पलामू के चेरो आदिवासी बारिश में सांपों से बचाव के लिए घोड़बच पौधे और महुआ के धुएं का करते हैं प्रयोग पलामू में मानसून के दौरान सांपों के बिलों में पानी भरने पर चेरो समाज घोड़बच पौधा लगाने और महुआ की खली का धुआं करने जैसे पारंपरिक उपायों से बचाव करता है। पलामू जिले के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में मानसून का आगमन होते ही सांपों का खतरा काफी बढ़ जाता है। मूसलाधार बारिश के कारण जब जमीनी बिलों में पानी भर जाता है, तो सर्प सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी मकानों और बस्तियों का रुख करने लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस मौसम के दौरान सर्पदंश के जानलेवा मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए पलामू का चेरो आदिवासी समाज सदियों पुरानी अपनी पारंपरिक देसी तकनीकों और प्राकृतिक नुस्खों पर अटूट विश्वास रखता है। घर की दहलीज पर घोड़बच पौधे की सुरक्षा परत चेरो समुदाय के उमेश सिंह बताते हैं कि उनके इलाके में लोग अपने घरों के मुख्य द्वार और चारों तरफ घोड़बच नामक छोटा पौधा लगाने की परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। इस पौधे की पत्तियां और तना एक खास किस्म की गंध छोड़ते हैं, जो सांपों को बिल्कुल पसंद नहीं आती। इस विशिष्ट सुगंध के प्रभाव से सांप उस क्षेत्र से दूर हट जाते हैं और मकान के भीतर दाखिल नहीं होते। गांव के लोग घोड़बच पौधे को अपने घरों के लिए एक प्रकार की प्राकृतिक 'लक्ष्मण रेखा' मानते हैं। इसी परंपरा के संबंध में संजय कुमार का कहना है कि यह पूरा तरीका बुजुर्गों के लंबे अनुभव और देसी ज्ञान पर आधारित है। घोड़बच की महक से बचकर सांप घर में घुसने के बजाय बाहर से ही अपना रास्ता बदल लेते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में घोड़बच के अलावा कई अन्य स्नेक प्लांट भी उपलब्ध हैं, जिन्हें यदि सही स्थानों पर रोपा जाए तो सांपों को रिहायशी दायरे से दूर रखा जा सकता है। घर के अंदर सांप घुसने पर महुआ की खली का धुआं और केरोसिन का प्रयोग यदि कोई सांप असावधानीवश या मौका पाकर मकान के भीतर प्रवेश कर जाता है, तो उसे बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालने के लिए ग्रामीण अलग पारंपरिक तरीका अपनाते हैं। चेरो समाज में महुआ के बीजों यानी डोरी से तेल निकालने के बाद बचे हुए अवशेष का उपयोग किया जाता है, जिसे स्थानीय बोली में 'खली' कहा जाता है। जब इस खली को सुलगाकर घर के भीतर धुआं किया जाता है, तो उसकी तेज धुंध सांपों को सहन नहीं होती और वे तुरंत बाहर भाग खड़े होते हैं। हालांकि, ग्रामीणों का यह भी मानना है कि धुआं करते समय आग से जुड़ी सावधानियों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि कोई दुर्घटना न हो। इसके साथ ही, कई मौकों पर मिट्टी के तेल यानी केरोसिन का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसकी गंध से सांप तेजी से स्थान छोड़ देते हैं। इसका आप पर असर मानसून में सांपों के प्रकोप और सर्पदंश से बचाव के लिए यह जानकारी ग्रामीण और जंगलों से सटे क्षेत्रों के निवासियों के लिए अत्यंत व्यावहारिक है। • भारत में: देश के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोग सांपों को दूर रखने के लिए बिना महंगे रसायनों के पारंपरिक स्नेक प्लांट और घोड़बच जैसे पौधे लगा सकते हैं। इससे घरों के आसपास प्राकृतिक सुरक्षा घेरा बनता है। • पलामू (झारखंड) में: पलामू जिले के ग्रामीण चेरो समाज की आजमाई हुई पद्धतियों को अपनाकर मानसून में सर्पदंश के खतरों को कम कर सकते हैं। यह स्थान आधारित उपाय बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उपलब्ध है। • सुरक्षा सावधानियां: घर के भीतर महुआ की खली का धुआं करते समय आग से बचाव के कड़े इंतजाम रखें। लापरवाही से घर में आग लगने का जोखिम हो सकता है। • आपातकालीन स्थिति: सांप के काटने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी-वेनम इंजेक्शन लगवाएं। समय पर डॉक्टरी इलाज ही जीवन बचा सकता है। सवाल-जवाब 1. मानसून में सांप घरों की ओर क्यों आते हैं? बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, इसलिए वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में घरों में घुस आते हैं। 2. पलामू का चेरो समाज सांपों को रोकने के लिए किस पौधे का उपयोग करता है? चेरो समाज अपने घरों के आसपास घोड़बच नामक पौधा लगाता है, जिसकी विशेष गंध से सांप दूर रहते हैं। 3. यदि सांप घर के अंदर आ जाए तो स्थानीय लोग क्या देसी उपाय करते हैं? घर में सांप घुसने पर महुआ के बीजों की खली को जलाकर धुआं किया जाता है या मिट्टी के तेल (केरोसिन) का प्रयोग किया जाता है। 4. महुआ की खली कैसे बनती है? महुआ के बीजों यानी डोरी से तेल निकालने के बाद जो ठोस अवशेष बचता है, उसे स्थानीय भाषा में खली कहते हैं। https://trendkia.com/jharkhand/palamu-ke-chero-adivasi-barisha-men-sanpon-se-bachava-ke-lie-ghorbach-paudhe-aura-mahua-ke-dhuen-ka-karate-hain-prayoga-28940 TrendKia — Har trend, sabse pehle.