कोडरमा में डेढ़ लाख मिट्टी के दीयों से बनाई गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भव्य मोजेक कलाकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर झारखंड के कोडरमा में कलाकार सुमित गुंजन और उनकी टीम ने डेढ़ लाख मिट्टी के दीयों से उनकी एक बेहद खूबसूरत मोजेक कलाकृति बनाई। झारखंड के कोडरमा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर एक बेहद अनोखा और भव्य आयोजन किया गया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री और कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी के चाराडीह स्थित आवास के पास लगभग डेढ़ लाख मिट्टी के दीयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बेहद खूबसूरत मोजेक आर्ट कलाकृति बनाई गई। इस विशाल कलाकृति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाल रंग की पगड़ी पहने हुए दिखाया गया है, जिसने कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस कलाकृति की भव्यता को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। डेढ़ लाख दीयों से तैयार हुई कलाकृति इस शानदार मोजेक आर्ट को गिरिडीह के रहने वाले मशहूर कलाकार सुमित गुंजन ने अपनी 11 सदस्यों वाली टीम के साथ मिलकर तैयार किया है। इस भव्य कलाकृति को आकार देने के लिए कलाकारों की इस टीम ने 15 और 16 सितंबर को दिन-रात लगातार कड़ा परिश्रम किया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डेढ़ लाख दीयों को एक विशेष और निश्चित डिजाइन में व्यवस्थित ढंग से सजाया गया। इसके बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह भव्य तस्वीर पूरी तरह उभरकर सामने आ सकी। इतनी बड़ी संख्या में दीयों से बनी इस अद्भुत कलाकृति को देखने के लिए स्थानीय लोगों में भारी उत्सुकता और उत्साह देखा गया। कलाकारों की इस अनूठी कला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुमित गुंजन का कलात्मक सफर कलाकार सुमित गुंजन ने अपनी कला के बारे में बात करते हुए बताया कि वे पहले भी कई मौकों पर बेकार और दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामग्रियों से कई बेहतरीन मोजेक आर्ट बना चुके हैं। इससे पहले वे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम दरबार, महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा और वीर सिद्धू-कान्हू की भी शानदार मोजेक आर्ट तस्वीरें बना चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि अलग-अलग तरह की सामान्य चीजों का रचनात्मक रूप से इस्तेमाल करके विशाल आकृतियां तैयार करना ही उनकी इस अनोखी कला की मुख्य पहचान है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के भावों को दीयों की मदद से हूबहू उभारने के लिए उनकी पूरी टीम को बहुत ही बारीकी से काम करना पड़ा। दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए की गई प्रार्थना इस विशेष आयोजन के दौरान कार्यक्रम स्थल पर एक मुख्य आशीर्वाद का दीया भी प्रज्ज्वलित किया गया। वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और आगंतुकों ने मिलकर दीये जलाए और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। इस उत्सव में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कलाकारों की इस मेहनत की जमकर सराहना की। दीयों की रोशनी से जगमगाती इस कलाकृति के सामने लोग तस्वीरें लेते और इस पल को संजोते हुए नजर आए। कार्यक्रम स्थल का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो गया था। आधुनिक भारत के शिल्पकार का सम्मान इस खास अवसर पर मौजूद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री और स्थानीय सांसद अन्नपूर्णा देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधुनिक भारत के सच्चे शिल्पकार हैं। उन्होंने बताया कि कोडरमा की जनता की तरफ से प्रधानमंत्री को उनके जन्मदिन पर एक बेहद अलग और यादगार तरीके से बधाई देने के लिए ही इस विशेष कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी। डेढ़ लाख दीयों से सजी यह विशाल मोजेक आर्ट इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रही, जिसने कला और पारंपरिक आस्था का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया। इसका आप पर असर यह रचनात्मक आयोजन पारंपरिक भारतीय कला रूपों की क्षमता को प्रदर्शित करता है और बड़े मंच पर क्षेत्रीय कलाकारों की प्रतिभा को उजागर करता है। • भारत में: यह आयोजन दिखाता है कि कैसे पारंपरिक मिट्टी के दीयों जैसी चीजों का उपयोग करके विशाल समकालीन कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। इससे देश भर के स्थानीय समुदायों को बड़े त्योहारों के दौरान पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने की प्रेरणा मिलती है। • कोडरमा में: इस अनोखी प्रदर्शनी ने कोडरमा और गिरिडीह क्षेत्र की कलात्मक प्रतिभा की ओर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। इस सफल प्रदर्शन से स्थानीय कलाकारों को अधिक पहचान मिलेगी और उन्हें अपनी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पेश करने के नए अवसर मिलेंगे। ऐसा क्यों हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर उन्हें एक अनोखी श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से इस विशाल मोजेक कलाकृति का निर्माण किया गया था। • जन्मदिन का अवसर: इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री को उनके जन्मदिन पर एक विशिष्ट और यादगार बधाई देने के लिए किया गया था। स्थानीय नेताओं और प्रशंसकों ने इस अवसर को पारंपरिक भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाली कलाकृति के साथ मनाने का फैसला किया। • स्थानीय प्रतिभा को बढ़ावा: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने क्षेत्रीय कलाकारों की असाधारण प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए अपने आवास पर इस पहल का समर्थन किया। इससे सुमित गुंजन और उनकी टीम को अपनी बड़े पैमाने की मोजेक कला को जनता के सामने पेश करने का मौका मिला। • सांस्कृतिक महत्व: पारंपरिक मिट्टी के दीयों का उपयोग करना भारतीय संस्कृति में शुभ और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। इस सामग्री के चयन ने आधुनिक कला का निर्माण करते हुए भारतीय विरासत की सुंदरता को भी उजागर किया है। सवाल-जवाब 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मोजेक आर्ट कहाँ बनाई गई? यह कलाकृति झारखंड के कोडरमा में, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के चाराडीह स्थित आवास के पास बनाई गई थी। 2. इस चित्र को बनाने में कितने मिट्टी के दीयों का उपयोग किया गया? इस भव्य मोजेक कलाकृति को पूरा करने के लिए लगभग डेढ़ लाख (1,50,000) मिट्टी के दीयों को व्यवस्थित किया गया था। 3. इस अनोखे मोजेक आर्ट को किसने तैयार किया है? इसे गिरिडीह के कलाकार सुमित गुंजन ने अपनी 11 सदस्यीय टीम के साथ मिलकर तैयार किया है। 4. इस मोजेक कलाकृति को पूरा करने में कितना समय लगा? कलाकारों की टीम ने 15 और 16 सितंबर को दिन-रात लगातार मेहनत करके इस कलाकृति को पूरा किया। 5. कलाकार सुमित गुंजन ने इससे पहले कौन सी मोजेक कलाकृतियाँ बनाई हैं? उन्होंने पहले मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम दरबार, भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की मोजेक कलाकृतियां बनाई हैं। प्रेरणा और सबक सुमित गुंजन और उनकी टीम का यह समर्पण टीमवर्क और रचनात्मक अभिव्यक्ति के बारे में मूल्यवान सीख देता है। • सहयोग की शक्ति: दो दिनों तक लगातार काम करना यह दर्शाता है कि एक एकजुट टीम जटिल कलात्मक परियोजनाओं को भी सफलतापूर्वक पूरा कर सकती है। इस विशाल व्यवस्था को समय पर पूरा करने के लिए सभी 11 सदस्यों के बीच तालमेल सबसे महत्वपूर्ण था। • रचनात्मक संसाधनशीलता: भव्य चित्र बनाने के लिए मिट्टी के दीयों जैसी साधारण चीजों का उपयोग करना साबित करता है कि रचनात्मकता सामग्री तक सीमित नहीं है। कलाकार प्रभावशाली कला बनाने के लिए पारंपरिक संसाधनों से प्रेरणा ले सकते हैं। • दृढ़ता और ध्यान: डेढ़ लाख दीयों को बारीकी से व्यवस्थित करने के लिए अत्यधिक धैर्य और चौबीसों घंटे काम करने की आवश्यकता थी। एक ही लक्ष्य के प्रति समर्पण शारीरिक थकान पर विजय पाकर शानदार परिणाम हासिल करने में मदद करता है। https://trendkia.com/jharkhand/koderma-men-derha-lakha-mitti-ke-diyon-se-banai-gai-pradhanamntri-narendra-modi-ki-bhavya-mojeka-kalakriti-33239 TrendKia — Har trend, sabse pehle.