# झारखंड में राहुल गांधी की बड़ी जनसभा की तैयारी, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा साझा विरोध

> दिल्ली रैली के बाद झारखंड में कांग्रेस और झामुमो गठबंधन ने जल्द राहुल गांधी की जनसभा आयोजित करने की घोषणा की है, जबकि भाजपा ने मंच पर झामुमो को जगह न मिलने का हवाला देकर कटाक्ष किया है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jharkhand-men-rahul-gandhi-ki-bari-janasabha-ki-taiyari-gyanesh-kumar-ke-istiphe-taka-jari-rahega-sajha-virodha-55482 · **Language:** Hindi
**Tags:** राहुल गांधी, झारखंड राजनीति, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, हेमंत सोरेन, राकेश सिन्हा, ज्ञानेश कुमार, भारतीय जनता पार्टी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1 नवंबर को आयोजित राहुल गांधी की रैली के संपन्न होने के तुरंत बाद झारखंड के सियासी हलकों में नई हलचल शुरू हो गई है। राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन का स्पष्ट मानना है कि इस आयोजन ने विपक्षी एकजुटता को नई ताकत दी है। प्रांतीय स्तर पर दोनों ही दल यह दावा कर रहे हैं कि आने वाले समय में उनका यह तालमेल पहले से कहीं अधिक आक्रामक और मजबूत स्वरूप में जनता के बीच दिखाई देगा।

## ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अडिग रुख
झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने गठबंधन के आगामी राजनीतिक कदमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका यह संयुक्त संघर्ष किसी भी मोड़ पर थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक झारखंड के भीतर भी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। राकेश सिन्हा ने यह भी रेखांकित किया कि बहुत जल्द झारखंड की धरती पर राहुल गांधी की एक विशाल रैली आयोजित होने जा रही है। उनके मुताबिक, यह सभा बेहद असरदार साबित होगी और इससे राज्य में झामुमो तथा कांग्रेस का आपसी गठबंधन और अधिक सशक्त बनेगा।

## हेमंत सोरेन के नेतृत्व और चिंगारी का असर
दूसरी तरफ, सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस राजनीतिक माहौल को राष्ट्रव्यापी स्तर से जोड़ते हुए अपनी बात रखी है। झामुमो का कहना है कि विरोध की यह चिंगारी केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे देश में असर दिखाया है। पार्टी ने दावा किया कि झारखंड में गठबंधन का नेतृत्व हेमंत सोरेन जैसी मजबूत शख्सियत कर रही हैं। झामुमो के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के पास हेमंत सोरेन के सियासी कद की बराबरी करने वाला ऐसा कोई चेहरा मौजूद नहीं है जो सीधे मुकाबले में उतर सके। झामुमो का मानना है कि दिल्ली के शक्ति प्रदर्शन से मिले सकारात्मक संदेश के दम पर आने वाले दिनों में गठबंधन की ताकत और बढ़ेगी।

## रामलीला मैदान के मंच का हवाला देकर भाजपा का हमला
विपक्षी गठबंधन की इन तैयारियों और बयानों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा आखिरकार किस तरह के गठबंधन का बखान कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि रामलीला मैदान के मंच पर ही झामुमो के प्रति कांग्रेस का सम्मान पूरी तरह उजागर हो गया था, जहां उन्हें मंच तक पर स्थान नहीं दिया गया। भाजपा का आरोप है कि इस उपेक्षा के चलते ही झामुमो ने अपने कार्यकर्ताओं को दिल्ली नहीं भेजा, जिससे इस कथित गठबंधन की असलियत सामने आ चुकी है। बहरहाल, दिल्ली के घटनाक्रम के बाद झारखंड में राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली और दोनों दलों की साझा रणनीति ही यह तय करेगी कि यह गठबंधन धरातल पर कितना एकजुट रहता है।

## इसका आप पर असर
झारखंड में कांग्रेस और झामुमो के साझा आंदोलन और आगामी रैलियों का सीधा असर राज्य की कानून व्यवस्था, आम यातायात और राजनीतिक समीकरणों पर देखने को मिलेगा।

- **भारत में:** केंद्र स्तर पर विपक्षी एकजुटता के प्रयासों के तहत विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसका सीधा असर संसद के आगामी सत्रों और राष्ट्रीय विमर्श में विपक्षी आक्रामकता के रूप में सामने आएगा।
- **झारखंड में:** ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों और राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली से राजधानी रांची समेत अन्य जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। आम नागरिकों को प्रमुख प्रशासनिक इलाकों में आवाजाही के दौरान यातायात डायवर्जन और संभावित राजनीतिक जाम का सामना करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित राहुल गांधी की रैली के बाद दोनों गठबंधनों के बीच उपजे दावों और आरोपों के कारण तेज हुआ है।

- **सीधा कारण:** दिल्ली रैली की समाप्ति के बाद झारखंड में कांग्रेस और झामुमो ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक संघर्ष जारी रखने और राज्य में नई रैली की घोषणा की है।
- **भाजपा का पलटवार:** भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया कि रामलीला मैदान के मंच पर झामुमो को समुचित स्थान नहीं दिया गया और झामुमो कार्यकर्ताओं ने भी रैली से दूरी बनाए रखी, जिससे गठबंधन में दरार साफ दिखाई देती है।
- **आगामी समीकरण:** झामुमो द्वारा हेमंत सोरेन के नेतृत्व को चुनौती रहित बताए जाने और कांग्रेस द्वारा संयुक्त आंदोलन जारी रखने के फैसले के बाद अब राज्य की राजनीति पूरी तरह आगामी शक्ति प्रदर्शन पर टिक गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली में राहुल गांधी की रैली किस तारीख को आयोजित हुई थी?
दिल्ली में राहुल गांधी की रैली 1 नवंबर को संपन्न हुई थी।

### 2. झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने क्या मुख्य मांग रखी है?
राकेश सिन्हा ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक गठबंधन का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

### 3. झारखंड में गठबंधन की आगामी योजना क्या है?
गठबंधन बहुत जल्द झारखंड में राहुल गांधी की एक बड़ी और असरदार जनसभा आयोजित करने की तैयारी में है।

### 4. झामुमो-कांग्रेस गठबंधन पर भाजपा ने क्या कटाक्ष किया है?
भाजपा ने कहा कि रामलीला मैदान के मंच पर झामुमो को जगह तक नहीं दी गई और उनके कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली रैली में भाग नहीं लिया।

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