# झारखंड के कोडरमा में मनीषा मेहता ने 20 हजार से शुरू किया मुर्गी पालन, हर महीने कमा रहीं 10 से 12 हजार रुपये

> झारखंड के कोडरमा जिले के भेलवाटांड़ गांव की मनीषा मेहता ने बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों का पालन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर उन्होंने महज 20 हजार रुपये में यह कारोबार शुरू किया था।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-koderma-men-manisha-mehta-ne-20-hajara-se-shuru-kiya-murgi-palana-hara-mahine-kama-rahin-10-se-12-hajara-rupaye-29961 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुर्गी पालन, स्वरोजगार, कोडरमा समाचार, झारखंड, महिला सशक्तिकरण, कृषि व्यवसाय, JSLPS

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर तेजी से उभर रहे हैं। झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित भेलवाटांड़ गांव की रहने वाली मनीषा मेहता ने कुक्कुट पालन के जरिए वित्तीय स्वावलंबन का एक बेहतरीन मार्ग तैयार किया है। उन्होंने अपने गांव में ही छोटा सा पोल्ट्री फार्म स्थापित कर न केवल अपनी आमदनी का साधन बनाया है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

## 20 हजार रुपये के शुरुआती खर्च से खड़ा किया पोल्ट्री फार्म
मनीषा मेहता ने वर्ष 2025 में अपने घर के करीब 1000 वर्गफीट की जगह में मुर्गी पालन की नींव रखी थी। व्यवसाय के शुरुआती ढांचे को समझने के बाद उन्होंने 100 मुर्गियों की क्षमता वाला एक केज स्थापित किया। सामान्य तौर पर 100 मुर्गियों के इस पूरे केज सेटअप को तैयार करने में लगभग 1,08,560 रुपये की लागत आती है। हालांकि, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा दिए जाने वाले 80 प्रतिशत अनुदान की मदद से उनका व्यक्तिगत खर्च घटकर केवल 20,000 रुपये रह गया। इस सरकारी सहायता ने उनके शुरुआती वित्तीय जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया।

## BV 300 नस्ल की मुर्गियों से रोजाना 80 से 100 अंडों की पैदावार
अंडा उत्पादन के मामले में बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों को काफी बेहतर माना जाता है। मनीषा के केज में मौजूद 100 मुर्गियां प्रतिदिन औसतन 80 से 100 अंडों का उत्पादन करती हैं। बाजार में अंडों की नियमित बिक्री से प्रतिदिन होने वाली आय में से दाना, दवाइयां और अन्य रख-रखाव के खर्च निकालने के बाद भी उन्हें प्रतिदिन लगभग 400 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। इस प्रकार नियमित अंडा उत्पादन से एक स्थिर आय चक्र तैयार हो गया है।

## घरेलू कामकाज के साथ 10 से 12 हजार रुपये की मासिक आय
पोल्ट्री फार्म के संचालन के लिए दिन भर में केवल कुछ घंटों की देखभाल की आवश्यकता होती है। मनीषा बताती हैं कि घर के सभी दैनंदिन काम निपटाने के बाद वे आसानी से इस व्यवसाय की देखरेख कर लेती हैं। इससे उन्हें प्रति माह 10,000 से 12,000 रुपये तक की निश्चित आमदनी हो जाती है, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा कर पा रही हैं। मनीषा ने ग्रामीण महिलाओं का आह्वान किया है कि वे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार से जुड़ें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

## इसका आप पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पैमाने पर मुर्गी पालन और सरकारी अनुदान योजनाओं का उपयोग करके महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

- **भारत में:** देश भर में ग्रामीण महिलाएं छोटे पैमाने पर कुक्कुट पालन अपनाकर अतिरिक्त पारिवारिक आय अर्जित कर सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर अंडों की उपलब्धता बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
- **झारखंड और कोडरमा में:** राज्य सरकार की जेएसएलपीएस योजना के तहत 80 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठाकर स्थानीय महिलाएं मात्र 20,000 रुपये के निवेश से अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। इससे कोडरमा जिले के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
मनीषा मेहता के इस सफल व्यवसाय के पीछे उचित योजना, सही प्रजाति के चुनाव और सरकारी प्रोत्साहन की प्रमुख भूमिका रही है।

- **सरकारी सब्सिडी का सहयोग:** कुल 1,08,560 रुपये की लागत वाले सेटअप पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से 80 प्रतिशत अनुदान मिला, जिससे शुरुआती लागत घटकर 20,000 रुपये रह गई।
- **उच्च उत्पादकता वाली प्रजाति:** बीवी 300 नस्ल की मुर्गियां प्रतिदिन 80 से 100 अंडों की उच्च पैदावार देती हैं, जो व्यवसाय की निरंतरता और लाभप्रदता सुनिश्चित करती हैं।
- **कम समय और स्थान की आवश्यकता:** 1000 वर्गफीट जगह और प्रतिदिन केवल कुछ घंटे की देखभाल से यह व्यवसाय घरेलू कामकाज के साथ भी आसानी से संचालित हो सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मनीषा मेहता ने मुर्गी पालन का व्यवसाय किस स्थान से शुरू किया?
उन्होंने झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत भेलवाटांड़ गांव से इस व्यवसाय की शुरुआत की।

### 2. 100 मुर्गियों के केज सेटअप की कुल लागत कितनी है और सरकारी अनुदान के बाद कितना खर्च आता है?
इस केज की कुल लागत 1,08,560 रुपये है, लेकिन जेएसएलपीएस से 80 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद यह व्यवसाय लगभग 20,000 रुपये में शुरू हो जाता है।

### 3. बीवी 300 प्रजाति की 100 मुर्गियों से रोजाना कितने अंडों का उत्पादन होता है?
100 मुर्गियों के एक केज से प्रतिदिन लगभग 80 से 100 अंडों का उत्पादन होता है।

### 4. खर्च निकालने के बाद इस व्यवसाय से प्रतिदिन और प्रति माह कितनी बचत होती है?
चारा और दवाओं का खर्च निकालने के बाद प्रतिदिन करीब 400 रुपये की बचत होती है, जिससे महीने में 10,000 से 12,000 रुपये की आमदनी हो जाती है।

## प्रेरणा और सबक
मनीषा मेहता की यह सफलता साबित करती है कि सीमित संसाधनों और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है।

- **सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं:** अपनी पूंजी लगाने से पहले उपलब्ध सरकारी अनुदानों और आजीविका मिशनों की जानकारी प्राप्त करें।
- **सही तकनीक और प्रजाति का चयन करें:** व्यवसाय शुरू करने से पहले उच्च उत्पादकता वाली नस्लों (जैसे बीवी 300) की जानकारी जुटाएं।
- **समय प्रबंधन पर ध्यान दें:** दैनिक प्राथमिकताओं के साथ संतुलन बनाकर छोटे समय में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।

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