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  "type": "article",
  "title": "मौसम बदलते ही दुधारू मवेशियों के आहार में करें जरूरी फेरबदल, बढ़ेगी पैदावार",
  "summary": "मानसून के बाद तापमान में गिरावट के दौरान मवेशियों की खुराक में 60 फीसदी चारा, 40 फीसदी दाना और नियमित मिनरल मिक्सचर शामिल करने से दूध उत्पादन 12 लीटर तक पहुंच सकता है।",
  "content": "बरसात का दौर खत्म होते ही सितंबर और अक्टूबर के महीनों में मौसम करवट लेने लगता है। इस समय बारिश की विदाई के बाद तापमान गिरने लगता है और हल्की ठंडक दस्तक देने लगती है। वातावरण में आने वाला यह अचानक बदलाव सीधे तौर पर दुधारू मवेशियों के स्वास्थ्य और उनकी दूध देने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे संवेदनशील समय में पशुपालकों को मवेशियों के भोजन, चारे और उनके बाड़े के प्रबंधन पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, जिससे मौसमी बदलाव के कारण दूध की मात्रा में कोई गिरावट न दर्ज हो।\n\nचारे और दाने के सही तालमेल से बनी रहेगी मवेशियों की ऊर्जा\nतापमान में बदलाव के दौर में दुधारू गायों के दैनिक आहार में पोषक संतुलन बनाए रखना सबसे अहम कदम माना जाता है। कोडरमा गौशाला के पशु एक्सपर्ट रजनीश कुमार के अनुसार, पशुपालकों को ऋतु के हिसाब से पशु देखभाल के तौर-तरीकों को तुरंत ढाल लेना चाहिए। यदि खानपान सही रखा जाए तो पशु बीमारियों से बचे रहते हैं और उनकी दूध देने की क्षमता कमजोर नहीं पड़ती। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक दुधारू गाय के कुल दैनिक आहार में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा सूखे और हरे चारे का होना चाहिए, जबकि शेष 40 प्रतिशत हिस्सा विशेष फीड यानी दाने का निर्धारित किया जाना चाहिए। चारे और दाने का यह संतुलित अनुपात मवेशियों को जरूरी ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है, जिसका सीधा सकारात्मक असर उनके शरीर और दुग्ध उत्पादन दोनों पर देखने को मिलता है।\n\nदाने में शामिल करें पौष्टिक घटक और नियमित मिनरल मिक्सचर\nपशुओं के दैनिक दाने को तैयार करते समय गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। रजनीश कुमार ने जानकारी दी कि दाने के मिश्रण में गेहूं का दर्रा और सरसों की खली जैसी पौष्टिक सामग्रियों को प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है। खुराक तय करते समय पशुपालक को मवेशी की उम्र, उसका वजन, शारीरिक स्थिति, नस्ल और रोजाना दूध देने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। सामान्य आहार के अलावा मवेशी के पोषण चक्र को पूरा करने के लिए मिनरल मिक्सचर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। नियमित चारे और दाने के साथ हर दुधारू पशु को प्रतिदिन लगभग 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर अवश्य दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही पशु की जरूरत के मुताबिक कैल्शियम की खुराक सुनिश्चित करने से शरीर को सभी अनिवार्य खनिज और लवण सुलभ हो जाते हैं।\n\nसंतुलित खुराक से 10 लीटर वाला दूध उत्पादन पहुंचेगा 12 लीटर तक\nजब दुधारू मवेशी को रोजमर्रा की खुराक के साथ जरूरी पोषक तत्व और खनिज दिए जाते हैं, तो उसका शारीरिक स्वास्थ्य मजबूत होता है और दूध उत्पादन का स्तर ऊंचा बना रहता है। रजनीश कुमार ने रेखांकित किया कि जो गाय सामान्य तौर पर 10 लीटर तक दूध देती है, उसे सही अनुपात में संतुलित आहार, 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर और आवश्यक कैल्शियम लगातार देने से उत्पादन बढ़कर 11 से 12 लीटर तक पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त, मौसम में बदलाव के दौरान पशुओं को हमेशा स्वच्छ व ताजा पीने का पानी उपलब्ध कराना चाहिए। चारे की गुणवत्ता की निरंतर जांच करने के साथ-साथ पशुओं के रहने के स्थान को पूरी तरह सूखा और साफ-सुथरा रखना चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा न पनपे।\n\nइसका आप पर असर\nमानसून के बाद मौसम में बदलाव के दौरान संतुलित पशु आहार अपनाने से डेयरी किसानों की आय और मवेशियों की सेहत में सीधा सुधार देखा जा सकता है।\n\n• भारत में: मौसम बदलने पर मवेशियों के आहार में 60 प्रतिशत चारा और 40 प्रतिशत दाना शामिल करके किसान मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं। इससे देश भर के दुग्ध उत्पादकों को सर्दियों की शुरुआत में दूध की पैदावार घटने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n• कोडरमा में: स्थानीय गौशाला विशेषज्ञ की सलाह मानकर 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम देने से 10 लीटर वाली गाय का दूध 11 से 12 लीटर तक पहुंच सकता है। इस अतिरिक्त उत्पादन से क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों की दैनिक कमाई में सीधा इजाफा होगा।\n• खुराक प्रबंधन: दाने में गेहूं दर्रा और सरसों की खली का मिश्रण पशु की नस्ल, उम्र और वजन के अनुसार तय किया जाना चाहिए। सटीक पोषण देने से पशु कमजोर नहीं पड़ते और उनकी प्रजनन क्षमता भी दुरुस्त बनी रहती है।\n• बाड़े की स्वच्छता: मवेशियों को साफ पानी पिलाने और उनके रहने की जगह को सूखा रखने से संक्रमण की संभावना घटती है। इससे पशुपालकों के इलाज और दवाइयों पर होने वाले आकस्मिक खर्चों में खासी कमी आती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमानसून समाप्त होने के बाद सितंबर और अक्टूबर में तापमान में गिरावट और बदलते मौसम के कारण दुधारू मवेशियों के शरीर पर मौसमी तनाव बढ़ता है, जिससे दूध उत्पादन घटने का जोखिम पैदा हो जाता है।\n\n• मौसम और तापमान में बदलाव: बरसात खत्म होने के साथ ही ठंडक की शुरुआत होती है और तापमान में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है। मौसम के इस अचानक बदलाव के चलते मवेशियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।\n• पोषण की असंतुलित आपूर्ति: बदलते मौसम में केवल साधारण चारा देने से पशु को अनिवार्य ऊर्जा और लवण नहीं मिल पाते हैं। ऊर्जा और खनिजों की इस कमी के कारण दूध उत्पादन में गिरावट दर्ज की जाती है।\n• खनिज तत्वों का अभाव: सामान्य आहार में कैल्शियम और आवश्यक ट्रेस खनिजों की पर्याप्त मात्रा नहीं होती है। इसी वजह से विशेषज्ञों द्वारा 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर और अतिरिक्त पोषण देने की सलाह दी गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मानसून के बाद दुधारू मवेशियों के आहार का सही अनुपात क्या होना चाहिए?\nदुधारू गाय के कुल आहार में लगभग 60 प्रतिशत सूखा व हरा चारा और 40 प्रतिशत दाना या फीड शामिल होना चाहिए।\n\n2. दुधारू पशु को प्रतिदिन कितना मिनरल मिक्सचर देना चाहिए?\nसामान्य भोजन के साथ मवेशी को प्रतिदिन करीब 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर और जरूरत अनुसार कैल्शियम देना चाहिए।\n\n3. संतुलित आहार देने से दूध उत्पादन में कितनी वृद्धि हो सकती है?\nउचित पोषण और मिनरल मिक्सचर की मदद से 10 लीटर दूध देने वाली गाय का उत्पादन बढ़कर 11 से 12 लीटर तक पहुंच सकता है।\n\n4. पशुओं के दाने में कौन-सी पौष्टिक सामग्रियां मिलाई जा सकती हैं?\nदाने के मिश्रण में गेहूं का दर्रा और सरसों की खली जैसी पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती हैं।\n\n5. मौसम बदलने के दौरान बाड़े और पानी को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?\nपशुपालकों को मवेशियों के लिए साफ पानी की व्यवस्था करनी चाहिए और उनके रहने के स्थान को पूरी तरह साफ-सुथरा रखना चाहिए।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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