# झुमरी तिलैया के दो स्कूली साथियों ने किताबों के कारोबार से बनाई पहचान, 30 की उम्र में पार किया 50 लाख का आंकड़ा

> कोडरमा में छठी कक्षा से साथ पढ़े विक्की केसरी और खालिद रिजवी ने मिलकर एवन बुक सेंटर शुरू किया, जिसका सालाना टर्नओवर अब 50 लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुका है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jhumri-telaiya-ke-do-skuli-sathiyon-ne-kitabon-ke-karobara-se-banai-pahachana-30-ki-umra-men-para-kiya-50-lakha-ka-ankara-56080 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोडरमा, झुमरी तिलैया, एवन बुक सेंटर, विक्की केसरी, खालिद रिजवी, स्टार्टअप, किताब सप्लाई

झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया में दो बचपन के साथियों ने आपसी विश्वास और कारोबारी सूझबूझ के दम पर सफलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। स्कूल के दिनों की गहरी मित्रता को एक मजबूत व्यावसायिक साझेदारी में बदलकर विक्की केसरी और खालिद रिजवी ने 30 साल की उम्र में अपना सालाना कारोबार 50 लाख रुपये से अधिक का बना लिया है। एवन बुक सेंटर के बैनर तले संचालित उनका यह उद्यम अब केवल कोडरमा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड और पड़ोसी राज्य बिहार के विभिन्न जिलों के विद्यालयों तक अपनी पहुंच बना चुका है।

## स्कूल की साझा पढ़ाई से व्यावसायिक साझेदारी की नींव
इस कारोबारी सफर की बुनियाद दो दशक पहले वर्ष 2005 में पड़ी थी, जब विक्की केसरी और खालिद रिजवी स्कूल में कक्षा छह के दौरान पहली बार एक-दूसरे से मिले थे। प्रारंभिक कक्षाओं से शुरू हुआ यह परिचय समय बीतने के साथ प्रगाढ़ दोस्ती में बदल गया। दोनों ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई भी एक साथ जारी रखी और वर्ष 2016 में दोनों ने स्नातक की डिग्री हासिल की।

अपनी औपचारिक शिक्षा के दौरान ही दोनों युवा व्यावहारिक ज्ञान भी अर्जित कर रहे थे। विक्की केसरी के परिवार का पहले से बैग का व्यवसाय था, जिसके चलते उन्हें व्यापार की बुनियादी समझ विरासत में मिली। अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ विक्की स्टेशन रोड स्थित अपनी पारिवारिक दुकान पर नियमित समय बिताते थे। इस अनुभव ने उन्हें ग्राहकों से सीधा संवाद स्थापित करने, उनकी प्राथमिकताओं को परखने और रोजमर्रा के व्यापारिक तालमेल को साधने में पारंगत बनाया। दूसरी तरफ, खालिद रिजवी ने वर्ष 2015 में स्वतंत्र रूप से पुस्तक आपूर्ति के क्षेत्र में कदम रखा और शैक्षणिक वितरण व्यवस्था का व्यावहारिक अनुभव जुटाया। दोनों ने अपने-अपने अनुभवों और रुचियों को साझा करते हुए एक साथ मिलकर स्वतंत्र व्यापार शुरू करने का संकल्प लिया।

## कोडरमा से निकलकर कई जिलों तक फैला आपूर्ति नेटवर्क
वर्ष 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों मित्रों ने आधिकारिक तौर पर साझेदारी में स्कूलों को किताबें सप्लाई करने का उद्यम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने कोडरमा जिले के स्थानीय विद्यालयों को अपनी सेवाएं देनी शुरू कीं। समय पर आपूर्ति, गुणवत्तापूर्ण सेवा और आपसी समन्वय के कारण शैक्षणिक संस्थानों में उनका भरोसा बढ़ता गया और धीरे-धीरे काम का दायरा विस्तृत होता चला गया।

वर्तमान में एवन बुक सेंटर के माध्यम से कोडरमा के अलावा बरही, बरकट्ठा, रजौली और गिरिडीह सहित झारखंड और बिहार के कई प्रमुख इलाकों के स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की निरंतर आपूर्ति की जा रही है। यह उद्यम प्ले ग्रुप से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए निजी प्रकाशकों की चुनिंदा पुस्तकें उपलब्ध कराता है। महज कुछ वर्षों के भीतर 50 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर का आंकड़ा पार करना दोनों युवा उद्यमियों की निरंतर कार्यकुशलता और जमीनी मेहनत को दर्शाता है।

## कार्य विभाजन और नए शैक्षणिक सत्र की अग्रिम तैयारी
अपने व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए दोनों भागीदारों ने कार्य जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन कर रखा है। नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां प्रतिवर्ष अक्टूबर और नवंबर के महीनों से ही शुरू हो जाती हैं। दोनों साझेदार मिलकर दिल्ली और मेरठ जैसे प्रमुख प्रकाशन केंद्रों की यात्रा करते हैं। वहां वे विभिन्न पुस्तक प्रकाशकों से सीधे संपर्क साधते हैं और शैक्षणिक पाठ्यक्रम की बदलती जरूरतों तथा विद्यालयों की मांग के आधार पर उच्च गुणवत्ता वाली किताबों का चयन करते हैं।

जब विद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होता है, तो विक्की केसरी प्रतिष्ठान की आंतरिक व्यवस्थाओं, भंडार प्रबंधन और कागजी प्रक्रियाओं को संभालते हैं। वहीं दूसरी ओर, खालिद रिजवी मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर विभिन्न विद्यालयों का दौरा करते हैं, प्रबंधकों से व्यक्तिगत संपर्क साधते हैं और किताबों के ऑर्डर एकत्र करते हैं। जिम्मेदारियों के इस सटीक बंटवारे से उनके व्यवसाय का दैनिक संचालन निर्बाध रूप से चलता रहता है।

## पारदर्शिता, अटूट भरोसा और रोजगार सृजन
विक्की केसरी के अनुसार किसी भी साझेदारी वाले उद्यम को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने की मुख्य कुंजी ईमानदारी, अटूट भरोसा और वित्तीय पारदर्शिता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारिक लेन-देन का हिसाब पूरी तरह स्पष्ट और व्यवस्थित होना चाहिए, जिसके कारण कई वर्षों के संयुक्त संचालन में आज तक उनके बीच आर्थिक मामलों को लेकर कभी कोई विवाद पैदा नहीं हुआ।

दैनिक कार्यप्रणाली अथवा समय-सारणी को लेकर कभी-कभार होने वाले सामान्य मतभेदों को दोनों साथी आपसी विचार-विमर्श से तुरंत सुलझा लेते हैं। विक्की का यह भी मानना है कि कई बार बाहरी व्यक्ति दो साझेदारों के बीच संदेह या गलतफहमी उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं, इसलिए ऐसे तत्वों से सावधान रहकर एक-दूसरे के प्रति विश्वास को हमेशा अडिग रखना जरूरी होता है। इस पहल ने न केवल इन दोनों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। वर्तमान में उन्होंने चार सहयोगियों को अपने संस्थान में नियमित रोजगार दिया है, जिससे यह उद्यम अन्य परिवारों की आजीविका का भी जरिया बन रहा है।

## इसका आप पर असर
यह उद्यम दिखाता है कि छोटे शहरों में भी सुनियोजित साझेदारी और स्थानीय संसाधनों के सही उपयोग से आत्मनिर्भर व्यापार खड़ा किया जा सकता है।

- **झारखंड और बिहार में:** स्थानीय स्कूलों को बड़े प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें सीधे अपने क्षेत्र में आसानी से और समय पर उपलब्ध हो रही हैं। इससे स्कूल प्रबंधकों और अभिभावकों को किताबों के लिए महानगरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ता।
- **छोटे शहरों के युवाओं के लिए:** यह मॉडल साबित करता है कि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ जमीनी व्यावहारिक ज्ञान से बड़ा कारोबार शुरू किया जा सकता है। स्नातक के तुरंत बाद बिना भारी पूंजी के भी सेवा और आपूर्ति क्षेत्र में उद्यम स्थापित किया जा सकता है।
- **स्थानीय रोजगार के अवसर:** छोटे व्यापारिक उद्यम स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराते हैं। इस प्रतिष्ठान में काम कर रहे चार कर्मचारियों की तरह अन्य सहयोगी भी स्थानीय स्तर पर कमाई कर पा रहे हैं।
- **व्यापारिक साझेदारों के लिए:** हिसाब-किताब में शत-प्रतिशत पारदर्शिता रखने से व्यापारिक रिश्ते दशकों तक मजबूत बने रहते हैं। वित्तीय अनुशासन बनाए रखकर युवा उद्यमी साझेदारी में होने वाले आपसी विवादों से बच सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह व्यापारिक सफलता स्कूली दोस्ती, पारिवारिक व्यावसायिक पृष्ठभूमि और स्थानीय बाजार की वास्तविक जरूरतों के सटीक मेल का परिणाम है।

- **अनुभव और रुचि का मेल:** विक्की केसरी ने पारिवारिक दुकान पर ग्राहकों से बातचीत और व्यापार प्रबंधन सीखा, जबकि खालिद रिजवी ने 2015 से पुस्तक आपूर्ति का व्यावहारिक जमीनी काम किया। दोनों ने अपनी व्यक्तिगत दक्षताओं को मिलाकर 2016 में साझा फर्म शुरू की।
- **क्षेत्रीय बाजार में किताबों की मांग:** निजी स्कूलों में प्ले ग्रुप से 12वीं तक स्तरीय प्रकाशकों की किताबों की भारी मांग रहती थी, जिसकी नियमित आपूर्ति स्थानीय स्तर पर सुलभ नहीं थी। दोनों ने सीधे दिल्ली और मेरठ के प्रकाशकों से संपर्क जोड़कर इस आपूर्ति अंतर को पाटा।
- **स्पष्ट कार्य विभाजन:** एक साथी द्वारा मैदानी स्तर पर स्कूलों से ऑर्डर जुटाना और दूसरे साथी द्वारा स्टोर व प्रशासनिक काम संभालना संचालन को बाधा रहित बनाता है। इस संगठित कार्यप्रणाली ने कारोबार को कई जिलों में फैलने का अवसर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. एवन बुक सेंटर के संचालक कौन हैं और उनकी दोस्ती कब शुरू हुई थी?
इसके संचालक विक्की केसरी और खालिद रिजवी हैं, जिनकी दोस्ती वर्ष 2005 में कक्षा छह में पढ़ने के दौरान शुरू हुई थी।

### 2. दोनों युवा उद्यमियों का वर्तमान में सालाना टर्नओवर कितना है?
वर्तमान में महज 30 वर्ष की उम्र में उनका वार्षिक कारोबार 50 लाख रुपये से अधिक का हो चुका है।

### 3. एवन बुक सेंटर किन-किन क्षेत्रों के स्कूलों में किताबों की आपूर्ति करता है?
यह फर्म कोडरमा के अलावा बरही, बरकट्ठा, रजौली और गिरिडीह सहित झारखंड और बिहार के कई जिलों के स्कूलों में किताबें पहुंचाती है।

### 4. यह प्रतिष्ठान किस स्तर के विद्यार्थियों के लिए किताबें उपलब्ध कराता है?
यह प्ले ग्रुप से लेकर कक्षा 12वीं तक के छात्रों के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूलों को उपलब्ध कराता है।

### 5. साझेदारी में दोनों मित्रों ने जिम्मेदारियों का बंटवारा किस तरह किया है?
विक्की केसरी दुकान और प्रबंधकीय व्यवस्था संभालते हैं, जबकि खालिद रिजवी फील्ड विजिट करके स्कूलों से किताबों के ऑर्डर प्राप्त करते हैं।

### 6. किताबों के नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां कब से शुरू होती हैं?
दोनों साझेदार अक्टूबर-नवंबर के महीने से दिल्ली और मेरठ जैसे शहरों में जाकर प्रकाशकों से पुस्तकों का चयन शुरू करते हैं।

### 7. इस उद्यम में कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है?
वर्तमान में दोनों संस्थापकों ने अपने साथ चार लोगों को सहयोगी के रूप में काम पर रखा है।

## प्रेरणा और सबक
विक्की केसरी और खालिद रिजवी की यह प्रेरक यात्रा सिखाती है कि मजबूत आपसी विश्वास और जमीनी सूझबूझ से छोटे कस्बे में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

- **पारदर्शिता की शक्ति:** साझेदारी में वित्तीय लेन-देन का हिसाब पूरी तरह स्पष्ट रखना ही लंबे रिश्ते की बुनियाद है। जब पैसे के मामले में दोनों पक्ष पारदर्शी रहते हैं, तो व्यापार में कभी मनमुटाव नहीं होता।
- **सटीक कार्य विभाजन:** अपनी-अपनी क्षमताओं के अनुसार जिम्मेदारियां बांटने से उद्यम तेजी से प्रगति करता है। दोनों सहयोगियों ने फील्ड वर्क और स्टोर मैनेजमेंट को अलग-अलग संभालकर कार्यक्षमता बढ़ाई।
- **अग्रिम योजना और तैयारी:** नए सत्र की किताबें जुटाने के लिए महीनों पहले दिल्ली और मेरठ जाना उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। किसी भी व्यापार में सीजन शुरू होने से पहले की गई तैयारी सफलता की गारंटी बनती है।
- **दूसरों को साथ लेकर बढ़ना:** अपनी तरक्की के साथ-साथ चार अन्य लोगों को रोजगार देकर उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी का भी निर्वहन किया है। एक सच्चा उद्यमी वही है जो अपने साथ अन्य परिवारों की आजीविका भी संवारता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._