# झारखंड पेपर लीक कांड में बीडब्ल्यूओ अभय तिवारी गिरफ्तार, 13 साल में 12 परीक्षाएं पास कर रचा था नेटवर्क

> झारखंड में जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर रांची में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच सीआईडी ने गोड्डा के बीएसओ अभय तिवारी को गिरफ्तार किया है, जिस पर 13 वर्षों में 12 सरकारी परीक्षाएं पास कर 25 करोड़ रुपये का सिंडिकेट चलाने का आरोप है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/jpsc-aura-jssc-pepara-lika-mamale-men-bso-abhay-tiwari-giraphtara-13-sala-men-12-parikshaen-pasa-kara-banaya-tha-sindiketa-netavar-14998 · **Language:** Hindi
**Tags:** अभय तिवारी, जेपीएससी पेपर लीक, झारखंड न्यूज, पोड़ैयाहाट बीएसओ, झारखंड सीआईडी, हेमंत सोरेन, जेएसएससी पेपर लीक, रांची प्रदर्शन

झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कथित बड़े पैमाने पर हुई धांधली को लेकर हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र झारखंड सिविल सेवा परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इस गतिरोध को सुलझाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार तथा छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है। इसी गहमागहमी के बीच अपराध अनुसंधान विभाग यानी सीआईडी ने गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में तैनात ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर अभय तिवारी को गिरफ्तार कर एक बड़े पर्दाफाश का दावा किया है। लगातार कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का अद्भुत रिकॉर्ड रखने वाले अभय तिवारी की तुलना बिहार के कुख्यात संजीव मुखिया से की जा रही है, जिसे हाल ही में नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई से क्लीनचिट मिली थी।

## छात्रों का विरोध प्रदर्शन और सरकारी अधिकारी की संदिग्ध भूमिका
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के आरोपों ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है। गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत अभय कुमार तिवारी की कहानी प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार मिलने वाली सफलताओं से शुरू होकर एक कथित परीक्षा माफिया के रूप में समाने आई है। सीआईडी की जांच के अनुसार अभय तिवारी ने पिछले 13 वर्षों के दौरान एक दर्जन से अधिक कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। आरोप है कि उसने अपनी इसी असाधारण क्षमता और रिकॉर्ड को अभ्यर्थियों के बीच अपनी साख और भरोसा स्थापित करने के लिए एक मजबूत हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

## एजेंसी से कनेक्शन और ब्लैकलिस्टेड कंपनी का नेटवर्क
जांच अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अभय तिवारी का सीधा संबंध टीआरएस डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी से था। इस कंपनी को अप्रैल महीने में आयोजित 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन का जिम्मा सौंपा गया था। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के चलते इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट घोषित कर चुकी है। सीआईडी की पड़ताल में सामने आया है कि सरकारी सेवा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के रूप में नियुक्त होने से पहले अभय तिवारी इसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्य कर चुका था। आरोप है कि सरकारी पद संभालने के बाद भी उसका इस कंपनी से संपर्क बना रहा और उसने विभिन्न परीक्षाओं में उम्मीदवारों को निश्चित चयन की गारंटी देने वाले एक संगठित सिंडिकेट के साथ मिलकर काम किया।

## 13 सालों में 12 परीक्षाएं पास करने का अनूठा रिकॉर्ड
अभय तिवारी का परीक्षा पास करने का ट्रैक रिकॉर्ड काफी लंबा और विविधता से भरा रहा है। सीआईडी के दस्तावेजों के मुताबिक उसने 2013 में भारतीय नौसेना की सीनियर सेकेंडरी रिक्रूट परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके अगले ही साल 2014 में उसने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में असिस्टेंट पद की लिखित परीक्षा के साथ-साथ सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल की लिखित एवं टाइपिंग परीक्षा में भी सफलता हासिल की। इसके बाद 2018 में उसने जेएसएससी पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा, आईआरबी कांस्टेबल परीक्षा, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड परीक्षा, जेएसएससी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर परीक्षा और जेएसएससी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा को भी क्लियर किया। जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में भी उसका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां उसने असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, फूड सेफ्टी ऑफिसर तथा 11वीं एवं 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं पास की थीं। आरोप है कि इसी सफलता के आवरण का उपयोग वह उम्मीदवारों का विश्वास जीतने के लिए करता था।

## करोड़ों का रेट कार्ड, अवैध कमाई और बीएनएस के तहत कार्रवाई
मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार इस संगठित गिरोह ने अभ्यर्थियों से वसूली के लिए बाकायदा एक रेट कार्ड निर्धारित कर रखा था। शुरुआती चरण यानी प्रारंभिक परीक्षा के लिए करीब 5 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा के लिए कम से कम 10 लाख रुपये अग्रिम और अंतिम चयन सुनिश्चित करने के लिए 25 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी। कुछ मामलों में उम्मीदवारों से 25 लाख से 40 लाख रुपये तक वसूलने के आरोप भी सामने आए हैं। सीआईडी का अनुमान है कि अभय तिवारी ने इन गैरकानूनी गतिविधियों के माध्यम से लगभग 25 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। जांच एजेंसी ने उसकी ज्ञात आय और आधिकारिक परिसंपत्तियों के मुकाबले उसके आलीशान जीवनशैली में भारी अंतर का भी उल्लेख किया है, हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अदालत में होनी अभी बाकी है। इस पूरे मामले में अभय तिवारी सहित कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सीआईडी ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया है। जांच के सिलसिले में रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद स्थित 18 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की गई है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक सिंडिकेट पर शिकंजा कसने के लिए पूरे देश में सख्त कानूनों की मांग जोर पकड़ रही है।

**झारखंड में:** JPSC और JSSC सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हजारों अभ्यर्थियों के परिणाम और भविष्य पर संशय बना हुआ है तथा परीक्षा रद्द करने की मांग जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. अभय तिवारी कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया है?
अभय तिवारी गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में तैनात ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) है, जिसे JPSC पेपर लीक मामले में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर फर्जी तरीके से चयन कराने के सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप में CID ने गिरफ्तार किया है।

### 2. अभय तिवारी ने पिछले 13 सालों में कौन-कौन सी परीक्षाएं पास की थीं?
उसने भारतीय नौसेना SSR, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र असिस्टेंट, CRPF हेड कांस्टेबल, JSSC पुलिस SI, IRB कांस्टेबल, NCL, JSSC PGT, JSSC CGL तथा JPSC ACF, FRO, FSO और सिविल सर्विसेज पीटी सहित 12 परीक्षाएं पास की थीं।

### 3. पेपर लीक सिंडिकेट अभ्यर्थियों से कितने पैसे लेता था?
सिंडिकेट प्रारंभिक परीक्षा के लिए 5 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा के लिए 10 लाख रुपये एडवांस और अंतिम चयन के लिए 25 लाख से 40 लाख रुपये तक मांगता था।

### 4. इस मामले में CID ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
CID ने अभय तिवारी समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, BNS की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है और रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो तथा धनबाद में 18 ठिकानों पर छापेमारी की है।

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