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  "title": "पलामू में मक्का उगाने वाले किसान हो जाएं सावधान, फॉल आर्मीवर्म कीट तबाह कर सकता है पूरी फसल",
  "summary": "खरीफ सीजन में मक्के की फसल जब घुटने तक बढ़ती है, तब फॉल आर्मीवर्म कीट का खतरा सबसे ज्यादा होता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित निगरानी और सही समय पर कीटनाशक छिड़काव की सलाह दी है।",
  "content": "खरीफ के मौसम में मक्के की खेती को बढ़ावा देने वाले अन्नदाताओं के लिए यह समय बेहद अहम है। कम अवधि में बंपर पैदावार देने के कारण यह फसल किसानों की आजीविका का मजबूत आधार बनती है। हालांकि, जैसे ही पौधे अपनी बढ़वार के शुरुआती चरण को पार करके घुटने की ऊंचाई तक पहुंचते हैं, वैसे ही खेतों में एक खतरनाक कीट का संकट मंडराने लगता है। फॉल आर्मीवर्म नाम का यह कीट मक्के की फसल पर अचानक हमला बोलकर भारी तबाही मचा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस कीट की मौजूदगी को महज तीन से चार दिनों के लिए भी अनदेखा कर दिया जाए, तो यह बेहद कम समय में पूरे खेत में फैलकर फसल को बर्बाद कर सकता है।\n\nशुरुआती अवस्था में फसल को सबसे ज्यादा खतरा\nपलामू के चियांकी स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि फॉल आर्मीवर्म मक्के की शुरुआती और तेजी से बढ़ने वाली अवस्था के दौरान सबसे खतरनाक साबित होता है। इस कीट का लार्वा पौधे के ऊपरी हिस्सों, नई निकल रही पत्तियों और गोभ के अंदर छिपकर बैठ जाता है और वहीं से पत्तियों को कुतरना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे पौधों पर बड़े छेद, कटी-फटी धारियां और गंभीर क्षति के निशान साफ नजर आने लगते हैं। यदि संक्रमण भीषण रूप ले ले, तो यह कीट पौधे के सबसे कोमल ऊपरी हिस्से को भी खा जाता है, जिससे पौधे की लंबाई और विकास पूरी तरह रुक जाता है और अंततः पैदावार शून्य हो जाती है।\n\nनियमित देखरेख और सतर्कता है बेहद जरूरी\nखेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसानों को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि शुरुआती लक्षण नजर आने के बाद भी खेतों का निरीक्षण बंद न करें। जब मक्के के पौधे घुटने तक पहुंच जाएं, तो किसानों को सुबह या शाम के वक्त नियमित रूप से अपने खेतों का चक्कर लगाना चाहिए। इस दौरान विशेष तौर पर पौधों के केंद्रीय भाग और नई पत्तियों के भीतर बारीकी से जांच करनी चाहिए। कीट का जरा सा भी अंदेशा होते ही बिना देर किए अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव शुरू कर देना चाहिए। यह समूची समस्या आमतौर पर तब गंभीर होती है जब फसल घुटने की ऊंचाई पर होती है।\n\nकीटनाशक के इस्तेमाल में बरतें सही सावधानी\nफॉल आर्मीवर्म के प्रकोप पर काबू पाने के लिए कृषि वैज्ञानिक क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल आधारित कीटनाशक जैसे कोराजन के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। हमेशा उत्पाद के पैकेट पर छपे निर्देशों और तयशुदा मात्रा के अनुसार ही दवा का घोल तैयार करना चाहिए। अमूमन ऐसी परिस्थितियों में प्रति लीटर पानी में लगभग 0.6 से 1 मिलीलीटर तक दवा मिलाई जाती है। दवा का छिड़काव करते वक्त इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि घोल पौधे की पत्तियों के बीच और सीधे गोभ तक पहुंचे ताकि छिपा हुआ कीट तुरंत प्रभाव में आ सके।\n\nसमय पर उठाए गए कदम बचाते हैं फसल\nविशेषज्ञों के अनुसार, यदि सही वक्त पर उचित कदम उठा लिए जाएं, तो कीटनाशक के छिड़काव के महज एक से दो दिनों के भीतर ही असर दिखने लगता है और कीट नियंत्रित होने लगते हैं। इसलिए मक्के की फसल को फॉल आर्मीवर्म के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। खेतों की नियमित निगरानी, समय रहते कीट की पहचान और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सही समय पर की जाने वाली दवा की खुराक ही आपकी मेहनत और फसल को भारी नुकसान से बचा सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nमक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए इस कीट का प्रकोप सीधा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।\n\n• भारत में: खरीफ सीजन में मक्का उगाने वाले देश भर के किसानों को फसल की पैदावार बचाने के लिए गोभ और पत्तियों की नियमित जांच करनी होगी।\n• पलामू में: क्षेत्रीय किसानों को सलाह दी जाती है कि वे घुटने तक पहुंची फसल में फॉल आर्मीवर्म के शुरुआती लक्षणों की तुरंत जांच करें और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक का छिड़काव करें ताकि फसल नष्ट होने से बचे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फॉल आर्मीवर्म मक्के की फसल पर कब सबसे ज्यादा हमला करता है?\nयह कीट मक्के की फसल के घुटने तक पहुंचने के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।\n\n2. पलामू में कृषि वैज्ञानिक कौन हैं जिन्होंने सलाह दी है?\nचियांकी स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने यह सलाह दी है।\n\n3. फॉल आर्मीवर्म के लार्वा पौधे के किस हिस्से को नुकसान पहुंचाते हैं?\nलार्वा पौधे के ऊपरी हिस्से, नई पत्तियों और शिखर के बीच छिपकर पत्तियों को खाते हैं।\n\n4. इस कीट के नियंत्रण के लिए किस कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है?\nक्लोरान्ट्रानिलिप्रोल आधारित कीटनाशक जैसे कोराजन का प्रयोग किया जा सकता है।\n\n5. प्रति लीटर पानी में कीटनाशक की कितनी मात्रा मिलाई जानी चाहिए?\nपरिस्थितियों के अनुसार प्रति लीटर पानी में लगभग 0.6 से 1 मिलीलीटर तक दवा मिलाई जा सकती है।\n\n6. कीट नियंत्रण का असर कितने दिनों में दिखाई देने लगता है?\nसही समय पर छिड़काव करने पर एक से दो दिन में कीट नियंत्रण का असर दिखने लगता है।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "मक्का की खेती",
    "फॉल आर्मीवर्म",
    "कृषि पलामू",
    "फसल सुरक्षा",
    "कीटनाशक छिड़काव"
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