# पलामू के सतीश दुबे ने खेत में लगाए चंदन के पेड़, भविष्य में 50 लाख रुपये की कमाई की उम्मीद

> पलामू के किसान सतीश दुबे ने पारंपरिक खेती से हटकर लंबी अवधि के मुनाफे के लिए चंदन के पौधे लगाए हैं। नागपुर से मंगाए गए ये पौधे तीन साल में बढ़कर आठ से दस फीट ऊंचे हो चुके हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/palamu-ke-satish-dubey-ne-kheta-men-lagae-chndana-ke-pera-bhavishya-men-50-lakha-rupaye-ki-kamai-ki-ummida-38897 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंदन की खेती, पलामू किसान, सतीश दुबे, बागवानी, कृषि निवेश, झारखंड समाचार

पलामू के किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय में बंपर मुनाफा देने वाली बागवानी की तरफ भी रुख कर रहे हैं। इसी बदलाव की कड़ी में जिले के एक किसान ने अपने खेतों में चंदन के पौधे रोपने का साहसिक कदम उठाया है। इस पहल के तहत उन्होंने लगभग तीन साल पहले नागपुर से विशेष तौर पर चंदन के पौधे मंगवाकर अपने खेतों में लगाए थे, जो अब तेजी से विकसित हो रहे हैं।

## नागपुर से मंगाए गए थे पौधे
पलामू जिले के बसना गांव के रहने वाले सतीश दुबे ने खेती-किसानी में एक नया प्रयोग किया है। उन्होंने करीब तीन वर्ष पूर्व नागपुर से चंदन के कुल 50 पौधे मंगाकर अपनी जमीन पर रोपे थे। उस वक्त उन्हें एक पौधा लगभग 100 रुपये की लागत में मिला था। चंदन की खेती को आम फसलों की तुलना में काफी अलग माना जाता है क्योंकि इसे तैयार होने में लंबा समय लगता है, लेकिन इसकी लकड़ी के बाजार मूल्य को देखते हुए इसे एक सुरक्षित और फायदेमंद निवेश माना जा रहा है।

## तीन साल में हुई शानदार बढ़वार
सतीश दुबे की देखरेख में लगाए गए इन पौधों की ग्रोथ काफी अच्छी चल रही है। रोपण के महज तीन साल के भीतर ही कई पौधे आठ से दस फीट तक ऊंचे हो चुके हैं। चंदन के पेड़ों की खास बात यह होती है कि ये सामान्य पेड़ों की तरह जल्दी नहीं पकते, लेकिन इनमें खुशबू और लकड़ी की प्रीमियम गुणवत्ता के कारण भारी मांग रहती है। इसी उपयोगिता और बाजार में इसकी जबरदस्त डिमांड को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक फसलों के साथ चंदन को भी जगह दी है।

## भविष्य के लिए एक बड़ा वित्तीय निवेश
चंदन के पेड़ों में सुगंधित लकड़ी विकसित होने में वक्त लगता है। जानकारों और किसानों के अनुसार, इन पेड़ों में लगभग आठ से दस साल के बाद महक आनी शुरू होती है, जबकि इन्हें पूरी तरह से व्यावसायिक रूप से तैयार होने में 10 से 15 साल या उससे भी अधिक का समय लग सकता है। यही वजह है कि चंदन की इस खेती को तुरंत मिलने वाले मुनाफे के बजाय आने वाले कल के लिए एक मजबूत निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

## लाखों रुपये की कमाई का अनुमान
चंदन की गिनती दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में होती है और बाजार में इसकी लगातार भारी मांग बनी रहती है। इसी आर्थिक संभावना को ध्यान में रखते हुए सतीश दुबे ने अपने सभी 50 पौधों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का मन बनाया है। उनका मुख्य लक्ष्य इन पेड़ों से लगभग 15 से 20 वर्षों के बाद भारी-भरकम आमदनी हासिल करना है। उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में जब ये 50 पेड़ पूरी तरह तैयार होकर बिकेंगे, तो उन्हें बाजार में करीब 50 लाख रुपये तक की शानदार आय प्राप्त हो सकती है।

## इसका आप पर असर
चंदन की खेती जैसी लंबी अवधि की बागवानी अपनाने से किसानों को भविष्य में भारी वित्तीय लाभ मिल सकता है, जो पारंपरिक फसलों से मिलने वाली आय का एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों में किसान अब चंदन और अन्य मूल्यवान पेड़ों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी दीर्घकालिक आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
- **पलामू में:** पलामू क्षेत्र के किसानों के लिए यह पहल एक मिसाल पेश करती है कि कैसे बंजर या सामान्य जमीन पर भी भविष्य के लिए बड़े निवेश किए जा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक खेती में बढ़ती अनिश्चितता और कम मुनाफे के कारण किसान अब दीर्घकालिक और उच्च मूल्य वाली व्यावसायिक फसलों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

- **बाजार में भारी मांग:** चंदन की लकड़ी और उससे बने उत्पादों की वैश्विक बाजार में हमेशा से बहुत अधिक मांग रही है, जिससे इसके दाम काफी ऊंचे रहते हैं।
- **दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा:** इस प्रकार के पौधे शुरुआती कुछ साल में कम देखभाल के साथ बढ़ते हैं और परिपक्व होने पर लाखों का रिटर्न देते हैं।
- **अनुकूल जलवायु:** नागपुर और पलामू जैसी जगहों की जलवायु और मिट्टी इन विशेष पौधों की वृद्धि के लिए उपयुक्त पाई गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. सतीश दुबे ने कितने चंदन के पौधे लगाए हैं?
सतीश दुबे ने अपने खेत में चंदन के कुल 50 पौधे लगाए हैं।

### 2. चंदन के ये पौधे कहां से मंगवाए गए थे?
ये चंदन के पौधे लगभग तीन साल पहले नागपुर से मंगवाए गए थे।

### 3. खरीदते समय एक पौधे की कीमत कितनी थी?
उस समय नागपुर से मंगाए गए एक चंदन के पौधे की कीमत करीब 100 रुपये थी।

### 4. तीन साल में पौधे कितने बड़े हो चुके हैं?
रोपण के करीब तीन साल के भीतर कई पौधे बढ़कर आठ से दस फीट तक ऊंचे हो चुके हैं।

### 5. इन पेड़ों से कितने रुपये की कमाई की उम्मीद है?
किसान सतीश दुबे को उम्मीद है कि भविष्य में ये पेड़ बिकने पर करीब 50 लाख रुपये तक की आय हो सकती है।

## प्रेरणा और सबक
सतीश दुबे की यह पहल दिखाती है कि कैसे पारंपरिक खेती से हटकर दूरदर्शी सोच और धैर्य के साथ भविष्य के लिए बड़ा वित्तीय लाभ कमाया जा सकता है।

- **लंबी अवधि की सोच:** किसानों को केवल त्वरित फसलों तक सीमित न रहकर भविष्य की बड़ी कमाई के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम करना चाहिए।
- **नवाचार अपनाएं:** स्थानीय कृषि में नए पौधों और बागवानी के प्रयोग से आय के नए स्रोत खड़े किए जा सकते हैं।
- **धैर्य और देखभाल:** चंदन जैसी फसलों में सफलता पाने के लिए वर्षों तक निरंतर देखभाल और धैर्य रखना सबसे जरूरी है।

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