पलामू में शारदीय नवरात्रि के दौरान लगता है अनोखा भूत मेला, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर में स्थित देवी धाम शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि पर हर साल एक अजीब मेला सजता है। यहां देश के विभिन्न राज्यों से लोग कथित प्रेत बाधाओं से मुक्ति पाने और अपनी मन्नतें पूरी कराने आते हैं। झारखंड के पलामू जिले में स्थित हैदरनगर का प्रसिद्ध देवी धाम शक्तिपीठ अपनी अनोखी परंपराओं के कारण पूरे क्षेत्र में एक अलग पहचान रखता है। यहां विज्ञान और तर्क से परे एक ऐसी आस्था जुड़ी हुई है, जिसके तहत हर साल शारदीय नवरात्रि के दौरान एक विशेष मेले का आयोजन किया जाता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार सैकड़ों सालों पुरानी इस परंपरा का हिस्सा बनने के लिए केवल झारखंड ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस स्थान पर आने वाले श्रद्धालुओं का मुख्य उद्देश्य बीमारियों से छुटकारा पाना, संतान प्राप्ति की कामना करना या फिर जीवन की अन्य पारिवारिक समस्याओं का समाधान ढूंढना होता है। इस धाम की लोकप्रियता इस बात से आंकी जाती है कि यहां हर साल हजारों की संख्या में ऐसे लोग पहुंचते हैं जो अपनी अनकही परेशानियों से त्रस्त होकर माता के दरबार में राहत तलाशते हैं। सासाराम से आए श्रद्धालुओं का अनुभव बिहार के सासाराम से इस धार्मिक स्थल पर पहुंचीं सुनीता देवी ने अपनी पारिवारिक व्यथा साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी पिछले पांच-छह वर्षों से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी। उन्होंने दावा किया कि परिवार के कुछ लोगों की तरफ से उनकी बेटी पर कथित तौर पर प्रेत बाधा कराई गई थी, जिसकी वजह से वह अचानक बेहोश हो जाती थी और उसके जबड़े तक भींच जाते थे। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए परिवार ने कई बड़े डॉक्टरों से चिकित्सीय इलाज कराया और तमाम तरह की दवाइयां भी दीं, लेकिन बेटी की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार जब उन्होंने एक गुरु से संपर्क किया तो उन्होंने इस समस्या को प्रेत बाधा से जुड़ा हुआ बताया। इसके बाद देवी धाम की प्रसिद्धि और चमत्कारों के बारे में सुनकर वह अपनी बेटी को लेकर सीधे इस मंदिर में आ गईं, जहां आने के बाद अब उन्हें अपनी बेटी की सेहत में काफी सुधार महसूस हो रहा है। वहीं सासाराम से ही आए एक अन्य श्रद्धालु सतेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने भी इस देवी धाम की महिमा के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद के साथ वह खुद यहां पहुंचे हैं। मंदिर परिसर में भूतों की अदालत और विशेष स्थान मंदिर परिसर की आंतरिक व्यवस्था और वहां होने वाले अनुष्ठानों के बारे में जानकारी देते हुए सतेंद्र भगत ने बताया कि वह पिछले करीब दस वर्षों से लगातार इस देवी धाम में आ रहे हैं और यहां ओझा-गुनी का कार्य संभालते हैं। उनका यह दावा है कि माता के इस दरबार में कदम रखते ही कथित प्रेत बाधाओं की समस्त शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं। मंदिर परिसर के भीतर अलग-अलग प्रकार की आत्माओं और शक्तियों के बैठने के लिए विशेष स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन निर्धारित स्थानों में ब्रह्म स्थान, मरी स्थान, डोम-डकनी स्थान और जिन बाबा का स्थान प्रमुख रूप से शामिल हैं। स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार जिस व्यक्ति पर जिस प्रकार की प्रेत बाधा का साया माना जाता है, उसे उसी श्रेणी के विशेष स्थान पर ले जाकर स्थापित किया जाता है ताकि समस्या का उचित समाधान निकल सके। कपड़ों की मांग और हवन कुंड के पास अजीब घटनाएं इस पूरी प्रक्रिया के दौरान होने वाली अन्य गतिविधियों का जिक्र करते हुए सतेंद्र भगत ने आगे बताया कि इन कथित प्रेत बाधाओं से मुक्ति दिलाने के लिए कई प्रकार की पारंपरिक रीतियों का पालन करना पड़ता है। अनुष्ठान के दौरान कुछ कथित आत्माओं की तरफ से साड़ी, सूट, चुनरी और झंडे जैसी वस्तुओं की मांग रखी जाती है। जब श्रद्धालुओं द्वारा इन सभी मांगों को पूरी श्रद्धा के साथ पूरा कर दिया जाता है, तब उस संबंधित आत्मा को मंदिर द्वारा निर्धारित किए गए निश्चित स्थान पर स्थापित कर दिया जाता है। इसके अलावा मंदिर के हवन कुंड के आसपास के क्षेत्र में कई बार कुछ श्रद्धालुओं के द्वारा बेहद असामान्य और विचित्र व्यवहार किए जाने की घटनाएं भी सामने आती हैं। स्थानीय लोग इस तरह के अजीबोगरीब बर्ताव को सीधे तौर पर प्रेत बाधा के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं, जिसके बाद उन बाधाओं को मंदिर परिसर में ही उचित विधि-विधान से स्थापित करा दिया जाता है。 सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक जिन बाबा का स्थान हैदरनगर के इस देवी धाम में स्थित जिन बाबा का स्थान केवल धार्मिक आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का भी एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। यहां किसी एक धर्म या जाति के लोगों का अधिकार नहीं है, बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के तमाम लोग पूरी श्रद्धा के साथ पहुंचकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। स्थानीय निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि जिन बाबा के इस पावन दरबार में जात-पात और धर्म का कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता है, जिससे हर वर्ग के लोग यहां खिंचे चले आते हैं। शारदीय नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान इस स्थान पर भारी भीड़ उमड़ती है, जो इसे और अधिक खास बना देती है। इस प्रकार से हैदरनगर में लगने वाला यह अनोखा मेला लोकविश्वास, गहरी धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का अनूठा संगम बनकर आज भी लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसका आप पर असर इस मेले और स्थानीय मान्यताओं का प्रभाव मुख्य रूप से उन लोगों पर पड़ता है जो मानसिक स्वास्थ्य या रहस्यमय बीमारियों से जूझ रहे हैं और पारंपरिक चिकित्सा के साथ आध्यात्मिक उपचार की तलाश करते हैं। • मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा: ऐसे मेलों में जाने से कई बार लोग वैज्ञानिक और चिकित्सीय इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां और अधिक बढ़ सकती हैं। • क्षेत्रीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था: नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से स्थानीय स्तर पर छोटे दुकानदारों और परिवहन सेवाओं को व्यापार का अच्छा अवसर मिलता है। • सांप्रदायिक सौहार्द: जिन बाबा के स्थान पर सभी धर्मों के लोगों का आना क्षेत्र में आपसी भाईचारे और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देता है। • श्रद्धालुओं की आस्था: दूर-दराज से आने वाले लोगों की अपनी गहरी मान्यताएं जुड़ी होती हैं, जिससे उन्हें मानसिक संबल और सांत्वना मिलती है। ऐसा क्यों हुआ हैदरनगर के देवी धाम में इस प्रकार के मेले के आयोजन और लोगों की गहरी आस्था के पीछे सदियों पुरानी परंपराएं और सांस्कृतिक विश्वास काम करते हैं। विज्ञान के इस युग में भी कुछ इलाकों में लोग मानसिक या शारीरिक समस्याओं के लिए पारम्परिक मान्यताओं का सहारा लेते हैं। • ऐतिहासिक परंपराएं: स्थानीय लोगों के अनुसार यह मेला सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। • चिकित्सा का अभाव या विश्वास की कमी: कई बार आधुनिक मेडिकल साइंस से राहत न मिलने पर लोग वैकल्पिक और आध्यात्मिक उपचार की ओर रुख करते हैं। • ओझा-गुनी की मान्यता: समाज के एक वर्ग में ओझा-गुनी और तांत्रिक परंपराओं पर अटूट विश्वास है, जो ऐसे आयोजनों को बल देता है। • सामूहिक लोकविश्वास: आसपास के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभवों और लोककथाओं के कारण इस स्थान की ख्याति लगातार बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. हैदरनगर का देवी धाम किस जिले में स्थित है? देवी धाम शक्तिपीठ झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर में स्थित है। 2. यह विशेष मेला किस अवसर पर आयोजित किया जाता है? यह मेला हर साल शारदीय नवरात्रि के पवित्र अवसर पर आयोजित किया जाता है। 3. किन राज्यों से श्रद्धालु इस मेले में पहुंचते हैं? इस मेले में झारखंड के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। 4. सुनीता देवी अपनी बेटी को लेकर यहां क्यों आई थीं? उनकी बेटी पिछले पांच-छह वर्षों से बेहोश होने और दांत भींचने की समस्या से परेशान थी, जिसे प्रेत बाधा माना गया था। 5. मंदिर परिसर में कौन-से विशेष स्थान बनाए गए हैं? मंदिर परिसर में ब्रह्म स्थान, मरी स्थान, डोम-डकनी स्थान और जिन बाबा का स्थान प्रमुख रूप से बनाए गए हैं। 6. जिन बाबा के स्थान की क्या विशेषता है? जिन बाबा का स्थान सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग मन्नतें मांगने आते हैं। https://trendkia.com/jharkhand/palamu-men-shardiya-navratri-ke-daurana-lagata-hai-anokha-bhuta-mela-dura-dura-se-pahunchate-hain-shraddhalu-48147 TrendKia — Har trend, sabse pehle.