मेकअप की कला से बदली जिंदगी, रांची की सोनी चौरसिया ने तानों को पछाड़कर बनाई खास पहचान रांची की सोनी चौरसिया ने बिना किसी लंबी ट्रेनिंग के अपने हुनर के दम पर मेकअप की दुनिया में मुकाम हासिल किया है। 18 वर्षों के सफर में हजारों दुल्हनों को संवारने वाली सोनी आज अकेले दम पर परिवार संभालते हुए दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली सोनी चौरसिया ने सौंदर्य और मेकअप के क्षेत्र में अपनी मेहनत से एक अलग पहचान कायम की है। चेहरे के अनुसार रूप-रंग को पूरी तरह निखार देने की अपनी अद्भुत कला के चलते लोग उन्हें प्यार से जादू वाली दीदी पुकारते हैं। बिना किसी लंबी औपचारिक डिग्री या बड़े संस्थानों के सहारे, उन्होंने केवल अपने अभ्यास और लगन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। आज वह अपने दम पर बेहतरीन आजीविका कमा रही हैं और कई अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। छोटे से कोर्स से शुरू हुआ हुनर का सफर सोनी चौरसिया के इस पेशेवर सफर की शुरुआत किसी भव्य संस्थान से नहीं हुई थी। उन्होंने केवल 20 दिनों का एक बुनियादी कोर्स किया था। इसके बाद उन्होंने किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बजाय खुद लगातार अभ्यास करने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। जैसे-जैसे उनका अभ्यास बढ़ता गया, उनके काम में निपुणता आती गई और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा भी मजबूत होता चला गया। उनका मानना है कि इस पेशे में किसी भी डिग्री से अधिक महत्व निरंतर अभ्यास और काम के प्रति समर्पण का होता है। त्वचा की समझ और खास तकनीक मेकअप करने के दौरान सोनी हर व्यक्ति के चेहरे और त्वचा की बनावट को गहराई से परखती हैं। उनका कहना है कि हर इंसान की त्वचा का प्रकार अलग होता है, इसलिए उत्पाद भी उसी हिसाब से चुने जाने चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक की त्वचा ऑयली यानी तैलीय होती है, तो वह हाइड्रोलिक जेल जैसे खास उत्पादों का उपयोग करती हैं। उनका काम इतना प्रभावशाली होता है कि कई बार 60 वर्ष की महिलाएं भी सजने-संवरने के बाद 40 वर्ष जितनी युवा दिखने लगती हैं। अपने 18 वर्षों के लंबे करियर में वह अब तक 5000 से अधिक दुल्हनों को सजा चुकी हैं। सामाजिक तानों के बीच अकेले संभाली जिम्मेदारी एक अकेली महिला के रूप में काम करते हुए सोनी को अपने शुरुआती दिनों में समाज की तीखी टिप्पणियों और तानों का सामना भी करना पड़ा था। इन सभी नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने अपना पूरा ध्यान काम और अपने परिवार पर रखा। वह एक बेटे की मां हैं, जो इस समय बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहा है, और वह अकेले ही उसकी परवरिश और पढ़ाई का पूरा जिम्मा उठा रही हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। होम सर्विस और आत्मनिर्भरता की मिसाल सोनी ज्यादातर अपने ग्राहकों को उनके घर जाकर ही सेवाएं प्रदान करती हैं। उनकी सेवाओं की दरों की बात करें तो एक फेशियल के लिए वह 6,000 रुपये और एक सामान्य मेकअप के लिए लगभग 10,000 रुपये तक चार्ज करती हैं। इस काम से वह हर महीने एक शानदार आय अर्जित कर लेती हैं। जो समाज कभी सवाल उठाता था, आज वही महिलाएं उनसे प्रेरित होकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं और उनसे प्रेरणा ले रही हैं। इसका आप पर असर यह कहानी दर्शाती है कि बिना महंगी डिग्रियों के भी व्यावहारिक हुनर और सतत अभ्यास से एक सफल करियर बनाया जा सकता है। • भारत में: स्वरोजगार की तलाश में जुटी महिलाओं के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि सौंदर्य और सेवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। यह दिखाता है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद व्यावहारिक कौशल से स्वतंत्र आजीविका खड़ी की जा सकती है। • रांची में: स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को सामाजिक बाधाओं और तानों के बावजूद आगे बढ़ने का हौसला मिलता है। यह स्थानीय कारीगरों और सेवा प्रदाताओं को अपने हुनर की सही कीमत तय करने की प्रेरणा देता है। • हुनरमंद युवाओं के लिए: किसी भी काम में औपचारिक डिग्री से अधिक महत्व निरंतर अभ्यास और तकनीक की सही समझ का होता है। अपनी स्किल को निखारकर कोई भी व्यक्ति घर बैठे या होम सर्विस के जरिए बेहतरीन आय कमा सकता है। • एकल अभिभावकों के लिए: सामाजिक टिप्पणियों की परवाह किए बिना अपने काम पर ध्यान देकर परिवार का सम्मानपूर्वक भरण-पोषण करना पूरी तरह संभव है। अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी अकेले उठाने का यह एक सशक्त उदाहरण है। ऐसा क्यों हुआ सोनी चौरसिया की यह सफलता वर्षों की अनवरत मेहनत, तकनीक की गहरी समझ और सामाजिक बाधाओं को नजरअंदाज करने के मजबूत संकल्प का परिणाम है। • सीमित शुरुआत से निरंतर अभ्यास: उन्होंने 20 दिनों के एक संक्षिप्त कोर्स के बाद किसी अन्य प्रशिक्षण के बजाय खुद लगातार अभ्यास किया। इसी नियमित अभ्यास ने उनके हाथों में सफाई और चेहरे के अनुसार काम करने की कला विकसित की। • त्वचा के प्रकार की तकनीकी समझ: वह हर चेहरे और त्वचा की प्रकृति को समझकर उपयुक्त उत्पादों का चयन करती हैं, जैसे तैलीय त्वचा पर हाइड्रोलिक जेल का इस्तेमाल। इस सही तकनीक और चयन के कारण उनके काम में बेहतर परिणाम नजर आते हैं। • सामाजिक तानों की अनदेखी: एक अकेली महिला के रूप में काम करते समय उन्हें समाज से कई ताने मिले, लेकिन उन्होंने उन पर ध्यान देने के बजाय अपने काम पर ध्यान दिया। इस मानसिक दृढ़ता ने उन्हें बिना विचलित हुए आगे बढ़ने में मदद की। • पारिवारिक जिम्मेदारी की प्रेरणा: अपने बेटे की अकेले परवरिश करने और उसकी बोर्ड परीक्षा की पढ़ाई की जिम्मेदारी ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। इस जिम्मेदारी ने उन्हें एक सफल और स्वतंत्र पेशेवर बनने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. सोनी चौरसिया को लोग प्यार से क्या कहकर बुलाते हैं? अपने बेहतरीन मेकअप और चेहरे को नया रूप देने की कला के कारण लोग उन्हें प्यार से जादू वाली दीदी कहते हैं। 2. सोनी ने मेकअप का प्रशिक्षण कहां से और कितने समय के लिए लिया था? उन्होंने कोई औपचारिक डिग्री नहीं ली, बल्कि सिर्फ 20 दिनों का एक बुनियादी कोर्स किया और बाकी सब अभ्यास से सीखा। 3. सोनी चौरसिया पिछले कितने वर्षों से यह काम कर रही हैं? वह पिछले 18 वर्षों से इस पेशे में सक्रिय हैं और अब तक 5000 से अधिक दुल्हनों को तैयार कर चुकी हैं। 4. तैलीय त्वचा वाले ग्राहकों के लिए सोनी किस तरह के उत्पाद का उपयोग करती हैं? तैलीय यानी ऑयली स्किन वाले ग्राहकों के लिए वह हाइड्रोलिक जेल जैसे विशेष मेकअप उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं। 5. सोनी अपनी फेशियल और मेकअप सेवाओं के लिए कितना चार्ज करती हैं? वह एक फेशियल के लिए 6,000 रुपये और एक मेकअप के लिए लगभग 10,000 रुपये तक फीस लेती हैं। 6. सोनी चौरसिया किस तरह की सेवाएं देना पसंद करती हैं? वह ज्यादातर अपने ग्राहकों को उनके घर जाकर ही होम सर्विस सेवाएं प्रदान करती हैं। प्रेरणा और सबक सोनी चौरसिया का जीवन संघर्ष यह सिखाता है कि समाज के तानों को पीछे छोड़कर अपने हुनर पर भरोसा करने से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। • डिग्री से बड़ा अभ्यास: किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महंगी औपचारिक डिग्री से ज्यादा जरूरी निरंतर अभ्यास और काम के प्रति लगन होती है। • तानों को नजरअंदाज करना: जब आप कुछ नया या अलग करते हैं तो लोग बातें बनाएंगे, लेकिन उन पर ध्यान दिए बिना अपने लक्ष्य पर डटे रहना ही कामयाबी दिलाता है। • तकनीकी बारीकियों की कद्र: अपने काम की बुनियादी समझ और ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से सही फैसले लेना ही आपको दूसरों से अलग बनाता है। • अकेले दम पर जिम्मेदारी निभाना: परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अपने हुनर को अपनी ताकत बनाकर आप अपने परिवार का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण कर सकते हैं। https://trendkia.com/jharkhand/mekaapa-ki-kala-se-badali-jindagi-ranchi-ki-soni-chourasiya-ne-tanon-ko-pachharakara-banai-khasa-pahachana-46458 TrendKia — Har trend, sabse pehle.