# मानसून में गाय और भैंस का दूध घटने से बचाएंगे ये जरूरी उपाय, देवघर की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन से जानें खास टिप्स

> बरसात के मौसम में हरे चारे में नमी और गोहाल की गंदगी से गाय और भैंस के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. पूनम सोरेन ने पशुओं को बीमारियों से बचाने और दूध बढ़ाने के आसान तरीके बताए हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/manasuna-men-gaya-aura-bhainsa-ka-dudha-ghatane-se-bachaenge-ye-jaruri-upaya-deoghar-ki-pashu-chikitsaka-do-poonam-soren-se-janen--18893 · **Language:** Hindi
**Tags:** पशुपालन, दूध उत्पादन, देवघर कृषि विज्ञान केंद्र, डॉ पूनम सोरेन, मानसून पशु देखभाल, गाय भैंस की बीमारियां, पशु टीकाकरण

झारखंड के देवघर जिले और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मानसून की शुरुआत के साथ ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है। खेतों और मैदानों में प्रचुर मात्रा में हरा चारा उपलब्ध होने से पशुपालकों के चेहरे पर खुशी दिखाई देने लगती है। अधिकांश किसानों को लगता है कि बारिश के दिनों में पशुओं के भोजन का संकट पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब दूध का उत्पादन बढ़ेगा। हालांकि, पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बरसात का महीना पशुपालकों के लिए सबसे अधिक सतर्कता बरतने का समय होता है। इस दौरान वातावरण और चारे में नमी का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिससे जीवाणु और फफूंद तेजी से पनपने लगते हैं। इसके अलावा गोहाल में पानी जमा होने और कीचड़ फैलने से पशु कई तरह के संक्रमणों का शिकार हो सकते हैं। इसका सीधा नुकसान पशुपालक को उठाना पड़ता है, क्योंकि बीमार या तनावग्रस्त पशु धीरे-धीरे दाना-पानी कम कर देता है और उसका दूध उत्पादन तेजी से घटने लगता है। इस स्थिति से निपटने और पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए देवघर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने खान-पान, गोहाल की स्वच्छता और आवश्यक दवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।

## बरसात के मौसम में पशुओं के बीमार पड़ने और दूध घटने की मुख्य वजहें
बरसात के दिनों में वातावरण में नमी का स्तर काफी अधिक होता है, जो सूक्ष्मजीवों और हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने के लिए बेहद अनुकूल माहौल तैयार करता है। डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार, जिन पशुपालकों ने मानसून की शुरुआत से पहले अपने मवेशियों का समय पर टीकाकरण करवा लिया है, उनके पशुओं में गंभीर संक्रामक बीमारियों की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। इसके विपरीत, बिना टीकाकरण वाले पशु इस मौसम में बहुत जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके साथ ही, बारिश के पानी से भीगे हुए हरे चारे में बैक्टीरिया और अन्य कीटाणु जमा हो सकते हैं। जब गाय, भैंस या बकरी इस प्रकार के दूषित या अत्यधिक नमी वाले चारे का सेवन करते हैं, तो उनका पाचन तंत्र प्रभावित होता है और वे पेट से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। जब पशु का स्वास्थ्य बिगड़ता है या उसका आहार प्रभावित होता है, तो उसका सीधा असर दैनिक दूध उत्पादन की मात्रा पर दिखाई देने लगता है।

## हरे चारे के रखरखाव और सही आहार प्रबंधन के नियम
बारिश के मौसम में पशुओं को दिए जाने वाले आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। डॉ. पूनम सोरेन ने सलाह दी है कि खेतों से काटकर लाए गए हरे चारे को कभी भी सीधे पशुओं के सामने नहीं डालना चाहिए। हरे चारे को खिलाने से पहले कुछ समय के लिए धूप या हवा में सुखा लेना चाहिए ताकि उसकी अतिरिक्त नमी खत्म हो सके। यदि चारे पर फफूंद लगी दिखाई दे या वह बहुत ज्यादा गीला और सड़ा हुआ हो, तो उसे पशुओं को बिल्कुल नहीं देना चाहिए। इसके साथ ही पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उन्हें अंदरूनी संक्रमण से बचाने के लिए प्राकृतिक घरेलू उपायों का सहारा लिया जा सकता है। डॉ. सोरेन के अनुसार, सप्ताह में कम से कम तीन दिन पशुओं के आहार में नीम की पत्तियां, अजवाइन और लहसुन जैसी चीजों को शामिल करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। ये चीजें पशु के शरीर में एंटीबायोटिक और पाचक के रूप में काम करती हैं। इसके अलावा, बारिश के मौसम में गाय, भैंस और बकरी को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की सलाह पर उचित कृमिनाशक दवा अनिवार्य रूप से देनी चाहिए।

## गोहाल की नियमित सफाई और चूने के छिड़काव का महत्व
बरसात में केवल आहार ही नहीं, बल्कि पशुओं के रहने के स्थान की स्वच्छता भी उतनी ही मायने रखती है। गोहाल में पानी का ठहराव और कीचड़ जमा होना पशुओं के खुरों के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। लगातार नमी और गंदगी के संपर्क में रहने से पशुओं के खुर सड़ने लगते हैं और उनमें घाव या संक्रमण पैदा हो जाता है, जिसे खुरपका या सड़न की बीमारी कहा जाता है। इस परेशानी से बचाव के लिए पशुपालकों को हर दिन गोहाल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए और वहां पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। डॉ. पूरेन सोरेन ने बताया कि गोहाल की सूखी जमीन पर रोजाना चूने का छिड़काव करना एक बेहद असरदार तरीका है। चूना कीटाणुओं को नष्ट करता है, नमी को सोखता है और फर्श को कीटाणुरहित बनाए रखने में मदद करता है। गोहाल को साफ और सूखा रखकर पशुओं को तनावमुक्त और बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

## टीकाकरण और शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत करें इलाज
पशुपालकों के लिए बारिश का मौसम वित्तीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य से बेहतर दूध उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बीमारी होने के बाद इलाज पर भारी धनराशि खर्च करने से कहीं अधिक बेहतर है कि समय रहते बचाव के उपाय अपनाए जाएं। मानसून शुरू होने से पहले ही सभी जरूरी टीकों की खुराक पूरी करा लेनी चाहिए। यदि किसी पशु का दूध अचानक कम हो जाए, वह दाना-पानी खाना बंद कर दे, लगातार सुस्त पड़ा रहे, चलने-फिरने में लंगड़ाए या उसके खुरों में घाव नजर आए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई देने पर बहुत लंबे समय तक केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर सही डॉक्टरी परामर्श और इलाज शुरू कराना चाहिए। थोड़ी सी जागरूकता और देखभाल से पशुपालक बरसात के दिनों में अपने मवेशियों को स्वस्थ रखकर दूध का उत्पादन स्थिर बनाए रख सकते हैं और अनावश्यक खर्चों से बच सकते हैं।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** पशुपालक मानसून के दौरान गोहाल की नियमित सफाई, चूने के छिड़काव और सूखे चारे के प्रबंधन से मवेशियों का दूध उत्पादन बनाए रख सकते हैं और इलाज के अनावश्यक खर्चों को कम कर सकते हैं।
- **झारखंड और देवघर में:** स्थानीय किसान कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ सलाह पर अमल करते हुए अपने मवेशियों का समय पर टीकाकरण और कृमिमुक्ति कराकर मौसमी बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बरसात के मौसम में गाय और भैंस का दूध क्यों घटने लगता है?
बारिश में हरे चारे में अधिक नमी, बैक्टीरिया के पनपने, गोहाल में कीचड़ और मवेशियों के बीमार या तनावग्रस्त होने से दूध उत्पादन में गिरावट आती है।

### 2. मानसून में पशुओं को हरा चारा खिलाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
हरे चारे को सीधे खिलाने के बजाय पहले धूप या हवा में सुखा लेना चाहिए और बहुत गीला या फफूंद लगा चारा मवेशियों को बिल्कुल नहीं देना चाहिए।

### 3. गोहाल में चूने का छिड़काव क्यों जरूरी माना गया है?
गोहाल की जमीन पर रोजाना चूना छिड़कने से फर्श की नमी सोख ली जाती है, कीटाणु नष्ट होते हैं और खुर की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

### 4. पशुओं की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कौन से प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं?
सप्ताह में तीन दिन मवेशियों के आहार में नीम की पत्तियां, अजवाइन और लहसुन शामिल करने से उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

### 5. पशुपालकों को पशु चिकित्सक से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि पशु अचानक दूध कम कर दे, खाना छोड़ दे, सुस्त रहे, चलने में लंगड़ाए या खुर में घाव दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._