क्लासरूम छोड़कर कशिश ने शुरू किया गहनों का कारोबार, दुबई गोल्ड और साउथ टेंपल स्टाइल से बनाई नई पहचान फिजिक्स पढ़ाने वाली कशिश ने अपने बचपन के शौक को नया मुकाम देते हुए ज्वेलरी डिजाइनिंग का सफल व्यवसाय खड़ा किया है, जहां देश और दुनिया के चुनिंदा गहने एक साथ मिल रहे हैं। किताबों और ब्लैकबोर्ड के बीच फिजिक्स के मुश्किल नियम समझाने वाली कशिश ने अब अपनी जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल ली है। अध्यापन का लंबा सफर तय करने के बाद उन्होंने अपने बचपन के सपने को पूरा करने की ठानी और ज्वेलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में कदम रखा। आज वह देश के कोने-कोने से पारंपरिक गहनों की शैलियों को चुनकर लाने के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय पैटर्न भी अपने ग्राहकों के लिए तैयार करवा रही हैं। उनके इस नए उद्यम को कुछ ही महीनों के भीतर खरीदारों का जबरदस्त समर्थन हासिल हुआ है। दुबई गोल्ड और साउथ टेंपल ज्वेलरी का अनूठा मेल कशिश के संग्रह में पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का खूबसूरत समन्वय दिखाई देता है। वह खास तौर पर दुबई के लोकप्रिय गोल्ड डिजाइनों पर काम करती हैं, जिनमें जाली डिजाइन, झालर डिजाइन और मास्क गोल्ड ज्वेलरी शामिल हैं। आमतौर पर लोग इस तरह के जटिल और भारी पैटर्न सोशल मीडिया रील में ही देखते हैं, लेकिन कशिश इन डिजाइनों को वास्तविकता में अपने ग्राहकों के सामने पेश कर रही हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत की प्रसिद्ध टेंपल स्टाइल ज्वेलरी और मनकों वाली खास बीड ज्वेलरी भी उनके कलेक्शन का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। कारीगरों की मदद और खुद की रचनात्मकता अपने संग्रह को विशिष्ट बनाने के लिए कशिश पूरे भारत का भ्रमण करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की यात्रा के दौरान वह वहां की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले गहनों को चुनती हैं। कुछ गहने वह सीधे सेलेक्ट करती हैं, जबकि कई पैटर्न वह खुद डिजाइन करके तैयार करती हैं। जहां बड़े पैमाने पर या जटिल काम की जरूरत होती है, वहां वह कुशल कारीगरों की मदद से आभूषण बनवाती हैं। अगर उन्हें किसी पारंपरिक डिजाइन में कुछ नयापन जोड़ना हो, तो वह अपनी मौलिक सोच से उसमें बदलाव करवाती हैं। महिलाओं की पसंद और बढ़ता कारोबार कशिश का मानना है कि गहने हमेशा से महिलाओं की सबसे बड़ी कमजोरी रहे हैं। किसी महिला के पास भले ही पहले से पचास गहने मौजूद हों, लेकिन बाहर निकलने पर नई और खूबसूरत ज्वेलरी देखकर उनका आकर्षित होना बेहद स्वाभाविक है। इसी सोच के आधार पर उन्होंने तय किया कि भारत और विदेश के तमाम मशहूर आभूषणों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जाए। शिक्षिका के तौर पर अपनी पहली पारी पूरी करने के बाद वह इस दूसरी व्यावसायिक पारी का भरपूर आनंद ले रही हैं। उनका यह उद्यम अब पूरे देश में फैल चुका है, जहां ऑनलाइन माध्यम से रोजाना 10 गहनों तक के ऑर्डर आ रहे हैं और इनकी पूरे भारत में डिलीवरी की जा रही है। इसका आप पर असर यह पहल आभूषण प्रेमियों को एक ही मंच पर देश और विदेश के अनूठे पारंपरिक डिजाइनों तक आसान पहुंच प्रदान करती है। • खरीदारी में विविधता: ग्राहकों को दुबई शैली के जटिल सोने के काम से लेकर दक्षिण भारतीय मंदिर शैली के आभूषण एक साथ मिल रहे हैं। इसके चलते खरीदारों को अलग-अलग राज्यों या देशों के विशिष्ट डिजाइनों के लिए अलग-अलग भटकना नहीं पड़ता। • देशव्यापी उपलब्धता: यह ब्रांड पैन इंडिया डिलीवरी की सुविधा दे रहा है। देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले ग्राहक ऑनलाइन माध्यम से इन खास गहनों को अपने घर मंगवा सकते हैं। • कस्टम डिजाइन का विकल्प: पारंपरिक आभूषणों में निजी पसंद के अनुसार बदलाव की सुविधा मिलती है। ग्राहक अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से खास मौकों के लिए विशिष्ट डिजाइन तैयार करवा सकते हैं। • कारीगरों को अवसर: स्थानीय कारीगरों को नियमित काम और बेहतर रोजगार मिल रहा है। इस तरह के उद्यम पारंपरिक शिल्पकारों के कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़कर उन्हें निरंतर आमदनी दिलाते हैं। ऐसा क्यों हुआ फिजिक्स की पढ़ाई कराने के दौरान कशिश के मन में अपने बचपन के शौक को एक बड़े पेशेवर मंच पर ले जाने की इच्छा थी। बाजार में अलग-अलग शैलियों के आभूषणों की बिखरी हुई उपलब्धता देखकर उन्होंने एक एकीकृत संग्रह तैयार करने का फैसला किया। • बचपन के जुनून की प्रेरणा: कशिश लंबे समय तक फिजिक्स पढ़ाने के बाद अपनी रचनात्मक रुचि को मुख्य करियर बनाना चाहती थीं। इसी आंतरिक प्रेरणा ने उन्हें अध्यापन छोड़कर ज्वेलरी डिजाइनिंग में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया। • बाजार में सिंगल प्लेटफॉर्म की कमी: ग्राहकों को अलग-अलग संस्कृतियों और अंतरराष्ट्रीय शैलियों के गहने खोजने में काफी समय लगता था। कशिश ने इस अंतर को समझा और एक ही छत के नीचे विविध संग्रह पेश करने का निर्णय लिया। • सोशल मीडिया का प्रभाव: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लोग अक्सर दुबई के जटिल सोने के पैटर्न देखते थे लेकिन उन्हें आसानी से खरीद नहीं पाते थे। उन्होंने इन आकर्षक डिजाइनों को वास्तविकता में उपलब्ध कराने का अवसर देखा। सवाल-जवाब 1. कशिश पहले किस पेशे में सक्रिय थीं? ज्वेलरी डिजाइनिंग में आने से पहले कशिश विद्यार्थियों को फिजिक्स पढ़ाती थीं। 2. उनके कलेक्शन में किस प्रकार के प्रमुख आभूषण उपलब्ध हैं? उनके संग्रह में दुबई गोल्ड पैटर्न, साउथ इंडियन टेंपल स्टाइल और विशेष बीड ज्वेलरी शामिल हैं। 3. दुबई गोल्ड आभूषणों में कौन से खास डिजाइन देखने को मिलते हैं? इनमें विशेष तौर पर जाली डिजाइन, झालर डिजाइन और मास्क गोल्ड ज्वेलरी के पैटर्न मौजूद हैं। 4. कशिश अपने संग्रह के लिए नए डिजाइन कैसे तैयार करती हैं? वह देशभर में घूमकर चुनिंदा गहने लाती हैं, कुछ खुद डिजाइन करती हैं और जटिल काम कारीगरों से करवाती हैं। 5. उनके व्यवसाय को वर्तमान में ऑनलाइन कितने ऑर्डर मिल रहे हैं? उन्हें ऑनलाइन माध्यम से प्रतिदिन 10 गहनों तक के ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं और वे पूरे भारत में डिलीवरी कर रही हैं। प्रेरणा और सबक अध्यापन जैसे सुरक्षित पेशे से निकलकर नए व्यवसाय में पहचान बनाने का कशिश का सफर हर महत्वाकांक्षी व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है। • उम्र या करियर कभी बाधा नहीं: अपने पुराने पेशे में सफल होने के बावजूद नया रास्ता चुनने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। कशिश ने दिखाया कि सही लगन हो तो करियर की दूसरी पारी भी बेहद कामयाब हो सकती है। • शौक को हुनर और व्यवसाय बनाना: व्यक्तिगत रुचियों को केवल फुरसत के पलों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें योजनाबद्ध तरीके से उद्यम में बदला जा सकता है। • जमीनी शोध और निरंतर प्रयोग: कशिश ने केवल एक जगह बैठकर काम नहीं किया बल्कि खुद यात्राएं कर नई शैलियों को समझा। ग्राहकों को कुछ नया देने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता की कुंजी है। https://trendkia.com/jharkhand/klasaruma-chhorakara-kashish-ne-shuru-kiya-gahanon-ka-karobara-dubai-gold-aura-south-temple-style-se-banai-nai-pahachana-42654 TrendKia — Har trend, sabse pehle.