# मिट्टी सुधार और जैविक घोल के दम पर 1 एकड़ में भिंडी से डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर रहे किसान मुकेश

> रांची के किसान मुकेश ने सटीक जुताई, देसी खाद और सतर्क निगरानी के जरिए 1 एकड़ खेत से 35 किलो दैनिक भिंडी उत्पादन और डेढ़ लाख रुपये की कमाई हासिल की है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/mitti-sudhara-aura-jaivika-ghola-ke-dama-para-1-ekara-men-bhindi-se-derha-lakha-rupaye-ki-kamai-kara-rahe-kisana-mukesh-41643 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांची, भिंडी की खेती, किसान मुकेश, कृषि तकनीक, जैविक खाद, सब्जी उत्पादन

झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले किसान मुकेश ने अपने एक एकड़ खेत में भिंडी की शानदार पैदावार लेकर खेती को मुनाफे का मजबूत जरिया बना दिया है। उनके खेत से रोजाना 35 किलो ताजी भिंडी निकल रही है और उनकी फसल पूरी तरह कीटों से सुरक्षित है। पिछले दो महीनों में मुकेश भिंडी बेचकर करीब डेढ़ लाख रुपये जुटा चुके हैं, जबकि आने वाले एक महीने तक यह फसल लगातार उत्पादन देती रहेगी।

## चार बार जुताई और धूप से मिट्टी को सशक्त बनाने की तकनीक
मुकेश के अनुसार किसी भी फसल की सफलता उसकी जमीन की उर्वरता पर टिकी होती है। बुवाई शुरू करने से पहले वे खेत की पूरी चार बार गहरी जुताई करते हैं। प्रत्येक जुताई के दौरान खेत को अच्छी धूप लगने दी जाती है, जिससे मिट्टी की सेहत निखरती है और उसमें छिपे हानिकारक तत्व खत्म होते हैं। जुताई की इस प्रक्रिया में वे थोड़ा यूरिया, थोड़ा डीएपी, चूना और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिलाते हैं। इस चक्र को चार बार दोहराने से जमीन बीज बोने के लिए पूरी तरह उपजाऊ बन जाती है।

## बेसन, गुड़ और गोमूत्र के देशी मिश्रण का जादुई असर
जमीन की जैविक शक्ति बढ़ाने के लिए मुकेश एक विशेष देसी पोषण तैयार करते हैं। वे थोड़ा बेसन, थोड़ा गुड़ और गोमूत्र आपस में मिलाकर खेत की मिट्टी को उपलब्ध कराते हैं। उनका साफ मानना है कि पौधे लगाने से पहले यदि मिट्टी पर पूरी मेहनत कर ली जाए, तो आगे चलकर फसल को न केवल पोषण मिलता है बल्कि पौधे हर मौसम को झेलने में सक्षम बन जाते हैं।

## कीट प्रबंधन के लिए पहले से स्प्रे और प्रभावित पौधे को तुरंत हटाना
सब्जियों की बागवानी में कीट सबसे बड़ी चुनौती बनकर फसल बर्बाद कर सकते हैं। इस खतरे से निपटने के लिए मुकेश पहले से ही कीटनाशक स्प्रे तैयार रखते हैं। वे लगातार खेत में घूमते रहते हैं और पौधों की पत्ती-पत्ती की जांच करते हैं। अगर किसी पौधे में कीड़े का हल्का सा भी असर नजर आता है, तो वे जोखिम उठाए बिना उस पौधे को जड़ से उखाड़कर अलग फेंक देते हैं। इसके फौरन बाद आसपास के स्वस्थ पौधों पर स्प्रे कर दिया जाता है ताकि संक्रमण आगे न फैले।

## दैनिक आठ घंटे की निगरानी और पचास हजार रुपये की अतिरिक्त उम्मीद
मुकेश बताते हैं कि खेती से मोटी कमाई जरूर होती है, मगर यह काम लगातार सतर्कता मांगता है। वे रोज करीब आठ घंटे खेत में बिताते हैं ताकि फसल को कीड़ों और आवारा जानवरों के नुकसान से बचाया जा सके। पिछले दो महीनों में डेढ़ लाख रुपये की आमदनी के बाद उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले एक महीने में वे 50 से 60 हजार रुपये का अतिरिक्त मुनाफा आसानी से निकाल लेंगे।

## इसका आप पर असर
यह समाचार किसानों और छोटे जोत वाले उत्पादकों को कम जमीन में सही वैज्ञानिक एवं पारंपरिक तकनीकों से अधिक आय अर्जित करने का व्यवहारिक खाका प्रदान करता है।

- **भारत में:** छोटी जोत वाले किसान मिट्टी की चार बार जुताई, चूना, सड़ा गोबर और गोमूत्र-गुड़-बेसन मिश्रण अपनाकर फसल की उत्पादकता कई गुना बढ़ा सकते हैं। इससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है और लागत में सीधी बचत होती है।
- **रांची में:** स्थानीय सब्जी उत्पादक रांची के आसपास के बाजारों में भिंडी की नियमित मांग का फायदा उठाकर 35 किलो दैनिक आपूर्ति से मासिक आय को सुरक्षित कर सकते हैं। समय रहते कीट प्रबंधन कर क्षेत्रीय किसान पूरी फसल के नुकसान से बच सकते हैं।
- **लागत और आमदनी:** एक एकड़ खेत से दो से तीन महीने में दो लाख रुपये से अधिक का सकल मुनाफा कमाने का यह स्पष्ट उदाहरण है। नियमित नकद प्रवाह के लिए किसान इस फसल चक्र को अपनी मौसमी योजना में शामिल कर सकते हैं।
- **निगरानी का महत्व:** खेतों में दैनिक आठ घंटे का समय देकर फसलों को आवारा जानवरों और कीटों के प्रसार से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रारंभिक अवस्था में ही प्रभावित पौधे हटाने से कीटनाशकों का अत्यधिक खर्च बचता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुकेश की यह बंपर पैदावार और भारी मुनाफा किसी चमत्कार का नतीजा नहीं, बल्कि मिट्टी की बहुस्तरीय तैयारी, देशी पोषक तत्वों के संतुलित प्रयोग और सख्त निगरानी का सीधा परिणाम है।

- **गहरी जुताई और संतुलित उर्वरक:** खेत की चार बार जुताई कर उसमें चूना, सड़ी गोबर खाद, यूरिया और डीएपी मिलाने से जमीन को पर्याप्त धूप मिली और उसकी संरचना सुधरी। इस तैयारी ने पौधों की जड़ों को मजबूत विस्तार और भरपूर पोषण दिया।
- **देशी जैविक घोल का प्रयोग:** गोमूत्र, बेसन और गुड़ का विशेष मिश्रण जमीन में सूक्ष्म पोषक तत्वों और मित्र जीवाणुओं की सक्रियता को बढ़ाता है। इससे फसल को लंबे समय तक कीटों से लड़ने की प्राकृतिक ताकत मिली।
- **सख्त कीट नियंत्रण रणनीति:** खेत में कीड़े दिखने पर दवा के छिड़काव का इंतजार करने के बजाय संक्रमित पौधे को तुरंत उखाड़कर नष्ट किया गया और आसपास स्प्रे किया गया। इस तत्परता ने कीटों को पूरे खेत में फैलने से रोक दिया।
- **निरंतर व्यक्तिगत निगरानी:** रोजाना लगातार आठ घंटे खेत पर नजर रखने से पौधों को होने वाले किसी भी शुरुआती नुकसान को समय रहते रोक लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. किसान मुकेश 1 एकड़ में भिंडी से कितनी कमाई कर चुके हैं?
किसान मुकेश पिछले दो महीनों में एक एकड़ खेत से करीब डेढ़ लाख रुपये कमा चुके हैं, और आने वाले एक महीने में 50 से 60 हजार रुपये अतिरिक्त मिलने की उम्मीद है।

### 2. खेत से रोजाना कितनी भिंडी का उत्पादन हो रहा है?
मुकेश के एक एकड़ खेत से प्रतिदिन लगभग 35 किलो ताजी भिंडी निकल रही है।

### 3. मुकेश मिट्टी तैयार करने के लिए खेत की कितनी बार जुताई करते हैं?
वे बीज बोने से पहले खेत की कुल चार बार जुताई करते हैं ताकि मिट्टी को अच्छी धूप मिल सके।

### 4. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए वे किन चीजों का इस्तेमाल करते हैं?
वे यूरिया, डीएपी, चूना, सड़ा हुआ गोबर खाद और साथ में बेसन, गुड़ व गोमूत्र का मिश्रण इस्तेमाल करते हैं।

### 5. फसल को कीड़ों से बचाने के लिए मुकेश क्या तरीका अपनाते हैं?
वे पहले से स्प्रे तैयार रखते हैं और जिस पौधे में कीड़ा दिखता है, उसे तुरंत खेत से उखाड़कर आसपास स्प्रे छिड़क देते हैं।

### 6. फसल की सुरक्षा के लिए मुकेश रोजाना कितने घंटे खेत में बिताते हैं?
मुकेश कीड़ों और जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए रोजाना करीब आठ घंटे खेत पर नजर रखते हैं।

## प्रेरणा और सबक
रांची के किसान मुकेश की यह उपलब्धि बताती है कि सीमित जमीन होने के बावजूद निष्ठा, सही योजना और मेहनत से खेती में उल्लेखनीय सफलता पाई जा सकती है।

- **जमीन की तैयारी में कोई जल्दबाजी न करें:** बुवाई से पहले खेत की चार बार जुताई और धूप लगवाने का धैर्य ही फसल को बंपर पैदावार की ताकत देता है।
- **देशी संसाधनों का प्रभावी उपयोग:** गोबर, गोमूत्र, बेसन और गुड़ जैसी सामान्य घरेलू चीजों से बेहतरीन खाद बनाकर खेती की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
- **समस्या दिखते ही तुरंत कड़ा फैसला लें:** कीड़ा लगते ही कमजोर पौधे को उखाड़कर अलग करना यह सिखाता है कि बड़े नुकसान से बचने के लिए समय रहते सख्त कदम उठाना जरूरी है।
- **सफलता निरंतर मेहनत से मिलती है:** प्रतिदिन आठ घंटे खेत में नजर रखना यह साबित करता है कि नियमित निगरानी और परिश्रम ही खेती को फायदे का सौदा बनाते हैं।

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