पलामू के पांच प्रखंडों में कौशल उन्नयन प्रशिक्षण का ऐलान, हर दिन 300 रुपये का वजीफा और बाजार तक सीधी मदद झारखंड के पलामू जिले में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्योग विभाग पांच प्रखंडों में मुफ्त हुनर विकास कार्यक्रम चलाएगा। प्रशिक्षण के दौरान 300 रुपये दैनिक भत्ता, सरकारी प्रमाणपत्र और एक साल तक उत्पादों की बिक्री में मार्केटिंग सहायता दी जाएगी। झारखंड के पलामू जिले में ग्रामीण आबादी को स्वावलंबी बनाने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन मजबूत करने के लिए उद्योग विभाग ने व्यापक कौशल विकास पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद ग्रामीण कामगारों, महिलाओं और युवाओं को पारंपरिक तथा आधुनिक शिल्पकला से जुड़े विभिन्न कार्यों का व्यावहारिक ज्ञान देकर उन्हें सीधे स्वरोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना है। केवल तकनीकी हुनर सिखाने तक सीमित रहने के बजाय प्रशासन तैयार उत्पादों की बिक्री और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने की ठोस कार्ययोजना पर काम कर रहा है, ताकि प्रशिक्षण पाने वाले कारीगर नियमित आय अर्जित कर सकें। जिले के पांच चुनिंदा प्रखंडों में चलेगा हुनर विकास अभियान उद्योग विभाग पलामू के जिला समन्वयक चंद्रकांत पांडे के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में कौशल उन्नयन योजना के तहत जिले के पांच विशिष्ट प्रखंडों को प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने के लिए चुना गया है। इनमें पंडवा, चैनपुर, सतबरवा, पांकी और लेस्लीगंज प्रखंड शामिल हैं। इन सभी पांचों चिन्हित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की रुचि, क्षेत्रीय संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर अलग-अलग ट्रेड निर्धारित किए गए हैं। इस पूरी कवायद का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर ही मजबूत रोजगार ढांचा तैयार करना है, जिससे लोगों को आजीविका की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। वुड क्राफ्ट और सिलाई में पचास दिनों का गहन तकनीकी अभ्यास कार्ययोजना के विवरण साझा करते हुए विभाग ने बताया कि पंडवा प्रखंड में लकड़ी के शिल्प यानी वुड क्राफ्ट का 50 दिवसीय सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागियों को लकड़ी तराशने, डिजाइन तैयार करने और फिनिशिंग की बारीक तकनीकें सिखाई जाएंगी। दूसरी तरफ, लेस्लीगंज प्रखंड में सिलाई और कटाई का 50 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। इन दोनों लंबी अवधि वाले पाठ्यक्रमों में थ्योरी के बजाय व्यावहारिक अभ्यास पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा, जिससे प्रशिक्षण पूरा करते ही प्रतिभागी अपना निजी बुटीक, सिलाई केंद्र या वुड क्राफ्ट वर्कशॉप शुरू करने में सक्षम हो सकें। वाल हैंगिंग और लाख की चूड़ियों का पच्चीस दिवसीय सत्र हस्तशिल्प और सजावटी सामान बनाने की दिशा में भी विशेष तकनीकी कक्षाएं संचालित की जाएंगी। चैनपुर, सतबरवा और पंडवा प्रखंडों में वाल हैंगिंग तथा लेक बैंगल्स यानी लाख की चूड़ियां बनाने से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन दोनों शिल्पों के लिए प्रशिक्षण की समय सीमा 25-25 दिन तय की गई है। इस प्रशिक्षण में महिला और पुरुष दोनों वर्ग के प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें स्वयं सहायता समूहों अथवा सहकारी समितियों के रूप में संगठित किया जाएगा। व्यवस्था के तहत प्रत्येक बैच में लगभग 20 प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा। इस तरह कुल पांच समूहों के माध्यम से शुरुआती चरण में करीब 100 स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। दैनिक स्टाइपेंड और आधिकारिक सरकारी प्रमाणपत्र प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को आर्थिक संबल देने के लिए योजना के तहत पूरी अवधि के दौरान 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से स्टाइपेंड दिया जाएगा। इससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को सीखने के दौरान दैनिक खर्चों की चिंता नहीं सताएगी। निर्धारित अवधि का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर सभी प्रतिभागियों को सरकार की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र उन्हें विभिन्न बैंकों या सरकारी वित्तीय संस्थानों से रियायती दर पर ऋण प्राप्त करने और अपने हुनर को औपचारिक पहचान दिलाने में मददगार साबित होगा। एक वर्ष तक बाजार और मार्केटिंग लिंकेज का पूरा सहयोग योजना की सबसे बड़ी विशेषता प्रशिक्षण के बाद मिलने वाली हैंडहोल्डिंग सहायता है। जिला समन्वयक ने स्पष्ट किया कि प्रतिभागियों को केवल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र देकर अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए करीब एक वर्ष तक सरकार की ओर से निरंतर सहयोग और मार्केटिंग लिंकेज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को स्थानीय मेलों, प्रदर्शनियों और मुख्य बाजारों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही पलामू जिले में पहले से संचालित पीएम विश्वकर्मा, पीएमएफएमई और पीएमईजीपी जैसी केंद्रीय योजनाओं के साथ इनका तालमेल बैठाया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त कारीगर आसानी से पूंजी जुटाकर अपना उद्यम आगे बढ़ा सकें। इसका आप पर असर पलामू के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले इच्छुक कारीगरों और युवाओं को इस योजना से मुफ्त तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ दैनिक वित्तीय सहायता मिलेगी। • भारत में: केंद्र और राज्य सरकारों के हुनर विकास मिशनों के तहत ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय कारीगरों को औपचारिक आर्थिक तंत्र में शामिल होने का अवसर मिलता है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में पारंपरिक हस्तशिल्प को नया बाजार मिलता है और पलायन में कमी आती है। • पलामू में: चयनित पांच प्रखंडों के लगभग 100 स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण के साथ प्रतिदिन 300 रुपये का सीधा स्टाइपेंड प्राप्त होगा। सरकारी प्रमाणपत्र और एक वर्ष के बाजार सहयोग से प्रतिभागी अपना स्वयं का लघु उद्योग या सिलाई-शिल्प केंद्र स्थापित कर नियमित कमाई शुरू कर सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ पलामू जिला प्रशासन और उद्योग विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ाने और पारंपरिक शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण अभियान की रूपरेखा तैयार की है। • स्वरोजगार का विस्तार: जिले के युवाओं और महिलाओं को केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय खुद का उद्यम शुरू करने के लिए व्यावहारिक कौशल देना जरूरी समझा गया। इसी को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय मांग वाले ट्रेड चुने गए। • कौशल उन्नयन योजना का क्रियान्वयन: चालू वित्तीय वर्ष में कौशल उन्नयन योजना के तहत पांच प्रमुख प्रखंडों को चिन्हित कर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके जरिए पारंपरिक कामगारों को आधुनिक तकनीकों से लैस करना प्राथमिक लक्ष्य है। • बाजार पहुंच की समस्या का समाधान: अक्सर ग्रामीण कारीगर हुनर सीखने के बाद भी अपने उत्पाद बेचने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसी बाधा को दूर करने के लिए विभाग ने एक वर्ष तक विपणन और बाजार लिंकेज का संरचित सहयोग देने की व्यवस्था बनाई है। सवाल-जवाब 1. पलामू में कौशल उन्नयन प्रशिक्षण के लिए किन पांच प्रखंडों को चुना गया है? प्रशिक्षण के लिए पलामू जिले के पंडवा, चैनपुर, सतबरवा, पांकी और लेस्लीगंज प्रखंडों का चयन किया गया है। 2. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कितना स्टाइपेंड दिया जाएगा? प्रशिक्षण की पूरी अवधि के दौरान सभी पंजीकृत प्रतिभागियों को प्रतिदिन 300 रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। 3. वुड क्राफ्ट और सिलाई प्रशिक्षण की अवधि कितने दिनों की होगी? पंडवा में आयोजित होने वाले वुड क्राफ्ट और लेस्लीगंज में आयोजित होने वाले सिलाई प्रशिक्षण की अवधि 50-50 दिन निर्धारित है। 4. वाल हैंगिंग और लाख की चूड़ियों का प्रशिक्षण किन स्थानों पर और कितने दिनों का होगा? चैनपुर, सतबरवा और पंडवा प्रखंडों में वाल हैंगिंग और लाख की चूड़ियों का प्रशिक्षण 25-25 दिनों के लिए आयोजित किया जाएगा। 5. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को बाजार से कैसे जोड़ा जाएगा? विभाग प्रतिभागियों को सरकारी प्रमाणपत्र देने के साथ-साथ करीब एक वर्ष तक मार्केटिंग लिंकेज और उत्पाद बिक्री में निरंतर सहायता प्रदान करेगा। https://trendkia.com/jharkhand/palamu-ke-pancha-prakhndon-men-kaushala-unnayana-prashikshana-ka-ailana-hara-dina-300-rupaye-ka-vajipha-aura-bajara-taka-sidhi-mad-41031 TrendKia — Har trend, sabse pehle.