# पलामू के जानकार ने तैयार किया चांदी का खास साबुन, छह महीने की मेहनत और 33 ग्राम का दाम 3,300 रुपये

> झारखंड के पलामू निवासी शिव कुमार पांडे ने सात दुर्लभ औषधीय तत्वों को मिलाकर चांदी का अनूठा साबुन बनाने का दावा किया है, जिसकी कीमत 3,300 रुपये प्रति 33 ग्राम रखी गई है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/palamu-ke-janakara-ne-taiyara-kiya-chandi-ka-khasa-sabuna-chhaha-mahine-ki-mehanata-aura-33-grama-ka-dama-3-300-rupaye-42280 · **Language:** Hindi
**Tags:** चांदी का साबुन, पलामू, शिव कुमार पांडे, आयुर्वेदिक स्किनकेयर, सत्सिद्ध पद्धति, झारखंड

झारखंड के पलामू जिले में त्वचा की देखभाल को लेकर एक अनूठा प्रयोग सामने आया है, जहां आयुर्वेद की गहरी समझ रखने वाले एक स्थानीय निवासी ने चांदी के इस्तेमाल से खास साबुन तैयार करने का दावा पेश किया है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाले रासायनिक साबुनों के उलट यह उत्पाद अपनी असाधारण निर्माण प्रक्रिया और भारी-भरकम कीमत के चलते क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। इसे बनाने वाले का दावा है कि त्वचा संबंधी कई पुरानी और जिद्दी दिक्कतों को दूर करने में यह साबुन बेहद असरदार साबित हो सकता है।

## सात औषधीय घटकों और सत्सिद्ध पद्धति का अनूठा संगम
पलामू के रहने वाले शिव कुमार पांडे के अनुसार, इस विशिष्ट साबुन का निर्माण कुल सात प्राकृतिक और औषधीय तत्वों के मेल से किया जाता है। मुख्य घटक के रूप में शुद्ध चांदी के अलावा इसमें शंख भस्म या तत्व, चंदन, गुलाब, नीम, तुलसी और पुदीना को शामिल किया गया है। इन सभी सामग्रियों को एक तय अनुपात और विशेष विधि के अंतर्गत आपस में मिलाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे निर्माण कार्य को पारंपरिक सत्सिद्ध पद्धति के नियमों का पालन करते हुए पूरा किया जाता है, जिससे औषधियों की स्वाभाविक शक्ति बरकरार रहे।

## तैयार होने में क्यों लगते हैं पूरे छह महीने
साधारण साबुनों की तुलना में इस साबुन को बनाने का तरीका बेहद जटिल और समय लेने वाला है। शिव कुमार पांडे ने जानकारी दी कि इसमें प्रयुक्त प्रत्येक घटक का निर्धारित आयुर्वेदिक विधान से शोधन और लंबी अवधि तक निरंतर प्रसंस्करण किया जाता है। विभिन्न सामग्रियों को आपस में समाहित होने और अपने औषधीय गुणों को पूरी तरह सक्रिय करने में लंबा समय लगता है। इसी कारणवश इस साबुन के एक बैच को पूरी तरह उपयोग लायक बनने में लगभग छह महीने का समय लग जाता है।

## त्वचा की इन गंभीर समस्याओं में राहत का दावा
इस अनूठे साबुन के फायदों का ब्योरा देते हुए शिव कुमार पांडे ने बताया कि इसका नियमित प्रयोग चेहरे के दाग-धब्बे, कील-मुंहासे और पुरानी छाइयों को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। इसके साथ ही यह त्वचा की झुर्रियों को घटाने, ढीली पड़ती त्वचा में नया कसावट लाने और चेहरे पर कुदरती चमक लौटाने का काम भी करता है। उनके मुताबिक, चेहरे के संपूर्ण पोषण और ताजगी के लिए यह एक बहुउपयोगी विकल्प बनकर उभरता है।

## उपयोग का सही तरीका और चेहरे की मसाज
साबुन के इस्तेमाल को लेकर भी एक खास विधि निर्धारित की गई है। शिव कुमार पांडे के मुताबिक, रोजाना के उपयोग के लिए साबुन का केवल एक ग्राम हिस्सा ही पर्याप्त होता है। इस एक ग्राम हिस्से में दो से तीन बूंद साफ पानी मिलाकर हथेलियों से चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करनी होती है। मसाज के बाद इस लेप को करीब 10 मिनट तक त्वचा पर लगा छोड़ देना चाहिए, ताकि औषधीय तत्व गहराई तक समा सकें। इसके पश्चात सामान्य ताजे पानी से चेहरा धोने की सलाह दी गई है।

## 33 ग्राम के लिए 3,300 रुपये का मूल्य
सामग्रियों की विशिष्टता और छह महीने की अथक मेहनत के चलते इस साबुन की कीमत भी काफी ऊंची रखी गई है। इसके 33 ग्राम के एक टुकड़े का दाम करीब 3,300 रुपये तय किया गया है, जो आम बाजार में मिलने वाले साबुनों के मुकाबले कई गुना अधिक है। मूल्य निर्धारण को उचित ठहराते हुए निर्माता का कहना है कि इसमें कीमती धातु चांदी का वास्तविक इस्तेमाल हुआ है और छह महीने तक चलने वाली जटिल निर्माण प्रक्रिया के कारण ही इसकी लागत इतनी अधिक बैठती है।

## चांदी की तासीर और कीटाणुनाशक प्रभाव
चांदी के प्रभाव पर बात करते हुए शिव कुमार पांडे ने रेखांकित किया कि आयुर्वेद में चांदी की तासीर को शीतल यानी ठंडक प्रदान करने वाला माना गया है। इसके अलावा चांदी में प्राकृतिक रूप से कीटाणुनाशक क्षमता भी मौजूद होती है, जो त्वचा को बैक्टीरिया और संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करती है। उनका मानना है कि चांदी के इन्हीं गुणों और छह अन्य जड़ी-बूटियों के असर से चेहरे को भीतर से निखार और कसावट मिलती है।

## इसका आप पर असर
यह अनोखा उत्पाद विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए प्रासंगिक है जो महंगे और पारंपरिक त्वचा देखभाल उत्पादों में रुचि रखते हैं।

- **भारत में:** प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों के प्रति जागरूक लोग अब चांदी जैसी धातुओं पर आधारित सौंदर्य प्रसाधनों के विकल्पों से परिचित हो रहे हैं। हालांकि इसकी 3,300 रुपये प्रति 33 ग्राम की ऊंची कीमत आम उपभोक्ताओं के बजट से काफी बाहर है।
- **पलामू में:** स्थानीय स्तर पर पारंपरिक ज्ञान के आधार पर तैयार किए जा रहे इस उत्पाद से जिले के हर्बल और कुटीर प्रयोगों को नई पहचान मिल रही है। स्थानीय निवासियों के बीच इस दुर्लभ और महंगी औषधि को लेकर खासी उत्सुकता देखने को मिल रही है।
- **सौंदर्य प्रेमी:** चेहरे की छाइयों, मुंहासों और झुर्रियों से परेशान लोग इसे नियमित कॉस्मेटिक साबुनों के विकल्प के तौर पर देख सकते हैं। हालांकि एक बार में केवल एक ग्राम के सीमित उपयोग की विधि के कारण इसे बेहद संभलकर इस्तेमाल करना होगा।
- **बजट पर असर:** यह सामान्य साबुन की तुलना में कई गुना महंगा होने के कारण केवल विशिष्ट वर्ग के लिए ही व्यावहारिक है। दैनिक स्वच्छता के बजाय इसे एक उपचारात्मक लेप की तरह इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पलामू के एक स्थानीय जानकार ने पारंपरिक चिकित्सा मान्यताओं और आधुनिक त्वचा समस्याओं को ध्यान में रखकर चांदी के साबुन का निर्माण किया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक तत्वों की मदद से जिद्दी त्वचा विकारों का समाधान प्रस्तुत करना है।

- **सामग्रियों की औषधीय तासीर:** चांदी के प्राकृतिक शीतलता और कीटाणुनाशक गुणों को शंख, चंदन, नीम, तुलसी, पुदीना और गुलाब के साथ मिलाकर त्वचा के लिए एक शक्तिशाली फॉर्मूला तैयार करना मुख्य उद्देश्य था। इन तत्वों का पारंपरिक मेल चेहरे की जलन और कील-मुंहासों से लड़ने में सक्षम माना जाता है।
- **पारंपरिक सत्सिद्ध पद्धति:** निर्माण में आधुनिक केमिकल विधियों के स्थान पर छह महीने लंबी सत्सिद्ध पद्धति को अपनाया गया ताकि सभी सात औषधियां अपना असर पूरी तरह सक्रिय कर सकें। इस लंबी अवधि के शोधन और मिश्रण के कारण ही साबुन तैयार हो सका।
- **त्वचा की बढ़ती समस्याएं:** रासायनिक कॉस्मेटिक्स के दुष्प्रभावों के बीच दाग, झुर्रियों और छाइयों से परेशान लोगों के लिए प्राकृतिक और धातु आधारित उपचार पेश करने की सोच से यह प्रयोग शुरू हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. चांदी का साबुन किसने तैयार किया है और वे कहां के निवासी हैं?
इस साबुन को पलामू निवासी और आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे ने तैयार करने का दावा किया है।

### 2. इस साबुन को बनाने में किन-किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है?
इसमें चांदी, शंख, चंदन, गुलाब, नीम, तुलसी और पुदीना समेत कुल सात औषधीय सामग्रियां शामिल हैं।

### 3. चांदी के साबुन को पूरी तरह तैयार होने में कितना समय लगता है?
सत्सिद्ध पद्धति और विशेष प्रसंस्करण प्रक्रिया के तहत इसे तैयार होने में करीब छह महीने का समय लगता है।

### 4. इस साबुन के इस्तेमाल से चेहरे को क्या फायदे होने का दावा है?
इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे के दाग-धब्बे, कील-मुंहासे, छाइयां और झुर्रियां कम होने के साथ त्वचा में कसावट और चमक आने का दावा किया गया है।

### 5. इस साबुन के 33 ग्राम के टुकड़े की कीमत कितनी रखी गई है?
इसके 33 ग्राम साबुन की कीमत करीब 3,300 रुपये रखी गई है।

### 6. निर्माता के अनुसार इस साबुन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?
करीब एक ग्राम साबुन में दो से तीन बूंद पानी मिलाकर चेहरे पर मसाज करें, 10 मिनट तक लगा रहने दें और फिर साफ पानी से धो लें।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._