे अब पूरे उत्साह के साथ दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया है। श्री कोडरमा गौशाला समिति द्वारा संचालित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। गौशाला परिसर में रंग-रोगन, मरम्मत और सजावट के कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं, ताकि हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए एक आनंददायक वातावरण तैयार किया जा सके।

श्री कोडरमा गौशाला समिति के कार्यकारी सचिव जितेंद्र कुमार अरुण के अनुसार, इस प्रतिष्ठित मेले का उद्देश्य गौ संवर्धन और धार्मिक रीति-रिवाजों को सहेजने के साथ-साथ क्षेत्रवासियों को स्वस्थ पारिवारिक मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का साझा मंच प्रदान करना है। आयोजन को सुचारू और व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए समिति ने राम रतन महर्षि और प्रदीप खाटूवाला को मेला मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों पदाधिकारी मेला मैदान की व्यवस्थाओं और समन्वय की निगरानी कर रहे हैं।

## भगवान श्रीकृष्ण की 28 प्रतिमाएं और मीना बाजार बनेंगे प्रमुख आकर्षण
इस बार मेले का केंद्रीय आकर्षण गौशाला परिसर में स्थापित की जाने वाली भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल और युवा लीलाओं पर आधारित 28 विशेष प्रतिमाएं होंगी। स्थानीय और कुशल मूर्तिकार इन प्रतिमाओं को सजीव रूप देने में जुटे हैं। एक ही स्थल पर भगवान कृष्ण से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों की सजीव झांकियों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

धार्मिक आयोजनों के अलावा मेले में बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। परिसर में विशाल झूले स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू उपयोग की वस्तुओं और पारंपरिक शिल्प के लिए प्रसिद्ध मीना बाजार, खिलौनों की अनेक दुकानें और स्वादिष्ट व्यंजनों के विविध फूड स्टॉल भी मेले के मुख्य आकर्षण होंगे। यह व्यवस्था पूरे परिवार को एक साथ खरीदारी और खानपान का भरपूर अवसर प्रदान करेगी।

## पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण
मेले के दौरान 17 नवंबर से लेकर 21 नवंबर तक प्रतिदिन विशिष्ट सांस्कृतिक और साहित्यिक मंच सजाए जाएंगे। समिति ने पांचों दिनों के कार्यक्रमों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की है

- **17 नवंबर:** उद्घाटन दिवस पर कोडरमा जिले के प्रतिभाशाली स्थानीय गायकों और वादकों द्वारा भुले-बिसरे पुराने गीतों की संगीतमयी शाम सजाई जाएगी।
- **18 नवंबर:** दूसरे दिन विख्यात जादूगर शंकर सम्राट के हैरतअंगेज जादू के शो का मंचन होगा, जो बच्चों और बड़ों को रोमांचित करेगा।
- **19 नवंबर:** तीसरे दिन विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच इंटर स्कूल समूह नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्कूली प्रतिभागी अपनी कला प्रस्तुत करेंगे।
- **20 नवंबर:** चौथे दिन इंटर स्कूल चित्रकला प्रतियोगिता के साथ-साथ हास्य नाटिका प्रतियोगिता कराई जाएगी, जिसमें छात्र अपनी रचनात्मक और अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
- **21 नवंबर:** मेले के अंतिम दिन एक भव्य हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसके साथ पांच दिवसीय ऐतिहासिक उत्सव का औपचारिक समापन किया जाएगा।

## सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के कड़े इंतजाम
इस ऐतिहासिक उत्सव में कोडरमा जिले के स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त निकटवर्ती क्षेत्रों जैसे बरही, बरकट्ठा, गिरिडीह और राजधनवार से भी भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है। दर्शकों की भारी संभावित तादाद को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

कार्यकारी सचिव जितेंद्र कुमार अरुण ने स्पष्ट किया कि मेले में शांति, कानून व्यवस्था और सहज आवागमन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन के जवानों के साथ-साथ एनसीसी कैडेटों की भी सक्रिय तैनाती की जाएगी। स्वयंसेवकों और सुरक्षाकर्मियों की यह संयुक्त व्यवस्था महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी असुविधा से बचाएगी। सात वर्षों के विराम के पश्चात पुनः प्रारंभ हो रहा यह मेला कोडरमा के पुराने सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक वैभव को नई ऊर्जा प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

## इसका आप पर असर
कोडरमा और आसपास के क्षेत्रों के परिवारों, व्यापारियों और छात्र-छात्राओं के लिए सात साल बाद लौट रहा यह मेला सांस्कृतिक मेलजोल और मनोरंजन के नए अवसर ला रहा है।

- **झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में:** बरही, बरकट्ठा, गिरिडीह और राजधनवार के ग्रामीण व शहरी परिवारों को पांच दिनों तक एक संपूर्ण सांस्कृतिक मंच और पारिवारिक सैर-सपाटे का सुरक्षित गंतव्य मिलेगा। विभिन्न जिलों से आने वाले आगंतुकों के कारण स्थानीय परिवहन और छोटे व्यापारियों की दैनिक आय में वृद्धि दर्ज होगी।
- **कोडरमा शहर में:** स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों को 19 और 20 नवंबर को आयोजित प्रतियोगिताओं में अपनी कला, नृत्य और अभिनय प्रदर्शित करने का बड़ा मंच प्राप्त होगा। नगर के खुदरा दुकानदारों और खानपान विक्रेताओं को पांच दिनों के दौरान अतिरिक्त मौसमी कारोबार का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचेगा।
- **मेले में जाने वाले परिवारों के लिए:** गौशाला परिसर में एनसीसी कैडेटों और पुलिस की संयुक्त निगरानी के कारण सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध रहेगा, जिससे भीड़भाड़ में भी सुरक्षित आवाजाही संभव होगी। श्रद्धालु एक ही स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण की 28 लीलाओं की झांकियों के दर्शन के साथ बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की खरीदारी का आनंद ले सकेंगे।
- **स्थानीय कलाकारों के लिए:** उद्घाटन दिवस पर भूले-बिसरे गीतों की प्रस्तुति से लेकर समापन के कवि सम्मेलन तक क्षेत्रीय प्रतिभाओं को व्यापक जनसमूह के सामने अपनी प्रस्तुति देने का सीधा अवसर मिलेगा। सांस्कृतिक गतिविधियों के दोबारा शुरू होने से क्षेत्र की पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
कोडरमा का यह पारंपरिक गोपाष्टमी मेला पिछले सात वर्षों से कोविड महामारी के समय लागू हुए प्रतिबंधों और उसके बाद के घटनाक्रमों के कारण आयोजित नहीं हो सका था।

- **महामारी के प्रतिबंध:** वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सामूहिक आयोजनों और मेलों पर सरकारी स्तर पर सख्त पाबंदियां लगाई गई थीं, जिसके चलते इस ऐतिहासिक मेले को स्थगित करना पड़ा था। हालात सामान्य होने के बाद भी प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर इसे फिर से खड़ा करने में लंबा समय लगा।
- **समिति का पुनरुद्धार निर्णय:** श्री कोडरमा गौशाला समिति ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस वर्ष इसे भव्य स्तर पर आयोजित करने का औपचारिक संकल्प लिया। समिति ने व्यवस्था को संभालने के लिए विशेष मेला मंत्रियों की नियुक्ति करके तैयारियों को गति दी।
- **आयोजन की भविष्य की दिशा:** गौशाला समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व स्वच्छता के कड़े प्रबंध किए गए हैं ताकि यह आयोजन बिना किसी अवरोध के शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके। सफल आयोजन के बाद इस मेले को हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित करने की परंपरा को फिर से स्थापित किया जाएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. कोडरमा का गोपाष्टमी मेला कितने वर्षों बाद आयोजित हो रहा है?
यह ऐतिहासिक मेला कोरोना महामारी के समय से बंद रहने के बाद सात साल के अंतराल पर दोबारा आयोजित हो रहा है।

### 2. मेले की तिथियां क्या हैं और यह कितने दिनों तक चलेगा?
यह मेला कुल पांच दिनों तक चलेगा और इसका आयोजन 17 नवंबर से 21 नवंबर तक किया जाएगा।

### 3. मेले के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण क्या हैं?
परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित 28 प्रतिमाएं स्थापित होंगी, साथ ही झूले, मीना बाजार और फूड स्टॉल लगाए जाएंगे।

### 4. मेले के विभिन्न दिनों में कौन-से मुख्य कार्यक्रम होंगे?
17 नवंबर को स्थानीय गीतों का कार्यक्रम, 18 को शंकर सम्राट का जादू शो, 19 को नृत्य प्रतियोगिता, 20 को चित्रकला व हास्य नाटक और 21 नवंबर को हास्य कवि सम्मेलन होगा।

### 5. मेले की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं?
समिति ने राम रतन महर्षि और प्रदीप खाटूवाला को मेला मंत्री बनाया है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय पुलिस और एनसीसी कैडेट तैनात रहेंगे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._