# झारखंड के साहिबगंज में 1.20 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी का पर्दाफाश, पश्चिम बंगाल से 3 आरोपी गिरफ्तार

> साहिबगंज में सीबीआई अधिकारी बनकर एक नागरिक को व्हाट्सऐप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर 1.20 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह के 3 सदस्यों को पुलिस ने दुर्गापुर से गिरफ्तार किया है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ke-sahibganj-men-1-20-karora-rupaye-ki-dijitala-aresta-thagi-ka-pardaphasha-west-bengal-se-3-aropi-giraphtara-30289 · **Language:** Hindi
**Tags:** डिजिटल अरेस्ट, साहिबगंज पुलिस, साइबर अपराध, झारखंड समाचार, दुर्गापुर गिरफ्तारी, सीबीआई फ्रॉड

झारखंड के साहिबगंज जिले में साइबर अपराधियों द्वारा एक व्यक्ति को मानसिक दबाव में लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये ऐंठने के एक बड़े मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बरहरवा थाना क्षेत्र के निवासी गौतम दास को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया और उनसे करोड़ों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन आरोपियों को पश्चिम बंगाल से दबोच लिया है। इस कार्रवाई से साइबर ठगों के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है।

## सीबीआई अधिकारी बनकर दिया डिजिटल अरेस्ट का झांसा
साइबर अपराध के इस सनसनीखेज मामले में जालसाजों ने पीड़ित गौतम दास से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क साधा था। फोन करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और पीड़ित पर गंभीर कानूनी कार्रवाई का आरोप लगाकर दबाव बनाया। आरोपियों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि वह किसी गंभीर जांच के दायरे में है और उसे तुरंत डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। फर्जी अदालती मुकदमों और गिरफ्तारी की लगातार धमकी देकर पीड़ित को मानसिक रूप से बेबस कर दिया गया। इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी दी और उनसे 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

## साहिबगंज पुलिस ने गठित की विशेष जांच टीम
जब पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित की शिकायत के आधार पर 31 अगस्त 2026 को साहिबगंज जिले के बरहरवा थाने में साइबर धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इतनी बड़ी रकम की ठगी को देखते हुए साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक ने मामले में तुरंत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर सेल के नोडल अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने पीड़ित के बैंक स्टेटमेंट और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण शुरू किया और तकनीकी शाखा की मदद से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला।

## पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में छापेमारी कर 3 आरोपी दबोचे गए
तकनीकी जांच के दौरान एसआईटी को साइबर अपराधियों के लोकेशन के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने रंजीत बख्शी और असित महतो नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने गिरोह के अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी दी। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके तीसरे साथी धीरज हारी को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को साहिबगंज लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

## 4 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंची ठगी की रकम
पुलिस की शुरुआती जांच में इस साइबर सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का जो खाका सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। जांच टीम ने पाया कि पीड़ित से ठगे गए 1.20 करोड़ रुपये किसी एक या दो खातों में नहीं, बल्कि 4 हजार से भी अधिक बैंक खातों के विशाल नेटवर्क में भेजे गए थे। आरोपियों ने पैसे का सुराग मिटाने के लिए कई स्तरों पर लेनदेन किया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। अब पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इन सभी खातों के तार जोड़ने और पैसे के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

## बिहार, यूपी और बंगाल तक जुड़े हैं गिरोह के तार
साहिबगंज पुलिस का मानना है कि यह केवल कुछ लोगों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह काम कर रहा है। साहिबगंज के डीएसपी मुख्यालय रविकांत साव ने बताया कि एसआईटी मामले की हर पहलू से गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क की जड़ें पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह में शामिल अन्य मास्टरमाइंडों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

## इसका आप पर असर
डिजिटल अरेस्ट और साइबर जालसाजी के बढ़ते मामलों के बीच इस घटना से आम नागरिकों और ऑनलाइन बैंकिंग उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा सावधानियों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

- **भारत में:** केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर होने वाले डिजिटल अरेस्ट घोटालों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है। सरकारी एजेंसियां कभी भी व्हाट्सऐप वीडियो या वॉइस कॉल पर किसी को हिरासत में नहीं लेतीं और न ही खातों से पैसे ट्रांसफर करने को कहती हैं।
- **झारखंड में:** साहिबगंज और आसपास के जिलों के निवासियों को अनजान नंबरों से आने वाली कानूनी धमकियों के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। स्थानीय पुलिस और साइबर सेल अब अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर रही है।
- **खाता सुरक्षा के संदर्भ में:** ऑनलाइन लेनदेन और बैंक खातों की सुरक्षा के लिए किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान कॉल पर अपनी वित्तीय जानकारी साझा न करें। यदि आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
- **म्यूल खातों पर कार्रवाई:** बैंक खातों का दुरुपयोग रोकने के लिए बैंकों द्वारा संदिग्ध लेनदेन की निरंतर निगरानी की जा रही है। किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता किराए पर देना या लेनदेन के लिए इस्तेमाल करने देना कानूनी अपराध है।

## ऐसा क्यों हुआ
साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी अधिकारियों का रूप धरकर आम लोगों को मानसिक दबाव में लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। इस मामले के पीछे की वजहों और साइबर नेटवर्क की कार्यप्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है।

- **सीबीआई अधिकारी बनने का ढोंग:** ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए प्रतिष्ठित जांच एजेंसी का नाम इस्तेमाल किया। फर्जी कानूनी मुकदमों और गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ित की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित किया गया।
- **व्हाट्सऐप तकनीक का दुरुपयोग:** जालसाजों ने व्हाट्सऐप कॉल और डिजिटल अरेस्ट के जरिए पीड़ित पर लगातार निगरानी रखी। इससे पीड़ित को परिवार या पुलिस से संपर्क करने का मौका नहीं मिला।
- **अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क:** पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में फैले इस गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों पर बनाए गए बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम को तेजी से हजारों खातों में बांट दिया जाता है ताकि मुख्य आरोपियों तक पहुंचना कठिन हो।
- **तकनीकी जांच और त्वरित कार्रवाई:** बरहरवा थाने में 31 अगस्त 2026 को मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने बैंक खातों के लेनदेन और कॉल डिटेल का गहन विश्लेषण किया। तकनीकी शाखा के साक्ष्यों के आधार पर ही पुलिस की विशेष टीम दुर्गापुर पहुंचकर आरोपियों को दबोचने में सफल रही।

## सवाल-जवाब

### 1. साहिबगंज में डिजिटल अरेस्ट के जरिए कितने रुपये की ठगी हुई?
साइबर अपराधियों ने पीड़ित से 1 करोड़ 20 लाख रुपये (1.20 करोड़ रुपये) की ठगी की।

### 2. ठगी का शिकार हुए पीड़ित का नाम क्या है और वह कहां के निवासी हैं?
पीड़ित का नाम गौतम दास है, जो झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

### 3. पुलिस ने इस मामले में कहां से और कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस की एसआईटी ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से रंजीत बख्शी और असित महतो को गिरफ्तार किया, और उनकी निशानदेही पर तीसरे आरोपी धीरज हारी को पकड़ा।

### 4. साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को कितने बैंक खातों में ट्रांसफर किया था?
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी के पैसे का लेनदेन 4 हजार से अधिक बैंक खातों के नेटवर्क में हुआ था।

### 5. इस मामले में पुलिस में शिकायत कब दर्ज कराई गई थी?
पीड़ित की शिकायत के आधार पर 31 अगस्त 2026 को साहिबगंज के बरहरवा थाने में मामला दर्ज किया गया था।

### 6. साइबर ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए किस एजेंसी का अधिकारी बताया था?
ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._