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  "type": "article",
  "title": "नेपाल आपदा में पलामू के महेंद्र विश्वकर्मा लापता, परिजनों ने सरकार से लगाई गुहार",
  "summary": "नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के बीच झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले महेंद्र विश्वकर्मा लापता हो गए हैं। वे वहां एक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में फोरमैन के रूप में काम कर रहे थे, और पिछले कई दिनों से उनका परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।",
  "content": "नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और विकट बाढ़ के माहौल के बीच झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के हैदरनगर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बडंडा बरवाडीह गांव के रहने वाले पचास वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल में लापता हो गए हैं। इस घटना के बाद से उनके पूरे परिवार में भारी बेचैनी, डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल के रसुवा जिले के बाणेश्वर इलाके में स्थित एक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के सदस्यों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, वे एंड्रीज हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड के इस प्रोजेक्ट पर फोरमैन के पद पर तैनात थे। पिछले कुछ दिनों से उनका परिजनों से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है, जिसके बाद उनके परिवार ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है कि उनकी जल्द से जल्द खोजबीन की जाए और उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाए।\n\nमेघालय से नेपाल ट्रांसफर हुए थे महेंद्र\nपरिजनों ने पूरी बात साझा करते हुए बताया कि महेंद्र विश्वकर्मा इस साल बीस मार्च को कंपनी के काम के सिलसिले में मेघालय गए थे। वहां कुछ समय तक काम करने के बाद, अप्रैल के महीने में उनका ट्रांसफर नेपाल स्थित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कर दिया गया था। नेपाल पहुंचने के बाद वे लगातार वहीं रहकर फोरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जिस इलाके में वे तैनात थे और काम कर रहे थे, वहां हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा के कारण भारी पैमाने पर तबाही और नुकसान हुआ है। इस विनाशकारी आपदा की खबर सामने आने के बाद से महेंद्र विश्वकर्मा के लापता होने की बात ने परिजनों की नींद उड़ा दी है और उनकी चिंता कई गुना बढ़ गई है।\n\nपत्नी से हुई थी आखिरी बार बात\nमहेंद्र विश्वकर्मा की पत्नी कलावती देवी ने पूरी घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पच्चीस अगस्त की रात करीब नौ बजकर पैंतालीस मिनट पर उनके पति से आखिरी बार सामान्य बातचीत हुई थी। उस वक्त बातचीत के दौरान किसी भी तरह की आपदा या संकट को लेकर कोई बात नहीं हुई थी और सब कुछ सामान्य लग रहा था। इसके अगले ही दिन यानी छब्बीस अगस्त की सुबह आठ बजकर सात मिनट पर महेंद्र की तरफ से एक कॉल जरूर आया था, लेकिन किसी वजह से उस वक्त बात नहीं हो पाई। उसके बाद से उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है और परिवार का उनके साथ किसी भी माध्यम से संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है।\n\nकंपनी से अब तक नहीं मिली ठोस जानकारी\nकलावती देवी का कहना है कि वे लगातार कंपनी प्रबंधन से संपर्क साधने और अपने पति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, कंपनी की तरफ से अभी तक केवल मामले की जांच करने और जल्द ही कोई सूचना देने की बात ही कही जा रही है। महेंद्र विश्वकर्मा के परिवार में उनकी पत्नी कलावती देवी के अलावा दो बेटे और एक बेटी हैं। उनके एक बेटे और बेटी की शादी पहले ही हो चुकी है। घर में उनके दो भाई और परिवार के अन्य सदस्य भी महेंद्र के सुरक्षित घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और लगातार दुआएं मांग रहे हैं।\n\nअनहोनी के डर से सहमा परिवार\nपरिवार के लोगों का मानना है कि नेपाल में लगातार बनी बाढ़ और प्राकृतिक आपदा की स्थिति ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। इस वजह से किसी अनहोनी के डर ने सभी को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। कलावती देवी ने बताया कि पति से ज्यादातर बातचीत व्हॉट्सऐप के जरिए ही होती थी, लेकिन छब्बीस अगस्त के बाद से वह जरिया भी पूरी तरह बंद हो चुका है। अब पीड़ित परिवार ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और संबंधित कंपनी के प्रबंधन से तत्काल प्रभाव से दखल देने और महेंद्र विश्वकर्मा की तलाश के अभियान को तेज करने की मांग की है। परिजनों का दर्द है कि उन्हें अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है और पूरा परिवार उनकी एक आवाज सुनने के लिए बेचैन है।\n\nइसका आप पर असर\nपलामू के महेंद्र विश्वकर्मा के नेपाल में लापता होने की घटना से स्थानीय स्तर पर और उनके पैतृक क्षेत्र में भारी चिंता का माहौल है, जो विदेश में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है।\n\n• भारत में: विदेशों या आपदा प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके परिजनों को त्वरित अपडेट मिलने का मुद्दा गंभीर हो जाता है। इससे कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज होती है।\n• पलामू में: स्थानीय प्रशासन और पीड़ित परिवार पर संकट के इस समय गहरा मानसिक दबाव है, क्योंकि सही जानकारी न मिलने से परिजनों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. महेंद्र विश्वकर्मा मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं?\nवे झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बडंडा बरवाडीह गांव के रहने वाले हैं।\n\n2. महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल में किस पद पर काम कर रहे थे?\nवे नेपाल के रसुवा जिले के बाणेश्वर क्षेत्र में एक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में फोरमैन के पद पर कार्यरत थे।\n\n3. वे किस कंपनी के प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे?\nवे एंड्रीज हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे।\n\n4. परिजनों का उनसे आखिरी बार संपर्क कब हुआ था?\nपरिजनों की उनसे अंतिम सामान्य बातचीत पच्चीस अगस्त की रात करीब नौ बजकर पैंतालीस मिनट पर हुई थी।\n\n5. परिजनों ने किससे मदद की गुहार लगाई है?\nपरिजनों ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और कंपनी प्रबंधन से मदद की गुहार लगाई है।",
  "url": "https://trendkia.com/jharkhand/nepala-apada-men-palamu-ke-mahendra-vishwakarma-lapata-parijanon-ne-sarakara-se-lagai-guhara-24004",
  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-08-29",
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    "झारखंड न्यूज",
    "पलामू",
    "नेपाल आपदा",
    "विदेश मंत्रालय",
    "लापता व्यक्ति"
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