पारंपरिक जनजातीय परिधान में नजर आईं फुटबॉलर अष्टम उरांव, साझा की खास तस्वीरें भारतीय महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ी अष्टम उरांव ने अपनी जनजातीय संस्कृति के प्रति सम्मान दर्शाते हुए पारंपरिक परिधान में तस्वीरें साझा की हैं। झारखंड से ताल्लुक रखने वाली महिला फुटबॉलर अष्टम उरांव ने पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में अपनी नई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। वर्तमान में भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम के राष्ट्रीय शिविर में भाग ले रहीं अष्टम ने इस परिधान के जरिए अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा जुड़ाव प्रदर्शित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फोटोशूट उनका निजी फैसला था और पहनी गई पोशाक किसी खेल क्लब से संबद्ध नहीं है। सांस्कृतिक पहचान और व्यक्तिगत गौरव अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बात करते हुए अष्टम ने कहा, "मुझे उस समाज पर बेहद गर्व है जिससे मैं आती हूं।" इसी भावना को रेखांकित करने के लिए उन्होंने विशेष रूप से डिजाइन की गई पारंपरिक जनजातीय पोशाक पहनकर यह फोटोशूट करवाया। उनका मानना है कि खेल के बड़े मंचों तक पहुंचने के बावजूद अपनी मूल पहचान और रीति-रिवाजों को संजोकर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। मैदान पर उपलब्धियां और कप्तानी का इतिहास अष्टम उरांव ने वर्ष 2022 में आयोजित अंडर-17 फीफा महिला विश्व कप में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था। इसके साथ ही वह किसी भी भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तानी करने वाली झारखंड की पहली फुटबॉलर बनीं। पेशेवर स्तर पर वह बीते 3 वर्षों से प्रतिष्ठित ईस्ट बंगाल क्लब के साथ जुड़ी हुई हैं और उसकी नियमित खिलाड़ी के रूप में मैदान में उतरती रही हैं। संघर्ष से सफलता तक का सफर झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली अष्टम का पारिवारिक जीवन बेहद साधारण रहा है। उनके माता-पिता किसान हैं और परिवार में कुल पांच भाई-बहन हैं, जिनमें चार बहनों के बीच अष्टम दूसरे स्थान पर आती हैं। एक समय परिवार के पास सरकारी पहचान के नाम पर महज एक राशन कार्ड मौजूद था। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में गुमला के गोर्राटोली गांव में उनके नाम पर एक खेल स्टेडियम का निर्माण भी स्वीकृत किया गया था। इसका आप पर असर यह समाचार जमीनी स्तर के युवा एथलीटों के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करता है। • भारत में: यह घटनाक्रम दिखाता है कि पारंपरिक पृष्ठभूमि के युवा राष्ट्रीय खेल फलक पर पहचान बना रहे हैं। इससे देश भर की उभरती महिला फुटबॉल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है। • झारखंड में: राज्य के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं में खेलों के प्रति आकर्षण मजबूत होगा। गुमला और आसपास के क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विकास को नई गति मिलती है। • खेल जगत में: पेशेवर एथलीटों द्वारा अपनी सांस्कृतिक विरासत को खुलकर स्वीकार करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है। क्लब और राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान केवल खेल तक सीमित न रहकर उनके सामाजिक परिवेश से भी जुड़ती है। • प्रशंसकों के लिए: प्रशंसकों को मैदान के बाहर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक मूल्यों को जानने का अवसर मिलता है। इससे समर्थकों और खिलाड़ियों के बीच संवाद अधिक मजबूत होता है। ऐसा क्यों हुआ अष्टम उरांव ने अपनी जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। • सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन: अष्टम अपनी जड़ों और समुदाय की परंपराओं के प्रति गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं। इसी भावना को सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए उन्होंने पारंपरिक परिधान में यह विशेष फोटोशूट कराया। • व्यक्तिगत पहल: यह निर्णय पूरी तरह से उनका निजी था और किसी खेल संघ अथवा क्लब के प्रचार अभियान से नहीं जुड़ा था। उन्होंने खुद स्पष्ट किया कि पोशाक विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत पसंद पर आधारित थी। • प्रेरणा का संदेश: राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद भी अपनी सामाजिक पहचान को गर्व से अपनाना युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं का सम्मान करने का स्पष्ट संदेश देता है। सवाल-जवाब 1. अष्टम उरांव ने हाल ही में किस तरह की तस्वीरें साझा की हैं? उन्होंने अपनी जनजातीय संस्कृति और पहचान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए पारंपरिक जनजातीय परिधान में तस्वीरें साझा की हैं। 2. वर्तमान में अष्टम उरांव किस खेल शिविर का हिस्सा हैं? वह वर्तमान में भारतीय महिला सीनियर फुटबॉल टीम के राष्ट्रीय शिविर में शामिल हैं। 3. अष्टम उरांव ने भारतीय टीम के लिए किस बड़े टूर्नामेंट में कप्तानी की थी? उन्होंने वर्ष 2022 के अंडर-17 महिला फीफा विश्व कप में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था। 4. अष्टम उरांव घरेलू फुटबॉल में किस क्लब के लिए खेलती हैं? वह पिछले 3 वर्षों से ईस्ट बंगाल क्लब के लिए नियमित रूप से फुटबॉल खेल रही हैं। 5. अष्टम उरांव किस राज्य और जिले की रहने वाली हैं? वह झारखंड राज्य के गुमला जिले की रहने वाली हैं। 6. अष्टम उरांव के सम्मान में किस स्थान पर स्टेडियम बनाने की घोषणा की गई थी? उनके सम्मान में गुमला जिले के गोर्राटोली गांव में उनके नाम पर स्टेडियम बनाने का निर्णय लिया गया था। प्रेरणा और सबक अष्टम उरांव का जीवन अभावों से जूझते हुए राष्ट्रीय गौरव हासिल करने की जीवंत मिसाल पेश करता है। • जड़ों से जुड़ाव: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचने के बाद भी अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान पर गर्व महसूस करना सबसे बड़ा गुण है। • संसाधनों की कमी से आगे निकलना: केवल राशन कार्ड और सीमित पारिवारिक आय जैसी कठिनाइयां भी दृढ़ संकल्प के आगे बाधा नहीं बन सकतीं। • कड़ी मेहनत और नेतृत्व क्षमता: छोटे गांव से निकलकर भारतीय टीम की कप्तानी संभालना यह साबित करता है कि लगन से किसी भी शिखर तक पहुंचा जा सकता है। • निरंतरता ही सफलता की कुंजी है: राष्ट्रीय शिविरों और बड़े क्लबों में अपनी जगह बनाए रखने के लिए हर दिन अनुशासन के साथ अभ्यास करना जरूरी है। https://trendkia.com/jharkhand/parnparika-janajatiya-paridhana-men-najara-ain-phutabolara-astam-oraon-sajha-ki-khasa-tasviren-54096 TrendKia — Har trend, sabse pehle.