कोडरमा में दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र देगा मुफ्त सिलाई प्रशिक्षण, नौकरी में मिलेगा 20 हजार तक वेतन कोडरमा के दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र में मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत युवाओं को निःशुल्क सैंपलिंग टेलर की ट्रेनिंग दी जा रही है। 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए बैच में प्रशिक्षण के साथ भोजन, आवास और प्लेसमेंट की सुविधा मिलेगी। झारखंड के कोडरमा जिले में आत्मनिर्भर बनने और सिलाई कढ़ाई के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने के इच्छुक युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। कोडरमा स्थित महाराणा प्रताप चौक के पास संचालित दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र में युवाओं को विशेष तकनीकी हुनर सिखाने की पहल की गई है। यहां राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत सैंपलिंग टेलर ट्रेड का निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व शहरी युवाओं को व्यावहारिक दक्षता प्रदान कर उन्हें सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। प्रशिक्षण की अवधि और मिलने वाली सुविधाएं इस हुनरमंद पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। ट्रेनर सबीला बानो के अनुसार, यह समग्र प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग 580 घंटों का है, जिसे पूरा करने में तकरीबन तीन महीने का समय लगता है। पूरी ट्रेनिंग प्रक्रिया के दौरान शिक्षार्थियों से किसी भी प्रकार की ट्यूशन या पंजीकरण फीस नहीं वसूली जाती है। इतना ही नहीं, केंद्र की ओर से छात्र-छात्राओं के ठहरने के लिए हॉस्टल और पौष्टिक भोजन की संपूर्ण व्यवस्था पूरी तरह मुफ्त रखी गई है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्रशिक्षु को यूनिफॉर्म, बैग, नोटबुक, पाठ्य सामग्री और व्यावहारिक अभ्यास के लिए आवश्यक सभी साधन केंद्र की तरफ से ही निःशुल्क दिए जाते हैं। कपड़े तैयार करने से लेकर डिजाइनिंग की पूरी प्रक्रिया ट्रेनर सबीला बानो ने स्पष्ट किया कि सैंपलिंग टेलर पाठ्यक्रम केवल सिलाई मशीन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गारमेंट निर्माण की ए टू जेड व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। विशेष रूप से महिला अभ्यर्थियों को सूट, पटियाला, कोट-पैंट, शर्ट, ब्लाउज और पेटीकोट जैसे विभिन्न परिधानों की सटीक कटिंग, ड्राफ्टिंग और सिलाई सिखाई जाती है। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान सैद्धांतिक ज्ञान की तुलना में प्रैक्टिकल वर्क पर अधिक जोर दिया जाता है, ताकि कोर्स पूरा होने के बाद अभ्यर्थी बिना किसी हिचकिचाहट के स्वतंत्र रूप से कपड़े तैयार कर सकें। एंब्रायडरी और सजावटी शिल्प का व्यावहारिक ज्ञान आधुनिक दौर में गारमेंट सेक्टर के भीतर कपड़ों के अलंकरण और डिजाइनिंग की भारी मांग को देखते हुए पाठ्यक्रम में अतिरिक्त कलात्मक कौशल भी जोड़े गए हैं। विद्यार्थियों को सामान्य सिलाई के साथ हैंड एंब्रायडरी, मशीन एंब्रायडरी और स्टोन एंब्रायडरी की बारीक तकनीकें सिखाई जाती हैं। इसके अलावा हाथ की कारीगरी वाले अन्य सजावटी काम तथा घर की सजावट में उपयोग होने वाली विविध वस्तुएं बनाने का हुनर भी सिखाया जाता है। कपड़ों की फिनिशिंग और डिजाइनिंग की यह समझ युवाओं को बुटीक संचालन अथवा वस्त्र उद्योग में बेहतर अवसर दिलाने में सहायक साबित होती है। मशीन रखरखाव और तकनीकी दिक्कतों का समाधान सिलाई के पेशे में मशीनों का सही संचालन और उनकी देखभाल सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र में बाजार में प्रचलित विभिन्न प्रकार की आधुनिक सिलाई मशीनों की कार्यप्रणाली समझाई जाती है। प्रशिक्षण के दौरान मशीन में आने वाले छोटे-मोटे तकनीकी दोषों, धागा टूटने या पुर्जों की सामान्य रुकावटों की पहचान करना और उन्हें तत्काल खुद ठीक करना सिखाया जाता है। इससे यह लाभ होता है कि काम करते समय अगर मशीन में कोई सामान्य खराबी आ जाए, तो कारीगर को मैकेनिक पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और काम में रुकावट नहीं आती। प्रवेश प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज सैंपलिंग टेलर का यह कोर्स लड़के और लड़कियां दोनों के लिए खुला है, यद्यपि इस विधा में आमतौर पर लड़कियों की भागीदारी अधिक देखी जाती है। गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 30 अभ्यर्थियों को ही दाखिला दिया जाता है। आगामी नया प्रशिक्षण सत्र 15 अक्टूबर से प्रारंभ होने जा रहा है। नामांकन के इच्छुक उम्मीदवारों को अपने आवेदन के साथ आधार कार्ड की छायाप्रति, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होने का अंकपत्र या प्रमाण पत्र और हालिया पासपोर्ट साइज फोटो केंद्र में जमा कराने होंगे। प्लेसमेंट सहायता और 20 हजार तक का वेतन तीन महीने की 580 घंटे की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद कौशल केंद्र की ओर से प्लेसमेंट अभियान चलाकर सीधे कंपनियों में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। परिधान निर्माता कंपनियों द्वारा चयनित युवाओं को 18 हजार से 20 हजार रुपये तक का शुरुआती मासिक वेतन दिया जाता है, जिसमें कार्यस्थल पर रहने और भोजन की व्यवस्था भी शामिल रहती है। नौकरी शुरू करने के लगभग तीन महीने बीतने पर कार्य प्रदर्शन के आधार पर वेतन वृद्धि का लाभ भी मिलता है। वहीं जो अभ्यर्थी नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना चाहते, वे इस हुनर के बल पर अपने घर से ही बुटीक अथवा सिलाई केंद्र शुरू कर स्वतंत्र स्वरोजगार अपना सकते हैं। इसका आप पर असर कोडरमा और आसपास के 10वीं पास युवाओं के लिए बिना किसी खर्च के हुनर सीखने और सुरक्षित मासिक आय प्राप्त करने का सीधा रास्ता खुला है। • झारखंड में: मुख्यमंत्री सारथी योजना के जरिए राज्य के युवाओं को निशुल्क तकनीकी हुनर और आवासीय सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने में बड़ी मदद मिल रही है। • कोडरमा में: महाराणा प्रताप चौक के समीप स्थित केंद्र में 15 अक्टूबर से 30 सीटों वाला नया बैच शुरू हो रहा है। स्थानीय 10वीं पास युवक-युवतियां आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मार्कशीट जमा कर तुरंत प्रवेश पा सकते हैं। • आर्थिक लाभ: तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद कंपनियों में 18 हजार से 20 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाली नौकरी मिल सकती है। चयनित युवाओं को रहने और खाने की सुविधा भी कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। • स्वरोजगार का मौका: नौकरी न करने के इच्छुक प्रशिक्षु अपने घर से ही सिलाई और बुटीक का काम शुरू कर सकते हैं। हैंड, मशीन व स्टोन एंब्रायडरी का हुनर सीखकर वे स्थानीय बाजार में अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ झारखंड में युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने और वस्त्र उद्योग की जरूरतों के अनुरूप दक्ष कारीगर तैयार करने के लिए यह प्रशिक्षण शुरू किया गया है। • योजना का उद्देश्य: राज्य सरकार मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत ऐसे युवाओं को प्रशिक्षित करना चाहती है जो औपचारिक उच्च शिक्षा के अभाव में रोजगार की तलाश कर रहे हैं। कौशल विकास के माध्यम से उन्हें सीधे उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। • बाजार में सैंपलिंग टेलर की मांग: वस्त्र निर्माण कंपनियों में आधुनिक डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए कुशल सैंपलिंग टेलर की लगातार जरूरत रहती है। इसी औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए 580 घंटे का व्यावहारिक कोर्स डिजाइन किया गया है। • सीमित सीटें और निश्चित तिथियां: व्यक्तिगत मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए बैच का आकार केवल 30 अभ्यर्थियों तक सीमित रखा गया है। 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सवाल-जवाब 1. प्रशिक्षण केंद्र कोडरमा में कहां स्थित है? यह प्रशिक्षण केंद्र कोडरमा के महाराणा प्रताप चौक के समीप स्थित दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र में चल रहा है। 2. सैंपलिंग टेलर कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है? इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए अभ्यर्थी का न्यूनतम 10वीं पास होना अनिवार्य है। 3. प्रशिक्षण की कुल अवधि कितनी है? इस कोर्स की कुल अवधि करीब 580 घंटे है, जो लगभग तीन महीने में पूरी होती है। 4. प्रशिक्षण के दौरान क्या-क्या सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं? प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क है और इसमें रहने, खाने, यूनिफॉर्म, बैग, कॉपी-किताब तथा जरूरी सामग्री की सुविधा मुफ्त मिलती है। 5. कोर्स पूरा होने के बाद कितना वेतन मिल सकता है? प्लेसमेंट के जरिए कंपनियों द्वारा 18 हजार से 20 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता है, जिसमें रहना और खाना भी शामिल होता है। 6. नया बैच कब से शुरू हो रहा है और नामांकन के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? नया बैच 15 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसके लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, 10वीं का प्रमाण पत्र और फोटो जमा करना होगा। https://trendkia.com/jharkhand/koderma-men-deen-dayal-upadhyaya-kaushal-kendra-dega-muphta-silai-prashikshana-naukari-men-milega-20-hajara-taka-vetana-43589 TrendKia — Har trend, sabse pehle.