कोडरमा में पुराने और बेकार कपड़ों से घर बैठे बन रहा आरामदायक गद्दा, ट्रैक्टर पर मशीन लेकर घूम रही टीम कोडरमा में अब पुराने और इस्तेमाल न होने वाले कपड़ों को फेंका नहीं जा रहा है, बल्कि ट्रैक्टर पर लगी मशीन की मदद से घर बैठे ही आरामदायक गद्दे तैयार किए जा रहे हैं। आपके घरों में भी पुरानी जींस, शर्ट, पैंट, स्वेटर, चादर और बेडशीट जैसे कई ऐसे कपड़े जरूर पड़े होंगे जिनका अब कोई इस्तेमाल नहीं बचा है। यदि आप भी इन बेकार कपड़ों को कचरे में फेंकने या कबाड़ में देने का मन बना रहे हैं, तो थोड़ा ठहरिए। अब इन्हीं पुराने कपड़ों से बेहद उपयोगी और आरामदायक गद्दे तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए आपको अपना सामान लेकर किसी दुकान या कारखाने के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है। झारखंड के कोडरमा जिले में एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है, जहां ट्रैक्टर पर विशेष मशीन लादकर घूम रही एक टीम सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रही है और उनकी आंखों के सामने गद्दे बना रही है। घरों में जगह घेरने वाले कपड़ों का हो रहा सदुपयोग घरों में बरसों से पड़े बेकार कपड़े अक्सर अलमारियों और बक्सों में केवल धूल फांकते रहते हैं और जगह घेरते हैं। इस अनोखे और अनूठे तरीके से उन पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा रहा है। लोगों को अब कबाड़ में फेंकने के बजाय अपने अनचाहे कपड़ों का एक बेहद बेहतरीन और उपयोगी विकल्प मिल गया है। पर्यावरण और घर दोनों की साफ-सफाई के लिहाज से यह तरीका काफी कारगर साबित हो रहा है, जिससे कबाड़ बन चुके कपड़ों को एक नया जीवन मिल रहा है। ट्रैक्टर पर लगी मशीन करती है अनोखा कमाल पुराने और बेकार कपड़ों से गद्दा तैयार करने की यह पूरी प्रक्रिया एक ट्रैक्टर पर टिकी हुई है, जिस पर विशेष रूप से एक मशीन फिट की गई है। इसी आधुनिक मशीन की सहायता से पुराने कपड़ों को बहुत बारीक और मुलायम टुकड़ों में बदला जाता है। इसके बाद इन्हीं मुलायम रेशेनुमा टुकड़ों की भराई करके आरामदायक गद्दा तैयार किया जाता है। बिहार के मोतिहारी के रहने वाले सइमउद्दीन अपने तीन सदस्यीय दल के साथ इस अनोखे व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी यह टीम ट्रैक्टर पर मशीन लादकर कोडरमा के विभिन्न इलाकों में घर-घर जाकर अपनी सेवाएं दे रही है। आंखों के सामने तैयार होता है नया गद्दा जहां कहीं भी लोगों के पास पुराने कपड़े बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं, यह टीम वहां मौके पर पहुंचकर गद्दा तैयार करने का काम करती है। ग्राहक को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि कारीगर खुद मशीन लेकर घर के दरवाजे पर पहुंचते हैं। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया ग्राहक की अपनी आंखों के सामने होती है, जिससे पारदर्शिता भी बनी रहती है। मशीन की मदद से कपड़ों की कटाई और भराई का काम देखकर लोग हैरान भी होते हैं और खुश भी होते हैं। मात्र 80 रुपये प्रति किलो आता है खर्च सइमउद्दीन के अनुसार पुराने कपड़ों से गद्दा बनवाने का खर्च बेहद किफायती है और इसके लिए मात्र 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। एक गद्दा पूरी तरह तैयार होने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का वक्त लेता है। हालांकि, यह समय गद्दे के तय आकार और उपलब्ध कराए गए कपड़ों की कुल मात्रा के आधार पर थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ग्राहक अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार गद्दे का आकार तय कर सकते हैं। इस नंबर पर कर सकते हैं संपर्क कपड़ों को मशीनी प्रक्रिया से गुजारने के बाद उन्हें गद्दे के अंदर भरकर सिलाई कर दी जाती है, जिससे पुराना कबाड़ एक उपयोगी बिस्तर बन जाता है। इस सेवा का लाभ उठाने के इच्छुक लोग कारीगर सइमउद्दीन से उनके मोबाइल नंबर 99058 63880 पर सीधा संपर्क कर सकते हैं और अपने घर पर ही टीम को बुलाकर गद्दा तैयार करवा सकते हैं। इसका आप पर असर कोडरमा के स्थानीय नागरिकों के लिए यह एक बेहद किफायती और उपयोगी सेवा है, जिससे घर बैठे ही पुराने कबाड़ कपड़ों का सदुपयोग संभव हो रहा है। • कोडरमा में: स्थानीय लोग अपने घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़ों को बिना कहीं ले जाए बेहद कम खर्च पर नया गद्दा बनवा सकते हैं। एक गद्दे को तैयार करने में केवल 80 रुपये प्रति किलो का शुल्क और एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। • बजट की बचत: महंगे बाजार भाव पर नया गद्दा खरीदने के बजाय नागरिक बहुत कम लागत में अपने ही पुराने सामान से जरूरत का सामान पा रहे हैं। • स्थान की बचत: अलमारियों और बक्से में अनगिनत दिनों से जगह घेरने वाले बेकार कपड़ों से घर को मुक्ति मिलती है। • पारदर्शी प्रक्रिया: पूरी निर्माण प्रक्रिया घर के सामने होती है, जिससे सामग्री की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर कोई संदेह नहीं रहता। • आसान संपर्क: इच्छुक लोग दिए गए मोबाइल नंबर पर आसानी से संपर्क करके इस सेवा का लाभ अपने दरवाजे पर उठा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक रूप से लोग पुराने कपड़ों को फेंक देते थे या कबाड़ में दे देते थे, लेकिन इस अनोखे मोबाइल व्यवसाय मॉडल ने कचरे को उपयोगी वस्तु में बदलने का नया रास्ता निकाला है। • मोबाइल मशीन की सुविधा: ट्रैक्टर पर विशेष मशीन स्थापित करने से कारीगरों के लिए गांव-गांव और घर-घर जाकर सीधे मौके पर सेवा देना संभव हो गया है। • बिहार से पलायन और रोजगार: मोतिहारी के सइमउद्दीन जैसे कुशल कारीगर नए क्षेत्रों में इस तरह की अनूठी सेवाएं देकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। • सस्ती रीसाइक्लिंग: लोग कम खर्चे में अपने पुराने सामान का पुनरुुपयोग करना चाहते हैं, जिसके कारण इस प्रकार की डोर-टू-डोर सेवाओं की मांग लगातार बनी रहती है। सवाल-जवाब 1. कोडरमा में पुराने कपड़ों से गद्दा कौन तैयार कर रहा है? बिहार के मोतिहारी निवासी सइमउद्दीन अपनी तीन सदस्यीय टीम के साथ ट्रैक्टर पर मशीन लगाकर यह काम कर रहे हैं। 2. पुराने कपड़ों से गद्दा बनवाने का खर्च कितना आता है? गद्दा तैयार करने के लिए 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। 3. एक गद्दा तैयार होने में कितना समय लगता है? एक गद्दा तैयार करने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है, जो कपड़ों की मात्रा पर निर्भर करता है। 4. क्या गद्दा ग्राहक के सामने बनता है? हां, पूरी प्रक्रिया ग्राहक के घर पर उनकी आंखों के सामने की जाती है। 5. इस सेवा के लिए किस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है? इच्छुक लोग मोबाइल नंबर 99058 63880 पर संपर्क कर सकते हैं। https://trendkia.com/jharkhand/old-and-unused-clothes-converted-into-comfortable-mattresses-in-koderma-by-mobile-team-52119 TrendKia — Har trend, sabse pehle.