# पलामू के किसानों के लिए सरसों तेल मिल लगाने का मौका, सरकारी योजना में मिलेगी 35 फीसदी की पूंजी सब्सिडी

> पलामू में किसान सरसों सीधे बेचने के बजाय खुद की तेल मिल स्थापित कर मूल्य संवर्धन के जरिए कमाई बढ़ा सकते हैं। केंद्र सरकार की पीएमएफएमई योजना के तहत पात्र सूक्ष्म इकाइयों को 35 प्रतिशत तक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/palamu-ke-kisanon-ke-lie-sarason-tela-mila-lagane-ka-mauka-sarakari-yojana-men-milegi-35-phisadi-ki-punji-sabsidi-45756 · **Language:** Hindi
**Tags:** सरसों तेल, पलामू, पीएमएफएमई योजना, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि सब्सिडी, ग्रामीण स्वरोजगार

झारखंड के पलामू जिले में ग्रामीण स्तर पर रोजगार को विस्तार देने और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में खाद्य प्रसंस्करण एक प्रभावी जरिया बन रहा है। केंद्र सरकार की ओर से संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना, जिसे संक्षेप में पीएमएफएमई कहा जाता है, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वित्तीय और तकनीकी मदद मुहैया करा रही है। परंपरागत तौर पर किसान अपनी सरसों की फसल कटाई के तुरंत बाद कच्चे रूप में बाजार में बेच देते हैं। इसके विपरीत, यदि गांव या कस्बे में ही तेल निष्कर्षण की आधुनिक इकाई लगा ली जाए, तो तैयार खाद्य तेल बेचकर मुनाफा काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र प्रसंस्करण इकाइयों को नियमों के तहत वित्तीय सहायता, बैंक ऋण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।

## पीएमएफएमई योजना के तहत वित्तीय मदद और सब्सिडी के नियम
पलामू जिले के प्रखंड उद्यमी समन्वयक अरविंद कुमार के अनुसार, केंद्र सरकार की यह पहल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म उद्यमों को नई शुरुआत देने या पहले से चल रही इकाइयों को उन्नत बनाने के लिए तैयार की गई है। इस कार्यक्रम के दायरे में केवल तेल मिल ही नहीं, बल्कि आटा चक्की और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार करने वाली इकाइयां भी आती हैं। योजना के नियमों के मुताबिक पात्र व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोजेक्ट की पात्र लागत पर 35 प्रतिशत की दर से क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस वित्तीय लाभ को पाने के लिए जरूरी है कि आवेदक निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत आवेदन करे और संबंधित बैंक से परियोजना ऋण की औपचारिक स्वीकृति हासिल करे। बैंक की मंजूरी और कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही सब्सिडी का लाभ अंतिम रूप से मिलता है।

## कच्चे तिलहन की तुलना में प्रसंस्कृत तेल की बिक्री से बेहतर मुनाफा
अरविंद कुमार का कहना है कि फसल को सीधे आढ़तियों या व्यापारियों को सौंपने के बजाय प्रसंस्करण का मार्ग चुनना आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक साबित हो सकता है। बाजार में सामान्य तौर पर कच्ची सरसों 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकती है। इसके मुकाबले, जब उसी सरसों की पेराई कर तेल निकाला जाता है, तो खुदरा बाजार में शुद्ध सरसों तेल की कीमत 200 से 250 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती है। कच्चे माल को सीधे न बेचकर उसका अंतिम उत्पाद तैयार करने से किसानों को मिलने वाले मुनाफे का दायरा काफी बढ़ जाता है। इस तरह का मूल्य संवर्धन न केवल उत्पादक को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देता है, बल्कि गांव में ही अतिरिक्त आमदनी का स्थायी स्रोत भी खड़ा करता है।

## आधुनिक पेराई तकनीक और गुणवत्ता बनाए रखने की प्रक्रिया
प्रसंस्करण के क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल से काम की गति और तेल की शुद्धता दोनों में सुधार हुआ है। पलामू जिले में प्रिंसी शाह की तेल प्रोसेसिंग यूनिट इसका एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है। इस इकाई में स्थापित मशीन की पेराई क्षमता लगभग 120 किलोग्राम सरसों प्रति घंटे दर्ज की गई है। इस यूनिट में नियमित रूप से प्रतिदिन करीब 3 से 4 क्विंटल सरसों की पेराई का काम संपन्न किया जाता है। तेल निष्कर्षण की प्रक्रिया सीधे शुरू नहीं की जाती, बल्कि उससे पहले दानों की समुचित सफाई की जाती है। सफाई के बाद सरसों को अच्छी तरह सुखाया जाता है और उसकी नमी की जांच की जाती है। नमी का स्तर मानक के अनुसार तय होने के बाद ही पेराई की जाती है, ताकि निकलने वाले तेल की गुणवत्ता और शुद्धता पूरी तरह बरकरार रहे।

## इकाई लगाने से पहले व्यावहारिक पहलुओं का आकलन
अरविंद कुमार ने बताया कि पलामू के जो भी किसान या ग्रामीण युवा अपनी तेल मिल शुरू करने में रुचि रखते हैं, वे उद्योग विभाग के संबंधित कार्यालय अथवा अपने प्रखंड उद्यमी समन्वयक से सीधा संपर्क साध सकते हैं। वहां से योजना की पात्रता शर्तों, संभावित प्रोजेक्ट लागत, बैंक लोन की रूपरेखा और सब्सिडी हासिल करने के पूरे क्रम की विस्तृत जानकारी ली जा सकती है। हालांकि, मिल लगाने का निर्णय लेने से पूर्व स्थानीय बाजार में तेल की मांग, मशीन की कार्यक्षमता, बिजली पर होने वाले नियमित खर्च और कच्चे माल के तौर पर सरसों की निरंतर उपलब्धता का ठोस आकलन करना बेहद जरूरी है। सटीक व्यावसायिक योजना और बाजार की मजबूत समझ के साथ खेती को प्रसंस्करण से जोड़कर किसान अपनी नियमित आय को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

## इसका आप पर असर
पलामू के किसान अब कच्चे तिलहन की सीधी बिक्री के मुकाबले अपनी प्रसंस्करण इकाई लगाकर हर क्विंटल पर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।

- **पलामू में:** जिले के सरसों उत्पादक किसान अपनी उपज को 60 से 70 रुपये प्रति किलो पर बेचने के बजाय 200 से 250 रुपये प्रति लीटर के भाव पर तेल बनाकर बेच सकते हैं। स्थानीय युवा और किसान ब्लॉक कोऑर्डिनेटर या उद्योग कार्यालय से संपर्क कर यूनिट लगाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर सकते हैं।
- **भारत में:** देश भर के ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमी पीएमएफएमई योजना के जरिए आटा, तेल और अन्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 35 प्रतिशत तक क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी सब्सिडी ले सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए उद्यमी को बैंक से प्रोजेक्ट लोन स्वीकृत कराकर आवेदन जमा करना होता है।
- **लागत और बिजली का आकलन:** मिल लगाने से पहले मशीन की क्षमता, दैनिक बिजली खर्च और साल भर कच्चे माल की उपलब्धता की पड़ताल करना अनिवार्य है। सही योजना बनाकर काम शुरू करने से अनियोजित खर्चों और शुरुआती नुकसान से बचा जा सकता है।
- **गुणवत्ता नियंत्रण:** पेराई से पहले सरसों की सफाई, सुखाने और नमी की जांच करने से तेल की बाजार में बेहतर कीमत मिलती है। तय मानकों के अनुसार तेल निकालने पर ग्रामीण उत्पादक सीधे स्थानीय खुदरा बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
किसानों को कच्चे माल की कम कीमतों से उबारने और ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर रोजगार तैयार करने के लिए मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

- **सीधी फसल बिक्री पर सीमित लाभ:** फसल कटाई के समय बाजार में भारी आवक के कारण कच्ची सरसों 60 से 70 रुपये प्रति किलो पर सिमट जाती है, जिससे उत्पादक को सीमित मार्जिन मिलता है। तैयार तेल 200 से 250 रुपये प्रति लीटर में बिकने की वजह से प्रसंस्करण में बड़ा आर्थिक अवसर मौजूद है।
- **सरकारी प्रोत्साहन और पूंजी का अभाव:** ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसान मशीनरी की प्रारंभिक लागत वहन नहीं कर पाते, जिसके समाधान के लिए केंद्र सरकार ने पीएमएफएमई में 35 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया है। बैंक लोन से जुड़ी इस व्यवस्था से पूंजी की कमी दूर कर नई इकाइयां लगाना आसान हो जाता है।
- **आधुनिक तकनीक की उपलब्धता:** प्रति घंटे 120 किलोग्राम तक पेराई करने वाली छोटी और मध्यम क्षमता की आधुनिक मशीनें अब आसानी से उपलब्ध हैं। उचित सफाई और नमी जांच की व्यवस्था से ग्रामीण स्तर पर भी बाजार के स्तर का शुद्ध खाद्य तेल तैयार करना संभव हो गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. पीएमएफएमई योजना के तहत व्यक्तिगत इकाइयों को कितनी सब्सिडी मिलती है?
योजना के नियमों के तहत पात्र व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को परियोजना की पात्र लागत पर 35 प्रतिशत की दर से क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी सब्सिडी दी जाती है।

### 2. सरसों बेचने और उसका तेल तैयार करने की कीमत में क्या अंतर है?
कच्ची सरसों बाजार में 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम बिकती है, जबकि उससे तैयार सरसों तेल की कीमत खुदरा बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति लीटर तक होती है।

### 3. पलामू में प्रिंसी शाह की तेल प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता कितनी है?
प्रिंसी शाह की यूनिट में लगी मशीन लगभग 120 किलोग्राम सरसों प्रति घंटे पेर सकती है और वहां प्रतिदिन 3 से 4 क्विंटल सरसों की पेराई की जाती है।

### 4. तेल निकालने से पहले सरसों की क्या तैयारी की जाती है?
पेराई से पहले सरसों के दानों की सफाई की जाती है, उन्हें सुखाया जाता है और नमी की जांच के बाद तय मानक पर ही पेराई होती है।

### 5. पलामू के किसान योजना की जानकारी और आवेदन के लिए किससे संपर्क कर सकते हैं?
इच्छुक किसान उद्योग विभाग के संबंधित कार्यालय या अपने प्रखंड उद्यमी समन्वयक से मिलकर पात्रता, लागत और ऋण प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।

### 6. तेल मिल लगाने से पहले किन प्रमुख बातों की जांच करनी चाहिए?
इकाई लगाने से पूर्व स्थानीय बाजार की मांग, मशीन की क्षमता, बिजली खर्च और पर्याप्त सरसों की उपलब्धता का आकलन करना जरूरी है।

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