झारखंड की जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में होटल ले जाकर सवाल रटवाने वाला आरोपी राजन कुमार गिरफ्तार, सीआईडी को मिले कई राज झारखंड सीआईडी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा गड़बड़ी मामले में बिहार निवासी राजन कुमार को गिरफ्तार किया, जो अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के एक होटल में ले जाकर सवाल-जवाब रटवाता था। पूछताछ में सामने आया कि वह आईसीएन संचालक मिथिलेश सिंह के सिंडिकेट के लिए बिचौलिए का काम करता था। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल प्रतियोगी परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच में झारखंड सीआईडी ने एक और आरोपी को दबोच लिया है। पकड़े गए शख्स की पहचान राजन कुमार के रूप में हुई है, जो बिहार के पटना जिले के नेवरा थाना क्षेत्र स्थित श्री चंद्रपुर गांव का निवासी बताया जा रहा है। सीआईडी की टीम ने उसे 7 सितंबर यानी सोमवार को हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में राजन ने परीक्षा में हुई धांधली से जुड़े कई अहम राज उगल दिए। होटल में करवाई जाती थी सवालों की तैयारी जांच एजेंसी के मुताबिक राजन कुमार परीक्षा से ठीक पहले उम्मीदवारों को पश्चिम बंगाल के नियामतपुर इलाके में स्थित एक होटल में ठहरा देता था। वहां उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब रटवाए जाते थे, ताकि वे परीक्षा हॉल में बिना किसी दिक्कत के सही जवाब लिख सकें। पड़ताल में यह भी सामने आया कि इसी तरीके से कई अभ्यर्थियों को गैरकानूनी ढंग से मदद पहुंचाई गई, जिससे वे बाकी उम्मीदवारों के मुकाबले परीक्षा में बढ़त हासिल कर सके। कुछ अभ्यर्थी जिन्हें यह मदद मिली, वे परीक्षा में पास भी हो गए। यही बात अब सीआईडी की जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गई है, क्योंकि एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इन उम्मीदवारों तक पेपर के सवाल-जवाब पहुंचे कैसे। राजन की गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ जारी है और जांचकर्ता इस पूरे रैकेट की एक-एक कड़ी जोड़ने में लगे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में राजन के अलावा और कौन-कौन शामिल था, सवाल-जवाब किसने मुहैया कराए और इस पूरी सौदेबाजी में पैसों का लेन-देन किस तरह हुआ। सिंडिकेट में बिचौलिए की भूमिका निभाता था राजन जांच में खुलासा हुआ है कि राजन कुमार उस सिंडिकेट से जुड़ा था, जिसे परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी आईसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह चलाते हैं। मिथिलेश सिंह भी मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले बताए जाते हैं। दोनों की मुलाकात अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान हुई थी, जिसके बाद मिथिलेश ने राजन को एक खास काम सौंप दिया, अभ्यर्थियों से संपर्क करना, उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिलाना और बदले में उनसे मोटी रकम वसूलना। राजन उम्मीदवारों से जो पैसे वसूलता था, उसे आगे मिथिलेश तक पहुंचा देता था और इस काम के बदले उसे तय कमीशन मिलता था। इससे पहले सीआईडी दिल्ली से आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस रिमांड पर हुई पूछताछ में इन दोनों ने ही राजन के ठिकाने और सिंडिकेट में उसकी भूमिका को लेकर अहम जानकारियां दी थीं। इन्हीं सुरागों के आधार पर सीआईडी की टीम राजन तक पहुंची और उसे दबोच लिया। जांच अब भी जारी सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ राजन और मिथिलेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। एजेंसी उन सभी बिचौलियों और मददगारों की पहचान करने में जुटी है, जो परीक्षा में सेटिंग कराने के इस पूरे खेल में शामिल रहे होंगे। जांच पूरी होने के बाद आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। इसका आप पर असर इस गिरफ्तारी से साफ है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में सेटिंग और नकल कराने वाले गिरोह अब भी सक्रिय हैं, इसलिए अभ्यर्थियों को इनके झांसे में आने से बचना चाहिए। • भारत में: देशभर में चल रही भर्ती परीक्षाओं की साख पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। अभ्यर्थियों को किसी भी एजेंट या दलाल के जरिए सीट पक्की कराने के दावों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना कानूनी कार्रवाई का सामना करने का जोखिम भी बढ़ाता है। • झारखंड में: जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जिन अभ्यर्थियों को सिंडिकेट के जरिए मदद मिली थी, उनके नतीजों की समीक्षा हो सकती है। झारखंड में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को आगे परिणाम रद्द होने या दोबारा परीक्षा जैसी स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। • निगरानी बढ़ेगी: सीआईडी की जांच के बाद परीक्षा एजेंसी आईसीएन और उससे जुड़े केंद्रों पर आगे की परीक्षाओं में सुरक्षा जांच और निगरानी और सख्त हो सकती है। • बिचौलियों पर शिकंजा: जो लोग अभ्यर्थियों से पैसे लेकर सेटिंग का वादा करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो सकती है, जिससे ऐसे गिरोह चलाने वालों को गिरफ्तारी का डर बढ़ेगा। ऐसा क्यों हुआ इस गड़बड़ी की जड़ में एक संगठित सिंडिकेट है, जो परीक्षा से पहले ही चुनिंदा अभ्यर्थियों तक सवाल और जवाब पहुंचा देता था। सीआईडी की जांच में अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक यह पूरा नेटवर्क पैसों के लेन-देन पर टिका था। • सिंडिकेट की भूमिका: जांच में सामने आया कि परीक्षा एजेंसी आईसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह ने ही यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया था और राजन कुमार जैसे बिचौलियों की मदद से अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाई। • पैसों का लालच: राजन अभ्यर्थियों से रकम वसूलकर मिथिलेश तक पहुंचाता था और बदले में उसे कमीशन मिलता था, यानी पूरा खेल पैसों के लेन-देन पर आधारित था। • पहले की गिरफ्तारियां: इससे पहले आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार की गिरफ्तारी और उनकी पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर ही सीआईडी राजन तक पहुंच सकी थी। • आगे की जांच: सीआईडी अभी यह पता लगाने में जुटी है कि सवाल-जवाब मूल रूप से किसने लीक किए या तैयार कराए, इसलिए मामले की पूरी तह तक पहुंचने में अभी वक्त लग सकता है। सवाल-जवाब 1. राजन कुमार कौन है और उसे कब गिरफ्तार किया गया? राजन कुमार बिहार के पटना जिले के नेवरा थाना क्षेत्र स्थित श्री चंद्रपुर गांव का रहने वाला है, जिसे झारखंड सीआईडी ने 7 सितंबर को गिरफ्तार किया। 2. राजन कुमार पर क्या आरोप है? आरोप है कि वह जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ले जाकर परीक्षा के सवाल-जवाब रटवाता था। 3. राजन का सिंडिकेट से क्या संबंध था? राजन परीक्षा एजेंसी आईसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह के सिंडिकेट के लिए बिचौलिए का काम करता था और अभ्यर्थियों से पैसे लेकर मिथिलेश तक पहुंचाता था। 4. सीआईडी राजन तक कैसे पहुंची? आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार की गिरफ्तारी और पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी ने राजन को गिरफ्तार किया। 5. अब सीआईडी की जांच में क्या हो रहा है? सीआईडी यह पता लगा रही है कि सिंडिकेट में और कौन शामिल था, सवाल-जवाब किसने उपलब्ध कराए और इस मामले में पैसों का लेन-देन किस तरह हुआ। https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ki-jssc-cgl-pariksha-men-hotala-le-jakara-savala-ratavane-vala-aropi-rajan-kumar-giraphtara-cid-ko-mile-kai-raja-29353 TrendKia — Har trend, sabse pehle.