झारखंड को मिलेगी 1600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली, संसद में केंद्र ने दिया प्रोजेक्ट्स का पूरा ब्योरा राज्यसभा में झारखंड की बिजली उत्पादन क्षमता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि राज्य में तीन नई थर्मल यूनिट्स पर काम चल रहा है, जिनसे 1600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी। झारखंड में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़ा सवाल संसद के ऊपरी सदन में सामने आया, जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने राज्य में चल रहे थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स की पूरी तस्वीर पेश की। सांसद परिमल नथवाणी ने राज्यसभा में सवाल पूछा था कि झारखंड में बीते पांच बरसों के दौरान कौन सी नई थर्मल पावर परियोजनाएं शुरू हुईं, कौन सी अभी बन रही हैं और किन्हें मंजूरी मिली है। इसके जवाब में केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने सदन को बताया कि राज्य में इस वक्त तीन बड़ी थर्मल यूनिट्स पर निर्माण कार्य चल रहा है। कोडरमा और पतरातू में लग रहीं नई यूनिट्स मंत्री के मुताबिक कोडरमा में थर्मल पावर परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत 800-800 मेगावाट की दो नई यूनिट्स लगाई जा रही हैं, जिनसे राज्य को कुल 1600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता हासिल होगी। इसके अलावा पतरातू में 800 मेगावाट क्षमता की तीसरी यूनिट भी निर्माणाधीन है और इसके चालू होते ही झारखंड की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में और इजाफा होगा। पांच साल में जुड़ी 2780 मेगावाट क्षमता सरकार ने सदन को यह भी जानकारी दी कि बीते पांच वर्षों के दौरान झारखंड में कुल 2780 मेगावाट क्षमता के थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा चुके हैं। इस सूची में नॉर्थ कर्णपुरा की तीन यूनिट्स भी हैं, जिनकी क्षमता 660-660 मेगावाट है, और पतरातू की पहली यूनिट भी शामिल है, जिसकी क्षमता 800 मेगावाट है। कौन कर रहा है निर्माण लिखित जवाब में यह भी साफ किया गया कि कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन का निर्माण दामोदर वैली कॉर्पोरेशन यानी डीवीसी करा रही है, जबकि पतरातू की तीसरी यूनिट का काम पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड यानी पीवीयूएनएल के जिम्मे है। यह कंपनी एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की साझा उद्यम है। स्वच्छ ऊर्जा पर भी जोर केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने आगे कहा कि सरकार का ध्यान सिर्फ पारंपरिक बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी उतनी ही तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत सौर ऊर्जा के साथ-साथ हरित हाइड्रोजन और दूसरी नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं को रफ्तार दी जा रही है, ताकि बढ़ती बिजली मांग और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल बना रहे। इसका आप पर असर • भारत में: देशभर में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए थर्मल क्षमता बढ़ाने और साथ ही सौर व हरित हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं पर जोर, बिजली आपूर्ति व्यवस्था को आगे और मजबूत करेगा। • झारखंड में: कोडरमा और पतरातू की नई यूनिट्स चालू होने पर राज्य में उद्योगों और घरों को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिल सकती है और बिजली कटौती की समस्या घट सकती है। सवाल-जवाब 1. राज्यसभा में यह सवाल किसने पूछा था? सांसद परिमल नथवाणी ने झारखंड में थर्मल पावर परियोजनाओं को लेकर यह सवाल पूछा था। 2. सवाल का जवाब किसने दिया? केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने राज्यसभा में इसका जवाब दिया। 3. कोडरमा परियोजना से झारखंड को कितनी अतिरिक्त बिजली मिलेगी? कोडरमा की दो नई 800-800 मेगावाट यूनिट्स से राज्य को कुल 1600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता मिलेगी। 4. पतरातू में क्या निर्माण चल रहा है? पतरातू में 800 मेगावाट क्षमता की तीसरी यूनिट का निर्माण जारी है। 5. पिछले पांच वर्षों में झारखंड में कुल कितनी क्षमता की परियोजनाएं शुरू हुईं? पिछले पांच वर्षों में झारखंड में कुल 2780 मेगावाट क्षमता की थर्मल पावर परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें नॉर्थ कर्णपुरा की तीन 660 मेगावाट यूनिट्स और पतरातू की पहली 800 मेगावाट यूनिट शामिल है। 6. कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन का निर्माण कौन कर रहा है? कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन का निर्माण दामोदर वैली कॉर्पोरेशन यानी डीवीसी कर रही है। 7. पतरातू की तीसरी यूनिट किसकी जिम्मेदारी है? पतरातू की तीसरी यूनिट पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड यानी पीवीयूएनएल बना रही है, जो एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का साझा उपक्रम है। 8. सरकार स्वच्छ ऊर्जा को लेकर क्या कर रही है? सरकार सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं पर भी काम तेज कर रही है ताकि बिजली मांग और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बना रहे। https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-ko-milegi-1600-megavata-atirikta-bijali-snsada-men-centre-ne-diya-projektsa-ka-pura-byora-9413 TrendKia — Har trend, sabse pehle.