# कम लागत और बिना सिंचाई के डेढ़ लाख की कमाई देने वाली अरु की खेती का तरीका जानिए

> कम पानी और न्यूनतम देखभाल में पैदा होने वाली अरु की फसल किसानों के लिए बेहद किफायती साबित हो रही है। जानिए बुवाई से लेकर खुदाई और 1.5 लाख रुपये की बंपर पैदावार की पूरी प्रक्रिया।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/kama-lagata-aura-bina-sinchai-ke-derha-lakha-ki-kamai-dene-vali-aru-ki-kheti-ka-tarika-janie-26921 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरु की खेती, कम लागत खेती, कृषि समाचार, किसान कमाई, जैविक खेती, फसल उत्पादन

कृषि क्षेत्र में कम लागत और कम पानी वाली फसलें किसानों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। ऐसी ही एक अनोखी फसल अरु है, जिसकी बनावट ओल जैसी होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बार-बार पानी देने या दिन-रात देखभाल करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सही तकनीक और शुरुआती तैयारी के साथ इसकी खेती करके किसान प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये तक का कुल मूल्य हासिल कर सकते हैं।

## मिट्टी की तैयारी और बुवाई की अनोखी विधि
चारु मंडल के अनुसार, इस फसल की खेती में केवल शुरुआती चरण यानी बुवाई के दौरान ही मुख्य मेहनत लगती है। खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले जमीन में 4 फीट गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है। बीज रोपने से लगभग 15 दिन पहले मिट्टी में चूना, गोबर खाद, केंचुआ खाद और आवश्यक कीटनाशक दवाइयां मिलाई जाती हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता में जबरदस्त इजाफा होता है।

## सिंचाई की जरूरत नहीं, जमीन से खुद सोखता है नमी
तैयार किए गए गड्ढे में बीज बोने के बाद केवल बुवाई के वक्त ही एक बार सिंचाई करनी होती है। इसके उपरांत फसल को दोबारा पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह पौधा अपनी जड़ों के सहारे जमीन की गहराई से खुद-ब-खुद नमी और पानी सोख लेता है। सिंचाई का खर्च न के बराबर होने के कारण किसानों की उत्पादन लागत काफी घट जाती है।

## कंद का वजन और बंपर कमाई का गणित
अरु का एक कंद 15 से 20 किलोग्राम तक का आकार ले लेता है। यदि एक एकड़ जमीन में इसकी खेती की जाए, तो आसानी से लगभग 30 क्विंटल तक की कुल उपज प्राप्त हो जाती है। बाजार में 30 क्विंटल अरु का कुल मूल्य तकरीबन 1.5 लाख रुपये बैठता है, जिससे यह किसानों के लिए एक निश्चित और सुरक्षित रिटर्न देने वाला जरिया बन जाता है।

## पत्तियों से सब्जी और फसल कटाई का संकेत
इस पौधे की केवल जड़ या कंद ही उपयोगी नहीं होता, बल्कि इसकी पत्तियों का उपयोग स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए भी किया जाता है। पत्तियों का बढ़ता आकार जमीन के नीचे पल रहे कंद के विकास को दर्शाता है। जब ऊपर की पत्तियां काफी बड़ी हो जाती हैं, तब यह स्पष्ट संकेत होता है कि जमीन के अंदर कंद पूरी तरह तैयार हो चुका है और फसल की खुदाई की जा सकती है।

## इसका आप पर असर
यह खेती तकनीक कम सिंचाई सुविधाओं वाले किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक व्यावहारिक विकल्प प्रदान करती है।

- **कम पानी वाले क्षेत्रों के किसान:** बुवाई के समय सिर्फ एक बार पानी की जरूरत होने के कारण सूखे या पानी की कमी वाले इलाकों में यह फसल आसानी से उगाई जा सकती है। इससे सिंचाई पर होने वाला बिजली और डीजल का खर्च पूरी तरह से बच जाता है।
- **छोटे और सीमांत किसान:** एक एकड़ में लगभग 30 क्विंटल पैदावार और 1.5 लाख रुपये के बाजार मूल्य से छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। न्यूनतम रख-रखाव के कारण वे अन्य कृषि कार्यों पर भी ध्यान दे सकते हैं।
- **उपजाऊ क्षमता में सुधार:** गोबर खाद, चूना और केंचुआ खाद के इस्तेमाल से खेत की जैविक सेहत में सुधार होता है। इससे आगामी फसलों के लिए भी मिट्टी अधिक उपजाऊ बनी रहती है।
- **दोहरी आय का जरिया:** मुख्य कंद के अलावा पत्तियों की बिक्री या घरेलू उपयोग से अतिरिक्त आहार और आय मिलती है। पत्तियां तैयार होने से पहले ही भोजन का एक अच्छा जरिया बनती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अरु की खेती में सिंचाई की कितनी आवश्यकता होती है?
अरु की खेती में केवल बुवाई के समय एक बार पानी देना पड़ता है, जिसके बाद इसे दोबारा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।

### 2. बुवाई के लिए गड्ढा कितना गहरा खोदा जाता है?
जमीन में 4 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है और बुवाई से 15 दिन पहले मिट्टी में चूना, गोबर खाद, केंचुआ खाद और कीटनाशक मिलाए जाते हैं।

### 3. अरु के एक कंद का वजन कितना होता है?
अरु का एक कंद 15 से 20 किलोग्राम तक का हो जाता है।

### 4. एक एकड़ जमीन से अरु का कितना उत्पादन और कमाई होती है?
एक एकड़ जमीन से लगभग 30 क्विंटल अरु प्राप्त होता है, जिसका कुल बाजार मूल्य लगभग 1.5 लाख रुपये तक होता है।

### 5. अरु की फसल तैयार होने का पता कैसे चलता है?
अरु के पत्तों का आकार बड़ा होने पर यह संकेत मिलता है कि जमीन के अंदर कंद पूरी तरह तैयार हो चुका है और खुदाई की जा सकती है।

## प्रेरणा और सबक
पारंपरिक खेती से इतर अरु की खेती से किसान कई उपयोगी सबक सीख सकते हैं।

- **लागत प्रबंधन पर ध्यान:** अधिक सिंचाई और महंगे उर्वरकों के बिना भी खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। शुरुआती तैयारी में सही इनपुट देना लंबी अवधि में लागत घटाता है।
- **प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग:** जमीन के भीतर छिपी नमी का उपयोग करने वाली फसलें चुनना पानी के संकट से मुकाबला करने का बेहतरीन तरीका है।
- **फसल के हर हिस्से की उपयोगिता:** कंद के साथ-साथ पत्तियों का इस्तेमाल करना यह सिखाता है कि कृषि में शून्य बर्बादी से अतिरिक्त मूल्य हासिल किया जा सकता है।

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