पपीते की उन्नत खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, एक पौधे से हो सकती है तीन हजार रुपये तक की कमाई कोडरमा में वैज्ञानिक तरीके से पपीते की खेती कर रहे किसान आठ से नौ महीने में ही बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं। सही विधि अपनाने पर एक पौधे से कुल सत्तर से अस्सी किलोग्राम तक फल मिल सकता है। खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी आय को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक फसलों के साथ फलों की खेती करना एक मजबूत और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है। कोडरमा जिले में आमतौर पर लोग अपने घरों के आसपास या खेतों के सीमित हिस्सों में सिर्फ अपने निजी इस्तेमाल के लिए पपीते के कुछ पौधे लगाते हैं। हालांकि, यदि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए बड़े पैमाने पर पपीते की व्यावसायिक खेती करते हैं, तो इससे बेहद शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है। कोडरमा कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय ने बातचीत के दौरान पपीते की खेती से जुड़े तमाम अहम पहलुओं, उन्नत किस्मों, पौधों के बीच तय की जाने वाली दूरी और संभावित पैदावार के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। डेढ़ साल की अवधि में दो बार मिलती है हार्वेस्टिंग विशेषज्ञों के अनुसार पपीते की फसल कम समय में ही फल देना शुरू कर देने वाली चुनिंदा फल फसलों में प्रमुख रूप से शामिल है। यदि फसलों की उचित देखभाल की जाए और मौसम की स्थिति अनुकूल बनी रहे, तो रोपण के लगभग आठ से नौ महीने के भीतर ही पौधों पर फल आने और उनकी तुड़ाई शुरू हो जाती है। पपीते की कुल फसल अवधि अमूमन एक से डेढ़ साल तक की होती है और इस पूरे अंतराल के दौरान किसान दो बार आसानी से हार्वेस्टिंग कर सकते हैं। पहली बार की हार्वेस्टिंग प्रक्रिया में एक पौधे से औसतन पचास से साठ किलोग्राम तक पपीते की प्राप्ति हो जाती है, जबकि इसके बाद दूसरी बार की हार्वेस्टिंग से तीस से पैंतीस किलोग्राम तक अतिरिक्त उत्पादन मिलने का अनुमान लगाया जाता है। इस प्रकार एक पौधे से दोनों चरणों को मिलाकर कुल सत्तर से अस्सी किलोग्राम तक पपीता मिलने की संभावना बनी रहती है। रेड लेडी और पूसा जैसी उन्नत किस्मों का करें चयन पपीते की सफल खेती की शुरुआत करने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों और क्षेत्र के अनुकूल उपयुक्त किस्म का चुनाव करना सबसे अहम कदम होता है। डॉ. अजय कुमार राय ने स्पष्ट किया कि किसानों के पास खेती के लिए रेड लेडी और पूसा जैसी बेहतरीन किस्मों के साथ-साथ कई निजी कंपनियों के बीज भी उपलब्ध हैं। किसानों को हमेशा अपने स्थानीय क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी की बनावट और बाजार में चल रही मांग को ध्यान में रखकर ही किस्म का चुनाव करना चाहिए। खेती की शुरुआत में सबसे पहले बीजों की मदद से सुरक्षित नर्सरी तैयार की जाती है। जब पौधे खेत में रोपे जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएं, तब खेत में मेढ़ बनाकर उन्हें व्यवस्थित रूप से लगाया जाना चाहिए। इस तरीके को अपनाने से खेत में पौधों की उचित व्यवस्था बनी रहती है और भविष्य में उनकी सिंचाई, निराई और अन्य जरूरी देखभाल करने में काफी आसानी होती है. पौधों के बीच दो मीटर की दूरी रखना बेहद जरूरी वैज्ञानिक खेती में पौधों के बीच तय मानकों के अनुसार उचित दूरी बनाए रखना फसल के बेहतर विकास के लिए अनिवार्य माना गया है। कृषि वैज्ञानिक ने जोर देकर बताया कि पपीते के एक पौधे की लाइन से दूसरी लाइन के बीच कम से कम दो मीटर की दूरी जरूर होनी चाहिए। ठीक इसी तरह से लाइन के अंदर भी एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच दो मीटर की दूरी रखना सबसे उचित रहता है। इतनी पर्याप्त दूरी मिलने से प्रत्येक पौधे को फैलने और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती है, जिससे खेत के अंदर खरपतवार हटाने, निराई-गुड़ाई करने, सिंचाई करने तथा अन्य सभी कृषि संबंधी कार्य आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। इसके अलावा खेत तैयार करते समय जमीन में पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने की भी सलाह दी गई है, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है। एक सौ पौधों से तीन लाख रुपये तक की आमदनी का अनुमान कृषि विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार पपीते की खेती किसानों के लिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आमदनी कई गुना बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम बन सकती है। यदि उचित प्रबंधन और देखभाल के जरिए एक पौधे से लगभग तीन हजार रुपये तक की कुल आय प्राप्त हो जाती है, तो कोई भी किसान केवल एक सौ पौधों की खेती करके करीब तीन लाख रुपये तक की शानदार आमदनी प्राप्त कर सकता है। हालांकि यह पूरा मुनाफा बाजार के उतार-चढ़ाव और मौसम जैसे कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियां होने पर यह एक बहुत ही व्यावहारिक और सही साबित होने वाला अनुमान है। इसका आप पर असर यह खबर उन किसानों के लिए बेहद उपयोगी है जो अपनी पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त कमाई के नए साधन तलाश रहे हैं। • भारत में: बागवानी और फलों की खेती से जुड़ने वाले किसानों को कम अवधि में बेहतर वित्तीय रिटर्न मिलने की संभावना मजबूत होती है। वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से फसल का नुकसान कम होता है और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। • कोडरमा में: स्थानीय किसान पपीते की उन्नत किस्मों और सही वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके अपनी कृषि आय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं। पौधों के बीच उचित दूरी रखने से खेत का प्रबंधन आसान हो जाता है और पैदावार बेहतर होती है। ऐसा क्यों हुआ पपीते की खेती को बढ़ावा देने और उससे उच्च पैदावार प्राप्त करने के पीछे कई वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण काम करते हैं। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को तेजी से नकदी लाभ देने की क्षमता रखती है। • फसल की कम अवधि: पपीता अन्य कई दीर्घकालिक फलों की तुलना में बेहद कम समय यानी आठ से नौ महीने के भीतर फल देना शुरू कर देता है। • दोहरी हार्वेस्टिंग का लाभ: उचित देखभाल और अनुकूल मौसम मिलने पर एक ही फसल चक्र के भीतर डेढ़ साल की अवधि में दो बार तुड़ाई की जा सकती है। • उन्नत किस्मों की उपलब्धता: रेड लेडी और पूसा जैसी रोग-प्रतिरोधी और उच्च उत्पादकता वाली किस्में किसानों को भारी पैदावार सुनिश्चित करने में मदद करती हैं। • वैज्ञानिक प्रबंधन: पौधों के बीच दो मीटर की तय दूरी बनाए रखने से प्रत्येक पौधे को सूर्य का प्रकाश और पोषण पर्याप्त मात्रा में मिलता है। सवाल-जवाब 1. पपीते की खेती में फसल तैयार होने में कितना समय लगता है? उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में पपीते के पौधे रोपण के लगभग 8 से 9 महीने बाद फल देना शुरू कर देते हैं। 2. एक पपीते के पौधे से कुल कितना उत्पादन मिल सकता है? पपीते के एक पौधे से पहली और दूसरी हार्वेस्टिंग मिलाकर कुल 70 से 80 किलोग्राम तक फल प्राप्त होने की संभावना रहती है। 3. खेती के लिए किन उन्नत किस्मों का चयन किया जा सकता है? किसान रेड लेडी, पूसा और अपनी स्थानीय जलवायु के अनुकूल विभिन्न निजी कंपनियों की उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं। 4. पौधों के बीच कितनी दूरी रखना अनिवार्य है? एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच तथा एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच दो मीटर की दूरी रखना सबसे उचित माना गया है। 5. एक सौ पौधों से लगभग कितनी आमदनी हो सकती है? एक पौधे से तीन हजार रुपये तक की आय के हिसाब से सौ पौधों से करीब तीन लाख रुपये की कुल आमदनी का अनुमान लगाया जा सकता है। https://trendkia.com/jharkhand/papaya-farming-koderma-income-yield-hindi-47207 TrendKia — Har trend, sabse pehle.