# झारखंड लोक सेवा आयोग विवाद की सुनवाई से अलग हुईं जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना, अब 5 अक्टूबर को नई बेंच करेगी विचार

> सुप्रीम कोर्ट में झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े विवाद की सुनवाई से जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना अलग हो गई हैं, क्योंकि वकील रहते हुए वह इस मामले में पैरवी कर चुकी थीं। अब दूसरी बेंच 5 अक्टूबर को छात्रों से जुड़ी अर्जियों और प्राथमिकियों पर सुनवाई करेगी।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-loka-seva-ayoga-vivada-ki-sunavai-se-alaga-huin-justice-venkita-subramani-mohana-aba-5-aktubara-ko-nai-bencha-karegi-vic-40058 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, जस्टिस वीएस मोहना, जेपीएससी विवाद, झारखंड लोक सेवा आयोग, न्यायिक प्रक्रिया, केवी विश्वनाथन

झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी से जुड़े एक संवेदनशील और बहुचर्चित विवाद की कानूनी प्रक्रिया में शीर्ष अदालत के स्तर पर एक अहम बदलाव हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ से जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना अलग हो गई हैं, जिसके बाद यह पूरा प्रकरण अब एक अन्य पीठ के समक्ष स्थानांतरित कर दिया गया है। न्यायिक मर्यादा और निष्पक्षता की परंपरा का पालन करते हुए यह कदम तब उठाया गया, जब कार्यवाही के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि पीठ में शामिल जज पूर्व में एक वकील के तौर पर इसी विवाद के कुछ पक्षकारों की तरफ से अदालत में पेश हो चुकी थीं।

## पुराने कानूनी जुड़ाव के चलते दूसरी पीठ को सौंपा गया मामला
अदालत में जब जेपीएससी से संबंधित याचिकाएं विचार के लिए आईं, तो यह तथ्य सामने रखा गया कि बार में वकालत के अपने दिनों में जस्टिस मोहना ने इस विवाद में शामिल कुछ पक्षों की ओर से पैरवी की थी। न्यायिक सिद्धांतों के तहत किसी भी मामले में हितों के संभावित टकराव को टालने और सुनवाई की पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पीठ बदलने का निर्णय लिया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की गई है, जहां एक नई पीठ याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करेगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष कुछ तात्कालिक राहत से जुड़ी मांगें रखी गई हैं। इसमें विशेष रूप से यह आग्रह किया गया है कि इस विवाद के संबंध में छात्रों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, इस पूरे मामले से जुड़ी सभी प्राथमिकी यानी एफआईआर की मूल प्रतियां अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। आने वाली 5 अक्टूबर की तारीख पर यह तय होने की उम्मीद है कि छात्रों की सुरक्षा और आयोग से जुड़े कानूनी विवाद पर अदालत का रुख क्या रहता है।

## पोल्लाची से शीर्ष अदालत तक का असाधारण सफर
इस प्रकरण के केंद्र में आईं जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में शामिल हुई हैं। केंद्र सरकार ने जून 2026 में उनकी पदोन्नति को हरी झंडी दी थी। उनके इस मनोनयन के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी जुड़ी है, क्योंकि वह बार से सीधे उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त होने वाली देश की दूसरी महिला अधिवक्ता बनी हैं। उनसे पहले वर्ष 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा को सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद पर नियुक्त किया गया था।

जस्टिस मोहना का व्यक्तिगत और शैक्षणिक सफर काफी प्रेरणादायी रहा है। उनका जन्म तमिलनाडु के पोल्लाची में हुआ, जहां वह 13 भाई-बहनों से भरे एक विशाल परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता ने पहले भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी थीं और बाद में तमिलनाडु सरकार के अधीन वरिष्ठ एंटोमोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत रहे। उस दौर में उनके घर का माहौल कड़े अनुशासन और अध्ययन के प्रति गहरे समर्पण से बंधा हुआ था।

उनकी माता औपचारिक शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे तक नहीं जा सकी थीं, किंतु उन्होंने अपनी बेटी के भीतर तार्किक बहस करने और सार्वजनिक मंचों पर बेबाकी से अपनी बात रखने की स्वाभाविक क्षमता को समय रहते पहचान लिया था। माता के इसी प्रोत्साहन ने उन्हें विधि के क्षेत्र को अपना करियर चुनने की दिशा दिखाई।

## शुरुआती बैच से वरिष्ठ अधिवक्ता और जज बनने का मुकाम
कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में भी जस्टिस मोहना देश के एक ऐतिहासिक बदलाव की साक्षी रहीं। उन्होंने वर्ष 1983 में प्रारंभ किए गए देश के सबसे पहले पांच वर्षीय एकीकृत बीए एलएलबी पाठ्यक्रम के शुरुआती बैच में प्रवेश लिया था। उन्होंने यह डिग्री कोयंबटूर लॉ कॉलेज से हासिल की। उस दौर में कानूनी शिक्षा के संसाधन बेहद सीमित हुआ करते थे और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते कक्षाएं भी किराए के भवनों में संचालित की जाती थीं।

इन तमाम चुनौतियों के बीच उन्होंने वर्ष 1988 में अपनी वकालत की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की और विधि व्यवसाय में कदम रखा। उसी दौर में उनके साथ अध्ययन करने वाले साथियों में केवी विश्वनाथन भी शामिल थे, जिन्होंने बाद में देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और अंततः सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में ख्याति प्राप्त की।

जस्टिस मोहना ने शीर्ष अदालत में वर्षों तक निरंतर वकालत की और जटिल कानूनी मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी उत्कृष्ट पैरवी और कानूनी दक्षता को मान्यता देते हुए वर्ष 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया था। इसके बाद जून 2026 में सीधे बार से शीर्ष अदालत की बेंच तक का उनका सफर भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। अब सबकी नजरें 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जेपीएससी और छात्रों से जुड़े कानूनी बिंदुओं पर नई पीठ निर्णय लेगी।

## इसका आप पर असर
झारखंड लोक सेवा आयोग मामले में नई पीठ के गठन से कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रभावित छात्रों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलेगा।

- **झारखंड में:** आयोग की परीक्षाओं और विवाद से प्रभावित अभ्यर्थियों के खिलाफ पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर मनमानी दंडात्मक कार्रवाई की आशंका पर फिलहाल विराम की उम्मीद बंधी है। छात्रों की निगाहें 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां दर्ज प्राथमिकियों की वैधता और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट होगी।
- **भारत में:** शीर्ष अदालत द्वारा हितों के संभावित टकराव पर अपनाए गए इस कड़े रुख से पूरे देश में न्यायपालिका की निष्पक्षता के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में विसंगतियों और प्रशासनिक मुकदमों से जूझ रहे अन्य राज्यों के छात्रों के लिए भी यह संदेश है कि उच्चतम स्तर पर निष्पक्ष न्यायिक समीक्षा सुनिश्चित की जाती है।
- **परीक्षार्थियों के अधिकार:** याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि किसी भी छात्र को दंडात्मक प्रक्रिया का निशाना न बनाया जाए। इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों को कानूनी संरक्षण मिलना आवश्यक है।
- **भविष्य की भर्ती प्रक्रियाएं:** राज्य सेवा आयोगों की परीक्षाओं में अनियमितताओं पर शीर्ष अदालत का रुख आगामी सभी परीक्षाओं के संचालन मानकों पर सीधा असर डालता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि सुनवाई कर रही जज पूर्व में वकील के रूप में इस मामले के पक्षकारों का प्रतिनिधित्व कर चुकी थीं, जिससे न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेंच बदलना आवश्यक हो गया।

- **पूर्व वकालत का इतिहास:** सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना ने निजी वकालत के दौरान इस मामले से जुड़े कुछ पक्षकारों की पैरवी की थी। किसी भी मामले में जज द्वारा पूर्व में पक्षकार का प्रतिनिधित्व करना हितों के टकराव का प्रत्यक्ष कारण बनता है।
- **न्यायिक शुचिता की परंपरा:** भारतीय न्याय व्यवस्था का बुनियादी सिद्धांत है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मामले को स्वतः दूसरी निष्पक्ष बेंच को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
- **छात्रों की याचिकाएं और प्राथमिकियां:** जेपीएससी विवाद में छात्रों के खिलाफ कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए थे और कथित अनियमिताओं को लेकर याचिकाएं दाखिल थीं। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर निर्णय पूरी तरह से निर्विवाद रहना आवश्यक था, जिसके चलते सुनवाई को 5 अक्टूबर के लिए नई पीठ को सौंपा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना जेपीएससी मामले की सुनवाई से अलग क्यों हुईं?
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वह अपनी वकालत के दौरान इस मामले से जुड़े कुछ पक्षकारों की ओर से पेश हो चुकी थीं। इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने खुद को अलग कर लिया।

### 2. जेपीएससी से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच अब इस मामले पर 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।

### 3. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से क्या राहत मांगी है?
याचिकाकर्ताओं ने छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने और मामले से जुड़ी सभी एफआईआर अदालत के समक्ष पेश करने की मांग की है।

### 4. जस्टिस मोहना सुप्रीम कोर्ट की जज कब बनीं?
केंद्र सरकार ने जून 2026 में उनकी सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी थी।

### 5. सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट जज बनने वाली पहली महिला कौन थीं?
वर्ष 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील बनी थीं।

### 6. जस्टिस मोहना ने अपनी कानूनी शिक्षा कहां से पूरी की थी?
उन्होंने 1983 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज में पांच वर्षीय बीए एलएलबी कोर्स में दाखिला लिया और 1988 में अपनी डिग्री पूरी की।

### 7. जस्टिस मोहना को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा कब मिला था?
सुप्रीम कोर्ट में वर्षों की वकालत के बाद उन्हें वर्ष 2015 में वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया था।

## प्रेरणा और सबक
एक सामान्य पृष्ठभूमि और बड़े परिवार से निकलकर देश की सर्वोच्च अदालत की दूसरी सीधी महिला जज बनने का सफर कड़े संघर्ष और लगन का उदाहरण है।

- **सीमित संसाधनों में बड़ा लक्ष्य:** पोल्लाची जैसे छोटे शहर में 13 भाई-बहनों के साथ रहने और किराए के कमरों वाले शुरुआती लॉ कॉलेज में पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने अपनी लगन कम नहीं होने दी। साधारण साधनों के बीच भी निष्ठा से की गई तैयारी शीर्ष तक पहुंचा सकती है।
- **माता-पिता का मार्गदर्शन:** औपचारिक पढ़ाई न होने के बाद भी उनकी मां ने उनकी बोलने और बहस करने की प्रतिभा को पहचानकर वकालत के लिए प्रेरित किया। सही समय पर प्रतिभा की पहचान और निरंतर प्रोत्साहन सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बनता है।
- **लंबा अभ्यास और विशेषज्ञता:** 1988 में कानून की डिग्री पूरी करने के बाद दशकों तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत की और 2015 में वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा हासिल किया। रातों-रात सफलता के बजाय दशकों का निरंतर अभ्यास ही असाधारण मुकाम दिलाता है।
- **रूढ़ियों को तोड़ना:** बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला वकील बनकर उन्होंने साबित किया कि योग्यता और दृढ़ संकल्प के दम पर उच्चतम मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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