मोराबादी मैदान के दिवाली मेले में 51,000 रुपये की मधुबनी आर्ट वाली खास रामायण साड़ी बनी आकर्षण रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित दिवाली मेले में कोसा सिल्क पर 22 हाथ से बने चित्रों वाली रामायण साड़ी लोगों का ध्यान खींच रही है। एक महीने में तैयार इस 40 से 50 ग्राम वजन की साड़ी की कीमत 51,000 रुपये तय की गई है। झारखंड की राजधानी रांची स्थित मोराबादी मैदान में सजे दिवाली मेले में हस्तकला का एक अनोखा रूप ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहा है। त्योहारों के इस बाजार में कई पारंपरिक उत्पाद मौजूद हैं, लेकिन कारीगरी और सांस्कृतिक थीम की वजह से रामायण साड़ी सबसे अधिक चर्चा बटोर रही है। कोसा सिल्क के कपड़े पर तैयार की गई इस साड़ी की कीमत 51,000 रुपये है, जिसे तैयार करने में कारीगर को पूरा एक महीना लगा है। आगामी 'रामायण' फिल्म के प्रदर्शन से ठीक पहले इस खास परिधान को बाजार में पेश किया गया है, जिसके कई पीस पहले ही बिक चुके हैं। कोसा सिल्क पर हाथ से उकेरे गए 22 प्रसंग इस परिधान की सबसे बड़ी खासियत इसके पल्लू और बॉर्डर पर उकेरी गई मधुबनी कला है। साड़ी पर रामायण महाकाव्य से जुड़े कुल 22 अलग-अलग चित्रों को बड़ी बारीकी से चित्रित किया गया है। इन दृश्यों में माता सीता का स्वयंवर, भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी का वन गमन तथा हनुमान जी द्वारा लंका दहन जैसे प्रमुख प्रसंग शामिल हैं। हर एक प्रसंग को कपड़े पर क्रमबद्ध और सजीव तरीके से दर्शाया गया है, जिससे यह परिधान साधारण पहनावे के बजाय कला का एक संग्रहणीय नमूना प्रतीत होता है। रंगों की मजबूती और हल्का वजन स्टॉल संचालक अजीत के अनुसार, इस पूरे कलात्मक काम को उनकी पत्नी ने अपने हाथों से पूरा किया है। इसमें विशेष फैब्रिक रंगों का प्रयोग किया गया है, जो कई बार धुलने के बाद भी फीके नहीं पड़ते और न ही कपड़े से छूटते हैं। इतनी व्यापक पेंटिंग होने के बावजूद साड़ी का कुल वजन मात्र 40 से 50 ग्राम है। इतने हल्के वजन के कारण इसे संभालना और पहनना बेहद सहज रहता है। कारीगरी के आधार पर तय हुआ मूल्य साड़ी के मूल्य के पीछे के कारण को स्पष्ट करते हुए विक्रेता ने बताया कि बाजार में एक छोटी सी सामान्य मधुबनी पेंटिंग भी 2,000 रुपये से कम में नहीं मिलती। इस साड़ी में 22 विस्तृत मधुबनी चित्र हाथ से बनाए गए हैं और इसमें शुद्ध कोसा सिल्क फैब्रिक लगा है, जिसके चलते इसका दाम 51,000 रुपये रखा गया है। विक्रेता का कहना है कि वे इस परिधान को पारंपरिक कला और संस्कृति का सम्मान करने वाले कद्रदानों तक पहुंचाना चाहते हैं। अपनी विशिष्टता की वजह से यह परिधान किसी भी बड़े समारोह में पहनने वाले को अलग पहचान देता है। रांची के मोराबादी मैदान में यह दिवाली मेला 2 नवंबर तक आयोजित हो रहा है, जहां इस साड़ी को देखा और खरीदा जा सकता है। इसका आप पर असर पारंपरिक हस्तकला और हथकरघा उत्पादों में रुचि रखने वाले खरीदारों के लिए यह मेला सीधे कारीगरों से अनूठी कृतियां खरीदने का अवसर दे रहा है। • भारत में: देश भर में हथकरघा और लोक कला से जुड़े परिधानों की मांग बढ़ रही है, जहां सांस्कृतिक प्रसंगों वाले संग्रहणीय वस्त्र विशेष कार्यक्रमों के लिए पसंद किए जाते हैं। हाथ से बनी इन कृतियों की कीमत पारंपरिक मशीन निर्मित कपड़ों से कहीं अधिक होती है। • रांची में: मोराबादी मैदान में चल रहे दिवाली मेले में स्थानीय नागरिक 2 नवंबर तक जाकर इस 51,000 रुपये मूल्य की विशेष साड़ी और अन्य उत्पादों का अवलोकन कर सकते हैं। यह आयोजन शहर के निवासियों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे कारीगर परिवार की कला देखने का अवसर दे रहा है। • कला प्रेमियों के लिए: 22 मधुबनी चित्रों और 40 से 50 ग्राम वजन वाली यह कोसा सिल्क साड़ी उन खरीदारों के लिए है जो विशिष्ट और प्रीमियम परिधानों का संग्रह करते हैं। फैब्रिक रंगों के इस्तेमाल के कारण इसे सामान्य रूप से धोने पर भी कलाकृतियां खराब नहीं होती हैं। • हस्तशिल्प बाजार: त्योहारों के सीजन में फिल्मों और सांस्कृतिक प्रसंगों पर आधारित उत्पादों को पेश करने से स्थानीय कारीगरों को बेहतर ग्राहक और अपने काम की सही कीमत मिल पा रही है। ऐसा क्यों हुआ यह खास साड़ी पारंपरिक लोक कला को समकालीन परिधान बाजार और आगामी सिनेमाई चर्चा से जोड़ने की योजना के तहत तैयार की गई है। • सांस्कृतिक अवसर का लाभ: आगामी 'रामायण' फिल्म की रिलीज से पहले इस विषय पर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए विक्रेता परिवार ने इस थीम पर परिधान तैयार किया। इस सामयिक जुड़ाव से उत्पाद को बाजार में तुरंत पहचान और शुरुआती ग्राहक मिले। • श्रमसाध्य मधुबनी कला: कोसा सिल्क पर 22 अलग-अलग प्रसंगों को हाथ से चित्रित करने में पूरे एक महीने का समय लगा। व्यक्तिगत मेहनत और पक्के फैब्रिक रंगों के प्रयोग के कारण ही इस उत्पाद को एक सीमित और विशेष संस्करण के रूप में उतारा गया। • कला का मूल्य निर्धारण: सामान्य बाजार में एक अकेली मधुबनी पेंटिंग की न्यूनतम कीमत 2,000 रुपये तक होती है। साड़ी पर 22 अलग-अलग चित्रों के संयोजन और कपड़े की लागत को जोड़कर इसका मूल्य 51,000 रुपये तय किया गया। सवाल-जवाब 1. रांची के मोराबादी मैदान में रामायण साड़ी की कीमत क्या रखी गई है? इस विशेष रामायण साड़ी की कीमत 51,000 रुपये निर्धारित की गई है। 2. इस साड़ी को बनाने में कितना समय लगा है? कोसा सिल्क पर हाथ से 22 चित्र बनाकर इस साड़ी को तैयार करने में पूरा एक महीना लगा है। 3. साड़ी पर कौन सी पेंटिंग की गई है और इसके कलाकार कौन हैं? साड़ी पर मधुबनी पेंटिंग की गई है, जिसे विक्रेता अजीत की पत्नी ने अपने हाथों से तैयार किया है। 4. साड़ी पर रामायण के कौन-कौन से मुख्य प्रसंग दिखाए गए हैं? साड़ी पर कुल 22 चित्र हैं, जिनमें सीता स्वयंवर, राम-लक्ष्मण-सीता का वन गमन और हनुमान जी द्वारा लंका दहन जैसे प्रसंग शामिल हैं। 5. इस साड़ी का कपड़ा कौन सा है और इसका वजन कितना है? यह साड़ी कोसा सिल्क फैब्रिक पर बनी है और इसका कुल वजन केवल 40 से 50 ग्राम है। 6. मोराबादी मैदान में यह दिवाली मेला कब तक चलेगा? मोराबादी मैदान में लगा यह दिवाली मेला 2 नवंबर तक चलेगा, जहां लोग इस साड़ी को देख और खरीद सकते हैं। https://trendkia.com/jharkhand/morabadi-maidana-ke-divali-mele-men-51-000-rupaye-ki-madhubani-arta-vali-khasa-ramayana-sari-bani-akarshana-53673 TrendKia — Har trend, sabse pehle.